Deepak Sharma

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@DeepakShUPPSS

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DILEEP PANDEY
DILEEP PANDEY@dileepuppss·
उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे देश के शिक्षकों के दुख को आत्मसात कर चुके @TFI4India के राष्ट्रीय अध्यक्ष @DrDCSHARMAUPPSS जिस काम को अपने हाथ में लेते हैं अंजाम तक पहुंचा कर ही रुकते हैं।
Dr Dinesh Chandra Sharma@DrDCSHARMAUPPSS

अण्डमान निकोबार से दिल्ली चलकर पहुँचे अण्डमान निकोबार शिक्षक संघ के अध्यक्ष श्री प्रेम कुमार साधु एवं महासचिव श्री विकास मंडल से मिलने पर सुप्रीम कोर्ट के टेट के संबंध में आये आदेश के बाद अंडमान निकोबार के शिक्षक साथियों की दुख भरी व्यथा को सुनकर मन बहुत व्यथित हुआ और सोचने पर मजबूर हूँ कि इस प्रकार के आदेश आने के बाद सरकार किस अनहोनी का इंतज़ार कर रही है । दोनों शिक्षक नेताओं ने बताया कि 25 मार्च को अण्डमान निकोबार में टेट पास करने की अनिवार्यता के सम्बन्ध में पत्र निर्गत होने के बाद शिक्षक अवसाद से जूझ रहे हैं किसी भी शिक्षक को विश्वास नहीं हो रहा है कि आरटीई से पूर्व में नियुक्त एवं २०-२५ वर्षों से शिक्षण कर रहे शिक्षकों पर इस आदेश को कैसे थोपा जा सकता है । संघ के महासचिव श्री विकास मंडल जोकि आरएसएस के विभाग बौद्धिक प्रमुख भी हैं उनका कहना कि पोर्ट ब्लेयर में इस आदेश के बाद शिक्षकों में भारी तनाव व्याप्त है उन्होंने बताया कि बहाँ पर एक मात्र सांसद को छोड़कर कोई भी अन्य जनप्रतिनिधि नहीं है ।बहाँ का शासन पूर्णतया नौकरशाह चला रहे है ऐसे बिना किसी जनप्रतिनिधि के अपनी बात नौकर शाह को समझाना मुश्किल है दूसरी ओर उन्होंने बताया कि दिल्ली आकर न्याय की गुहार लगाना भी बहुत मंहगा है पोर्ट ब्लेयर से दिल्ली हवाई जहाज से आने पर एक तरफ़ से दोनों साथियों का टिकट 61000 रुपये का मिला है और यदि हवाई जहाज़ से न आकर दूसरा रास्ता अपनाये ,तो पानी के जहाज़ से कलकत्ता या चेन्नई तक पहुँचने में 3-4 दिन लगते हैं तथा किराया 18 हज़ार उसके बाद ट्रेन से दिल्ली तक का किराया एवं दो दिन का सफ़र ।इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट में बहुत महंगी पैरवी एवं राज्य में चुने हुए विधायक या एमएलसी न होने पर जब इस प्रकार का पत्र आया तो शिक्षक अवसाद में आ गये । उन्होंने बताया कि बहुत कठिन परिस्थिति में अंडमान निकोबार द्वीप समूह में शिक्षा का अलख जगा रहे हैं उन्होंने बताया कि पोर्ट ब्लेयर के पास अन्य द्वीप पर विद्यालय संचालित है बहाँ आने जाने का एक मात्र साधन छोटी नाव है कई बार ऐसा होता है विद्यालय पहुँचने के बाद मौसम ख़राब होता है तो लौटने हेतु नाव नहीं मिल पाती है और दो तीन दिन विद्यालय वाले द्वीप पर ही रहना पड़ता है । उनका कहना है कि नौकरी जाने पर बहाँ कोई फैक्टरी या उद्योग भी नहीं है जहाँ प्राइवेट नौकरी की जा सके । अंडमान निकोबार में शिक्षक साथियों ने 4 अप्रैल को रामलीला मैदान की रैली के फोटो और वीडियो देखे तो उन्हें आशा की किरण दिखाई दी और उन्होंने टीएफआई से संपर्क का मन बनाया । 