Chetan Meghwal

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@Chetan_Barmer

Ambedkarite,#NetrutvaSangamAlumni, EX.State Vice President Rajasthan Youth Congress,Ex.Jt.Gen Sec Student Union JNVU,FightFor Right,#JaiJagat

जनता के बीच Katılım Haziran 2017
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Chetan Meghwal@Chetan_Barmer·
बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर जी की सोच की सशक्त आवाज @INCIndia की सचिव एवं भरतपुर सांसद @IncSanjanajatav जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
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Chetan Meghwal@Chetan_Barmer·
@RannvijayLochav आदरणीय अंकल जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। प्रकृति से स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना करते हैं।
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Chetan Meghwal@Chetan_Barmer·
बाड़मेर जिले के आड़ेल में संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर जी की प्रतिमा को खंडित करने की घटना बेहद निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है। यह कृत्य केवल एक प्रतिमा पर हमला नहीं, बल्कि देश के करोड़ों संविधान प्रेमियों की भावनाओं और विश्वास पर सीधा आघात है। ऐसी घटनाएं समाज में वैमनस्य फैलाने का प्रयास करती हैं, जिन्हें किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन से मांग है कि इस मामले की त्वरित और निष्पक्ष जांच कर दोषियों की पहचान की जाए तथा उनके विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। @Barmer_Police
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Chetan Meghwal@Chetan_Barmer·
देश में दलित #राजनीति, दलित #नेतृत्व और दलित #मूवमेंट को जिस तरह से व्यवस्थित रूप से कमजोर किया जा रहा है, वह केवल एक वर्ग का सवाल नहीं बल्कि भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद पर सीधा प्रहार है। यह स्थिति इसलिए भी अधिक गंभीर है क्योंकि जिस व्यवस्था को समानता, न्याय और गरिमा के सिद्धांतों पर खड़ा किया गया था, उसी व्यवस्था में आज सबसे वंचित वर्ग की आवाज़ को सीमित करने की कोशिशें साफ़ दिखाई दे रही हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर जी ने संविधान निर्माण के समय जिस खतरे की ओर इशारा किया था, आज वही खतरा हमारे सामने वास्तविकता बनकर खड़ा है। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि अगर सामाजिक और आर्थिक असमानता खत्म नहीं हुई, तो केवल राजनीतिक अधिकार लोकतंत्र को टिकाऊ नहीं बना पाएंगे। आज स्थिति यह है कि अधिकार कागज़ों पर मौजूद हैं, लेकिन प्रभाव और भागीदारी के स्तर पर असमानता बनी हुई है। एक दौर था जब दलित राजनीति परिवर्तन की राजनीति थी वह सत्ता से सवाल करती थी, अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करती थी और समाज में बराबरी की नई चेतना पैदा करती थी। मान्यवर कांशीराम जी ने वंचित समाज को यह विश्वास दिलाया था कि वे केवल वोट