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@Dev9V

लक्ष्य यदि सर्वोपरि है तो आलोचना विवेचना और प्रशंसा कोई मायने नहीं रखती है !!

Barmer rajsthan Katılım Mart 2022
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Dharmendra Singh Rathore
Dharmendra Singh Rathore@DharmendraS_inc·
बाड़मेर के शिव क्षेत्र में मजदूरों के हक और अधिकारों की लड़ाई को लेकर गिरल लिग्नाइट माइंस में पिछले 38 दिनों से धरना जारी है,लेकिन राजस्थान सरकार अब तक पूरी तरह मौन बनी हुई है।पिछले 15 दिनों से शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी स्वयं मजदूरों के समर्थन में धरने पर बैठे रहे। यह प्रदेश सरकार की घोर विफलता है कि मजदूरों और जनप्रतिनिधियों की आवाज़ को लगातार अनदेखा किया गया,जिसके चलते एक निर्वाचित विधायक को पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास करना पड़ा।यदि सरकार अब भी नहीं जागी,तो यह केवल प्रशासनिक असफलता नहीं,बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर आघात माना जाएगा। @RavindraBhati__
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vasu_dev_charan
vasu_dev_charan@Dev9V·
और निंबनियों की ढानी के पास कुछ समय पहले हाईवे जाम किया गया था 33 केवी लाइन के विरोध में क्या वो सही था उस समय राजस्थान की पुलिस कहा थी कुछ तो भाई शर्म कर लो राजनीति अपनी जगह है कम से कम अपनी जनता के लिए आवाज उठाए तो ये भी आप जैसे मानसिक दिवालियापन लिए लोगो को अखर रहा है धन्य है भाई आपको अगर सरकारे बहरी होंगी हिटलर शाही पे आएगी तो आम इंसान क्या करेगा पहले सोचो
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Deependra Pal Singh Sau
Deependra Pal Singh Sau@SauDeependra·
आँख पर गिरा आँख मसली दर्द सा महसूस हुआ सब प्री प्लांड था इस ग़ैर जिम्मेदाराना हरकत पर अगर कोई ग़लत कदम उठाएगा तो जिम्मेदारी कौन लेगा @PoliceRajasthan आख़िर क्या कार्यवाही हुई है
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LP Pant
LP Pant@pantlp·
बाड़मेर में विरोध प्रदर्शन के दौरान शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने अचानक अपने ऊपर पेट्रोल छिड़क लिया। हालाँकि समर्थकों ने तुरंत कपड़े से पेट्रोल को पोंछ कर भाटी को अलग कर लिया। भाटी मजदूरों की वेतन वृद्धि , काम के घंटे और दूसरी मांगों के लिए लगातार आवाज उठा रहे हैं।
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AajTak
AajTak@aajtak·
बाड़मेर में कलेक्ट्रेट कूच के दौरान बड़ा हंगामा, विधायक भाटी ने खुद पर पेट्रोल छिड़का, मचा हड़कंप बाड़मेर के गिरल गांव में चल रहे खनन विवाद को लेकर कलेक्ट्रेट कूच के दौरान बड़ा बवाल हुआ. शिव विधायक रविंद्रसिंह भाटी ने कथित तौर पर खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया, जिससे पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया. ग्रामीण रोजगार और जमीन विवाद को लेकर पिछले कई दिनों से धरना प्रदर्शन चल रहा है. पूरी ख़बर- intdy.in/2xio0e #Barmer #Rajasthan #RavindraSinghBhati #MiningDispute #CollectorateMarch #Protest #ATCard #AajtakSocial
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vasu_dev_charan
vasu_dev_charan@Dev9V·
