दुर्योधन
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दुर्योधन
@Ashishguddus
सुअर के साथ कुश्ती नहीं करनी चाहिए क्योंकि आप गंदे हो जाओगे, लेकिन सुअर को मज़ा आएगा।
भीमराष्ट्र Katılım Nisan 2017
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“मोदी का दूसरा प्रहार आने वाला है,”
“अनुच्छेद 30-A को समाप्त किया जा सकता है।”
कहा जा रहा है कि मोदी जी हिंदुओं के साथ हुए नेहरूकालीन कथित अन्याय को सुधारने के लिए पूर्णतः तत्पर हैं।
क्या आपने कभी “अनुच्छेद 30” और “अनुच्छेद 30-A” के बारे में सुना है?
क्या आप जानते हैं कि “30-A” का वास्तविक आशय क्या है?
यदि नहीं, तो इसे जानने में विलंब न करें—
30-A संविधान में निहित एक प्रावधान बताया जाता है।
कहा जाता है कि जब नेहरू जी इसे संविधान में सम्मिलित करना चाहते थे, तब सरदार वल्लभभाई पटेल ने इसका कड़ा विरोध किया था।
उन्होंने कहा था—
“यह प्रावधान हिंदुओं के साथ विश्वासघात है; यदि इसे संविधान में शामिल किया गया, तो मैं मंत्रिमंडल और कांग्रेस से त्यागपत्र दे दूँगा।”
कथित रूप से अंततः नेहरू जी को झुकना पड़ा।
परंतु दुर्भाग्यवश, कुछ समय बाद ही सरदार पटेल का निधन हो गया, और उनके पश्चात यह प्रावधान संविधान में जोड़ दिया गया।
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अब जानिए 30-A की कथित विशेषताएँ:
इस दावे के अनुसार—
हिंदुओं को अपने धर्म की शिक्षा देने का अधिकार नहीं दिया गया।
निजी संस्थानों में हिंदू धर्म पढ़ाने की अनुमति नहीं है।
हिंदू धार्मिक शिक्षा के लिए विद्यालय या महाविद्यालय स्थापित नहीं किए जा सकते।
सार्वजनिक शिक्षण संस्थानों में हिंदू संस्कृति या धर्म का शिक्षण निषिद्ध बताया गया है।
इसके विपरीत, अनुच्छेद 30 के अंतर्गत—
मुसलमान, सिख और ईसाई समुदाय अपने धार्मिक शिक्षण संस्थान स्थापित कर सकते हैं।
वे अपनी धार्मिक शिक्षा स्वतंत्र रूप से प्रदान कर सकते हैं।
मदरसे, मिशनरी विद्यालय आदि स्थापित करने का अधिकार उन्हें प्राप्त है।
इसके अतिरिक्त यह भी कहा जाता है कि—
हिंदू मंदिरों की संपत्ति एवं आय पर सरकार का नियंत्रण हो सकता है।
जबकि अन्य धार्मिक संस्थानों की आय संबंधित समुदायों के उपयोग हेतु ही रहती है।
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निष्कर्ष (जैसा संदेश में व्यक्त किया गया है):
इस प्रकार अनुच्छेद 30 और 30-A को हिंदुओं के प्रति भेदभावपूर्ण एवं व्यवस्थित अन्याय के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
यह भी कहा गया है कि—
आज हिंदू समाज अपनी परंपराओं और ग्रंथों से दूर होता जा रहा है।
अतः आवश्यक है कि हम अपने धर्म को पढ़ें, समझें और उसका संरक्षण करें।
यदि आपको यह जानकारी उचित प्रतीत हो, तो इसे आगे साझा करें।
🙏 धन्यवाद।
“मैं हिंदू हूँ, इसलिए यह संदेश आप तक पहुँचाया।”
और सबूत चाहिए?
