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Rachna Gupta
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Rachna Gupta
@AVSKRG
JAI GURUDEV
Biaora, Madhya Pradesh. India Katılım Haziran 2021
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@Jaya__Kishori__ दरार और रोशनी (लियोनार्ड कोहेन का संदर्भ)
यह विचार प्रसिद्ध कवि लियोनार्ड कोहेन की पंक्तियों की याद दिलाता है: "There is a crack in everything, that's how the light gets in."
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दर्द से बचने की कोशिश में हम ज़िंदगी से बच रहे होते हैं। दर्द ज़िंदगी का हिस्सा है, जैसे रात दिन का हिस्सा है। अगर रात नहीं होगी तो सितारों
की ख़ूबसूरती कौन देखेगा
अगर दर्द न हो, तो
जीवन का आनंद कैसे मिलेगा
दर्द हमें तोड़ता नहीं,
दर्द हमें खोलता है
दर्द वो दरार है, जहाँ से
जीवन की रोशनी अंदर आती है
अब इसको थोड़ा विस्तार से समझते हैं:
1. दर्द से भागना, जीवन से भागना है
अक्सर हम दुःख, असफलता या चोट से इतना डरते हैं कि हम नए अनुभव लेना ही बंद कर देते हैं। हम सुरक्षित घेरे (Comfort Zone) में दुबक जाते हैं। लेकिन अनुभव कहता है कि जब आप दर्द से बचने के लिए खुद को बंद कर लेते हैं, तो आप अनजाने में जीना भी छोड़ देते हैं। क्योंकि जहाँ भावनाएँ हैं, वहाँ दर्द की संभावना भी हमेशा रहेगी।
2. द्वंद्व का सिद्धांत (रात और सितारे)
यह प्रकृति का नियम है कि किसी भी चीज़ का मूल्य उसके विपरीत की उपस्थिति से ही होता है
प्रकाश का महत्व केवल अंधकार के कारण है
आनंद का अहसास तभी होता है जब हमने कभी पीड़ा सही हो
जैसे बिना काली रात के हम सितारों की चमक नहीं देख सकते, वैसे ही बिना संघर्ष के हम अपनी आंतरिक शक्ति और जीवन की उपलब्धियों की चमक महसूस नहीं कर सकते
3. दर्द 'तोड़ने' के लिए नहीं, 'खोलने' के लिए है-
हम समझते हैं कि दर्द हमें कमज़ोर कर देता है या खत्म कर देता है। लेकिन यहाँ एक नया नज़रिया दिया गया है—दर्द हमें खोलता है
यह हमारी सहानुभूति (Empathy) को जगाता है।
यह हमारे अहंकार की कठोर परत को तोड़ता है।
यह हमें अपनी सीमाओं से रूबरू कराता है और हमें पहले से अधिक परिपक्व बनाता है
4. दरार और रोशनी (लियोनार्ड कोहेन का संदर्भ)
यह विचार प्रसिद्ध कवि लियोनार्ड कोहेन की पंक्तियों की याद दिलाता है: "There is a crack in everything, that's how the light gets in." जब हमारा हृदय किसी चोट से "फटता" या "टूटता" है, तो वह एक खाली जगह पैदा करता है उसी खाली जगह (दरार) से ज्ञान, करुणा और नई चेतना की रोशनी हमारे भीतर प्रवेश करती है। यदि हम पूरी तरह पत्थर की तरह ठोस रहेंगे, तो न कुछ बाहर जाएगा, न कुछ अंदर आ पाएगा
संक्षेप में, यह विचार हमें सिखाता है कि दर्द कोई दुश्मन नहीं बल्कि एक शिक्षक है। यह हमें मानवीय बनाता है। जीवन की पूर्णता केवल सुख में नहीं, बल्कि सुख और दुःख के संतुलन में है। दर्द को स्वीकार करना ही वास्तव में जीवन को पूरी तरह से स्वीकार करना है