सोचने को तो ये भी विवस करता है गुरुदेव की सता में बैठी सरकारे आख़िर बहरी क्यो हो गई है कब तक जनता का शोषण होगा जब सरकारे नहीं सुनती है डेमोक्रेसी में बैठा प्रशासन सता के हाथो कठपुतलिया बन चुका है तो ऐसे कार्य करने को इंसान मजबूर हो जाता है ये मात्र आहत है पश्चिम राजस्थान में सरकारों ने मल्टीनेशनल कंपनियों के हाथो बाड़मेर जैसलमेर को बेच दिया है जिससे कंपनिया मनमानी कर रही है अब सवाल ये है की हमारे पत्रकार बंधु इन मजदूर किसानों बेरोजगारों की मुखर आवाज कब बन पाते है जिससे नेताओं मंत्रियों मुख्यमंत्री से तीखे सवाल करके कठघरे में खड़ा करे जिससे सरकारों को अपनी कमजोरियों का अनुमान हो
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Durag Singh Rajpurohit 🇮🇳
यह कैसा विरोध? @RavindraBhati__ ? सत्ता और कंपनियों से परेशान हो जाओगे तो यह करोगे ? खुद पर पेट्रोल छिड़क कर यह सब करना साबित करता है कि संघर्ष अब बूते से बाहर हो गया ! यह अपेक्षा नहीं थी। बाड़मेर कलेक्ट्रेट परिसर में यह घटना सोचने को विवश करती है। @BhajanlalBjp @PoliceRajasthan @Barmer_Police @BarmerDm
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vasu_dev_charan
vasu_dev_charan@Dev9V·
सर जब सता में बैठी बहरी सरकारे एक विधायक का नहीं सुन रही है तो जनता का क्या सुनेगी क्या इसी लिए जनता अपना प्रतिनिधि चुन कर भेजती है की आप सिस्टम में बैठकर एक दूसरे से खुनस निकालो आप पत्रकार होने के नाते किसानों की मजदूरों की मांगों को सरकार के खिलाफ जाके उठाओ हम मान लेंगे की राजस्थान का मीडिया जनता के साथ है भाटी के द्वारा उठाया हुआ कदम गलत हो सकता है परंतु क्या किसी पत्रकार बंधु या सरकार के नुमाइंदों ने कभी इसे प्रमुखता से लिया की पिछले पंद्रह दिन से इस जुलसते रेगिस्तान में मजदूर अपनी मांगों को लेके पावरप्लांट के बाहर धरने पे बैठे है और उनकी एक नहीं सुनी जा रही है क्या ये लचर व्यवस्था का सवाल नहीं है क्या आपने उन सरकार के नुमाइंदों से पूछा की आखिर ओरण के लिए लड़ रहे है कंपनियों की मनमानी के ख़िलाफ़ लड़ रहे है सौलर विंड कंपनियों की मोनोपॉलिसी के ख़िलाफ़ लड़ रहे किसी के पास मुख्यमंत्री या मंत्री से किसी मीडिया बंधु ने सवाल पूछा फिर क्या समझे इसे या तो सरकार के नुमाइंदे हो चुके है पत्रकार या फिर खुलकर बोलने का साहस नहीं बचा अब अगर कोई विधायक ऐसा करे तो पूरे पत्रकार इसको ज्ञान की दुहाई देने लग जाते है ये भी अपने आप में एक सवाल है कभी सोचना आत्म मनन करना यही हठधर्मिता रही तो जनता आने वाले समय में सर एक दिन सरकारों की ताबूत में कील ठोकने का काम करेगी की विपक्ष में बैठने के लायक नहीं रहेंगे ये हाल पश्चिम राजस्थान से शुरू हो चुका है पता लगाना की बीजेपी के रथ को कितनी जगह रुकवाया गया था
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Arvind Chotia
Arvind Chotia@arvindchotia·
