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Dalit Times | दलित टाइम्स
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Dalit Times | दलित टाइम्स
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New Delhi, India Katılım Şubat 2021
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“दिल से BSP, फिर से BSP”
बसपा ने तेज की 2027 चुनाव की तैयारी
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उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ता अब जमीनी स्तर पर सक्रिय दिखाई देने लगे हैं। आगरा में बसपा समर्थकों द्वारा दीवारों पर नारे लिखकर प्रचार अभियान चलाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में बड़े अक्षरों में लिखा नजर आ रहा है
“समाज के दलालों को भगाना है, 2027 में बहन कुमारी मायावती को जीताना है।"
इसके साथ ही “जय भीम जय भारत” और “दिल से BSP, फिर से BSP” जैसे नारे भी दीवारों पर लिखे गए हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह अभियान बहुजन समाज के बीच पार्टी को दोबारा मजबूत करने और संगठन को सक्रिय करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार बसपा अब 2027 चुनावों के लिए बूथ स्तर पर तैयारी शुरू कर चुकी है। आगरा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में ऐसे नारे और दीवार लेखन चर्चा का विषय बने हुए हैं।
बसपा समर्थकों का दावा है कि पार्टी फिर से गांव, कस्बों और शहरों में अपने जनाधार को मजबूत करने पर फोकस कर रही है। वहीं प्रदेश की राजनीति में इसे आने वाले चुनावों की तैयारी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
#BSP
#Mayawati
#BahujanSamajParty
#UPPolitics
#JaiBhim
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“कॉकरोच” टिप्पणी पर घिरे CJI सूर्या कांत, बेरोज़गार युवाओं और एक्टिविस्ट्स को लेकर बयान पर विवाद
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भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्या कांत की एक टिप्पणी को लेकर देशभर में विवाद खड़ा हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उन्होंने कुछ बेरोज़गार युवाओं की तुलना “कॉकरोच” से करते हुए कहा कि ऐसे लोग बाद में मीडिया, सोशल मीडिया, RTI एक्टिविस्ट और अन्य एक्टिविस्ट बनकर “हर किसी को निशाना” बनाने लगते हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार यह टिप्पणी उस समय की गई, जब CJI सूर्या कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की बेंच एक वकील की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) का दर्जा दिए जाने से जुड़ी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता के सोशल मीडिया व्यवहार और पेशेवर आचरण पर नाराज़गी जताई।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्या कांत ने कहा:
“कुछ युवा कॉकरोच की तरह होते हैं, जिन्हें न तो रोजगार मिलता है और न ही किसी क्षेत्र में कोई पहचान मिल पाती है। उनमें से कुछ मीडिया में चले जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया, RTI कार्यकर्ता और दूसरे एक्टिविस्ट बन जाते हैं, और फिर हर किसी को निशाना बनाना शुरू कर देते हैं।”
इसी दौरान अदालत ने “परजीवी” (Parasites) शब्द का भी इस्तेमाल किया और कहा कि समाज में पहले से ऐसे लोग मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं।
यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। कई लोगों ने इसे बेरोज़गार युवाओं, मीडिया और RTI कार्यकर्ताओं के प्रति अपमानजनक बताया, जबकि कुछ लोगों ने कहा कि अदालत की टिप्पणी एक विशेष मामले और संदर्भ में की गई थी।
#CJISuryaKant
#SupremeCourt
#RTIActivists
#SocialMedia
#unemloyment

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SC/ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट की व्याख्या का CPI ने किया विरोध,
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के महासचिव डी. राजा बोले: “निजी जगह पर हुआ जातीय उत्पीड़न भी अपराध है”
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#SCSTAct #communist #supremecourtofindia

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SC/ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के खिलाफ चंद्रशेखर आज़ाद का सवाल: “क्या अब दलितों का अपमान लोकेशन देखकर तय होगा?”