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चलो आज स्वस्थ बने… निरोगी भव:
स्वस्थ तन – शांत मन का आधार
शुद्ध और सात्विक सेवा
जैसा अन्न वैसा मन
कहा जाता है जैसा अन्न वैसा मन यह केवल कहावत नहीं बल्कि सच है। पुरातन संस्कृति में भोजन और आहार-व्यवहार पर काफी ध्यान दिया जाता था। इससे उस दौर के लोग स्वस्थ, सुखी, संस्कारित और संयमित होते थे। उनमें एकता, सद्भावना, अपनापन, पारिवारिक सामंजस्य था। इस सबका मूल कारण था कि लोगों के खानपान में सात्विकता, शुद्धता और पवित्रता थी। इस बात को विज्ञान और वैज्ञानिकों ने भी स्वीकार कर लिया है कि सात्विक आहार वाले व्यक्ति ज्यादा सकारात्मक, ऊर्जावान, ज्ञानी, आध्यात्मिक, शक्तिप्तशाली और मानसिक रूप से स्वस्थ रहते हैं। यही नहीं उनका रोग प्रतिरोधक कर भी काफी मजबूत होता है
मन की अवस्था व भावना का भी गहरा प्रभाव
भोजन बनाते हैं और ग्रहण करते हैं तो उस समय भी कुछ नियमों का पालन करना चाहिए, ताकि भोजन संपूर्ण रीति तन और मन का पोषण कर सके। जैसी हमारी स्थिति होती है वैसी ही हमारी कृति बनती है। यदि कोई व्यक्ति क्रोध में भोजन बनाता है तो क्रोध में बनाया गया भोजन कभी स्वादिष्ट और सात्विक नहीं हो सकता है। क्योंकि क्रोधी व्यक्ति की भावना भी उसमें प्रवेश कर जाती है और खाने वाले पर उसका सूक्ष्म प्रभाव पड़ता है। वैसे ही अलग अलग विकारों वश व्यक्ति के विकार भी उस भोजन में सूक्ष्मता से मिश्रित हो ही जाते हैं और फिर वह विकार भोजन ग्रहण करने वाले व्यक्ति को भी असर करते हैं
हंमेशा अच्छी भावना के साथ बनाएं भोजन
हम जब भी भोजन बनाएं या उसे ग्रहण करें तो उस समय शुद्ध और सात्विक भासना होनी चाहिए। जिससे हमारे मन पर उसका सकारात्मक प्रभाव पड़े। क्योंकि जब हम किसी मंदिर या देवी देवताओं के लिए चढ़ावा चढ़ाने के लिए प्रसाद बनाते हैं तो उस समय साफ-सफाई और सात्विकता का बहुत ध्यान रखते हैं। इसलिए वह बनायी हुई सामग्री प्रसाद बन जाती है, जिसे लोग भाव और भावना से खाते हैं। मांस, मदिरा, मछली और अन्य मांसाहारी भोजन मनुष्य के लिए नहीं है। इससे मन में आसुरी विचारों का उदय होता है, इसलिए आज व्यक्ति तेजी से हिंसात्मक होता जा रहा है, परिवारों में कलह और तनाव बढ़ रहा है
ध्यान के साथ बनाएं और खाएं भोजन
जब भी हम भोजन बनाएं और खाएं तो सबसे पहले परमात्मा को अर्पण करें। शुद्ध और सात्विक भोजन ही ग्रहण करें। आसुरी स्वभाव वाले व्यक्तियों के हाथों से बने हुए भोजन से परहेज करना चाहिए। इससे काफी हद तक मनुष्य की मनोदशा बदल जाएगी। व्यक्ति सकारात्मक हो जाएगा। इस तरह के परहेज से सामाजिक समस्याओं से काफी हद तक निजात मिल सकती है