वह रे अंध समर्थकों... आज रविंद्र सिंह भाटी ने बाड़मेर में खुद पर पेट्रोल उड़ेल लिया। कानून की भाषा में तो इसे आत्महत्या का प्रयास कहा जाता है लेकिन व्यावहारिक रूप से देखा जाए तो यह एक खतरनाक खेल है। राजनीतिक प्रदर्शनों के दौरान पेट्रोल उड़ेलने का मतलब यह बिल्कुल नहीं होता कि अगला आदमी सच में आत्मदाह करना ही चाहता है। इस बहाने से वह सिर्फ लोगों और सरकार को संदेश देना चाहता है। लेकिन ऐसे मौकों पर कई बार छोटी सी गलती हो जाती है और वह बहुत-बहुत भारी पड़ जाती है। पेट्रोल को फक़त एक चिंगारी ही बहुत होती है। उसके बाद क्या? उसके बाद किसी के हाथ में कुछ नहीं होता। और यह बेहद कड़वा सच है। वीडियो देखकर हमें तो बहुत खराब लगा और लिख दी अपनी बात। अब रविंद्र सिंह भाटी के समर्थकों के जो कमेंट आ रहे हैं, वो गजब के हैं। हम पत्रकारों को बिका हुआ बताया जा रहा है। तो भाई पहले यह बताओ कि खरीदा किसने? और इससे पहले जब रविंद्र के बाकी प्रदर्शनों, चुनावों में रविंद्र की तारीफ़ की तब क्या आपने खरीदा था? रविन्द्र सिंह भाटी को चाहिए कि वे अपने इन महान समर्थकों को काबू में रखें और समझाकर रखें। बात-बात में किसी को यूं बिका हुआ बोलकर वे आपका ही नुकसान कर रहे हैं। आपका करियर अभी बहुत पड़ा है। इन महान आत्माओं के हाथों इसे बर्बाद होने से बचाएं। हम सही को सही कहेंगे और गलत को गलत कहेंगे हमेशा @RavindraBhati__
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vasu_dev_charan
vasu_dev_charan@Dev9V·
तुमने कभी भाई गिरल के लोगो के साथ अन्याय हो रहा है उसपे तो आवाज नहीं उठाई क्या आप लोगो का इतना भी फ़र्ज़ नहीं बनता की सच का साथ दे लेकिन नहीं अगर कोई व्यक्ति व्यथित होकर कुछ करे तो टीआरपी के चमचे फटाक से खड़े हो जाते है धन्य है भाई आपको थोड़ा उस माहौल से बाहर आओ और जनता का भी सोचो
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Ashok Meghwal
Ashok Meghwal@AshokMeghwal_·
TRP हेतु लोगो की भीड़ में पेट्रोल की बोतल खुद पर उड़ेल देना कितना सही है? हा शुद्ध राजनीतिक रूप से ऐसे कदम जनता के दिल पर लगते है। लेकिन अगर भीड़ में किसी ने बीड़ी, सिगरेट पीने हेतु माचिस जला दी होती तब? बाड़मेर में दंगे जैसे हालात पैदा हो जाते। एक MLA को ऐसा नाटक नहीं करना चाहिए था।🙏
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vasu_dev_charan
vasu_dev_charan@Dev9V·
@Viveksbarmeri @Manish_Jat_ अब इन बेरोजगार पत्रकार महोदय को ये कोन समझाये की बोतल कोई दूसरा लाके देगा तो पुलिस उसपे हत्या के प्रयास के लिए उकसाने का मुकदमा नहीं ठोक देगी तभी तो बोलते है की तुम जैसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ ख़ुद को मानने वाले से अब लोग भी नफ़रत करने लगे है प्रोपेगेडा पत्रकार
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Vivek Shrivastava
Vivek Shrivastava@Viveksbarmeri·
विधायक जी ख़ुद बैग में पेट्रोल की बोतल लेकर आए थे…यानी की सब प्री प्लान…कैमरे से बचने के लिए देखें पीछे होकर बोतल निकाल कर…हद हो गई। तारीफ़ बनती है कांस्टेबल दमाराम बेनीवाल का साहसिक कदम छलांग लगाकर विधायक भाटी के हाथ से पेट्रोल की बोतल छीनी। #Rajasthan
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Balkaur Singh Dhillon
Balkaur Singh Dhillon@BalkaurDhillon·
शर्म करो प्रदेश सरकार । @BhajanlalBjp
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vasu_dev_charan
vasu_dev_charan@Dev9V·
