पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने फाल्टा में पार्टी उम्मीदवार देबांशु पांडा के समर्थन में रोड शो किया।
(नहीं नहीं आप जो सोच रहे हैं ऐसा नहीं है ये गाड़ियां पेट्रोल पर नहीं चलती ये पानी पर चलने वाली गाड़ियां है उन्हें देश की चिंता है दोस्तो)
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“फ़िल्म धुरंदर तो सभी ने देखी होगी लेकिन आज एक ऐसे धुरंदर की बात करते हैं जो देश का सबसे ख़तरनाक और भरोसेमंद इंसान जो कभी स्कूल भी नहीं गया लेकिन जिसने देश के लिए बिना वर्दी एक सच्चे सैनिक की भूमिका निभाई”
🔷रेगिस्तान के इतिहास में कुछ ऐसी शख्सियतें हुई हैं जिनकी काबिलियत किसी आधुनिक तकनीक या GPS से भी कहीं ज्यादा सटीक थी। उन्हीं में से एक महान नाम है — रणछोड़दास सवाभाई रबारी, जिन्हें आदरपूर्वक “रणछोड़ पागी” कहा जाता है।
🔷👉वे भारत के ऐसे गुमनाम नायक थे, जिन्होंने केवल पैरों के निशान देखकर दुश्मनों की पूरी कुंडली बता देने की अद्भुत कला में महारत हासिल की थी। उनके इसी हुनर के कारण उन्हें “पागी” कहा गया। गुजराती/राजस्थानी में “पग” का अर्थ पैर होता है, और पैरों के निशान पहचानने वाले को “पागी” कहते हैं।
🔷आइए जानते हैं उस महान व्यक्तित्व की कहानी, जिसने बिना वर्दी पहने भी देश के लिए एक सच्चे सैनिक की तरह सेवा की।
🔷कौन थे रणछोड़दास पागी?
उनका जन्म गुजरात के बनासकांठा जिले के पेथापुर गांव में एक रबारी (चरवाहा) परिवार में हुआ था।
उनका जीवन रेगिस्तान में ऊंट और मवेशी चराते हुए बीता।
रेगिस्तान की रेत में खोए लोगों और पशुओं को ढूंढते-ढूंढते उन्होंने पैरों के निशान पढ़ने की ऐसी कला विकसित कर ली थी, जो किसी चमत्कार से कम नहीं थी।
वे केवल निशान देखकर बता देते थे कि व्यक्ति पुरुष है या महिला, उसकी उम्र क्या होगी, वजन कितना होगा, वह अकेला है या साथ में सामान भी है।
🔷भारतीय सेना में एंट्री — 1965 का भारत-पाक युद्ध:—
उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब बनासकांठा के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक बनवारी लाल ने उनकी प्रतिभा को पहचाना।
1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना ने कच्छ क्षेत्र की “विधाकोट” पोस्ट पर कब्जा कर लिया था। भारतीय सेना को रेगिस्तान में आगे बढ़ने और दुश्मन की स्थिति समझने में भारी परेशानी हो रही थी।
तब रणछोड़दास पागी को सेना के साथ गाइड और स्काउट के रूप में जोड़ा गया।
👉युद्ध के दौरान उन्होंने केवल रेत पर बने पैरों के निशानों को देखकर भारतीय सेना को बताया—
“यहाँ से लगभग 1200 पाकिस्तानी सैनिक गुजरे हैं और उनके पास भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद है।”
जब सेना ने उनके बताए इनपुट्स के आधार पर कार्रवाई की, तो उनकी जानकारी पूरी तरह सही साबित हुई।
🔷1971 के युद्ध में भी इस नायक ने ऐतिहासिक भूमिका निभाई:—-
1971 के युद्ध में भी रणछोड़दास पागी ने भारतीय सेना को थार रेगिस्तान के दुर्गम रास्तों से सुरक्षित निकाला।
उन्होंने ऐसे रास्ते बताए जिनसे भारतीय सेना समय पर पाकिस्तानी चौकियों तक पहुंच सकी।
सिर्फ रास्ता ही नहीं, उन्होंने दुश्मनों के छिपने के स्थानों का भी सटीक अंदाजा लगाया।
उनकी सूझबूझ और रेगिस्तान की गहरी समझ ने भारतीय सेना को बड़ी रणनीतिक बढ़त दिलाई।