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कुंडली में चंद्र से बनने वाले राजयोग
ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा मन और भावनाओं का कारक है, जो कुंडली में सुनफा, अनफा, दुर्धरा और गजकेसरी जैसे प्रभावशाली राजयोग बनाता है। ये योग व्यक्ति को अपार धन, मानसिक शक्ति और जीवन में उच्च सफलता प्रदान करते हैं। ये योग मुख्य रूप से चंद्रमा की स्थिति और अन्य ग्रहों के साथ उनके संबंधों पर आधारित होते हैं।
चंद्रमा के शुभ योग के लाभ
(1)मानसिक मजबूती - जातक मन से मजबूत होता है और मानसिक तनाव से मुक्त रहता है।
(2)माता का आशीर्वाद - यह योग माता का स्वास्थ्य और सुख अच्छा रखता है।
(3)उच्च सफलता - जीवन में अपार धन-दौलत और मान-सम्मान प्राप्त होता है।
चंद्रमा से बनने वाले प्रमुख राजयोग
=
गजकेसरी राजयोग
=
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गजकेसरी राजयोग का मतलब है। हाथी के ऊपर सवार सिंह। ऐसे में जब इस राजयोग का निर्माण होता है, तो जातक बलवान, निडर, साहसी, शक्तिशाली होता हैं।
जब गुरु और चंद्रमा केंद्र (1, 4, 7, 10 भाव) में एक साथ हों या एक-दूसरे से केंद्र में हों, तो यह योग बनता है। यह योग जातक को बुद्धिमान, धनवान और प्रतिष्ठित बनाता है।
सुनफा योग
=
यदि चंद्रमा से अगले घर में (दूसरे भाव) सूर्य के अलावा कोई अन्य ग्रह हो, तो सुनफा योग बनता है। यह जातक को बुद्धिमान, धनवान और प्रसिद्ध बनाता है।
अनफा योग
=
यदि चंद्रमा से पिछले घर में (12वें भाव) कोई ग्रह हो, तो अनफा योग बनता है। इससे व्यक्ति स्वस्थ, आकर्षक और सुख-सुविधाओं से युक्त होता है।
दुर्धरा योग
=
यदि चंद्रमा के आगे और पीछे (12वें और 2रे भाव) दोनों तरफ ग्रह हों, तो यह योग बनता है। यह जातक को धन-संपत्ति और मान-सम्मान दिलाता है।
महा लक्ष्मी योग
=
ज्योतिष में महालक्ष्मी राजयोग को बहुत ही शुभ और लाभकारी योग माना जाता है।
मंगल और चंद्रमा की युति से महालक्ष्मी राजयोग का निर्माण होता हैं ।इस राजयोग से धन, सुख-समृद्धि, करियर और धन लाभ के जीवन में योग बनते है
चंद्रमा और मंगल की युति या दृष्टि संबंध से लक्ष्मी राजयोग बनता है, जो धन और ऐश्वर्य का प्रतीक है।
वैभव लक्ष्मी योग
=
चंद्रमा और शुक्र की युति से यह राजयोग बनता है। इस योग के अद्भुत लाभ अपार धन-संपत्ति ऐसे व्यक्ति के पास जीवन में कभी धन की कमी नहीं रहती।
नोट - इन योगों का पूर्ण फल पाने के लिए चंद्रमा का कुंडली में बली (मजबूत) होना आवश्यक है

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The 5 Things That Decide Your Next Birth
Puranic teachings explain that rebirth is not random... The next birth unfolds according to precise inner and karmic laws
Karma… the accumulated force of past actions
What has been done with intention creates the momentum for future embodiment
Vasanas… deep latent tendencies
The strongest desires and unresolved inclinations seek expression again
Samskaras… stored impressions in the subtle body
Repeated thoughts and actions shape the psychological blueprint carried forward
Antim smriti… the state of mind at the moment of death
The final dominant thought reflects the deepest inner conditioning
Adhikara or inner fitness… the level of spiritual maturity and readiness
Consciousness is drawn toward the environment most suited to its evolution
These together determine the body, circumstances, and field of experience in the next life
Birth is not a beginning from nothing
It is the continuation of inner momentum
What appears as fate... the dharmic tradition explains as lawful continuity across lifetimes
The next life is not chosen randomly
it is shaped now