नहीं, बल्कि सत्ता के निर्णायक भागीदार बन सकते हैं। लेकिन आज वही राजनीति बिखराव, सीमित प्रभाव और प्रतीकात्मकता के दायरे में सिमटती दिखाई दे रही है। आज दलित नेतृत्व को सीधे टकराव से नहीं, बल्कि एक सुनियोजित तरीके से “सीमित” किया जा रहा है। प्रतिनिधित्व दिया जाता है, लेकिन निर्णय लेने की असली शक्ति से दूर रखा जाता है। चेहरों को आगे लाकर समावेश का संदेश दिया जाता है, लेकिन नीतियों के स्तर पर उनकी आवाज़ को उतनी ही जगह मिलती है जितनी सत्ता संरचना अनुमति देती है। यह प्रक्रिया बाहर से लोकतांत्रिक दिखती है, लेकिन भीतर से नेतृत्व की स्वायत्तता को कमज़ोर करती है। इसके साथ ही, सामाजिक न्याय के मूल मुद्दों को भी धीरे-धीरे राजनीतिक प्राथमिकताओं से हटाया जा रहा है। ज़मीन, शिक्षा, आरक्षण, सम्मान और बराबरी जैसे सवाल, जो कभी केंद्र में हुआ करते थे, आज हाशिए पर धकेले जा रहे हैं। उनकी जगह ऐसे व्यापक विमर्श ले रहे हैं, जिनमें वंचित वर्गों की विशिष्ट समस्याएँ दबकर रह जाती हैं। परिणाम यह होता है कि वास्तविक मुद्दे चर्चा में तो आते हैं, लेकिन समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं हो पाती। जमीनी हकीकत यह है कि भेदभाव और अत्याचार की घटनाएँ समाप्त नहीं हुई हैं। विभिन्न आधिकारिक आँकड़े यह दर्शाते हैं कि अनुसूचित जातियों के खिलाफ अपराध आज भी एक गंभीर चिंता का विषय हैं। इसका सीधा अर्थ है कि सामाजिक न्याय की लड़ाई अभी अधूरी है, लेकिन उसे वह राजनीतिक प्राथमिकता नहीं मिल रही जिसकी उसे आवश्यकता है। यही वह विरोधाभास है, जिसकी आशंका अंबेडकर जी ने जताई थी संवैधानिक अधिकार और सामाजिक वास्तविकता के बीच का अंतर। इन परिस्थितियों में दलित मूवमेंट के भीतर भी आत्ममंथन की आवश्यकता है। बिखराव, एकजुट नेतृत्व की कमी और दीर्घकालिक रणनीति का अभाव इन सभी ने आंदोलन की प्रभावशीलता को कम किया है। डिजिटल दौर में आवाज़ें बढ़ी हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर निरंतर संघर्ष और संगठन निर्माण की प्रक्रिया कमजोर हुई है। आज आवश्यकता केवल विरोध की नहीं, बल्कि पुनर्संगठन की है। दलित नेतृत्व को फिर से वैचारिक स्पष्टता, आत्मनिर्भरता और व्यापक सामाजिक गठजोड़ के साथ खड़ा होना होगा। यह समझना होगा कि सम्मान और अधिकार केवल प्रतीकात्मक भागीदारी से नहीं, बल्कि वास्तविक शक्ति और निर्णायक हिस्सेदारी से आते हैं। यह लड़ाई केवल दलित समाज की नहीं है यह उस भारत की लड़ाई है जो समानता और न्याय के सिद्धांतों पर खड़ा होना चाहता है। अगर इस देश में सबसे वंचित व्यक्ति की आवाज़ कमजोर होगी, तो लोकतंत्र की नींव भी उतनी ही कमजोर होगी। इसलिए यह समय चुप रहने का नहीं, बल्कि संगठित होकर अपने अधिकारों और अस्तित्व की रक्षा के लिए खड़े होने का है। #जय_भीम #जय_संविधान #DalitPolitics_DalitLeadership_Dalit_Movement @INCIndia @kharge @RahulGandhi @BJP4India @AnandAkash_BSP @BhimArmyChief @ambedkariteIND @DalitOnLine @INCSCDept
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Srinivas BV
Srinivas BV@srinivasiyc·
आग लगे बस्ती में लेकिन...