वाकई आपकी सुंदर लेखनी से इतिहास के पन्नो से नदारद इस घुम्मकड़ जाति के त्याग ने जिन्होंने अपने महाराजा के लिए क़िले छोड़े भूमि छोड़ी उसका वास्तविकता से परिचय करवाया आज के समय में सरकारो द्वारा भी इनको पर्याप्त सुविधाये उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है सरकारों को भी घुमंतू परिवारों पर ध्यान देना चाहिए @md_barmer @dineshbohrabmr @arvindchotia @KumariDiya
Manohar Dan Charan@md_barmer

इतिहास के कुछ अनछुए पहलू और पीएचडी यात्रा के संस्मरण । आज के दिन , 6 अप्रैल 1955 को चितौड़गढ़ में अलग स्तर का जुनून था । किले के पास गाड़िया लुहार समुदाय के सज्जे- धजे लोगों तथा उनकी बैल-गाड़ियों का जमावड़ा था। चितोड़गढ़ किले में उन्हें प्रवेश करवाने के लिए भारत के प्रधानमंगी जवाहरलाल नेहरू और आठ राज्यों के मुख्यमंत्री यहां आए हुए थे । इतिहास में ऐसे बहुत कम समुदाय होते है , जो कि अपनी प्रतिज्ञा के लिए अपना जीवन खपा देते हैं । चितोड़ पतन के उपरांत गाडोलिया लुहार समुदाय ने यह प्रण लिया था कि वे किले में प्रवेश नहीं करेंगे और महाराणा के साथ घुमतू जीवन अपनाकर जीवन निर्वाह करेंगे । इस लौह प्रतिज्ञा के बाद वे भीषण कठिनाइयों में जिए । रांगेय राघव ने अपने उपन्यास "धरती मेरा घर" और जहूर खां मेहर ने अपने निबंध "धर मजलां धर कोसां" में व्यापक स्तर पर उनके जीवन को लिखा हैं । गाँव - गाँव घूमकर लौह सामग्री बनाकर , जन कल्याण के विशिष्ट कार्य किए । कुछ लोग तो यूरोप तक गए , जो रोमां कहलाए हैं , यूनेस्को ने भी इस पर अध्ययन किया हैं। माणिक्य लाल वर्मा जो एक संवेदनशील वयक्ति थे , उन्हें इस समुदाय की जानकारी हुई तो उन्होंने इन्हें स्थायी निवास और क़िले में पुनः प्रवेश करवाने की ठानी । उन्होंने अथक प्रयासों से गाडोलिया लुहार समुदाय के लोगों और प्रधानमंत्री नेहरू को सहमत करवाकर, आज के दिन 1955 को न केवल स्वाभिमान के साथ किले में प्रवेश करवाया बल्कि स्थानी जीवन जीने की ओर प्रस्थान भी करवाया । वर्तमान में आज भी ये घूमंतू और अर्द्ध- घूमंतू जीवन पद्धति के साथ जीवन यापन कर रहें हैं, किंतु इनके समक्ष आज पहचान , आजीविका तया आवास सहित विभिन्न चुनौतियाँ है। रेनके और इदाते कमीशन ने इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट दी हैं । ये समुदाय संकटो के बावजूद, अपने स्वाभीमान युक्त इतिहास और कठोर परिश्रम से आज भी खुशहाल जीवन जी रहें जो कि एक अपने आप में एक प्रेरणादायक जीवन शैली हैं। #gadoliya_luhar #rajasthan #history @kuldeepdetha4 @pantlp

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𝗔𝗻𝗸𝗶𝘁 𝗔𝘄𝗮𝘀𝘁𝗵𝗶
रावणा राजपुत समाज को जातीय मोड़ देकर रची व्युह रचना:- ये सिर्फ चंद चिन्हित भाजपा नेता की रविंद्र भाटी के प्रति जलन ईर्ष्या व कुंठा शांत करने के लिए की गयी। इस व्युह रचना के साजिशकर्ता मे रावणा राजपुत का एक भी शक्स शामिल नही है। सारे के सारे शिव विधानसभा के राजपुत नेता है जिनको लग रहा है कि कैसे भी करने अगर रविंद्र भाटी को शिव की राजनिति से नही हटाया गया तो उन सभी भविष्य के नेता बने बेठे हूए की आशा पर पानी फिर रहा था। कोई प्रधान की चाह लिए कोई प्रमुख की तो कोई विधायक सासद का? उन सबको यही डर था जब तक रविंद्र भाटी सक्रिय है तब तक इन आशाधारी किसी एक का भी नबर नही लगने वाला है और इस वहम के शिकारी लोगो ने दो सालो से रविंद्र भाटी का हर तरफ से हर एंगल से विरोध किया लेकिन उनकी मंशा कही सफल नही हो पायी। अंतत वो हार मान कर सब बेठ गये कि अब इसका कोई ईलाज नही है। इसमे भाजपा की पुरी लोबी को #खतरा था कि ये जिस गति से आगे बढ रहा है इससे तो ये सीधा केन्द्र की राजनिति मे हस्तक्षेप करेगा तो कैसे भी करके इनको रोकना है? कुछ मझे हूए व शीर्ष राजपुत नेताओ को लग रहा था ये पुरी राजपुत समाज का नेता बन जायेगा।