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श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण
बालकाण्डम्
३२. ब्रह्मपुत्र कुश के चार पुत्रों का वर्णन, शोणभद्र-तटवर्ती प्रदेश को वसु की भूमि बताना, कुशनाभ की सौ कन्याओं का वायु के कोप से 'कुब्जा' होना
कुशाम्बस्तु महातेजाः कौशाम्बीमकरोत् पुरीम् । कुशनाभस्तु धर्मात्मा पुरं चक्रे महोदयम् ॥ ६ ॥
महातेजस्वी कुशाम्ब ने 'कौशाम्बी' पुरी बसायी (जिसे आजकल 'कोसम' कहते हैं)। धर्मात्मा कुशनाभ ने 'महोदय' नामक नगर का निर्माण कराया ॥ ६ ॥
असूर्तरजसो नाम धर्मारण्यं महामतिः । चक्रे पुरवरं राजा वसुनाम गिरिव्रजम् ॥ ७ ॥
परम बुद्धिमान् असूर्तरजस ने 'धर्मारण्य' नामक एक श्रेष्ठ नगर बसाया तथा राजा वसु ने 'गिरिव्रज' नगर की स्थापना की ॥ ७ ॥
एषा वसुमती नाम वसोस्तस्य महात्मनः । एते शैलवराः पञ्च प्रकाशन्ते समन्ततः ॥ ८॥
महात्मा वसु की यह 'गिरिव्रज' नामक राजधानी वसुमती के नाम से प्रसिद्ध हुई। इसके चारों ओर ये पाँच श्रेष्ठ पर्वत सुशोभित होते हैं ॥ ८ ॥
महाभारत सभापर्व (२१। १-१०) में इन पाँचों पर्वतों के नाम इस प्रकार वर्णित हैं-(१) विपुल, (२) वराह, (३) वृषभ (ऋषभ), (४) ऋषिगिरि (मातङ्ग) तथा (५) चैत्यक।
सुमागधी नदी रम्या मागधान् विश्रुताऽऽययौ । पञ्चानां शैलमुख्यानां मध्ये मालेव शोभते ॥ ९ ॥
यह रमणीय (सोन) नदी दक्षिण-पश्चिम की ओर से बहती हुई मगध देश में आयी है, इसलिये यहाँ 'सुमागधी' नाम से विख्यात हुई है। यह इन पाँच श्रेष्ठ पर्वतों के बीच में माला की भाँति सुशोभित हो रही है ॥ ९ ॥
सैषा हि मागधी राम वसोस्तस्य महात्मनः । पूर्वाभिचरिता राम सुक्षेत्रा सस्यमालिनी ॥ १०॥
श्रीराम ! इस प्रकार 'मागधी' नाम से प्रसिद्ध हुई यह सोन नदी पूर्वोक्त महात्मा वसु से सम्बन्ध रखती है। रघुनन्दन ! यह दक्षिण-पश्चिम से आकर पूर्वोत्तर दिशा की ओर प्रवाहित हुई है। इसके दोनों तटों पर सुन्दर क्षेत्र (उपजाऊ खेत) हैं, अतः यह सदा सस्य-मालाओं से अलंकृत (हरी-भरी खेती से सुशोभित) रहती है ॥ १०
श्रीराम – जय राम – जय जय राम

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अक्सर हम यह मान लेते हैं कि अधिक वस्तुएँ, अधिक पैसा, अधिक सुविधाएँ ही हमें अधिक खुश कर सकती हैं। लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है। खुशी का संबंध बाहरी चीज़ों की मात्रा से नहीं, बल्कि हमारे मन की संतुष्टि और दृष्टिकोण से होता है।
जब व्यक्ति कम में भी संतोष करना सीख लेता है, तो उसके मन में शिकायत, तुलना और लालच कम हो जाते हैं। वह जो कुछ उसके पास है, उसी के लिए कृतज्ञ महसूस करता है। ऐसी स्थिति में उसका मन हल्का, शांत और प्रसन्न रहता है। इसलिए उसके जीवन में खुशी की कमी नहीं होती।
लेकिन यदि व्यक्ति के पास बहुत कुछ होते हुए भी संतोष नहीं है, तो वह हमेशा किसी न किसी कमी को महसूस करता रहेगा। फिर चाहे उसके पास कितना भी धन या साधन क्यों न हों, उसका मन कभी पूर्ण नहीं होगा