17 अप्रैल को दोनों शिक्षक नेता अपने क्षेत्र के भाजपा सांसद श्री विष्णु पद रे के दिल्ली आवास पर पहुँचें और उनके साथ मा सांसद श्री जगदंबिका पाल जी से मुलाक़ात की ।मा पाल साहब ने हमें इन साथियों से मुलाकात करवाई । दोनों साथी पूरे दिन हमारे एवं श्री राधे रमण त्रिपाठी जी के साथ रहे और हमने आश्वस्त किया कि आप अकेले नहीं हैं टीएफआई आपके साथ है अब टीएफआई का नारा “कश्मीर से कन्याकुमारी तक “न होकर “कश्मीर से अंडमान निकोबार द्वीप समूह तक “होगा । दोनों साथियों को आश्वस्त किया कि शीघ्र ही अगली बैठक पोर्ट ब्लेयर में होगी ।

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Deepak Sharma
Deepak Sharma@DeepakShUPPSS·
@DrDCSHARMAUPPSS आदरणीय अध्यक्ष जी आप इस देश के शिक्षकों की आखिरी उम्मीद है। डाक्टर दिनेश चन्द्र शर्मा जिंदाबाद टीचर्स फैडरेशन ऑफ इंडिया जिंदाबाद
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Dr Dinesh Chandra Sharma
Dr Dinesh Chandra Sharma@DrDCSHARMAUPPSS·
अण्डमान निकोबार से दिल्ली चलकर पहुँचे अण्डमान निकोबार शिक्षक संघ के अध्यक्ष श्री प्रेम कुमार साधु एवं महासचिव श्री विकास मंडल से मिलने पर सुप्रीम कोर्ट के टेट के संबंध में आये आदेश के बाद अंडमान निकोबार के शिक्षक साथियों की दुख भरी व्यथा को सुनकर मन बहुत व्यथित हुआ और सोचने पर मजबूर हूँ कि इस प्रकार के आदेश आने के बाद सरकार किस अनहोनी का इंतज़ार कर रही है । दोनों शिक्षक नेताओं ने बताया कि 25 मार्च को अण्डमान निकोबार में टेट पास करने की अनिवार्यता के सम्बन्ध में पत्र निर्गत होने के बाद शिक्षक अवसाद से जूझ रहे हैं किसी भी शिक्षक को विश्वास नहीं हो रहा है कि आरटीई से पूर्व में नियुक्त एवं २०-२५ वर्षों से शिक्षण कर रहे शिक्षकों पर इस आदेश को कैसे थोपा जा सकता है । संघ के महासचिव श्री विकास मंडल जोकि आरएसएस के विभाग बौद्धिक प्रमुख भी हैं उनका कहना कि पोर्ट ब्लेयर में इस आदेश के बाद शिक्षकों में भारी तनाव व्याप्त है उन्होंने बताया कि बहाँ पर एक मात्र सांसद को छोड़कर कोई भी अन्य जनप्रतिनिधि नहीं है ।बहाँ का शासन पूर्णतया नौकरशाह चला रहे है ऐसे बिना किसी जनप्रतिनिधि के अपनी बात नौकर शाह को समझाना मुश्किल है दूसरी ओर उन्होंने बताया कि दिल्ली आकर न्याय की गुहार लगाना भी बहुत मंहगा है पोर्ट ब्लेयर से दिल्ली हवाई जहाज से आने पर एक तरफ़ से दोनों साथियों का टिकट 61000 रुपये का मिला है और यदि हवाई जहाज़ से न आकर दूसरा रास्ता अपनाये ,तो पानी के जहाज़ से कलकत्ता या चेन्नई तक पहुँचने में 3-4 दिन लगते हैं तथा किराया 18 हज़ार उसके बाद ट्रेन से दिल्ली तक का किराया एवं दो दिन का सफ़र ।इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट में बहुत महंगी पैरवी एवं राज्य में चुने हुए विधायक या एमएलसी न होने पर जब इस प्रकार का पत्र आया तो शिक्षक अवसाद में आ गये । उन्होंने बताया कि बहुत कठिन परिस्थिति में अंडमान निकोबार द्वीप समूह में शिक्षा का अलख जगा रहे हैं उन्होंने बताया कि पोर्ट ब्लेयर के पास अन्य द्वीप पर विद्यालय संचालित है बहाँ आने जाने का एक मात्र साधन छोटी नाव है कई बार ऐसा होता है विद्यालय पहुँचने के बाद मौसम ख़राब होता है तो लौटने हेतु नाव नहीं मिल पाती है और दो तीन दिन विद्यालय वाले द्वीप पर ही रहना पड़ता है । उनका कहना है कि नौकरी जाने पर बहाँ कोई फैक्टरी या उद्योग भी नहीं है जहाँ प्राइवेट नौकरी की जा सके । अंडमान निकोबार में शिक्षक साथियों ने 4 अप्रैल को रामलीला मैदान की रैली के फोटो और वीडियो देखे तो उन्हें आशा की किरण दिखाई दी और उन्होंने टीएफआई से संपर्क का मन बनाया । 17 अप्रैल को दोनों शिक्षक नेता अपने क्षेत्र के भाजपा सांसद श्री विष्णु पद रे के दिल्ली आवास पर पहुँचें और उनके साथ मा सांसद श्री जगदंबिका पाल जी से मुलाक़ात की ।मा पाल साहब ने हमें इन साथियों से मुलाकात करवाई । दोनों साथी पूरे दिन हमारे एवं श्री राधे रमण त्रिपाठी जी के साथ रहे और हमने आश्वस्त किया कि आप अकेले नहीं हैं टीएफआई आपके साथ है अब टीएफआई का नारा “कश्मीर से कन्याकुमारी तक “न होकर “कश्मीर से अंडमान निकोबार द्वीप समूह तक “होगा । दोनों साथियों को आश्वस्त किया कि शीघ्र ही अगली बैठक पोर्ट ब्लेयर में होगी ।
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Deepak Sharma
Deepak Sharma@DeepakShUPPSS·
आदरणीय जिलाधिकारी महोदय जनपद में भीषण लू चल रही है। छात्र छात्राओं के स्वस्थ को ध्यान में रखते हुए विधालय समय प्रातः 7.00 बजे से दोपहर 12.00 तक करने की कृपा करें। @dm_ghaziabad
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Deepak Sharma
Deepak Sharma@DeepakShUPPSS·
आदरणीय जिलाधिकारी महोदय जनपद गाजियाबाद में भीषण लू चल रही है। छात्र छात्राओं के स्वस्थ को ध्यान में रखते हुए विधालय समय प्रातः 7.00 से दोपहर 12.00 बजे तक करने की कृपा करें।
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Dr Dinesh Chandra Sharma
Dr Dinesh Chandra Sharma@DrDCSHARMAUPPSS·
विद्यालय की साफ़ सफ़ाई के सम्बन्ध में @DmSambhal के स्पष्ट एवं सराहनीय निर्देश ।शिक्षकों के साथ यह कार्य हम सबने विद्यार्थी जीवन में किया है जोकि शिक्षा का ही एक हिस्सा है परंतु वर्तमान में छात्रों द्वारा अपने स्वयं के भोजन किए वर्तन धोने या अपने कक्षा कक्ष में कोई सफाई करने जैसी खबरों पर अनेक शिक्षकों पर कार्रवाई की गई है ।अब इससे राहत मिलेगी ।जिलाधिकारी महोदय को धन्यवाद 🙏
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Ashutosh Tripathi
Ashutosh Tripathi@ashutoshUPPSS·
आदरणीय राष्ट्रीय अध्यक्ष @DrDCSHARMAUPPSS का योगदान शिक्षक हितों और संघर्ष के लिए सदैव याद रखा जाएगा..