ये रहा 👇👇
Article 30 of the Constitution of India - Wikipedia share.google/9YFFCGtedjm6NT…
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@_KajalKushwaha आप आईटी सेलियों की मजबूरी हम समझते हैं,
इस बूढ़े और क्रूर चेहरे को भी विनयशीलता दिखाई देती है।
इन थकी हुई आंखों में अब हर कीमत पर अपनी दरकती सत्ता बनाए रखने डर स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
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@Awadheshkum @neelkantbakshi अब तो जनता भी कहने लगी है, आजकल के पत्रकार जो टीवी पे दिखते हैं वे केवल मोदी सरकार के चरण चुम्बक हैं।
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पत्रकार अशोक श्रीवास्तव जी के घर तेलंगाना पुलिस के आने की सूचना है। पता चला कि तेलंगाना पुलिस तिलक मार्ग थाना भी गई थी। वहां से और पुलिस बल लेकर शायद छापा मारने और गिरफ्तार करने की योजना होगी। डीडी न्यूज़ का केंद्र तिलक मार्ग थाने में ही आता है। यह अत्यंत गंभीर विषय है। तेलंगाना की पुलिस कौन सा मामला लेकर आई है यह अभी नहीं पता। जो भी साथी इस संदर्भ में कानूनी रूप से कुछ कर सकते हैं अवश्य करें । केंद्र सरकार भी ध्यान दें। कोई पत्रकार टेलीविजन के अपने डिबेट में कुछ बोलता है, बहस करता है उसके विरुद्ध इस तरह मुकदमे हों ,पुलिस दूर-दूर से आए तो फिर काम करना मुश्किल होगा। पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं और ज्यादातर कांग्रेस की सरकारों ने ही ऐसा किया। यह खतरनाक प्रवृत्ति है। क्या कांग्रेस चाहती है कि कोई पत्रकार खुलकर कुछ बोले नहीं? किसी पत्रकार से आपका मतभेद हो सकता है, उसकी बात आपको गलत लग सकती है लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में इसका सामना करने का तरीका पुलिस नहीं हो सकती। पहले कांग्रेस के लोगों ने डीडी न्यूज़ के सामने हिंसक प्रदर्शन तक किया और अब एक राज्य की पुलिस आ गई है। कल कर्नाटक की पुलिस आ जाए फिर हिमाचल प्रदेश की आ जाए। कांग्रेस देश में किस तरह का माहौल पैदा करना चाहती है?
@HMOIndia @LtGovDelhi @CPDelhi @PMOIndia @AmitShahOffice @RahulGandhi @priyankagandhi @gurdeepsappal @
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@HindutvaNerve किसी को हटाने की जरूरत नहीं, अब जनता खुद महामानव को झोला पकड़वाएगी, स्वतः चले जाएंगे ये भी।
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@akhileshsharma1 SIR के नाम पर ममता के ओरिजनल वोटरों के नामों की कटौती, केंद्रीय बलों की तैनाती, भाजपा शासित राज्यों का पुलिस बल, ईडी, सीबीआई, चुनाव आयोग से वोटरों का मोबाइल नंबर लेकर दुरुपयोग करना, सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग का खुला पक्षपात, मीडिया, धूर्तता के बावजूद अगर ममता बनर्जी जीत गई तो?
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पश्चिम बंगाल में आज का मतदान तय करेगा कि किसकी सरकार बनेगी।
पिछले विधानसभा चुनाव में कोविड के कारण बीजेपी इस दौर में अपनी पूरी ताक़त नहीं लगा सकी थी।
बीजेपी 142 में से केवल 18 सीटें ही जीत सकी थी जबकि टीएमसी को रिकॉर्ड 123 सीटें मिली थीं।
लेकिन इस बार पूरा पार्टी नेतृत्व यहीं डेरा डाल कर बैठा रहा।
अगर बीजेपी आज ममता के इस क़िले को भेद पाई तो उसकी सरकार बन सकती है।
अन्यथा ज्योति बसु और नवीन पटनायक की तरह ममता बनर्जी भी लगातार चौथी बार किसी बड़े राज्य की सीएम बन सकती हैं।

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@REAL___HINDUVT क्या उसमें भी जाति देखकर आरक्षण दिया जाएगा? यानी -40 वाला अगर आरक्षित वर्ग से आएगा तो उसे जज बनाया जाएगा।
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@PiyushTiwariNew सत्ता मिलती है काम करने के लिए, आखिर इतने चुनाव जीतकर भाजपा करना क्या चाहती है जो पुरी की पुरी केंद्र सरकार, तमाम राज्यों की भाजपा सरकारें, विधायक, सांसद हर वक्त चुनावों में ही व्यस्त रहते हैं?
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एक चुनाव खत्म होते ही अगले रण के लिए बीजेपी ख़ुद को तुरंत तैयार कर लेती है आराम नहीं करती !
बंगाल के बाद अब बीजेपी का पूरा फोकस यूपी-उत्तराखंड पर है !
आज बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उत्तर प्रदेश में है
खबर है की 2-3 मई को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन उत्तराखंड के दौरे पर जा सकते है !!