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ठाकुर श्री मुरली मनोहर लाल जी की जय हो,
एक पंडित जी थे वो रोज घर घर जाके भगवत गीता का पाठ करते थे,,* एक दिन उसे एक चोर ने पकड़ लिया और उसे कहा तेरे पास जो कुछ भी है मुझे दे दो
तब वो पंडित जी बोला की बेटा मेरे पास कुछ भी नहीं है
तुम एक काम करना मैं यहीं पड़ोस के घर मैं जाके भगवत गीता का पाठ करता हूँ वो यजमान बहुत दानी लोग हैं जब मैं कथा सुना रहा होऊंगा
तुम उनके घर में जाके चोरी कर लेना! चोर मान गया
अगले दिन जब पंडित जी कथा सुना रहे थे तब वो चोर भी वहां आ गया तब पंडित जी बोले की यहाँ से मीलों दूर एक गाँव है वृन्दावन, वहां पे एक लड़का आता है जिसका नाम कान्हा है,वो हीरों जवाहरातों से लदा रहता है अगर कोई लूटना चाहता है तो उसको लूटो वो रोज रात को पीपल के पेड़ के नीचे आता है जिसके आस पास बहुत सी झाडिया हैं चोर ने ये सुना और ख़ुशी ख़ुशी वहां से चला गया!
वो चोर अपने घर गया और अपनी बीवी से बोला आज मैं एक कान्हा नाम के बच्चे को लुटने जा रहा हूँ
मुझे रास्ते में खाने के लिए कुछ बांध कर दे दो पत्नी ने कुछ सत्तू उसको दे दिया और कहा की बस यही है जो कुछ भी है,
चोर वहां से ये संकल्प लेके चला कि अब तो में उस कान्हा को लुट के ही आऊंगा,वो बेचारा पैदल ही पैदल टूटे चप्पल में ही वहां से चल पड़ा,
रास्ते में बस कान्हा का नाम लेते हुए, वो अगले दिन शाम को वहां पहुंचा जो जगह उसे पंडित जी ने बताई थी!
अब वहां पहुँच के उसने सोचा कि अगर में यहीं सामने खड़ा हो गया तो बच्चा मुझे देख कर भाग जायेगा तो मेरा यहाँ आना बेकार हो जायेगा,
इसलिए उसने सोचा क्यूँ न पास वाली झाड़ियों में ही छुप जाऊँ,
वो जैसे ही झाड़ियों में घुसा, झाड़ियों के कांटे उसे चुभने लगे! उस समय उसके मुंह से एक ही आवाज निकली कान्हा, कान्हा , उसका शरीर लहू लुहान हो गया पर मुंह से सिर्फ यही निकला कि कान्हा आ जाओ! कान्हा आ जाओ!
अपने भक्त की ऐसी दशा देख के कान्हा जी चल पड़े
तभी रुक्मणी जी बोली कि प्रभु कहाँ जा रहे हो वो आपको लूट लेगा!प्रभु बोले कि कोई बात नहीं अपने ऐसे भक्तों के लिए तो मैं लुट जाना तो क्या
मिट जाना भी पसंद करूँगा और ठाकुर जी बच्चे का रूप बना के आधी रात को वहां आए वो जैसे ही पेड़ के पास पहुंचे चोर एक दम से बहार आ गया और उन्हें पकड़ लिया और बोला कि ओ कान्हा तुने मुझे बहुत दुखी किया है अब ये चाकू देख रहा है न,अब चुपचाप अपने सारे गहने मुझे दे दे
कान्हा जी ने हँसते हुए उसे सब कुछ दे दिया! वो चोर हंसी ख़ुशी अगले दिन अपने गाँव में वापिस पहुंचा और सबसे पहले उसी जगह गया जहाँ पे वो पंडित जी कथा सुना रहे थे और जितने भी गहने वो चोरी करके लाया था उनका आधा उसने पंडित जी के चरणों में रख दिया!
जब पंडित ने पूछा कि ये क्या है, तब उसने कहा आपने ही मुझे उस कान्हा का पता दिया था
मैं उसको लूट के आया हूँ और ये आपका हिस्सा है पंडित ने सुना और उसे यकीन ही नहीं हुआ!
वो बोला कि मैं इतने सालों से पंडिताई कर रहा हूँ
वो मुझे आज तक नहीं मिला, तुझ जैसे पापी को कान्हा कहाँ से मिल सकता है!चोर के बार बार कहने पर पंडित बोला कि चल में भी चलता हूँ तेरे साथ वहां पर,मुझे भी दिखा कि कान्हा कैसा दिखता है, और वो दोनों चल दिए!
चोर ने पंडित जी को कहा कि आओ मेरे साथ यहाँ पे छुप जाओ और दोनों का शरीर लहू लुहान हो गया और मुंह से बस एक ही आवाज निकली
कान्हा, कान्हा, आ जाओ!
ठीक मध्य रात्रि कान्हा जी बच्चे के रूप में फिर वहीँ आये और दोनों झाड़ियों से बहार निकल आये
पंडित जी कि आँखों में आंसू थे वो फूट फूट के रोने लग गया, और जाके चोर के चरणों में गिर गया और बोला कि हम जिसे आज तक देखने के लिए तरसते रहे जो आज तक लोगो को लुटता आया है तुमने उसे ही लूट लिया तुम धन्य हो,
आज तुम्हारी वजह से मुझे कान्हा के दर्शन हुए हैं,
तुम धन्य हो
ऐसा है हमारे कान्हा का प्यार अपने सच्चे भक्तों के लिए
जो उसे सच्चे दिल से पुकारते हैं तो वो भागे भागे चले आते हैं
मेरो तो गिरधर-गोपाल, दूसरो न कोई

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5 अप्रैल – 10 अप्रैल: ब्रह्मांड का एक अदृश्य द्वार खुल रहा है
हजारों साल पहले Mesopotamia की प्राचीन सभ्यता में बैठे सुमेरियन आकाश को सिर्फ देखते नहीं थे
वे उसे पढ़ते थे
उनके लिए ग्रह-नक्षत्र सिर्फ तारे नहीं थे
वे घटनाओं के संकेत थे
उन्होंने कहा था
जब आकाश बदलता है, तो धरती पर जीवन की दिशा बदलती है
सदियों बाद Alexander Chizhevsky ने इसी सत्य को विज्ञान की भाषा में समझाने की कोशिश की
उन्होंने 700+ साल के इतिहास को खंगाला
और पाया कि
सूर्य की गतिविधियाँ (Solar Cycles)
सीधे मानव की सोच, भावनाओं और सामूहिक घटनाओं को प्रभावित करती हैं
जब सूर्य में ऊर्जा उफान पर होती है
तो धरती पर
युद्ध बढ़ते हैं
क्रांतियाँ जन्म लेती हैं
और मनुष्य के भीतर बेचैनी और बदलाव की आग जलती है
इतना गहरा सच था यह
कि उन्हें जेल में डाल दिया गया
अब वर्तमान की ओर देखो
5 अप्रैल से 10 अप्रैल के बीच
एक विशेष नक्षत्रीय संयोग बन रहा है
यह सिर्फ एक खगोलीय घटना नहीं है
यह एक ऊर्जा का पोर्टल है
इस समय
सूर्य की तरंगें बदलती हैं
ग्रहों का alignment नया pattern बनाता है
और ब्रह्मांड एक नई frequency पर कंपन करता है
लेकिन सबसे बड़ा सवाल है
क्या तुम इस ऊर्जा को संभाल पाओगे
क्योंकि जब ब्रह्मांड बदलता है
तो हर व्यक्ति को एक मौका मिलता है
या तो वह उठे
या टूट जाए
सावधान:
यह समय हर किसी के लिए आसान नहीं होगा
कुछ लोग अचानक गुस्से में आ सकते हैं
कुछ के जीवन में बड़े बदलाव होंगे
कुछ रिश्ते टूटेंगे
कुछ नए रास्ते खुलेंगे
क्योंकि ऊर्जा बदल रही है
और जब ऊर्जा बदलती है
तो जीवन का संतुलन भी बदलता है
लेकिन जो जागरूक हैं… उनके लिए यह वरदान है
अगर तुम इस “Cosmic Portal” में प्रवेश कर पाते हो
तुम अपनी दिशा बदल सकते हो
अपनी सोच को upgrade कर सकते हो
अपने जीवन का नया अध्याय शुरू कर सकते हो
याद रखो
सुमेरियन ने इसे संकेतों में बताया था
Alexander Chizhevsky ने इसे डेटा में साबित करने की कोशिश की
अब यह तुम्हारे सामने अनुभव बनने जा रहा है
मेरा दावा है:
5–10 अप्रैल के बीच
धरती पर कुछ न कुछ ऐसा जरूर बदलेगा
जिसे हर संवेदनशील व्यक्ति महसूस करेगा
सवाल यह नहीं है कि “क्या होगा
सवाल यह है कि “तुम उसके लिए तैयार हो या नहीं
अगर तैयार हो… तो इस ऊर्जा को पकड़ो।
क्योंकि ब्रह्मांड हर बार मौका नहीं देता