Dr Dinesh Chandra Sharma@DrDCSHARMAUPPSS

उत्तर प्रदेश के 1.86 लाख सहित देश में लगभग 20 लाख ऐसे शिक्षक जो आरटीई लागू होने से पूर्व में नियुक्त हुए हैं उन पर टेट उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता समाप्त करने हेतु 4 अप्रैल को रामलीला मैदान दिल्ली में हुई रैली के बाद आज टीएफआई के प्राधिनिधि मण्डल की पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मा सांसद श्री जगदंबिका पाल जी के साथ श्री पंकज चौधरी जी प्रदेश अध्यक्ष भाजपा उ प्र एवं मा वित्त राज्यमंत्री भारत सरकार से विस्तृत वार्ता हुई ।सुप्रीम कोर्ट के आदेश से देश के लाखों शिक्षकों पर पड़ने वाले कुप्रभाव से बचाने हेतु कानून बनाने की पूरी पैरवी की गई ।मा प्रदेश अध्यक्ष जी ने शीघ्र ही शीर्ष नेतृत्व से वार्ता एवं समाधान हेतु आश्वस्त किया ।प्रतिनिधि में टीएफआई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री संजय सिंह एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री राधेरमण त्रिपाठी जी उपस्थित रहे । @jagdambikapalmp @mppchaudhary @narendramodi @AmitShah @TFI4India @UPPSS1921

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Dr Dinesh Chandra Sharma
Dr Dinesh Chandra Sharma@DrDCSHARMAUPPSS·
#परशुराम_जयंती_की_हार्दिक_शुभकामनाएं
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Deepak Sharma
Deepak Sharma@DeepakShUPPSS·
@DrDCSHARMAUPPSS आदरणीय अध्यक्ष जी आप शिक्षकों की ताकत है उनका हौंसला है। लाखों लाख शिक्षकों की आशा का केंद्र बिंदु। डाक्टर दिनेश चन्द्र शर्मा जिंदाबाद टीचर्स फैडरेशन ऑफ इंडिया जिंदाबाद
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Dr Dinesh Chandra Sharma
Dr Dinesh Chandra Sharma@DrDCSHARMAUPPSS·
उत्तर प्रदेश के 1.86 लाख सहित देश में लगभग 20 लाख ऐसे शिक्षक जो आरटीई लागू होने से पूर्व में नियुक्त हुए हैं उन पर टेट उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता समाप्त करने हेतु 4 अप्रैल को रामलीला मैदान दिल्ली में हुई रैली के बाद आज टीएफआई के प्राधिनिधि मण्डल की पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मा सांसद श्री जगदंबिका पाल जी के साथ श्री पंकज चौधरी जी प्रदेश अध्यक्ष भाजपा उ प्र एवं मा वित्त राज्यमंत्री भारत सरकार से विस्तृत वार्ता हुई ।सुप्रीम कोर्ट के आदेश से देश के लाखों शिक्षकों पर पड़ने वाले कुप्रभाव से बचाने हेतु कानून बनाने की पूरी पैरवी की गई ।मा प्रदेश अध्यक्ष जी ने शीघ्र ही शीर्ष नेतृत्व से वार्ता एवं समाधान हेतु आश्वस्त किया ।प्रतिनिधि में टीएफआई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री संजय सिंह एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री राधेरमण त्रिपाठी जी उपस्थित रहे । @jagdambikapalmp @mppchaudhary @narendramodi @AmitShah @TFI4India @UPPSS1921
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Hrishkesh
Hrishkesh@Hrishkesh1uppss·
यह कारवां हर संघर्ष को धार देता जाएगा... जय है जय होगी🌹
Dr Dinesh Chandra Sharma@DrDCSHARMAUPPSS

#NoTetBeforRteAct महाराष्ट्र के दो दो शिक्षक संघ भी आये @TFI4India के साथ श्री श्रीकांत देशपांडे जी पूर्व एमएलसी एवं संस्थापक अध्यक्ष शिक्षक अघाड़ी विदर्भ प्रदेश तथा श्री दत्तात्रेय सावंत पूर्व एमएलसी एवं महासचिव महाराष्ट्र शाला क्रुती समिति महाराष्ट्र से कल दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन में टेट की अनिवार्यता को समाप्त करने के आंदोलन पर विस्तार से चर्चा हुई,दोनों ही नेताओं ने टीएफआई के प्रयास की सराहना की एवं टीएफआई से संबद्ध होने की इच्छा व्यक्त की ।महाराष्ट्र के दोनों संगठन शीघ्र ही टीएफआई के सदस्य होंगे ।

