Bihar Hate Archive
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Bihar Hate Archive
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Documenting anti-Bihari hate, xenophobia, stereotype, abuse etc. for potential legal, civic and academic use. https://t.co/RVZcxUKJWi












बिहार में एक शादी उस वक्त चर्चा में आ गई, जब लड़की के पिता ने 100 बराती बुलाए थे, लेकिन लड़के वाले 200 बरातियों को लेकर पहुंच गए। ज्यादा बारातियों को देखकर लड़की के पिता जो खाना पड़ जाने का डर सताने लगा, तभी किसी दूसरे रिश्तेदार ने एक सलाह दी की खाने में जमालघोटा मिला दिया जाए... फिर क्या था लड़की के पिता ने जमालघोटा मिला खाना बारातियों के सामने परोस दिया, जिससे गांव में अफरा तफरी मच गई, जिसे देखो वो लौटा, बोतल एवं अन्य पानी के बर्तन जो भी हाथ लग रहा था वो उसे उठाए खेतों की तरफ़ भागने लगा... हर बाराती बस यही बोल रहा है अगली बार किसी की बारात में नहीं जाएंगे... आपको क्या लगता है, लड़की के पिता ने सही किया या गलत...??


नमस्कार साथियों, आप सभी को बिहार दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। २२ मार्च १९१२ वह ऐतिहासिक दिवस है जब बिहार, बंगाल से अलग होकर एक स्वतंत्र प्रशासनिक इकाई के रूप में स्थापित हुआ, किंतु बिहार का अस्तित्व इससे कहीं अधिक प्राचीन, समृद्ध और गौरवशाली रहा है। मौर्यकाल की महानता, लिच्छवी गणराज्य की लोकतांत्रिक परंपरा, मिथिला की सांस्कृतिक चेतना, अंग प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत और वैदिक काल की आध्यात्मिक धारा, इन सबने मिलकर बिहार को न केवल भारत, बल्कि समूचे विश्व को दिशा देने वाला केंद्र बनाया। यही वह पुण्यभूमि है जहाँ से प्रथम गणतांत्रिक व्यवस्था का उदय हुआ और जिसने अखंड भारत की परिकल्पना को साकार करने का मार्ग प्रशस्त किया। किन्तु आज यह प्रश्न अत्यंत वेदनापूर्ण है कि इतना समृद्ध इतिहास और अपार संभावनाओं वाला बिहार समय के साथ पिछड़ता क्यों चला गया। स्वतंत्रता के पश्चात जिस राज्य को विकास की ऊँचाइयों को छूना चाहिए था, वह आज पिछड़े राज्यों की श्रेणी में क्यों खड़ा है। क्यों यहाँ के युवाओं को रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए अपने ही राज्य से पलायन करना पड़ता है। क्यों बिहार को “बीमारू राज्य” कहकर उपहास का विषय बनाया जाता है और “Bihar is not for beginners” जैसे वाक्यों के माध्यम से उसकी छवि को विकृत किया जाता है। यह केवल शब्द नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक असफलता और उपेक्षा का दर्पण हैं। सत्य यह है कि बिहार को लंबे समय तक राजनीतिक स्वार्थों की कसौटी पर आँका गया। कभी विभाजन के माध्यम से इसकी शक्ति को कम किया गया, तो कभी विकास के नाम पर अधूरी योजनाओं और खोखले वादों में उलझाकर इसकी प्रगति को रोका गया। यहाँ के उद्योग-धंधों को समाप्त होने दिया गया, बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने की दिशा में अपेक्षित प्रयास नहीं हुए, और परिणामस्वरूप यह राज्य अपनी क्षमता के अनुरूप आगे नहीं बढ़ सका। बिहार को बार-बार केवल एक वोटबैंक के रूप में देखा गया, न कि एक समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य के रूप में विकसित करने की गंभीर इच्छा के साथ। परंतु अब समय आ गया है कि हम इस स्थिति को बदलें। आज का बिहार दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन और संकल्प का भी दिन है। हम बिहार के युवा आज यह दृढ़ निश्चय करते हैं कि अपने गौरवशाली अतीत को पुनः जागृत करेंगे, अपनी पहचान को पुनर्स्थापित करेंगे और अपने राज्य को विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए समर्पित भाव से कार्य करेंगे। हम तन, मन और धन से बिहार के पुनर्निर्माण में योगदान देंगे और इसे पुनः उस स्थान पर स्थापित करेंगे, जिसका वह वास्तविक अधिकारी है। आइए, इस बिहार दिवस पर हम केवल इतिहास को स्मरण न करें, बल्कि भविष्य को गढ़ने का संकल्प लें। एक ऐसा बिहार, जो आत्मनिर्भर हो, सशक्त हो, और विकास की नई ऊँचाइयों को स्पर्श करे। जय बिहार - जय बिहारवाद 🚩🙏🏻