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Rahul Gandhi
Rahul Gandhi@RahulGandhi·
पंचायती राज, महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने को साकार करने की दिशा में एक मजबूत नींव रही है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी ने भारत के गांवों को सशक्त बनाते हुए उन्हें देश की मुख्य धारा से जोड़ा। उन्होंने हर वर्ग को अधिकार दिलाए और पंचायती राज व्यवस्था के माध्यम से जनभागीदारी को सुनिश्चित किया। पंचायती राज महिला सशक्तिकरण का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। 1993 से 73वें संविधान संशोधन के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए कम से कम 33% आरक्षण सुनिश्चित किया गया। आज कई राज्यों में यह बढ़ाकर 50% तक कर दिया गया है। कांग्रेस की इस ऐतिहासिक पहल का परिणाम है कि आज देशभर में लगभग 14 से 15 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि पंचायती राज संस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं - जो दुनिया में महिलाओं की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक भागीदारी में से एक है। पंचायती राज व्यवस्था ने देश की महिलाओं को नेतृत्व करने और राजनीति में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का सुनहरा अवसर दिया है। देश के सभी मुखिया, पंचों और स्थानीय निकायों के सदस्यों को पंचायती राज दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
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Chetan Meghwal
Chetan Meghwal@Chetan_Barmer·
यह सिर्फ़ एक तस्वीर नहीं, यह अपनी जड़ों से वो जुड़ाव है जो हर कदम को मज़बूती देता है, हर संघर्ष को दिशा देता है, और हर मंज़िल को मायने देता है। @Barmer_Harish
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MP Congress
MP Congress@INCMP·
भाजपा देश को कितना ही गुमराह करे, लेकिन याद रखे, मोदी जी का सरकारी बुलडोजर लोकतंत्र के मंदिर में नहीं चल सकता! : राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमति @NayakRagini जी. 📍भोपाल I प्रेसवार्ता
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Harish Chaudhary
Harish Chaudhary@Barmer_Harish·
ऑयल फ़ील्ड के पूरे घटनाक्रम- ऑयल ड्रिलिंग के लिए पॉलिसी परिवर्तन, प्रथम वाणिज्यिक उत्पादन (MPT), रिफायनरी के लिए कैबिनेट बैठक के माध्यम से स्वीकृति सहित तमाम निर्णयों का श्रेय किसी एक व्यक्ति को जाता है तो वह है पूर्व प्रधानमंत्री स्व मनमोहन सिंह जी। ऐसे में माननीय प्रधानमंत्री जी से निवेदन है कि HRRL राजस्थान रिफायनरी का नाम स्व मनमोहन सिंह जी के नाम पर रखा जाए। @PMOIndia @narendramodi
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Chetan Meghwal
Chetan Meghwal@Chetan_Barmer·
पनौती के आने की आहट,उद्घाटन से पहले अग्निकांड #रिफ़ाइनरी
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Arvind Chotia
Arvind Chotia@arvindchotia·
हरीश चौधरी का दर्द छलका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बायतु विधानसभा क्षेत्र में रिफाइनरी का उद्घाटन करने आ रहे हैं लेकिन अभी तक स्थानीय विधायक के नाते हरीश चौधरी के पास उद्घाटन कार्यक्रम का निमंत्रण नहीं आया है। अगर उन्हें बुलाया जाता तो वे थार की परंपरा के अनुसार मोदी जी को खीच, गुड़ और घी जरूर भेंट करते। राज्य सरकार और रिफाइनरी के जिम्मेदार ऐसा गैप क्यों रखते हैं? स्थानीय विधायक होने के नाते यह हरीश चौधरी का हक बनता है कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र में आने पर प्रधानमंत्री का स्वागत करें। इस गैप को तत्काल ठीक किया जाना चाहिए। अभी बेटी बाप के घर ही है। @BhajanlalBjp @RajCMO
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Vivek Shrivastava
Vivek Shrivastava@Viveksbarmeri·
मेरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बायतु विधानसभा में रिफाइनरी उद्घाटन के लिए कल आ रहे है…लेकिन दुर्भाग्य से मैं इन पावन अवसर पर उनका स्वागत नहीं कर पा रहा हूँ…मुझे कोई सूचना नहीं है…अगर बुलाते तो मैं उनको गुड़-घी और खीच ज़रूर भेंट करता - हरीश चौधरी (पूर्व मंत्री और बायतु विधायक) #Rajasthan
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Chetan Meghwal
Chetan Meghwal@Chetan_Barmer·