🔷👉👉फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ के प्रिय
भारतीय सेना के महानतम सैन्य नेताओं में से एक फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ रणछोड़ पागी के हुनर से बेहद प्रभावित थे।
• उन्होंने पागी को सेना में विशेष सम्मानजनक पद दिया।
• 1971 युद्ध के बाद ढाका में पाकिस्तान के आत्मसमर्पण के समय सैम मानेकशॉ ने विशेष रूप से रणछोड़ पागी को आमंत्रित किया था।
• कहा जाता है कि वे उनके साथ बैठकर भोजन भी करते थे और उन्हें अत्यंत सम्मान देते थे।
🔷सम्मान और पुरस्कार:—-
देश के लिए उनकी असाधारण सेवाओं के लिए उन्हें कई सम्मान मिले:—
👉• राष्ट्रपति पदक
👉• संग्राम पदक
👉• समर सेवा पदक
👉• BSF ने गुजरात के सुईगाम में अपनी एक सीमा चौकी का नाम “रणछोड़दास पागी पोस्ट” रखा।
🔷उनकी विरासत:—
साल 2013 में लगभग 112 वर्ष की आयु में रणछोड़दास पागी ने अंतिम सांस ली।
🔷आज जब पूरी दुनिया GPS, सैटेलाइट और आधुनिक तकनीक पर निर्भर है, तब रणछोड़ पागी ने दशकों पहले साबित कर दिया था कि इंसान की बुद्धि, अनुभव और प्रकृति को समझने की क्षमता किसी भी मशीन से कहीं अधिक अद्भुत हो सकती है।
वे भारतीय इतिहास के उन अनमोल नायकों में से एक हैं, जिन्होंने बिना किसी दिखावे, बिना किसी प्रसिद्धि की चाह के, अपना पूरा जीवन मातृभूमि की सेवा में समर्पित कर दिया।
ऐसे गुमनाम वीरों को शत-शत नमन। 🇮🇳
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आज का सुविचार:—
टूटना हमेशा अंत नहीं होता…
कई बार वही एक नई शुरुआत का द्वार बन जाता है।
ईश्वर टूटी हुई चीजों का इस्तेमाल कितनी खूबसूरती से करता है…
👉• बादल टूटते हैं, तो धरती पर जीवन बरसता है।
👉• मिट्टी टूटती है, तो खेत बनकर अन्न उगाती है।
👉• बीज टूटता है, तो एक नया पौधा जन्म लेता है।
👉• पत्थर टूटता है, तो मूर्ति बनकर पूजनीय हो जाता है।
👉• सीप टूटती है, तो मोती दुनिया की शोभा बनता है।
तो फिर इंसान क्यों घबराए अपने टूटने से…?
🔷साहिब,
कभी-कभी जीवन हमें इसलिए तोड़ता है ताकि हमारे भीतर छुपी असली ताकत बाहर आ सके।
हर दर्द, हर संघर्ष और हर ठोकर हमें पहले से ज्यादा मजबूत, समझदार और संवेदनशील बना देती है।
🔷जब भी लगे कि सब बिखर रहा है, तब ये याद रखिए —
ईश्वर आपको खत्म नहीं कर रहा,
बल्कि आपको किसी बड़ी भूमिका, बड़े उद्देश्य और बड़ी सफलता के लिए तैयार कर रहा है।
इसलिए मुस्कुराइए…
क्योंकि शायद आपकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत अध्याय अभी लिखा जाना बाकी है। 🌸🙏
आपका दिन सुख, शांति, सकारात्मकता और नई उम्मीदों से भरपूर हो।
सुप्रभात। ☀️🙏
क्या शादी से पहले सेक्स करना गलत है?
जानकारी: यह पूरी तरह से व्यक्तिगत और सामाजिक मान्यताओं पर निर्भर करता है। मेडिकली देखा जाए तो शादी
से पहले सेक्स करना कोई बीमारी या गुनाह नहीं है। बस दो बातों का ध्यान रखेंः सहमति (Consent) और सुरक्षा (Protection) I
डाउट क्लियरः क्या प्री-मैरिटल सेक्स से शादी टूट सकती है? यह कपल्स पर निर्भर करता है, सेक्स से ज्यादा इमोशनल कनेक्शन और भरोसा मायने रखता है।
🌌 ओम शं शनैश्चराय नमः 🌌
“नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छायामार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।”
“कर्मों का हिसाब भी रखता है,
और न्याय का तराज़ू भी थामे रहता है!