उत्तराखंड में पदाधिकारियों के साथ मीटिंग कर सकते है नितिन नवीन !!
बीजेपी कभी आराम नहीं करती… बस जीत की तैयारी करती रहती है !!
@BJP4UP @BJP4UK @NitinNabin
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@DrBS07 तो क्या भाजपा आईटी सेलियों को महामानव से भरोसा उठ गया है? क्या उन्हें भी लगता है जनता महामानव की बातें नहीं सुन कर अजित और आनंद की बातें सुनेगी?
दरअसल
मुद्दा अजित भारती या आनंद रंगनाथन है ही नहीं। बीजेपी आईटी सेल, नेता और प्रवक्ता जनता के जायज सवालों का जवाब दे ही नहीं पा रहे।
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आनंद रंगनाथन को अभी सात आठ साल पहले बाबरी मस्जिद ब्रिक बाय ब्रिक चाहिये था और प्राईवेट सेक्टर में भी आरक्षण के लिये उनके पास सैकङो तर्क थे, लेकिन अब वह बाकी दुनिया को जो हर विरोध, पराजय झेलकर हिन्दुत्व के साथ रहा, भगवान राम के साथ रहा, उसे ज्ञान बांट रहे हैं।
उनके चेले आनंद की तुलना कपिल मिश्र और दिलीप मंडल से करना चाहते हैं जबकि सत्य यह है कि कपिल मिश्र और दिलीप मंडल जब विरोध में थे, वह हमारे खुले शत्रु थे, उन्होंने कभी मित्र होने का ढोंग नहीं किया और ये दोनों लोग आज हमारे साथ हैं तो खुलकर साथ में हैं, लेकिन आनंद और अजीत भारती जैसै ब्लैकमेलर मौका देखकर विचार बदल लिये और आज उल्टा उन लोगों को हिन्दुत्व सिखाते फिरते हैं जो खराब से खराब समय में एकजुट थे।
इन ब्लैकमेलर और विंग आन सोल्ड को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता जिनका केवल एक काम है और वह है उसी विचारधारा के लोगों में फूट डालना, वसूली करना, टूकङे करना, जिसके साथ ये मौसम बदलने के बाद आने का ढोंग करते हैं।
वैसे विंग आन सोल्ड के सदस्य हर चुनाव से पहले माहौल खराब करने में लगे रहते हैं, बिहार चुनाव से पहले भी यहीं किया, अभी बंगाल चुनाव से पहले भी यहीं किया, बिलकुल महत्वपूर्ण मौको पर ये अपना असली रंग दिखाते हैं। ये गिरोह कभी भी मन से हिन्दुत्ववादी हुआ ही नही। ये जब समझ गये कि कांग्रेस की वापसी असंभव है तो ये इधर चले आये और भाजपा की नाव पर बैठकर सवारी करने लगे, अब इनको लगता है कि इन्होने इतने धूर्तों और मूर्खों को इकट्ठा कर लिया है कि यह अकेले चल सकते हैं तो ये हर क्षण कांग्रेस, बामपंथ के अप्रत्यक्ष पोषण में लग चुके हैं। उसके बाद भी धूर्तता का चरम ये कि हम असली राईट विंग हैं। ये राईट विंग नहीं हैं, ये लेफ्ट के विंग आन सेल हैं।
जो संघ, भाजपा से जुङे लोग हैं, जो भावुक हैं, वह इन बिकाऊ विंग की बातों में आकर अपने ही संगठन पर आक्रामक हैं, जैसे इनको पता ही नहीं है कि कोई भी सतत काम जोर जोर से चिल्लाने से, दिन रात मिडिया में आने से, निरंतर अपने ही लोगों को ब्लैकमेल करने से नहीं होता है। मैंने कई साल पूर्व यति नरसिंहानन्द के प्रति लोगों को सजग किया था, बाद में वह 2022 चुनाव में वह सपा का एजेंट निकला। अजीत भारती के सम्बंध में भी मैंने यह लिखा था, यह उसी बेहूदे यति का चेला निकला। ऐसे ढेर सारे नाम हैं, हां कुछ लोगों ने अपने को संभाला जिसमें आचार्य धीरेन्द्र शास्त्री और जे साई दीपक प्रमुख हैं, यह संभाल क्यों आया, उसके पीछे भी सज्जन शक्ति थी, न कि ब्लैकमेलर।
