Manohar Dan Charan
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Manohar Dan Charan
@md_barmer
•Senior Research Fellow (PhD in History)।। • UPSC CSE Interview | •Writer | speaker |

























इतिहास के कुछ अनछुए पहलू और पीएचडी यात्रा के संस्मरण । आज के दिन , 6 अप्रैल 1955 को चितौड़गढ़ में अलग स्तर का जुनून था । किले के पास गाड़िया लुहार समुदाय के सज्जे- धजे लोगों तथा उनकी बैल-गाड़ियों का जमावड़ा था। चितोड़गढ़ किले में उन्हें प्रवेश करवाने के लिए भारत के प्रधानमंगी जवाहरलाल नेहरू और आठ राज्यों के मुख्यमंत्री यहां आए हुए थे । इतिहास में ऐसे बहुत कम समुदाय होते है , जो कि अपनी प्रतिज्ञा के लिए अपना जीवन खपा देते हैं । चितोड़ पतन के उपरांत गाडोलिया लुहार समुदाय ने यह प्रण लिया था कि वे किले में प्रवेश नहीं करेंगे और महाराणा के साथ घुमतू जीवन अपनाकर जीवन निर्वाह करेंगे । इस लौह प्रतिज्ञा के बाद वे भीषण कठिनाइयों में जिए । रांगेय राघव ने अपने उपन्यास "धरती मेरा घर" और जहूर खां मेहर ने अपने निबंध "धर मजलां धर कोसां" में व्यापक स्तर पर उनके जीवन को लिखा हैं । गाँव - गाँव घूमकर लौह सामग्री बनाकर , जन कल्याण के विशिष्ट कार्य किए । कुछ लोग तो यूरोप तक गए , जो रोमां कहलाए हैं , यूनेस्को ने भी इस पर अध्ययन किया हैं। माणिक्य लाल वर्मा जो एक संवेदनशील वयक्ति थे , उन्हें इस समुदाय की जानकारी हुई तो उन्होंने इन्हें स्थायी निवास और क़िले में पुनः प्रवेश करवाने की ठानी । उन्होंने अथक प्रयासों से गाडोलिया लुहार समुदाय के लोगों और प्रधानमंत्री नेहरू को सहमत करवाकर, आज के दिन 1955 को न केवल स्वाभिमान के साथ किले में प्रवेश करवाया बल्कि स्थानी जीवन जीने की ओर प्रस्थान भी करवाया । वर्तमान में आज भी ये घूमंतू और अर्द्ध- घूमंतू जीवन पद्धति के साथ जीवन यापन कर रहें हैं, किंतु इनके समक्ष आज पहचान , आजीविका तया आवास सहित विभिन्न चुनौतियाँ है। रेनके और इदाते कमीशन ने इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट दी हैं । ये समुदाय संकटो के बावजूद, अपने स्वाभीमान युक्त इतिहास और कठोर परिश्रम से आज भी खुशहाल जीवन जी रहें जो कि एक अपने आप में एक प्रेरणादायक जीवन शैली हैं। #gadoliya_luhar #rajasthan #history @kuldeepdetha4 @pantlp



इतिहास के कुछ अनछुए पहलू और पीएचडी यात्रा के संस्मरण । आज के दिन , 6 अप्रैल 1955 को चितौड़गढ़ में अलग स्तर का जुनून था । किले के पास गाड़िया लुहार समुदाय के सज्जे- धजे लोगों तथा उनकी बैल-गाड़ियों का जमावड़ा था। चितोड़गढ़ किले में उन्हें प्रवेश करवाने के लिए भारत के प्रधानमंगी जवाहरलाल नेहरू और आठ राज्यों के मुख्यमंत्री यहां आए हुए थे । इतिहास में ऐसे बहुत कम समुदाय होते है , जो कि अपनी प्रतिज्ञा के लिए अपना जीवन खपा देते हैं । चितोड़ पतन के उपरांत गाडोलिया लुहार समुदाय ने यह प्रण लिया था कि वे किले में प्रवेश नहीं करेंगे और महाराणा के साथ घुमतू जीवन अपनाकर जीवन निर्वाह करेंगे । इस लौह प्रतिज्ञा के बाद वे भीषण कठिनाइयों में जिए । रांगेय राघव ने अपने उपन्यास "धरती मेरा घर" और जहूर खां मेहर ने अपने निबंध "धर मजलां धर कोसां" में व्यापक स्तर पर उनके जीवन को लिखा हैं । गाँव - गाँव घूमकर लौह सामग्री बनाकर , जन कल्याण के विशिष्ट कार्य किए । कुछ लोग तो यूरोप तक गए , जो रोमां कहलाए हैं , यूनेस्को ने भी इस पर अध्ययन किया हैं। माणिक्य लाल वर्मा जो एक संवेदनशील वयक्ति थे , उन्हें इस समुदाय की जानकारी हुई तो उन्होंने इन्हें स्थायी निवास और क़िले में पुनः प्रवेश करवाने की ठानी । उन्होंने अथक प्रयासों से गाडोलिया लुहार समुदाय के लोगों और प्रधानमंत्री नेहरू को सहमत करवाकर, आज के दिन 1955 को न केवल स्वाभिमान के साथ किले में प्रवेश करवाया बल्कि स्थानी जीवन जीने की ओर प्रस्थान भी करवाया । वर्तमान में आज भी ये घूमंतू और अर्द्ध- घूमंतू जीवन पद्धति के साथ जीवन यापन कर रहें हैं, किंतु इनके समक्ष आज पहचान , आजीविका तया आवास सहित विभिन्न चुनौतियाँ है। रेनके और इदाते कमीशन ने इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट दी हैं । ये समुदाय संकटो के बावजूद, अपने स्वाभीमान युक्त इतिहास और कठोर परिश्रम से आज भी खुशहाल जीवन जी रहें जो कि एक अपने आप में एक प्रेरणादायक जीवन शैली हैं। #gadoliya_luhar #rajasthan #history @kuldeepdetha4 @pantlp



फलोदी, पोकरण ,जैसलमेर ...इस क्षेत्र में 80 के दशक तक शिक्षा का एवं शिक्षा के क्षेत्र में भी गणित विज्ञान विषय की पढ़ाई के अवसर -प्रेरणा बहुत कम थी, उस दौर में बहुत कम लोग इन क्षेत्रों में शिक्षा का अवसर प्राप्त कर पाए, मेरे आदरणीय स्वर्गीय पिताजी श्री घासीराम जी पालीवाल ने उस दौर में इन विषयों की पढ़ाई का महत्व समझा एवं बहुत दूर खुर्जा उत्तर प्रदेश में शिक्षा हासिल की एवं हमको भी प्रेरित किया। उन्हीं की स्मृति में इस विषय के विद्यार्थी हेतु यह पुरस्कार की घोषणा है












India Marked a Record-Breaking Year in Clean Energy in 2️⃣0️⃣2️⃣5️⃣ India’s clean energy transition gathered unprecedented momentum in 2025. Non-fossil fuel capacity surged to 266.78 GW, marking a 22.6% rise over 2024. Solar power led the charge, jumping to 135.81 GW with a remarkable 38.8% growth, while wind energy climbed to 54.51 GW, registering a 13.2% increase. This landmark progress reflects decisive policy direction, long-term vision and sustained implementation under the leadership of Hon'ble PM Shri @narendramodi ji, strengthening India’s path towards energy security, climate responsibility and a self-reliant green economy. #RenewableEnergy #SolarEnergy #WindEnergy #CleanEnergy