क्योकि इनकी लोकप्रियता इतनी बढ रही थी कि आज से पहले हिंदुस्तान मे इतनी ईज्जत मान सम्मान किसी नेता को नही मिला? ये जेसीबी से स्वागत,मालाओ फुलाओ से स्वागत हर जनहितेषी मुद्दो को आंदोलित रूप देना ये सब भाटी की देन है। आजादी के बाद पहली बार नेताओ को इतना सक्रिय कर दिया है कि अब उनको जन हितेषी मे सक्रिय रहना पड़ता है। वास्तविकता तो है कि भाटी ने राजनिति व नेताओ की परिभाषा व उनकी कार्यशेली को ही बदल दी।जो नेता जितने के बाद जयपुर सरकारी आवासो मे रहते थे उन सबको सड़को पर खडा कर दिया। और ये सब गाथा सबको व्यथित कर रही थी कि इसको रोको। फिर रोकने मे शासनधारी पुरी सरकार का भी सहयोग रहा। फिर दिमाक मे एक गुत्थी सुलझती है और रावणा समाज के कलाकार छोटू के कंधे पर बदूक चलाते है दो बार पहले बंदूक चली नही लेकिन इस बार पहले प्री प्लान योजना बनाई गयी सबसे राय ली गयी कि छोटुसिह को आगे किया गया। यहा भी उनको भय था उनको पता था रंविद्र बहुत सुलझा हूआ नेता है और वो स्वंय कोई गलती या मौका नही देगा कि सामाजिक स्टंड बने लेकिन इस बार भाटी की ग्रह दशा शायद थोडी ठीक नही चल रही थी दिन भर थका परेशान व्यक्ति रात को दस बजे बेठता है तो वो देखता है कि छोटुसिह जानबुझकर उनका विरोध दर विरोध कर रहा है। इस बार भाटी को लगा क्यो ? न सीधा छोटुसिह से बात करके अपना विरोध जताया जाये कि आखिर मैने आपका क्या बुरा किया है ? मैने आपका क्या बिगाडा है? मेरे पीछे क्यो लगा है? तु मेरा भाई है। जब छोटुसिह ने कोई सार्थक जबाब नही दिया तो भाटी तिलमिला गये कि दो बार आपने पहले मुझे बेवजह प्रताडित किया है और मुझे माफी मागनी पडी।अब समझ जाओ बेवजह टिक्का टिप्पणी मत करो। और फोन करते ही उनका मक्शद सफल हो गया। छोटुसिह ने सबको बोल दिया कि फोन आ गया गुस्से मे मुझे फटकार भी लगाई और चाणक्य टीम ने वो हर सलाह मशवीरे रिपोर्ट तैयार की। संवेदन भरा विडियो बनाया और चल पडा बाड़मेर यहा भाटी विरोधी वो सारी शक्सियत इंतजार कर रही थी और इस बार खुश भी थे कि इस बार की योजना सफल हो रही है क्योकि इस बार रावणा राजपुत समाज पुरा इनकी रडार मे इनके झांसे मे फंस चुका था। इसे कहते है तिल का ताड़ बनाना? हां मै दावे से कह सकता हू कि इसमे नब्बे प्रतिशत रा्वणा समाज का दिल आत्मा,मन,चित भाटी के साथ है उनकी आत्मा आज भी अंदर ही अंदर रो रही है कि हम किसका विरोध कर रहे है? लेकिन वैमनष्य भरा माहोल और पाच प्रतिशत माहोल बिगाडने वालो ने सोशल जगत का दुरुपयोग किया जहा पर दोनो तरफ से टिप्पणियो द्वारा सामाजिक सौहार्द बिगाडा गया और यही पर संवेदना अपने अपने समाजो के जागी और दस प्रतिशत लोग दोनो समाजो की टिप्पणिया देखकर भडक उठे। ऐसे संवेदनशील माहोल पहले सनातन मे भी खराब होते आये है कहते है काचर का बीज एक ही खुब होता है यहा तो पुरी एक टीम दो सालो से माहोल बिगाड़ने मे लगी थी। कहते है इतिहास मे आज से पहले जितने भी दंगे हूए है वो सिर्फ एक भावनात्मक चिंगारी से उत्पन्न हूए है। रविंद्र भाटी के साथ भी यही हूआ। खैर कुछ समय के लिए उन सब आशावादी नेताओ की आशाए जगी है जो कही न कही शिव मे प्रधान प्रमुख विधायक के मुह धो रहे थे। लेकिन याद रखना अपना जमीर अपना स्वाभिमान बेचकर इतने गिर जाओगे तो आपको भगवान कभी मौका नही देगा। जिसकी किस्मत मे जो लिखा होगा वही मिलेगा। भाग्य को फोडकर आप सीधे कुछ हासिल कर लोगे तो गलत फहमी है। भाटी कोई सामान्य व्यक्ति नही है वो एक अकल्पनीय प्राकतिक शक्ति है जिसको कोई अदृश्य शक्ति चला रही है। उस शक्ति का सामना करने का किसी आदमी मे ताकत नही है। भगवान तो भगवान होता
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THE JAT ASSOCIATION
THE JAT ASSOCIATION@Jatassociation·
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में मुगलों की कट्टरपंथी हरकतों की वजह से वाल्मीक समाज गांव छोड़ने को मजबूर हैं | पोस्ट देख रहे हिंदुओं से बस यही कहना है कि हो सके तो जानकारी योगी महाराज तक पहुंचा देना | @myogioffice @myogiadityanath
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Yash Kanhaiyalal sahu
Yash Kanhaiyalal sahu@yash742505·
जुनझुनु राजस्थान : पूर्व सैनिक उदयवीर सिंह चाहर जी की बेटी अनमोल चाहर क्या कह रही है आप लोगो से और जवाब दीजिए, की क्या उनके पिताजी जिन्होंने देश को अपनी जिंदगी के 20 साल दिए।उन्हें इंसाफ दिलवाने में देश की जनता उनके परिवार का साथ देगी, उनकी इस न्याय की लड़ाई में।मारने वाले जिहादी का नाम अकरम है जिसे जुनझुनु पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है घटना 29 March की है उस दिन से लेकर अभी तक परिवार जिहादी अकरम की फासी की माँग कर रहा है । जय श्री राम 🚩🙏🏻
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Rajasthan Public Service Commission
आयोग की भर्ती परीक्षाओं के प्रश्न पत्र स्टील बॉक्स में सात लेयर सुरक्षा के साथ रखे जाते हैं। सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों एवं वायरल फोटो के संबंध में सभी जिलों के वरिष्ठ अधिकारियों से जानकारी लेकर कड़ी क़ानूनी कार्यवाही करवाई जा रही है।
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Deepak Sharma
Deepak Sharma@SonOfBharat7·
4 मुल्ले आतंकी UP ATS ने गिरफ्तार किये🚨 लखनऊ रेलवे स्टेशन पर चारों को दबोच लिया सिलेंडर से भरे ट्रक को आग लगाने और लखनऊ रेलवे स्टेशन के पास आगजनी की साज़िश रच रहे थे जिहादी... हिन्दुओं से राम राम करके उन्हीं के बीच रहकर साज़िश को अंजाम दे रहे थे चारों आतंकवादी ✍️
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vasu_dev_charan
vasu_dev_charan@Dev9V·
दूसरों के इशारे पे चलेंगे उनके यही हाल होने है आदमी ऐसे पे आरोप लगाए जिसने विधानसभा चुनाव में इतने नेताओ ने तंज कसे आज भी साजिशे होती है लेकिन जिस संयमशीलता का परिचय आज दिन तक उस इंसान ने दिया और अगर उसने अपना विरोध प्रकट किया तो महाशय को धमकी प्रतीत हुई जूठा नैरेटिव गढ़ समाज को भटकाने का काम किया ऐसे लोगो के एक समय बाद यही हाल होंगे अभी नेताओ का चढ़ाया हुआ है समय आयेगा इसके अक्ल भी आएगी और वास्तविकता के धरातल का भी पता चल जाएगा जब ज़मीन खिसकने लगेगी तब
