Suneel Kumar Adiwasi

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@AdvSuneelkumar

Writer, Socio-Political Activist. Inspired By Ideology Of Bapu , Bheem , Birsa , Nehru , Jaipal. Founder @TribalArmyRajs

MadhyPradesh Katılım Kasım 2017
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Suneel Kumar Adiwasi
Suneel Kumar Adiwasi@AdvSuneelkumar·
2 Oct 2023 लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा: एक अद्वितीय संघर्ष और समाज के लिए प्रेरणा आदिवासी अधिकारों और न्याय की लड़ाई में हमेशा अग्रसर रहने वाले एड. सुनील कुमार आदिवासी जी ने विदिशा वन विभाग द्वारा आदिवासी चैन सिंह की गोली मारकर हत्या के खिलाफ विशाल आक्रोश आंदोलन कर पीड़ित परिवार को 45 लाख रुपये की आर्थिक मदद दिलाई। इस साहसिक कदम से उन्होंने शिवराज सरकार को चुनौती दी और समाज में न्याय का एक उदाहरण पेश किया। वर्ष 2018 में सहरिया आदिवासी अधिकारों को लेकर उन्होंने 121 किलोमीटर की न्याय पदयात्रा कर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा था। वहीं, हाल ही में उनकी 450 किलोमीटर लंबी लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा ने छोटे से विचार को विशाल कारवां में तब्दील कर दिया। इस यात्रा में उपस्थित समस्त जनों का उन्होंने हृदय से आभार व्यक्त किया। पदयात्रा की अनूठी यात्रा और संघर्ष इस यात्रा के दौरान खट्टे-मीठे पल, सफर के उतार-चढ़ाव और पदयात्रियों के साथ बने जीवनभर के रिश्ते इसे अविस्मरणीय बनाते हैं। हर कदम पर कभी कड़ी धूप तो कभी तेज़ बारिश का सामना करते हुए, पदयात्रियों का हौसला अद्वितीय था। रोज़ाना 40 किलोमीटर का सफर तय कर, अगले दिन फिर वही ऊर्जा और जज़्बे के साथ आगे बढ़ना केवल उन नौजवानों का काम है, जिनके दिलों में देश के लिए कुछ करने की आग हो। गांवों की सच्चाई और दिल को छूने वाले अनुभव इस यात्रा के दौरान उन्होंने गांवों, कस्बों और शहरों में ग़रीबी के दयनीय किस्से सुने। कहीं 80 साल के बुजुर्ग मजदूरी करने को मजबूर हैं तो कहीं बच्चों ने अपने माता-पिता को घर से निकाल दिया। ये दिल दहला देने वाले अनुभव इस पदयात्रा की असली तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। सामाजिक एकता का संदेश इस पदयात्रा ने समाज में फैल रही नफरत को मिटाने और हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश देने का प्रयास किया। यात्रा के दौरान कई ऐसे क्षण आए, जिन्होंने समाज के हर वर्ग को जोड़ने और एकता का संकल्प दिलाया। अहिंसा के प्रतीक गांधी जी का मार्गदर्शन 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती पर पदयात्रा का समापन तय था। शिवराज सरकार की पुलिस ने भोपाल में पदयात्रा रोकने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन गांधीवादी नेता श्री दिग्विजय सिंह जी ने अपने अहिंसात्मक दृष्टिकोण से इसे सफल बनाया। संदेश के साथ समर्पण यह पदयात्रा केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि न्याय, समानता और मानवता के लिए संघर्ष का प्रतीक है। यह दिखाती है कि जब एक कदम उठता है, तो काफिला खुद बन जाता है। “अन्याय के खिलाफ सामाजिक संघर्ष ही सामाजिक परिवर्तन है।” #लोकतंत्र_बचाओ_पदयात्रा
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Salman Khan
Salman Khan@BeingSalmanKhan·
Arre yaar Mai apne bare mai nahi baat kar raha tha. How can i be alone when i have such a large amazing family n friends n how can I be lonely when I have u guys,your wishes n Duas, I would be the biggest na shukra ever. Kabhi Kabhi logon ke saath reh kar pak jaata hun, isliye some me time, Buss… Iss baar koi photo nahi breaking news bana diya,Mummy pooch rahi hai, Kya hua Beta? Chill maro yaar