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@Jaya__Kishori__ Even if you place a dog on a golden throne during an auspicious time and crown it as a king with all royal honors, it will not give up its original nature (of wandering or base behaviors
English
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a person's inherent nature does not change just because their status or position does...
Kanakapu simhasanamuna
sunakamu gurpundabetti shubhalagnamuna
donaraga battamu gattina
venukati gunamela manu vinara Sumathi!
(Sumathi Satakam)
Even if you place a dog on a golden throne during an auspicious time and crown it as a king with all royal honors, it will not give up its original nature (of wandering or base behaviors).
A person's character and deep-rooted habits do not change simply by giving them a high position, power, or wealth. Their true nature will eventually reveal itself regardless of their surroundings

English

@Jaya__Kishori__ भगवान सूर्य की शादी दक्ष प्रजापति की बेटी देवी संध्या से हुआ था। जिनसे उन्हें मनु, यमराज और यमुना नामक संतान प्राप्ति हुईं, लेकिन देवी संध्या भगवान सूर्य के ताप को सह नहीं पा रही थीं, इसलिए उन्होंने अपनी जगह एक प्रतिरूप
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भगवान शनि को काला रंग क्यों पसंद है? इससे जुड़ी पौराणिक कथा क्या है?*
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान सूर्य की शादी दक्ष प्रजापति की बेटी देवी संध्या से हुआ था। जिनसे उन्हें मनु, यमराज और यमुना नामक संतान प्राप्ति हुईं, लेकिन देवी संध्या भगवान सूर्य के ताप को सह नहीं पा रही थीं, इसलिए उन्होंने अपनी जगह एक प्रतिरूप छाया को रख दिया जो दिखने में देवी संध्या की प्रतिरूप छाया थीं। इस बात का पता भगवान सूर्य को पता नहीं चला, लेकिन देवी छाया भगवान शिव की कठोर तपस्या कर रही थीं जिसकी वजह से वह अपनी गर्भावस्था के समय सही से ध्यान नहीं रख पा रही थीं। इस वजह से शनिदेव जन्म के समय अंत्यत काल और कुपोषित पैदा हुआ। जिसके देखकर सूर्यदेव ने अपनी संतान मानने से इंकार कर दिया। लेकिन ये बात भगवान शनि को बहुत बुरी लगी।
देवी संध्या जब तप कर रही थी, उस समय मां के गर्भ में ही शनिदेव को भगवान शिव की शक्ति प्राप्त हो गई। जब शनिदेव ने भगवान सूर्य को क्रोध से देखा तो उनका रंग काला पड़ गया और उन्हें कुष्ठ रोग हो गया। सूर्यदेव ने भगवान शिव से क्षमा याचना मांगी और शनिदेव को सभी ग्रहों में सबसे अधिक शक्तिशाली होने का वरदान दिया। भगवान शनि ने अपने काला रंग होने और काले रंग के अपेक्षा के कारण काला रंग अतिप्रिय है, इसलिए उनकी पूजा में काले तिल, काला चना और लोहे की चीजों को खरीदा या दान में दिया जाता है

