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प्रेस विज्ञप्ति -
वैचारिक शून्यता, राजनैतिक अपरिपक्वता और अवसरवादी चयनात्मक संवेदनशीलता का जीवंत उदाहरण हैं नेता प्रतिपक्ष: डॉ वीरेंद्र सिंह सोलंकी
छात्रा अस्मिता पर तथ्यहीन टिप्पणी और उपहास, नेता प्रतिपक्ष के महिला विरोधी चरित्र का प्रमाण: अभाविप
राहुल गांधी द्वारा शैक्षिक परिसरों को राजनैतिक एजेंडे से पब्लिसिटी स्टंट कर विषाक्त बनाने के प्रयास निंदनीय: अभाविप
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप), गार्गी महाविद्यालय प्रकरण में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा तथ्यहीन संवाद किए जाने की भर्त्सना करती है। अभाविप का मानना है कि यह एक छात्रा जो स्वयं छात्रसंघ प्रत्याशी होने के नाते केवल निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना चाहती थी, जिसकी मांग करने पर वहां कार्यरत पुरुष कर्मचारियों द्वारा उसे अभद्रतापूर्ण तरीके से गाली-गलौज करते हुए धक्के मारकर बाहर निकाला गया हो, उसकी अस्मिता और सम्मान से जुड़े प्रकरण को पब्लिसिटी स्टंट कर संकीर्ण राजनैतिक एजेंडा बनाने का कुत्सित प्रयास है। राहुल गांधी का यह कदम छात्रहितों की वास्तविक चिंता के बजाय चुनावी अवसरवाद से ग्रस्त तथ्यात्मक दिवालियापन को दर्शाता है।
विगत दिनों गार्गी महाविद्यालय की छात्रा प्रतिष्ठा के साथ हुए अमर्यादित व्यवहार के विरोध में दिल्ली विश्वविद्यालय के निर्वाचित छात्रसंघ अध्यक्ष पीड़ित छात्रा के आग्रह पर लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से उसके न्याय की लड़ाई में साथ खड़े हुए थे। ऐसे में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना और एकतरफा संवाद के आधार पर उस पीड़ित छात्रा के संघर्ष और सम्मान को भी गहरी ठेस पहुँचाने वाला कृत्य है। एक तरफ राहुल गांधी और उनकी पार्टी 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' जैसे महिला सशक्तीकरण के ऐतिहासिक कदमों का विरोध कर अपने महिला विरोधी होने का परिचय देते हैं, वहीं दूसरी ओर छात्राओं को भ्रमित कर अपना राजनीतिक एजेंडा साधने का प्रयास कर रहे हैं। संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति से संवेदनशीलता की अपेक्षा की जाती है, किंतु राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रसित नेता प्रतिपक्ष से अपेक्षा भी क्या की जा सकती है? ऐसे में परिसरों को भी छद्म विमर्शों से विषाक्त बनाने के प्रयासों पर रोकथाम हेतु छात्र शक्ति का संगठित एवं सजग रहना आवश्यक एवं अनिवार्य है।
अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि, "राहुल गांधी द्वारा छात्राओं के मुद्दों को राजनीतिक ढाल बनाना और संवेदनशील विषयों का उपहास उड़ाना उनकी वैचारिक शून्यता, राजनैतिक अपरिपक्वता और अवसरवादी चयनात्मक संवेदनशीलता को दर्शाता है। अभाविप यह पुनः स्पष्ट करती है कि वह सदैव छात्राओं के सम्मान, सुरक्षा और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रही है। नेता प्रतिपक्ष से अपेक्षा की जाती है कि अपने चुनावी अवसरवाद व्यवहार से शैक्षिक परिवेश को विषाक्त न बनाए तथा अपनी वैचारिक शून्यता का जीवंत उदाहरण कैंपस में न ले जाए।"

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