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राष्ट्रीय आदिवासी जनक्रांति संघ - राजस-Rajs
जल, जंगल, ज़मीन सिर्फ संसाधन नहीं — आदिवासी अस्तित्व, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों की सांस हैं। जब विकास के नाम पर धरती ज़हरीली कर दी जाए और बच्चे गर्भ में ही मरने लगें, तो यह सिर्फ पर्यावरण संकट नहीं, बल्कि व्यवस्था द्वारा आदिवासी जीवन पर सुनियोजित हमला है।
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Digvijaya Singh
Digvijaya Singh@digvijaya_28·
जंगल काट कर  कब्जा कर उसका सौदा करने वाले अतिक्रमणकारी माफिया का रूप ले चुके हैं! गुना में जंगल पर कब्जा कर उसे बेचने का गोरखधंधा सरकार की नाकामी और जंगलों के संरक्षण में लापरवाही का सबूत है! ⁦@INCIndia
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राष्ट्रीय आदिवासी जनक्रांति संघ - राजस-Rajs
“जल-जंगल-ज़मीन सिर्फ संसाधन नहीं, हमारी अस्मिता, संस्कृति और अस्तित्व हैं। विकास के नाम पर जंगल उजाड़ना दरअसल सत्ता और पूंजी का केंद्रीकरण है। जब जंगल कटते हैं, सिर्फ पेड़ नहीं गिरते — समुदाय, परंपराएँ और भविष्य भी उजड़ते हैं।”
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राष्ट्रीय आदिवासी जनक्रांति संघ - राजस-Rajs
जब 40° की धूप में परिजन लाश ढोते हैं, तब सरकार के दावे खुद जल जाते हैं। न स्वास्थ्य, न व्यवस्था—सिर्फ भाषण! सहरिया समाज के साथ ये अन्याय कब रुकेगा? ज्योतिरादित्य सिंधिया जी जवाब दीजिए—ज़मीन पर सच्चाई इतनी शर्मनाक क्यों है ? @JM_Scindia @CAshoknagar
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Lalaram Nayak
Lalaram Nayak@lalaram_nayak·
संगम साथी राजस्थान युवा बोर्ड पूर्व अध्यक्ष( पूर्व राज्यमंत्री राजस्थान सरकार) मेरे अजीज प्रिय @sitaramlamba जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। हम आपके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु होने की ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।
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Suneel Kumar Adiwasi
Suneel Kumar Adiwasi@AdvSuneelkumar·
मप्र-अशोकनगर की ये तस्वीर नहीं, सिस्टम का काला सच है—जहाँ इंसानियत दम तोड़ चुकी है। न एम्बुलेंस, न स्ट्रेचर… आदिवासी आज भी लाश ढोने को मजबूर! ज्योतिरादित्य सिंधिया जी, आपके क्षेत्र में विकास सिर्फ भाषण है या जमीनी हकीकत भी ? @CAshoknagar @JM_Scindia @DrMohanYadav51
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Salman Khan
Salman Khan@BeingSalmanKhan·
Thinking yeh hai kisi bhi field mai . Soch lo samaj lo clear ho jao decision lo aur sab bhool ke aage badho and topi se yaad aaya topi khud pehno kisi ko pehnao nahi na kisi ko pehnane do.
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Suneel Kumar Adiwasi
Suneel Kumar Adiwasi@AdvSuneelkumar·
सहरिया प्राधिकरण में गुड्डी आदिवासी की नियुक्ति सम्माननीय है,पर सवाल बड़ा है—क्या यह नेतृत्व है या प्रतीकवाद ? 20 साल में भाजपा, RSS एक सक्षम सहरिया नेतृत्व नहीं दे पाई? नरेंद्र सिंह तोमर जी, क्या सहरिया सिर्फ चेहरा रहेंगे और फैसले कहीं और होंगे ? समाज को मोहरा नहीं,अधिकार चाहिए।
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Sachin Rao
Sachin Rao@SachinAhimsa·
Sanghatan Srujan, Jammu Kashmir, Himachal, and Punjab. I had the privilege of experiencing the Sangam that is India and the Congress. Jai Congress! Jai Hind! Jai Jagat!
