
आज फिर एक माफी आई। इन दो कौड़ी वाले अक्ल के अंधे लोगों की कोई औकात है नहीं और ये मेले में मिलने वाला पचास रूपये वाला चश्मा पहनकर सोचते हैं कि ये डॉन है। शर्म है कि फिर भी इनको आती नहीं। अगले दिन फिर वही काम शुरू कर देते हैं और तब तक करते हैं जब तक कोई कान नहीं पकड़ लेता । कान पकड़ते ही फिर से माफी , उसके अगले दिन फिर से वही काम । कुछ लोगों को लगता है कि ये माहौल बनाते हैं, सरकार बनवाते है। 😀😀













