
Saharsa Capital of Mithila
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Saharsa Capital of Mithila
@Capital_Saharsa
मिथिला के साहित्यिक, दार्शनिक आ सांस्कृतिक इतिहास में सहरसा के स्थान के दर्शाबै बला निजी आइडी।









भारत सरकार सँ आग्रह – मैथिली केँ शास्त्रीय भाषा के मान्यता दियौ। हमर भाषा, हमर अस्मिता, हमर अधिकार!💪🏻✊🏻 #Classical_Language_Maithili #शास्त्रीय_भाषा_मैथिली @BJP4Bihar @NitishKumar @SanjayJhaBihar @MinOfCultureGoI @PMOIndia @narendramodi @CallingMithila





दुइ टा एयरपोर्ट 100किमी पर स्थित छैइहे, सहरसा एयरपोर्ट के नाटक बंद कैल जाय! ओकर बदला सहरसा में "केन्द्रीय तकनिकी विश्वविद्यालय", "केन्द्रीय कला विश्वविद्यालय", "पोस्ट ग्रेजुएशन इन्स्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एण्ड रिसर्च" सनक संस्थानक स्थापना कैल जाय !

उ मुंशा जे DMCH में ढुइक के मारलकै ओय छौरा के तै में जाइत कारण नै छै ओकर कारण छै टका-पैसा , ओय मुंशा के भेलै जे एत्ते खर्चा केलौं आब कमाय के बेर भेल ते इ छौरी उरहैर के बिआह कै लेलक! इ रहत तऽ ने कमै के देत! तै दुआरे मारलकै जाइत दुआरे नै!

लड़की ने अपनी मर्ज़ी से शादी की और उसके पिता ने दामाद को गोली से उड़ा दिया। सोचिए, ये कैसा पिता है? समाज इस हत्यारे को 'इज्जत के रखवाले' का तमगा दे रहा है! मान लिया कि लड़की ने जात-बिरादरी से बाहर शादी की, बाप की मर्ज़ी के खिलाफ गई। लेकिन क्या यही उसकी सज़ा थी? बेटी का सुहाग उजाड़ देना, किसी माँ की कोख सूनी कर देना, क्या यही इज्जत है? जिसे लोग "बेटी का मान रखने वाला पिता" कह रहे हैं, वो असल में 'हत्यारा' है, अपराधी है, समाज का रोग है। अगर बेटी से सच्चा प्रेम होता तो गले लगाता, समझाता। लेकिन नहीं इसने समाज, जात, और झूठी लाज के नाम पर खून कर दिया। क्या ये इज्जत के नाम पर हिंसा को बढ़ावा नहीं देना हुआ? सोचिए! लड़का भी तो किसी का बेटा था। उस पिता ने गोली क्यों नहीं चलाई? शायद वह ज़्यादा समझदार, ज़्यादा इंसान था। प्रेम एक पवित्र चीज़ है, इसका अपमान मानवता का अपमान है। प्रेमियों के खून से इज्जत नहीं मिलती, इंसानियत की हार होती है। ऐसे अपराधियों को हीरो मत बनाइए। जात-पात, समाज, झूठी मर्यादा के नाम पर खून करने वालों को सम्मान नहीं, तिरस्कार मिलना चाहिए। बात कड़वी है, लेकिन ज़रूरी है। ऐसे मुद्दों पर अब चुप नहीं बैठा जा सकता। आपका क्या कहना है? कमेंट में ज़रूर बताइए। #DMCH