साहिब, शनि का नाम सुनकर डरते वही हैं,
जो अपने कर्मों से खुद डरते हैं!”
आज ज्येष्ठ मास की अमावस्या है—यानी हम सबके कर्मों का हिसाब रखने वाले, न्याय के देवता, कर्मफलदाता और सत्य के प्रतीक, सूर्यपुत्र भगवान श्री शनि देव महाराज की जन्म जयंती!
आज के इस विशेष दिन पर आप सभी को शनि जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।
भारतीय सनातन परंपरा में शनिदेव को केवल “दंड देने वाले देव” के रूप में नहीं, बल्कि सत्य, न्याय, अनुशासन और कर्मों का सही फल देने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है।
शनि देव का नाम सुनते ही बहुत से लोगों के मन में भय आ जाता है, लेकिन सच्चाई यह है कि शनिदेव किसी के शत्रु नहीं होते।
वे केवल मनुष्य को उसके कर्मों का फल देते हैं — न कम, न ज़्यादा।
इसीलिए उन्हें “न्याय का देवता” कहा जाता है।
🔹 शनि देव कौन हैं?
पुराणों के अनुसार शनिदेव सूर्य देव और माता छाया के पुत्र हैं।
उनका वर्ण श्याम है और उनका वाहन कौआ माना जाता है।
हाथों में दंड और त्रिशूल लिए शनिदेव संसार को यह संदेश देते हैं कि जीवन में अहंकार, अन्याय और छल का अंत निश्चित है।
🔹 शनि जयंती कब मनाई जाती है?
हर वर्ष ज्येष्ठ मास की अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाती है।
मान्यता है कि इसी दिन भगवान शनिदेव का जन्म हुआ था।
इस वर्ष यह पर्व विशेष श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है।
🔹 शनिदेव से लोग डरते क्यों हैं?
क्योंकि शनि की दृष्टि व्यक्ति को उसके कर्मों का आईना दिखाती है।
लेकिन जो व्यक्ति ईमानदार, मेहनती, न्यायप्रिय और दूसरों का सम्मान करने वाला होता है, उसके लिए शनिदेव कृपा और उन्नति के मार्ग खोल देते हैं।
यही कारण है कि कहा जाता है —
“शनि कभी बर्बाद नहीं करते,
वो केवल इंसान को उसकी असली औकात और सच्चाई से परिचित कराते हैं।”
🔹 शनि हमें क्या सिखाते हैं?
▪️ मेहनत का महत्व
▪️ अनुशासन में रहना
▪️ दूसरों के अधिकारों का सम्मान
▪️ गरीब, असहाय और श्रमिक वर्ग की सेवा
▪️ अहंकार से दूर रहना
🔹 इस दिन क्या किया जाता है?
🪔 सरसों के तेल का दीपक जलाया जाता है
🪔 पीपल वृक्ष की पूजा की जाती है
🪔 शनि मंत्रों का जाप किया जाता है
🪔 गरीबों और जरूरतमंदों को दान दिया जाता है
🪔 काले तिल, उड़द और तेल का दान शुभ माना जाता है
लेकिन सबसे बड़ा उपाय केवल एक है —
अपने कर्मों को अच्छा रखना।
आज के दिन हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि
हम किसी के साथ अन्याय नहीं करेंगे,
किसी का हक़ नहीं मारेंगे,
और अपने जीवन को सत्य, सेवा और ईमानदारी के मार्ग पर चलाएंगे।
क्योंकि…
जिसके कर्म उजले होते हैं,
उसे शनि का भय नहीं होता!
साहिब, न्याय वहीं झुकता है,
जहाँ इंसान सच्चा होता है!!
🪔 आप सभी को शनि जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ 🪔
मिलिए अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद, मातृ प्रकोष्ठ की दो विभूतियों से अपने अपने प्रदेशो में समाज हित में मन वचन और कर्म से समर्पित एवं संगठन को गौरवान्वित करने वाली दो प्रदेश अध्यक्ष l
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