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नगीना से सांसद और आज़ाद समाज पार्टी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट की हालिया व्याख्याओं पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि बार-बार न्यायिक व्याख्याओं के जरिए इस कानून के दायरे को सीमित किया जा रहा है, जिससे दलितों और आदिवासियों को न्याय मिलने में और कठिनाई पैदा हो सकती है।
चंद्रशेखर आज़ाद का बयान उस फैसले के बाद आया है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कथित जातिसूचक गाली किसी निजी स्थान पर दी गई हो और वह “public view” में न हो, तो हर मामले में SC/ST एक्ट की धाराएँ स्वतः लागू नहीं होंगी।
अपने X पोस्ट में आज़ाद ने सवाल उठाया कि क्या अब जातीय अपमान का अपराध “लोकेशन” और “माध्यम” देखकर तय किया जाएगा? उन्होंने कहा कि अगर घर के भीतर, फोन पर या निजी स्थानों में जातिसूचक अपमान होता है, तो उसे अपराध न मानना सामाजिक न्याय की मूल भावना के खिलाफ होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि दलित उत्पीड़न केवल सार्वजनिक जगहों तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी स्थानों, कार्यस्थलों और सामाजिक संबंधों में भी होता है। ऐसे में कानून की ऐसी व्याख्या पीड़ितों को कमजोर कर सकती है।
चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की दिशा में कदम उठाएगी। इससे पहले भी वे SC/ST अधिकारों, आरक्षण और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखते रहे हैं।
#SCSTAct
#ChandraShekharAzad
#DalitRights
#SocialJustice

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भारत में जातिवाद सिर्फ गांवों तक सीमित नहीं है, इसका असर खेल, शिक्षा और आगे बढ़ने के अवसरों तक में दिखाई देता है।
अंकित बैयनपुरिया का बयान उसी सच्चाई को सामने लाता है।
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हरियाणा के पहलवान अंकित बैयनपुरिया ने सुनाई जातिगत भेदभाव की कहानी PM मोदी के साथ मंच साझा कर चुके फिटनेस इन्फ्लुएंसर बोले, अखाड़ों में जाने से पहले पूछी जाती थी CASTE, कई बार जानबूझकर पहुंचाई गई चोट देखिये पूरी खबर 👇 youtube.com/shorts/3X4c7zn… #AnkitBaiyanpuria
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क्या आज भी इस देश में एक घूंट पानी इंसान की जाति देखकर तय किया जाएगा?
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#castediscrimination
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उत्तराखंड में दलित भाइयों पर हमला, “पानी पीने” को लेकर विवाद का आरोप, शादी समारोह के दौरान दलित युवकों के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। शादी में DJ चला रहे युवक ने पानी पी लिया, जिसके बाद जातिसूचक गालियां देते हुए हमला किया गया। पढ़िये पूरी खबर 👇 facebook.com/share/p/1CQ1ih…
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बंद कमरे में जातिसूचक टिप्पणी SC/ST एक्ट के तहत अपराध नहीं?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर देशभर में बहस तेज
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सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST एक्ट को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि कथित जातिसूचक गाली किसी बंद कमरे या निजी घर के भीतर दी गई हो और वह “public view” यानी सार्वजनिक नजर में न हुई हो, तो इसे स्वतः SC/ST एक्ट के तहत अपराध नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने साफ कहा कि SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) लागू होने के लिए घटना का “public view” में होना जरूरी है। यानी ऐसी जगह, जहां आम लोग मौजूद हों या घटना को देख-सुन सकें।
यह मामला दिल्ली के एक पारिवारिक संपत्ति विवाद से जुड़ा था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि घर के अंदर जातिसूचक शब्द कहे गए। निचली अदालत और हाई कोर्ट ने आरोप तय कर दिए थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें रद्द करते हुए कहा कि निजी कमरे में हुई घटना, बिना सार्वजनिक मौजूदगी के, SC/ST एक्ट की आवश्यक शर्त पूरी नहीं करती।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हर निजी जगह स्वतः कानून के दायरे से बाहर नहीं होगी। यदि किसी निजी स्थान पर भी कई लोग मौजूद हों और घटना सार्वजनिक रूप से देखी या सुनी जा सके, तो SC/ST एक्ट लागू हो सकता है।