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Mahaveer Singh
Mahaveer Singh@mahaveersodha09·
@MahendraSi14379 खुद करे तो रामलीला, दूसरा करे तो रासलीला विरोध तो होगा, जिस समुदाय ने मंच दिया उसी को राजनीति के चक्कर में टारगेट किया एक नेता की आड में... अब समाज का 10 साल स्नेह प्राप्त किया तो अब विरोध भी झेलो
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🇮🇳 Mahendra Singh 🇮🇳
🇮🇳 Mahendra Singh 🇮🇳@MahendraSi14379·
इनसे बड़ा ढोंगी कलाकार राजस्थान में कही भी नहीं मिलेगा कुछ महिने पहले यह ही जागरण के मंच पर राजनीति कर रहा था और बिठाने उठाने की औकात से बाहर की बात कर रहा था, जैसे ही कल रात को राजनीति के तहत विरोध हुआ तो चिल्लाने लगा जागरण के मंच को राजनीति का मंच बनने दों गजब का दोगला पन पाल रखा है
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Chandan Sharma
Chandan Sharma@ChandanSharmaG·
मैं मुस्लिम नही बनना चाहती हूं मर जाऊंगी पर मुस्लिम नही बनूंगी मेरे बच्चे जय श्री राम बोलते हैं तो वो मारते हैं हम परेशान हो चुके हैं। पत्रकार : आपको कौन परेशान करता है? हिंदू महिला : मुस्लिम जो पड़ोस में रहते हैं यह घटना दिल्ली के नांगलोई की हैं, जहां BJP की शासन में भी हिंदू परिवार घर छोड़कर जाने को मजबुर हैं, क्या कोई इस परिवार की मदद करेगा? वीडियो में इस हिंदू परिवार के दर्द को देखिए
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Arvind Chotia
Arvind Chotia@arvindchotia·
राजस्थान विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा विभाग खोलने की मांग को लेकर चल रहे धरने में शामिल होकर युवाओं की इस मुहिम को समर्थन दिया। पूजा और लोकेंद्र पिछले पांच दिनों से भूख हड़ताल पर हैं लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने इनसे एक बार भी बात करना उचित नहीं समझा है। राजस्थान के सबसे बड़े विश्वविद्यालय में ही राजस्थानी भाषा का विभाग नहीं होना अपने आप में शर्मनाक तो है ही, हैरान करने वाला भी है। सरकार से हमारी मांग है कि राजस्थान विश्वविद्यालय में तत्काल राजस्थानी भाषा विभाग खोला जाए। @BhajanlalBjp @DrPremBairwa
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HANUMAN KISAN
HANUMAN KISAN@HANUMANKISAN·
झूठ है एक लाख पदों पर परीक्षा तिथि की घोषणा थी जिसमें से 50 हज़ार पदों पर कैलेंडर आज दिनांक तक फ़ैल हो चुका है और पॉइंट 9 पर लिखी शिक्षा विभाग विविध 10 हज़ार पदों पर शिक्षा मंत्री जी ने पलटी मार कर मना कर दिया है यानी एक लाख बोलना भी युवाओं को झूठ बोलना है तो एक लाख से अधिक से तो बहुत बड़ा धोखा है ।। इसके अतिरिक्त 25 हज़ार बजट में अलग से थी उनका कोई अता पता नहीं है अभी ।। भगवान जाने CMO राजस्थान अकाउंट पर ट्वीट कौन कर रहा है रोजाना अलग अलग डाटा और बिल्कुल झूठ पर झूठ बार बार झूठ 🤔🤔🤔🤔🤔 नोट- बाकी पोस्ट के CMNT ही वास्तविक सच बता देगा लेकिन फिर भी सरकार ध्यान नहीं दे रही है ये भी किसी जादू से कम नहीं
CMO Rajasthan@RajCMO

पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में पेपरलीक और भ्रष्टाचार जैसी घटनाओं से युवाओं के सपनों पर कुठाराघात हुआ। @BhajanlalBjp #आपणो_अग्रणी_राजस्थान

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