अमित
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@Amitji__
राष्ट्रभक्त #आत्मनिर्भर














असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती को खत्म करके टीचिंग एसोसिएट की भर्ती निकालना बेरोजगार युवाओं के साथ खिलवाड़ है आखिर टीचिंग एसोसिएट भर्ती का फायदा क्या है क्वालिफिकेशन असिस्टेंट प्रोफेसर की पेपर पेटर्न असिस्टेंट प्रोफेसर का टीचिंग एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसर में अंतर क्या हुआ 28850 में आप उन कॉलेजों में टीचिंग एसोसिएट लगा रहे हो जो असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की काबिलियत रखते हैं मात्र 5 साल के लिए आप भर्ती कर रहे हो उसके बाद उनका फ्यूचर क्या है जब सामान पात्रता, सामान क्वालिफिकेशन ,सामान योग्यता, समान पैटर्न फिर मात्र 28850 में आप मजदूर की जैसे काम करवाओगे सोचिए एक कॉलेज में जो आपके समकक्ष है वह लाखों रुपए तनख्वाह लेगा और आप मात्र 28850 में वही काम करोगे JRF क्वालीफाई करने वाले बच्चों की फेलोशिप इससे ज्यादा है क्या आपको लगता है इससे बच्चों का भला होने वाला है क्या आपको लगता है इससे बेरोजगारी कम होगी


#Jodhpur: मासूम बच्चों पर भी नजरें इनायत करो "सरकार" ! गर्मियों की छुट्टियों को लेकर विरोधाभास की स्थिति आ रही नजर, राजकीय कॉलेजों में 1 मई से ही ग्रीष्मावकाश कर... #RajasthanWithFirstIndia @RajGovOfficial






NET, SET, PhD किए हुए राजस्थान के उच्च शिक्षित युवाओं के साथ यह एक मज़ाक की तरह है। यह युवाओं को हतोत्साहित करने का प्रयास है। राजस्थान में कर्मचारी चयन बोर्ड ने College Education में असिस्टेंट प्रोफेसर की परमानेंट पोस्ट्स की जगह टीचिंग एसोसिएट नाम से संविदा (Contract) पर भर्तियों का विज्ञापन जारी किया है। कंप्यूटर से लेकर इकोनॉमिक्स, इंग्लिश, जियोग्राफी, हिंदी, हिस्ट्री, साइंस सहित कई सब्जेक्ट्स के लिए टीचिंग एसोसिएट की वैकेंसी निकाली गई है। जो पहले असिस्टेंट प्रोफेसर की परमानेंट पोस्ट होती थी, अब उसे संविदा यानी ठेके पर कर दिया गया है, और बेहद कम सैलेरी रखी गई है। इसके लिए ऑनलाइन एप्लीकेशन भी होंगे, परीक्षा भी होगी और Educational Qualification भी वही रखी गई है, जो असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए होती थी। इतना सब कुछ होने के बाद भी युवाओं को जॉब सिक्योरिटी नहीं दी गई है। NET, SET, PhD किए हुए उच्च शिक्षित युवाओं के साथ यह एक भद्दे मज़ाक की तरह है। BJP सरकार के इस रवैये से समझ आता है कि ये लोग रिसर्च, इनोवेशन और हायर एजुकेशन के विरोध में खड़े हैं। यह उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को हतोत्साहित करने का प्रयास है। जिन युवाओं को आगे बढ़ाने का काम सरकारों को करना चाहिए, उन युवाओं को पीछे धकेलने की साजिश की जा रही है। PhD किए हुए युवाओं की क्षमता का उपयोग पॉलिसी मेकिंग से लेकर तमाम ऐसे कार्यों में किया जाना चाहिए, जिससे शासन-प्रशासन बेहतर होता हो, देश में growth model तैयार होते हो। राजस्थान सरकार को अपने इस युवा और शिक्षा विरोधी फैसले को वापस लेना चाहिए। संविदा पर Teaching Associates की जगह Assistant Professors की परमानेंट पोस्ट निकालनी चाहिए। युवाओं और उच्च शिक्षा को सम्मान भाजपा सरकार दे नहीं सकती, पर कम से कम Job Security और Career stability तो दे। #Rajasthan