हमारे संगम साथी भाई @mudr4 को राजीव गांधी पंचायतीराज संगठन जम्मू कश्मीर का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त करने पर @INCIndia का हृदय से आभार एवं भाई को बधाई। हमे पूरा विश्वास है कि आपकी यह नियुक्ति संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगी। #जय_जगत @sarvodayasangam
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Chetan Meghwal
Chetan Meghwal@Chetan_Barmer·
जो दिख रहा है वो सिर्फ मेहनत है, जो नहीं दिख रहा वह मेरा जुनून है।
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Chetan Meghwal
Chetan Meghwal@Chetan_Barmer·
केंद्र की भाजपा सरकार देश में महिला आरक्षण को लेकर जिस प्रकार का भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है, उससे अब देश की जनता भली-भांति परिचित हो चुकी है। सच्चाई यह है कि महिला आरक्षण की आड़ में सरकार अपनी राजनीतिक जमीन बचाने का खेल खेल रही थी, लेकिन अब वही दांव उस पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही संसद से पारित हो चुका है और इसके समर्थन में देश का हर सांसद खड़ा रहा एक भी सांसद ऐसा नहीं था जिसने इसका विरोध किया हो। यानी राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी का सवाल ही नहीं उठता। फिर सवाल यह है कि जब पूरा देश और संसद इसके पक्ष में है, तो महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने में देरी क्यों? सरकार इन्हीं मौजूदा सीटों पर इसे लागू क्यों नहीं कर रही? आखिर उसे किसने रोका है? सबसे बड़ा प्रश्न जनगणना को लेकर भी है। 2021 की जनगणना को 2026 तक टाल देना सिर्फ प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित निर्णय प्रतीत होता है। यदि जनगणना ही नहीं होगी, तो परिसीमन नहीं होगा, और जब परिसीमन नहीं होगा, तो महिला आरक्षण लागू करने का रास्ता भी टलता रहेगा। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सरकार जानबूझकर इस प्रक्रिया को लंबा खींच रही है? देश की महिलाओं को उनका हक देने की बात सिर्फ भाषणों में नहीं, बल्कि जमीन पर लागू करने की जरूरत है। अब जनता यह समझ चुकी है कि वादों और वास्तविकता के बीच कितना अंतर है, और यही अंतर सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करता है। #WomenReservation @INCIndia @RahulGandhi @sarvodayasangam @Barmer_Harish @PMOIndia @BJP4India
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Harish Chaudhary
Harish Chaudhary@Barmer_Harish·
आज भोपाल में मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा नियुक्त सभी जिला प्रभारियों के साथ बैठक कर संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा और आगामी रणनीति पर सामूहिक मंथन किया। बैठक में प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष जीतू पटवारी जी,संगठन के मेरे सहयोगी सह प्रभारी संजय दत्त जी,उषा नायडू जी उपस्थित रहे। @INCIndia @kharge @RahulGandhi @kcvenugopalmp @INCMP
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MP Congress
MP Congress@INCMP·
भाजपा सीटों के परिसीमन के बल पर देश को भ्रमित कर रही है, जबकि कांग्रेस महिला आरक्षण के पक्ष में पहले भी थी, आज भी है और हमेशा रहेगी। : श्री हरीश चौधरी जी, प्रदेश कांग्रेस प्रभारी. ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षगण सम्मेलन 📍रविन्द्र भवन, भोपाल.
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Chetan Meghwal
Chetan Meghwal@Chetan_Barmer·
मुख्यमंत्री जी आपकी पार्टी ने जिस प्रकार से देश की आधी आबादी के नाम पर अपनी राजनीतिक रोटिया सेकने का जो कुत्सित प्रयास किया था उसे “INDIA” ने आईना दिखा दिया है। @BhajanlalBjp
Bhajanlal Sharma@BhajanlalBjp

आज लोकसभा में विपक्ष का जो आचरण दिखा, उसने लोकतंत्र को शर्मसार कर दिया है। कांग्रेस, सपा, TMC और DMK सहित 'घमंडिया' गठबंधन ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को रोककर देश की करोड़ों माताओं-बहनों के हक पर प्रहार किया है। इन परिवारवादी पार्टियों ने सत्ता के लालच में नारी शक्ति का अपमान किया है। याद रहे, यह आक्रोश थमेगा नहीं! अब हर बूथ पर इन्हें 'नारी शक्ति के आक्रोश' का सामना करना होगा। 2029 तो क्या, आने वाले हर चुनाव में देश की महिलाएं इस विश्वासघात का मुंहतोड़ जवाब देंगी।

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