इस फैसले के बाद सोशल मीडिया से लेकर कानूनी हलकों तक बहस तेज हो गई है। एक पक्ष इसे कानून की “स्पष्ट व्याख्या” बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष आशंका जता रहा है कि इससे जातीय उत्पीड़न के मामलों में शिकायत दर्ज कराना और कठिन हो सकता है।
#SupremeCourt
#SCSTAct
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#SocialJustice
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यूपी की कानून-व्यवस्था पर बहन जी का बड़ा हमला,
सर्वसमाज को सुरक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी - बसपा सुप्रीमो
उत्तर प्रदेश की राजनीति में कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। बसपा सुप्रीमो Mayawati ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि प्रदेश में ब्राह्मण समाज केवल उपेक्षित ही नहीं, बल्कि काफी असुरक्षित भी महसूस कर रहा है। बहन जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब यूपी में हाल ही में मंत्रिमंडल विस्तार हुआ है और 2027 विधानसभा चुनाव की राजनीतिक तैयारियां तेज होती दिखाई दे रही हैं।
मायावती जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी अपने विस्तृत बयान में कहा कि मंत्रिमंडल का विस्तार किसी भी सत्ताधारी दल का आंतरिक मामला हो सकता है, लेकिन जनता को उसका सकारात्मक असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार का असली काम केवल राजनीतिक संतुलन बनाना नहीं, बल्कि गरीबों, मजदूरों, किसानों, युवाओं, महिलाओं और कमजोर तबकों को सुरक्षा, सम्मान और न्याय देना है। अगर जनता को राहत और सुरक्षा महसूस नहीं होती, तो लोग ऐसे विस्तार को केवल राजनीतिक जुगाड़ और सरकारी संसाधनों पर बढ़ता बोझ मानते हैं।
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि किसी भी सरकार और उसके मंत्रियों की पहली संवैधानिक जिम्मेदारी समाज के हर वर्ग की जान-माल और सम्मान की रक्षा करना होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में यूपी में कानून-व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं और कमजोर वर्गों के साथ-साथ अब सर्वसमाज के भीतर भी असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है।
बहन जी ने हाल ही में राजधानी लखनऊ में ब्राह्मण समाज से जुड़े भाजपा के एक युवा नेता पर हुए जानलेवा हमले का जिक्र करते हुए कहा कि इस घटना के बाद पूरे प्रदेश में यह चर्चा फिर तेज हो गई है कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समाज खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा। उन्होंने इसे “अति चिंताजनक” स्थिति बताया और कहा कि समाज के किसी भी वर्ग में डर और असुरक्षा की भावना लोकतंत्र और सुशासन के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
मायावती जी ने अपने शासनकाल का जिक्र करते हुए कहा कि बसपा सरकारों में “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” की नीति के तहत समाज के हर वर्ग को न्याय और सुरक्षा देने का काम किया गया था। उन्होंने दावा किया कि बसपा शासन में कानून-व्यवस्था मजबूत थी और दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक, ब्राह्मण सहित सर्वसमाज को बराबरी का सम्मान और सुरक्षा मिली थी। बहन जी ने यह भी संकेत दिया कि आज प्रदेश में सामाजिक संतुलन और भरोसे का माहौल कमजोर पड़ता जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बसपा एक बार फिर सामाजिक न्याय, कानून-व्यवस्था और सर्वसमाज की सुरक्षा के मुद्दे को मजबूती से उठाकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। खास तौर पर दलित-ब्राह्मण सामाजिक समीकरण को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। 2007 में बसपा को पूर्ण बहुमत दिलाने में इसी सामाजिक गठजोड़ की बड़ी भूमिका मानी जाती है।
बहन जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब यूपी में जातीय और सामाजिक समीकरणों को लेकर सभी दल सक्रिय हैं। ऐसे में मायावती जी द्वारा ब्राह्मण समाज की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाना आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।
#Mayawati #BSP #DalitLivesMatters #UPPolitics #SocialJustice

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लखनऊ के अंबेडकर पार्क में रोज शाम 7:30 बजे दिखाया जा रहा लेजर लाइट शो
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@_TheEqualGround News