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Dr Dinesh Chandra Sharma
Dr Dinesh Chandra Sharma@DrDCSHARMAUPPSS·
#NoTetBeforRteAct महाराष्ट्र के दो दो शिक्षक संघ भी आये @TFI4India के साथ श्री श्रीकांत देशपांडे जी पूर्व एमएलसी एवं संस्थापक अध्यक्ष शिक्षक अघाड़ी विदर्भ प्रदेश तथा श्री दत्तात्रेय सावंत पूर्व एमएलसी एवं महासचिव महाराष्ट्र शाला क्रुती समिति महाराष्ट्र से कल दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन में टेट की अनिवार्यता को समाप्त करने के आंदोलन पर विस्तार से चर्चा हुई,दोनों ही नेताओं ने टीएफआई के प्रयास की सराहना की एवं टीएफआई से संबद्ध होने की इच्छा व्यक्त की ।महाराष्ट्र के दोनों संगठन शीघ्र ही टीएफआई के सदस्य होंगे ।
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Ashutosh Tripathi
Ashutosh Tripathi@ashutoshUPPSS·
शराब पीकर विद्यालय में घुसकर शिक्षकों के साथ मारपीट करने वाले खुद को सत्तापक्ष का सेक्टर प्रभारी बता रहे..न्याय प्रिय सरकार से न्याय की प्रतीक्षा में.अन्यथा हम संघर्ष करना जानते है #uppolice #yogiadityanath #dmbanda #spbanda #upgoverment
भारत समाचार | Bharat Samachar@bstvlive

बांदा: शराब के नशे में भाजपा नेता की गुंडई ➡स्कूल में अध्यापकों के साथ की मारपीट ➡भाजपा नेता सत्यानंद यादव पर आरोप ➡सरकारी पत्रावली भी फाड़ने का आरोप ➡उच्च प्राथमिक विद्यालय बजरंगपुरवा में मारपीट ➡नगर कोतवाली क्षेत्र का पूरा मामला #Banda #Assault #SchoolIncident @bandapolice

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Dr Dinesh Chandra Sharma
Dr Dinesh Chandra Sharma@DrDCSHARMAUPPSS·
मित्रों अपने गृह जनपद संभल में निरंजन पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 आचार्य महामंडलेश्वर पूज्य डॉ स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज के मुखारविंद से श्री मद राम कथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । @JiKailashanand @DmSambhal @TFI4India @UPPSS1921
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Yogendra PandeyUPPSS
Yogendra PandeyUPPSS@YogendraPa81714·
4 अप्रैल को Delhi में जो हुआ, वह केवल एक प्रदर्शन नहीं था; वह उस वर्ग की मौन वेदना थी, जिसने हमेशा समाज को शब्द दिए, विचार दिए, दिशा दी — पर आज स्वयं अपनी बात सुनाए जाने के लिए खड़ा होना पड़ा। देश के विभिन्न राज्यों से, कश्मीर से कन्याकुमारी तक से आए लाखों शिक्षक, लंबी यात्राएँ तय करके, कई रातों की थकान साथ लेकर राजधानी पहुँचे। उद्देश्य केवल इतना था कि शासन तक यह निवेदन पहुँच सके कि उनकी आजीविका, उनका सम्मान और उनका भविष्य सुरक्षित किया जाए। Teachers Federation of India के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ0 दिनेश चंद्र शर्मा जी के आह्वान पर एकत्रित यह जनसमूह किसी क्षणिक असंतोष का परिणाम नहीं था; यह वर्षों से संचित उस पीड़ा का स्वर था जिसे शिक्षक अपने दायित्वों के बीच चुपचाप सहते आए हैं। किंतु सबसे अधिक पीड़ादायक यह है कि इतनी बड़ी संख्या में उठी यह आवाज़ आज तक सत्ता के गलियारों से किसी स्पष्ट उत्तर की प्रतीक्षा में है। सुनकर भी जैसे अनसुना कर दिया गया हो। और उससे भी अधिक चिंताजनक यह कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कही जाने वाली पत्रकारिता