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Suneel Kumar Adiwasi
Suneel Kumar Adiwasi@AdvSuneelkumar·
"समाज क्या कहेगा" के दबाव और शोक को प्रदर्शन बनाने वाली सोच की प्रथा को सीधी चुनौती परिवार का सामूहिक निर्णय, बदलाव की मजबूत शुरुआत।
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Suneel Kumar Adiwasi
Suneel Kumar Adiwasi@AdvSuneelkumar·
शोक संदेश एवं परिवार की ओर से सामूहिक निर्णय एवं परिवर्तन का संकल्प "स्व. श्री कमर लाल जी आदिवासी की आत्मशांति एवं सामाजिक सुधार हेतु" सादर निवेदन, दुःख के साथ सूचित किया जाता है दिनांक 17 अप्रैल 2026 को गोपाल सिंह, ब्रजेश सिंह, एड. सुनील कुमार आदिवासी, महेंद्र कुमार के पूज्य पिताजी, स्व. श्री कमर लाल जी आदिवासी (सेवानिवृत्त डिप्टी रेंजर) का दुखद स्वर्गवास हो गया था। इस अपार दुःख की घड़ी में आप सभी स्नेहीजनों, समाजजनों एवं ग्रामवासियों द्वारा मिले स्नेह, संवेदना और सहयोग के लिए हम हृदय से आभारी हैं। हमारे पिताजी का संपूर्ण जीवन सादगी, ईमानदारी और समाज के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा। उनके इन्हीं आदर्शों को ध्यान में रखते हुए, हम एक ऐसा निर्णय ले रहे हैं जो केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक छोटा प्रयास है। आज समाज में प्रचलित बारहवीं (मृत्युभोज) जैसी परंपराएं कई गरीब परिवारों के लिए गहरी पीड़ा और बोझ बन चुकी हैं। *“समाज क्या कहेगा”* के दबाव में लोग कर्ज लेते हैं, जमीन गिरवी रखते हैं, यहाँ तक कि बंधुआ मजदूरी में फंस जाते हैं। यह केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था है जिसे बदलने की आवश्यकता है—और बदलाव की शुरुआत हमें स्वयं से करनी होगी अतः हम परिवारजन यह सामूहिक एवं दृढ़ निर्णय लेते हैं कि— 1. हम बारहवीं (मृत्युभोज) का आयोजन नहीं कर करेंगे। 2. किसी भी प्रकार के भोज, दिखावा एवं अनावश्यक खर्च से पूर्णतः दूर रहेंगे। 3. आप सभी से विनम्र अनुरोध है कि कृपया कोई उपहार, कपड़े या अन्य सामग्री न लाएं। हमारे लिए आपकी उपस्थिति, संवेदना और नैतिक सहयोग ही सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है। विशेष निवेदन – दिनांक 28 अप्रैल 2026 दिन- मंगलवार आप सभी से निवेदन है कि इस दिन केवल दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करने, वृक्षारोपण, गंगा पूजन एवं प्रसादी ग्रहण करने तथा परिवार एवं समस्त परिजनों के दुःख में सहभागी बनने हेतु पधारें। आइए, हम सब मिलकर एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करें जहाँ शोक के समय दिखावा नहीं, बल्कि संवेदना और समानता हो; जहाँ परंपरा बोझ न बने, बल्कि मानवीयता का माध्यम बने। यह निर्णय केवल हमारे परिवार का नहीं, बल्कि एक सामूहिक पहल है—एक ऐसे समाज की ओर, जहाँ सादगी, न्याय और मानवीय गरिमा को प्राथमिकता मिले। “परिवर्तन की शुरुआत हमारे अपने निर्णयों से होती है।” कार्यक्रम स्थल :- निज निवास ग्राम झुकर जोगी, जिला विदिशा (म.प्र.)
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