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@Jaya__Kishori__ Bees are master engineers of nature. They communicate using waggle dances, coordinate massive team foraging missions, and maintain hive temperatures with wing vibrations
English
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That tiny teaspoon of honey in your tea is more precious than it seems. To make just one teaspoon, 12 honeybees must work together their entire lives, visiting over 30,000 flowers and flying nearly 800 miles—all while carrying nectar drop by drop back to the hive.
Bees are master engineers of nature. They communicate using waggle dances, coordinate massive team foraging missions, and maintain hive temperatures with wing vibrations. But beyond honey, bees play a critical role in the planet—they pollinate 75% of the world’s crops, including fruits, vegetables, and nuts

English

@Jaya__Kishori__ But what if I told you that the most dangerous, most feared, and most loyal secret weapon India ever had was not a trained intelligence officer, not a decorated army general, not even someone who went to school
English
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Dhurandhar who lived 108 years
You've seen spies in movies. You've watched Dhurandhar. You've heard stories of brave soldiers.
But what if I told you that the most dangerous, most feared, and most loyal secret weapon India ever had was not a trained intelligence officer, not a decorated army general, not even someone who went to school
Born in 1901, Ranchodbhai Savabhai Rabari known as "Pagi", meaning the one who shows the way spent his entire life doing exactly that. Guiding Indian soldiers through pitch black deserts. Tracking enemy footprints in the sand. Protecting a border that most of us can't even find on a map.
His skill was unlike anything any spy school could ever teach. One look at a footprint and he could tell you how many soldiers passed, how fast they were moving, whether they were armed, and how long ago they walked there.
100 years of living in the desert gave him a sense no technology could replace. During the 1965 war, the Indian Army needed to move 10,000 soldiers to their destination in three days.
Pagi guided them and arrived 12 hours ahead of schedule. Through a desert. In complete darkness. With zero technology.
Field Marshal Sam Manekshaw one of India's greatest ever military heroes personally gave him the nickname "Pagi" and never forgot him till his last breath. In 2008, lying on his deathbed in a hospital in Tamil Nadu, Manekshaw kept whispering one single word in his semi-conscious state. "Pagi… Pagi… Pagi…"
He worked with R&AW and the BSF guarding 540 km of the India-Pakistan border in Gujarat. He won the Sangram Medal, the Samar Seva Star and the Police Medal. The BSF named a border outpost after him that still stands today. His story is now in Gujarat school textbooks.
Most people retire at 60. Pagi retired at 108. He left this world on January 18, 2013, at the age of 112. No viral moment. No prime time coverage. No trending hashtag. Just a shepherd from Gujarat who quietly kept a billion people safe for over a century.
While we were watching fictional spies on screen, the real Dhurandhar was walking barefoot through the desert making sure we slept safely at night

English

@Jaya__Kishori__ वो ऊर्जा बनकर, एहसास बनकर, आपके पास वापस आती है… कभी सुकून के रूप में, कभी संतोष के रूप में, और कभी बिना वजह की मुस्कान बनकर
हिन्दी
Rachna Gupta retweetledi

जब आप किसी को मुस्कान देते हैं,* किसी का मन हल्का करते हैं, या बिना किसी कारण किसी के लिए अच्छा महसूस करते हैं… *तो वो पल वहीं खत्म नहीं होता
वो ऊर्जा बनकर, एहसास बनकर, आपके पास वापस आती है… कभी सुकून के रूप में, कभी संतोष के रूप में, और कभी बिना वजह की मुस्कान बनकर
सच तो ये है कि खुशियां बांटना कोई एहसान नहीं, ये अपने ही जीवन को भरने का सबसे आसान तरीका है
आप जितना बाहर देते हैं, जीवन उतना ही भीतर भरता है।
आप सदा खुश रहो सदा स्वस्थ रहो सदा सुखी रहो यही हम सब को शुभकामनाएं है

हिन्दी