इसी तरह मैने खट्टर नामक भाषणकर्ता को भी रील में सुना, अनावश्यक जोर जोर से चीख चीखकर बोलना, केवल गुस्से में नकारात्मकता और डर बेचना, कभी चेहरे पर हंसी दिखाई नहीं पङी, कभी सकारात्मक बात सुनने को नहीं मिला, केवल और केवल डर की खेती। एक और नाम है, जो कभी सोनिया जी के चरणों में नियमविरूद्ध कान्स्टिट्युशन क्लब की सदस्यता देने को लालायित थे, जिसे बाद में वापस लेना पङा, ये लोग कार्यक्रमों में पैसे लेकर बोलने आते हैं, पैसे लेकर आना कोई पाप नहीं है लेकिन पाप और धूर्तता तब है जब आप अपने इस बिजनेस को त्याग बताये और ये चाहे कि वह अपने मौखिक डायरिया के बाद उभरे समस्या में भी लोगों से पैसा वसूली कर लें।
जो आदमी हमेशा लगातार आपको चीखता चिल्लाता, गुस्से में तमतमाया, नकारात्मकता का शोर मचाता दिखे, सावधान हो जाईये, कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं होता, यदि है तो या तो वह नौटंकी का कलाकार है या फिर भयानक कुंठित है। ये लोग आपके भावनाओं को बेचने वाले हैं। हिन्दुत्व एक सतत लङाई में है लेकिन इसी हिन्दुत्व ने कासिम, गजनी, गोरी, गुलाम, लोदी, मुगल, पुर्तगाली, ब्रिटिश, कांग्रेस सबको झेला है और बचा भी रहा है, कम हुआ लेकिन समाप्ति के कगार पर भी नहीं पहुंचा, यह आज भी बङे हिस्से में है और रहेगा। दिन रात चीखते चिल्लाते इन बिकाऊ कलाकारों से सावधान रहिये। उनसे बात करिये, उनकी बात सुनिये जिसमें सभी नौ रस हो, मनुष्य नौ रस का है, एक रस का केवल नौटंकी का कलाकार होता है।
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@chidswami कांग्रेस और भाजपा में कोई अंतर नहीं रह गया। कलतक जिन कार्यों के लिए हम कांग्रेस को कोसते थे आज वही भाजपा कर रही है। हमारा जमीर कल भी जिंदा था, आज भी जिंदा है। इन जैसे चाटुकार दोनों तरफ हैं, उनकी बातों को नजरअंदाज करें।
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विधर्मियों का विरोध करो,,अपने धर्म के पक्ष में खूब काम करो पर वाणी की मर्यादा का ध्यान रखो।
बहुसंख्यक होने की गंभीरता दिखानी होगी।
विश्व स्तर पर आप सबको शत्रु नहीं बना सकते।
सरकार चलाना घर चलाने जितना आसान नहीं होता,,फिर भी घर भी नहीं चल पाता जिनसे वे मोदी को ज्ञान देते दिखाई पड़ते हैं तब दुःखद आश्चर्य होता है।
समस्या ये है कि अपने ही मोदी सरकार के लिए समस्याएं खड़ी करते रहे हैं।
हम भी विधर्मियों का विरोध करते हैं,,अनेक घरवापसी करवाई हैं,,पर वाणी का संयम नहीं खोया।
हम पर तो कोई FIR नहीं हुई कभी।
समझ सको तो
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@REAL___HINDUVT हिन्दुओं को एक होना चाहिए सनातन द्रोही महामानव की सरकार के खिलाफ।
सरकार ईसाई मिशनरियों और इस्लामिक मुल्कों के दबाव में काम कर रही है।
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@RubikaLiyaquat साहब का ढोंग अब सनातनी पहचान गए हैं। बंगाल में आंबेडकरवाद नहीं चल रहा, बुद्ध की पूजा का भी कोई फायदा नहीं हो रहा तो सनातनियों को दिखाने के लिए माता के दरबार में गए।
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@UP51_ @myogiadityanath साहब ने बड़ी महीनता से
तोगड़िया को निबटा दिया
बजरंगी कटियार जी को घर बैठा दिया
न जाने कितने हिंदुत्व के योद्धा को
नेपथ्य में धकेल दिया गया
तब लोगो को काठ का चश्मा लगा हुआ था
लेकिन अब काठ का चश्मा उतरने लगा है
इसीलिये अब जब भी किसी योद्धा के साथ गलत होता है
तो आवाज उठने लगी है।
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बंगाल की पुकार: अब दीदी का शासन खत्म हो और भाजपा का सुशासन आए!