लखनऊ के गोमतीनगर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल में लेजर लाइट एंड साउंड शो की शुरुआत कर दी गई है। यह शो रोजाना शाम 7:30 बजे आयोजित किया जा रहा है और इसकी अवधि करीब 30 मिनट बताई जा रही है।
इस हाईटेक शो में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन, संघर्ष, संविधान निर्माण और सामाजिक न्याय की लड़ाई को लेजर प्रोजेक्शन, विजुअल इफेक्ट्स और साउंड तकनीक के जरिए प्रदर्शित किया जा रहा है। शो में Hindu Code Bill और महिला अधिकारों से जुड़े उनके प्रयासों को भी शामिल किया गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट को लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने तैयार कराया है। पार्क में एंट्री के लिए टिकट व्यवस्था लागू है और लेजर शो शुरू होने के बाद यहां शाम के समय लोगों की भीड़ बढ़ने लगी है। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में पार्क का एंट्री टिकट 40 रुपये बताए जाने का भी उल्लेख है।
अंबेडकर पार्क पहले से ही लखनऊ के प्रमुख पर्यटन और सामाजिक स्थलों में गिना जाता है, लेकिन लेजर शो शुरू होने के बाद यह नई पीढ़ी के बीच भी चर्चा का केंद्र बन गया है। सोशल मीडिया पर इसके वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।
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“जाति भूलनी होगी, तभी सुधरेगी राजनीति” मोहन भागवत के बयान पर उठे सवाल
RSS प्रमुख ने जाति और विवाह को लेकर दिया बयान, लेकिन सामाजिक न्याय और जमीन पर जारी भेदभाव को लेकर बहस तेज
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत का जाति व्यवस्था और राजनीति को लेकर दिया गया बयान एक बार फिर चर्चा में है। लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि “जाति भूलनी होगी, तभी राजनीति सुधरेगी।” उन्होंने यह भी कहा कि विवाह को सिर्फ निजी संबंध नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए।
भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि समाज में जाति आधारित सोच कमजोर होगी तो जाति आधारित राजनीति भी बदलने लगेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि RSS में किसी स्वयंसेवक से उसकी जाति नहीं पूछी जाती और सभी को एक समान माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में भी मोहन भागवत कई बार सार्वजनिक मंचों से जातिगत भेदभाव खत्म करने की बात कह चुके हैं।
हालांकि, उनके इस बयान के बाद सामाजिक न्याय और बहुजन मुद्दों पर काम करने वाले लोगों के बीच कई सवाल फिर उठने लगे हैं। आलोचकों का कहना है कि भारत में जाति सिर्फ “मानसिकता” का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और संस्थागत ढांचे से जुड़ा मुद्दा है। उनका तर्क है कि जमीन पर आज भी दलित उत्पीड़न, सामाजिक बहिष्कार, मंदिर प्रवेश विवाद, सीवर में मौतें और अंतरजातीय विवाहों को लेकर हिंसा जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, अनुसूचित जातियों के खिलाफ अत्याचार के हजारों मामले हर साल दर्ज होते हैं। हाल के महीनों में राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश समेत कई राज्यों में दलित दूल्हों को घोड़ी से उतारने, बारात रोकने और सामाजिक बहिष्कार के मामले चर्चा में रहे हैं। ऐसे में “जाति भूलने” वाले बयान को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जाति भारतीय राजनीति की केंद्रीय वास्तविकताओं में से एक रही है। मंडल आयोग से लेकर आरक्षण और प्रतिनिधित्व की बहस तक, पिछड़े, दलित और आदिवासी समाज ने लंबे आंदोलनों के बाद संवैधानिक अधिकार हासिल किए हैं। इसी वजह से कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या सामाजिक बराबरी सिर्फ अपीलों से आएगी, या उसके लिए संस्थागत बदलाव और प्रतिनिधित्व पर भी गंभीर कदम जरूरी हैं।
सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने भागवत के बयान का समर्थन करते हुए इसे सामाजिक समरसता की दिशा में जरूरी बताया, जबकि कई लोगों ने कहा कि जब तक जातिगत भेदभाव की वास्तविक संरचनाओं पर खुलकर बात नहीं होगी, तब तक ऐसे बयान अधूरे माने जाएंगे।
#MohanBhagwat #RSS #CastePolitics #SocialJustice #DalitLivesMatter #Reservation #Bahujan #JaiBhim #CasteSystem #DalitTimes

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जिन्होंने वोट दिया, क्या अब उन्हें न्याय मिलेगा?
बंगाल ने सरकार बदल दी, क्या दलितों की हालत भी बदलेगी?
बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो चुका है। इस बार भारतीय जनता पार्टी 294 में से करीब 185+ सीटों पर बढ़त के साथ स्पष्ट बहुमत की ओर बढ़ती दिख रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस करीब 90 सीटों तक सिमटती नजर आ रही है।
याद रखना होगा कि यही वह बंगाल है, जहां 2016 में 3 सीटों से शुरू होकर बीजेपी 2021 में 77 सीटों तक पहुंची, लेकिन सत्ता से दूर रही। इसके बाद राज्य में व्यापक पोस्ट-पोल हिंसा की घटनाएं सामने आईं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को सैकड़ों शिकायतें मिलीं, जिनमें हत्या, यौन हिंसा, आगजनी और जबरन पलायन जैसे गंभीर आरोप शामिल थे। इन मामलों में बड़ी संख्या उन लोगों की बताई गई जिन्हें बीजेपी समर्थक माना गया, जिनमें दलित और आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोग भी शामिल थे।
इसी दौरान एक बड़ा आरोप यह भी सामने आया कि चुनाव खत्म होने के बाद बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व दिल्ली लौट गया और ज़मीनी स्तर पर कई समर्थक, खासकर दलित परिवार, खुद को असुरक्षित और अकेला महसूस करते रहे।
अब जब सत्ता परिवर्तन लगभग तय है, तो यह सिर्फ राजनीतिक जीत नहीं, बल्कि एक अहम परीक्षा है। जिन लोगों ने अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल किया और उसके बाद हिंसा, डर और विस्थापन का सामना किया, क्या उन्हें अब न्याय मिलेगा। क्या दलित समर्थकों की सुरक्षा, पुनर्वास और सम्मान की बहाली नई सरकार की प्राथमिकता बनेगी।
Dalit Times के नजरिए से यह सिर्फ सरकार बदलने की कहानी नहीं, बल्कि जवाबदेही का सवाल है।
#DalitTimes #WestBengal #Electionresult2026 #DalitLivesMatters #PoliticalViolence #BJP

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शांति, करुणा और ज्ञान का संदेश देने वाला बुद्ध पूर्णिमा का यह दिन केवल आस्था का नहीं, बल्कि जागरूकता और सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक है।
गौतम बुद्ध ने मानवता को तर्क, समानता और अहिंसा का मार्ग दिखाया- एक ऐसा मार्ग जो अन्याय और भेदभाव के विरुद्ध खड़ा होता है।
उनके विचार हमें समाज में प्रेम, भाईचारे और न्याय की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
जय भीम। नमो बुद्धाय। 🙏 @_TheEqualGround
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यूपी के भदोही जिले में दलित युवती के अपहरण का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला सुरियावां थाना क्षेत्र के फत्तूपुर गांव का बताया जा रहा है, जहां युवती की शादी 20 अप्रैल को तय थी।
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instagram.com/p/DXZGOWrkw0t/…
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भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने अमेरिका दौरे के दौरान कैलिफोर्निया में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा का अनावरण किया, कार्यक्रम में लगे जय भीम के नारे।
#jaibhim #BabasahebAmbedkar #bhimarmy #chandarshekharazad #AmbedkarJayanti #america
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IIT बॉम्बे में 'अंबेडकर' की गूंज, छात्रों ने भरी नई ऊर्जा
बाबासाहेब 'के नाम से IIT के कैंपस में दिखा जोश और एकजुटता
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महिला आरक्षण तभी न्यायपूर्ण होगा जब उसमें प्रतिनिधित्व भी न्यायपूर्ण हो। @_TheEqualGround
बसपा सुप्रीमो Mayawati ने 33% महिला आरक्षण का स्वागत करते हुए मांग की कि इसे 50% किया जाए और SC, ST, OBC महिलाओं को उनकी जनसंख्या के अनुपात में हिस्सा मिले।
#Mayawati #WomenReservation #SocialJustice #SCST #OBC #JaiBhim #DalitTimes #TheEqualGround
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“अगर गांधी से बड़ा कोई नेता इस देश में था,
तो वह बाबा साहेब आंबेडकर थे।”
- असदुद्दीन ओवैसी
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डॉली चायवाला ने अंबेडकर जयंती के अवसर पर बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को अपने अंदाज में किया नमन!
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