ने भी इस विषय को वह गंभीरता नहीं दी जिसकी यह अपेक्षा रखता था। जब लाखों लोग एक साथ खड़े हों और उनकी चिंता सार्वजनिक विमर्श का प्रमुख विषय न बन सके, तब प्रश्न केवल उपेक्षा का नहीं, व्यवस्था की संवेदनशीलता का भी बन जाता है। लोकतंत्र की आत्मा संवाद में होती है। यह विश्वास लंबे समय तक हमारे भीतर रहा कि संख्या बल निर्णयों को प्रभावित करता है, कि शांतिपूर्ण उपस्थिति सत्ता को सोचने पर विवश करती है, कि दूर-दराज़ से आया जनसमूह केवल भीड़ नहीं बल्कि सामाजिक संदेश होता है। लेकिन जब 15 से 20 लाख लोग अपने घरों से दूर, थके हुए, जागी हुई रातों के साथ राजधानी पहुँचें और फिर भी उनकी व्यथा मुख्य विमर्श का हिस्सा न बन पाए, तो चिंता स्वाभाविक है। शिक्षक जब सड़क पर उतरता है, तब वह केवल अपने लिए नहीं उतरता। वह उस व्यवस्था के लिए खड़ा होता है जिसमें आने वाली पीढ़ियों का भविष्य निर्मित होना है। उसकी माँगें व्यक्तिगत कम और संस्थागत अधिक होती हैं, क्योंकि शिक्षा का आधार यदि असुरक्षित होगा तो राष्ट्र की बौद्धिक संरचना भी अस्थिर होगी। निराशा शायद शिक्षक के स्वभाव में नहीं होती, क्योंकि वही हर कठिन समय में आशा का पाठ पढ़ाता है। पर चिंता अवश्य है — गहरी, गंभीर और विचारणीय। क्योंकि यदि राष्ट्र निर्माण करने वाला वर्ग बार-बार अपनी बात सुनाने के लिए संघर्षरत रहे, तो यह केवल एक वर्ग की समस्या नहीं रह जाती, यह लोकतांत्रिक संवेदनशीलता की परीक्षा बन जाती है। शिक्षक की आवाज़ धीमी हो सकती है, पर उसका अर्थ बहुत दूर तक जाता है। इतिहास साक्षी है — "जब विचार उपेक्षित होते हैं, तब समय स्वयं उन्हें फिर केंद्र में लाता है।" @dpradhanbjp @DrDCSHARMAUPPSS @TFI4India @UPPSS1921
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Alok Soni UPPSS
Alok Soni UPPSS@Sonialok150791·
संघर्ष जिन्दाबाद 💪💪💪
Dr Dinesh Chandra Sharma@DrDCSHARMAUPPSS

#NoTetBeforeRteAct अपनी जीविका एवं अपने स्वाभिमान पर मंडरा रहे संकट को देखते हुए अपनी व्यक्तिगत कठिनाइयों को पीछे छोड़ कर सैकड़ों किमी की यात्रा कर @TFI_India9 की रैली में पहुँचें इन सभी साथियों के मजबूत इरादों 💪को प्रणाम 🙏 @narendramodi @PMOIndia @AmitShah @dpradhanbjp @jagdambikapalmp @UPPSS1921

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Vipin Upadhyay | विपिन उपाध्याय | -وپن اپادھیائے
लेख: वेदना और मौन 4 अप्रैल को #Delhi में जो हुआ, वह केवल एक प्रदर्शन नहीं था; वह उस वर्ग की मौन वेदना थी, जिसने हमेशा समाज को शब्द दिए, विचार दिए, दिशा दी — पर आज स्वयं अपनी बात सुनाए जाने के लिए खड़ा होना पड़ा। देश के विभिन्न राज्यों से, कश्मीर से कन्याकुमारी तक से आए लाखों शिक्षक, लंबी यात्राएँ तय करके, कई रातों की थकान साथ लेकर राजधानी पहुँचे। उद्देश्य केवल इतना था कि शासन तक यह निवेदन पहुँच सके कि उनकी आजीविका, उनका सम्मान और उनका भविष्य सुरक्षित किया जाए। Teachers Federation of India के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दिनेश चंद्र शर्मा जी के आह्वान पर एकत्रित यह जनसमूह किसी क्षणिक असंतोष का परिणाम नहीं था; यह वर्षों से संचित उस पीड़ा का स्वर था जिसे शिक्षक अपने दायित्वों के बीच चुपचाप सहते आए हैं। किंतु सबसे अधिक पीड़ादायक यह है कि इतनी बड़ी संख्या में उठी यह आवाज़ आज तक सत्ता के गलियारों से किसी स्पष्ट उत्तर की प्रतीक्षा में है। सुनकर भी जैसे अनसुना कर दिया गया हो। और उससे भी अधिक चिंताजनक यह कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कही जाने वाली पत्रकारिता