उत्तर प्रदेश की तरह बंगाल में भी कानून का राज और अपराधियों में खौफ होना चाहिए मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी का बंगाल दौरा इस परिवर्तन की नई शुरुआत है।
जनता तैयार है, अब बदलाव होकर रहेगा!

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@Tiwari_1oct @Rajendr76134839 राहुल गांधी जो आज बोलता है, भाजपा के लोग कुछ दिन बाद स्वीकार करते हैं।
भूमि अधिग्रहण बिल,
किसान बिल,
जातिगत जनगणना,
नरेन्द्र सरेन्द्र,
महिला आरक्षण बिल
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अचानक राहुल गांधी के दिमाग में क्या फितरत जागी कि वो बीच बंगाल चुनाव से भाग निकले और भागकर पहुंचे कहाँ? अंडमान एंड निकोबार आइलैंड, वो भी पूरे तीन दिन के लिए। राहुल यहां ₹92,000 करोड़ के ग्रेट निकोबार आइलैंड प्रोजेक्ट का 'save nature' का राग अलापकर विरोध करेंगे।
एक ऐसा प्रोजेक्ट जिससे भारत की विदेशी पोर्ट्स पर निर्भरता समाप्त हो जाएगी वो भला कैसे राहुल को बर्दाश्त हो सकता है?
लेकिन सवाल राहुल की timeline पर है
-पहले बंगाल में रिकॉर्डतोड़ मतदान होना
-राहुल को कांग्रेस की हार दिखाई देना
-फिर अचानक तीन दिन अंडमार निकोबार आइलैंड की विरोध यात्रा
-और पीछे से अपनी प्रोपेगेंडा टीम को सक्रिय करना
जो कि बिना लॉजिक के ट्वीट पर ट्वीट किए जा रहे हैं। इनके अनुसार तो कांग्रेस की सत्ता में अप्रैल माह में ठंडी हवाएं चलती थीं और मोदी जी ने अप्रैल में गर्मी ला दी है। पीएम मोदी और सूरज दादा भी मिले हुए हैं।
यह तो स्पष्ट है इतने चुनाव हारने के बाद भी राहुल को हार पचती नहीं है, वो कुछ ना कुछ भ्रम फैलाने, बचकाना हरकत करने पर उतर ही आते हैं पर देश की जनता भी इनका खेल जानती है। इनके नकली डर से बंगाल की जनता घर में दुबककर बैठने वाली नहीं है।
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@Reetesh777 समाज की उन्नति हुई हो।
जैसे इसरो, हाल, आयुर्विज्ञान, पंचायती राज, श्वेत क्रांति, हरित क्रांति, पंच वर्षीय योजना, स्वर्णिम चतर्भुज, मनरेगा जैसी रोजगार योजना, नवोदय जैसी शिक्षा योजना, सर्व शिक्षा अभियान, पोलियो उन्मूलन।
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@Reetesh777 भी शामिल है।
उज्जवला योजना भी देश का पैसा वोट के लिए बांटना ही है,
इंदिरा आवास का नाम बदल कर टैक्स के पैसे से घर बांटना तो कोई भी कर सकता है,
२०१४ से पहले तो जैसे बैंक में किसी का खाता खुलता ही नहीं था, जनधन आने के बाद ही लोग खाता खोलने लगे हों,
अरे कोई योजना बताओ जिससे देश की .
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जो लोग पूछते हैं “भाजपा ने किया ही क्या है?” उनके लिए काम खुद जवाब हैं 👇
• 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन – गरीब के घर चूल्हा जलता रहे
• धारा 370 हटाकर कश्मीर को पूर्ण रूप से भारत से जोड़ा
• राम मंदिर निर्माण – सदियों का सपना साकार
• तीन तलाक खत्म – मुस्लिम बहनों को न्याय
• उज्ज्वला योजना – करोड़ों महिलाओं को गैस कनेक्शन
• आयुष्मान भारत – 5 लाख तक मुफ्त इलाज
• जनधन योजना – हर गरीब का बैंक खाता
• स्वच्छ भारत मिशन – करोड़ों शौचालय, सम्मानजनक जीवन
• पीएम आवास योजना – गरीबों को पक्का घर
• डिजिटल इंडिया – भारत बना डिजिटल शक्ति
• वंदे भारत ट्रेन – आधुनिक रेलवे की नई पहचान
• कोरोना काल में मुफ्त वैक्सीन और विश्व की सबसे बड़ी वैक्सीनेशन ड्राइव
• भारत बना दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
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