ने भी इस विषय को वह गंभीरता नहीं दी जिसकी यह अपेक्षा रखता था। जब लाखों लोग एक साथ खड़े हों और उनकी चिंता सार्वजनिक विमर्श का प्रमुख विषय न बन सके, तब प्रश्न केवल उपेक्षा का नहीं, व्यवस्था की संवेदनशीलता का भी बन जाता है। लोकतंत्र की आत्मा संवाद में होती है। यह विश्वास लंबे समय तक हमारे भीतर रहा कि संख्या बल निर्णयों को प्रभावित करता है, कि शांतिपूर्ण उपस्थिति सत्ता को सोचने पर विवश करती है, कि दूर-दराज़ से आया जनसमूह केवल भीड़ नहीं बल्कि सामाजिक संदेश होता है। लेकिन जब 15 से 20 लाख लोग अपने घरों से दूर, थके हुए, जागी हुई रातों के साथ राजधानी पहुँचें और फिर भी उनकी व्यथा मुख्य विमर्श का हिस्सा न बन पाए, तो चिंता स्वाभाविक है। शिक्षक जब सड़क पर उतरता है, तब वह केवल अपने लिए नहीं उतरता। वह उस व्यवस्था के लिए खड़ा होता है जिसमें आने वाली पीढ़ियों का भविष्य निर्मित होना है। उसकी माँगें व्यक्तिगत कम और संस्थागत अधिक होती हैं, क्योंकि शिक्षा का आधार यदि असुरक्षित होगा तो राष्ट्र की बौद्धिक संरचना भी अस्थिर होगी। निराशा शायद शिक्षक के स्वभाव में नहीं होती, क्योंकि वही हर कठिन समय में आशा का पाठ पढ़ाता है। पर चिंता अवश्य है — गहरी, गंभीर और विचारणीय। क्योंकि यदि राष्ट्र निर्माण करने वाला वर्ग बार-बार अपनी बात सुनाने के लिए संघर्षरत रहे, तो यह केवल एक वर्ग की समस्या नहीं रह जाती, यह लोकतांत्रिक संवेदनशीलता की परीक्षा बन जाती है। शिक्षक की आवाज़ धीमी हो सकती है, पर उसका अर्थ बहुत दूर तक जाता है। इतिहास साक्षी है — "जब विचार उपेक्षित होते हैं, तब समय स्वयं उन्हें फिर केंद्र में लाता है।" विपिन बिहारी उपाध्याय @DrDCSHARMAUPPSS @TFI4India @UPPSS1921
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Kalpana Rajauriya
Kalpana Rajauriya@KalpanaMadam·
अनुभव बनाम परीक्षा की लड़ाई- जीत सिर्फ सत्य की होगी। TFI -Teachers Federation of India की ऐतिहासिक महारैली में शामिल होना मेरे लिए केवल एक उपस्थिति नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी का एहसास था। रामलीला मैदान में 4 अप्रैल 2026 को उमड़ा वह जनसैलाब केवल भीड़ नहीं था, बल्कि शिक्षकों के वर्षों के अनुभव, संघर्ष और सम्मान की सामूहिक आवाज़ थी। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा जी के नेतृत्व में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के आदेश के बाद 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। यह सिर्फ एक नियम का विरोध नहीं, बल्कि “अनुभव बनाम परीक्षा” की उस असंतुलित सोच के खिलाफ खड़ा आंदोलन है, जो वर्षों की सेवा को एक परीक्षा में तौलने का प्रयास करता है। देश के लगभग 20 राज्यों से आए लाखों शिक्षक इस बात के साक्षी बने कि जब शिक्षक एकजुट होता है, तो उसकी आवाज़ अनसुनी नहीं रह सकती। मंच पर सांसद जगदंबिका पाल जी की उपस्थिति और उनका आश्वासन इस संघर्ष को और भी मजबूती देता है। एक राष्ट्रीय सचिव के रूप में, मैंने स्वयं शिक्षकों से संवाद किया और उनकी पीड़ा, उनका संकल्प और उनका विश्वास बहुत करीब से महसूस किया। यह आंदोलन अब केवल मांग नहीं, बल्कि सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है। यह संघर्ष रुकने वाला नहीं है—क्योंकि जब आवाज़ हक की हो, तो वह इतिहास बदल जाता है #NoTetBeforeRteAct @dpradhanbjp @Aamitabh2 @bstvlive @DrDCSHARMAUPPSS @SanjaySnghUPPSS @SSPANDEYUPPSS @RRTRIPATHIUPPSS @Virendr62094845 @VandanaUPPSS @TFI4India
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