Manohar Dan Charan

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Manohar Dan Charan

@md_barmer

•Senior Research Fellow (PhD in History)।। • UPSC CSE Interview | •Writer | speaker |

New Delhi Katılım Ekim 2020
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Manohar Dan Charan
Manohar Dan Charan@md_barmer·
राष्ट्रीय सेमिनार , कोटा (राजस्थान ) में दिए गए वक्तव्य का अंश... #kota #phd #speech
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Narendra Modi
Narendra Modi@narendramodi·
A joyous moment for every Indian! Chola Copper Plates dating back to the 11th Century will be repatriated to India from the Netherlands. Took part in the ceremony for the same in the presence of Prime Minister Rob Jetten. The Chola Copper Plates are a set of 21 large plates and 3 small plates and largely contain texts in Tamil, one of the most beautiful languages of the world. They relate to the great Rajendra Chola I formalising an oral commitment made by his father, King Rajaraja I. They also showcase the greatness of the Cholas. We in India are immensely proud of the Cholas, their culture and their maritime prowess. I thank the Government of the Netherlands and Leiden University in particular, where the Copper Plates were kept since the mid-19th century. @MinPres
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Manohar Dan Charan@md_barmer·
घुमंतू समुदायों के लिए आशा की किरण हैं - #दीपक_गाडोलिया । घुमंतू समुदायों पर अपनी शोध यात्रा के दौरान आज गाडोलिया लुहार समुदाय के पहले और एकमात्र RAS अधिकारी दीपक गाडोलिया से मिलना हुआ । दीपक जी का चयन घुमंतू समुदायों की पब्लिक सर्विस और मुख्यधारा में लौटने की आकांक्षा की अभिव्यक्ति हैं । दीपक के पिताजी श्री प्रेमकुमार गाडोलिया का जन्म एक बेलगाड़ी में हुआ था , जो गाडोलिया लुहार समुदाय के लुहारी कार्य को व्यक्त करता हैं । दीपक जी के पिताजी ने उन्हें सदैव पढ़ाई में लगाए रखा , कॉलेज के बाद राजस्थान प्रशासनिक सेवा की तैयारी शुरू की और अपने प्रथम प्रयास में ही RAS बन गए और अभी ट्रेनिंग ले रहें हैं । घुमंतू समुदायों के बच्चों को अभी स्कूल के गेट कम नसीब होते हैं , उच्च शिक्षा तक अत्यंत कम ही पहुंच पाते हैं । इस संदर्भ में दीपक जी का चयन , घुमंतू समुदायों के युवाओं के लिए धुंधली ही सही पर आशा की किरण हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी ने हाल में उनसे , उनकी संघर्ष पूर्ण गाथा को सुना था । घुमंतू समुदायों का भारत और राजस्थान के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान रहा हैं । व्यापार , आवश्यक टूल्स मेकिंग, मनोरंजन , लेखन , नैतिकता के प्रसार में सार्थक योगदान रहा हैं । औपनिवेशिक नीतियों से हमारे सामाजिक ढांचे टूट गए और आजीविका का संकट पैदा हो गया था सरकारों के द्वारा आरंभिक विकास प्लान में इन्हें शामिल नहीं किया था । केंद्र सरकार ने इदाते आयोग बनाकर इनकी सुध ली और विकास के प्लान बन रहे हैं । अभी इस क्षेत्र में मिलो सफर की यात्रा करनी शेष है । #udaipur #rajasthan #phd
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Manohar Dan Charan@md_barmer·
"राजस्थान के सैन्य इतिहास " पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में "रिसर्च पेपर " प्रस्तुत करने और अपनी बात को रखने का सुअवसर प्राप्त हुआ ✨। राजस्थान में सैन्य इतिहास का एक गौरवशाली इतिहास रहा हैं किंतु इसके बावजूद इतिहास लेखन पर अत्यंत कम कार्य हुआ हैं । मैंने "सैन्य आर्म्स बनाने वाले समुदायों की ऐतिहासिकता, विशेषकर गाडोलिया लुहार और सिकलीगर समुदाय के संदर्भ में " के ऊपर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया था । राजस्थान युद्धों में इन समुदायों का अमूल्य योगदान रहा हैं , जिसे व्यापक फलक पर देखने की आवश्यकता हैं📖 । 📍MLSU ; उदयपुर और M.M.C.F ; उदयपुर के तत्वाधान में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में उदयपुर के संजीदे सांसद @RawatML7 जी , अनेक कुलगुरु , दर्जनों प्रोफ़ेसर और सैकड़ों शोधार्थी उपस्थित रहें । #udaipur #rajasthan #history #Phd #militryhistory
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Manohar Dan Charan
Manohar Dan Charan@md_barmer·
I am a research scholar in the field of History, currently engaged in "historical study of the Gadoliya Luhar community". There exists a significant lack of written documentation on nomadic communities, which poses a challenge for scholarly research. Consequently, I am relying on alternative sources such as interviews, field surveys, personal observations, and secondary materials including books and related literature. If you have any written information, field-based insights, anecdotes, or other relevant inputs, I would greatly appreciate you sharing them @beyondcolours ji 👏। Such contributions would significantly enrich the quality and depth of this research work .
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Anuradha
Anuradha@beyondcolours·
@md_barmer You are welcome to whatever information and observations I have. Please feel free to chat on X.
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Manohar Dan Charan
Manohar Dan Charan@md_barmer·
इतिहास के कुछ अनछुए पहलू और पीएचडी यात्रा के संस्मरण । आज के दिन , 6 अप्रैल 1955 को चितौड़गढ़ में अलग स्तर का जुनून था । किले के पास गाड़िया लुहार समुदाय के सज्जे- धजे लोगों तथा उनकी बैल-गाड़ियों का जमावड़ा था। चितोड़गढ़ किले में उन्हें प्रवेश करवाने के लिए भारत के प्रधानमंगी जवाहरलाल नेहरू और आठ राज्यों के मुख्यमंत्री यहां आए हुए थे । इतिहास में ऐसे बहुत कम समुदाय होते है , जो कि अपनी प्रतिज्ञा के लिए अपना जीवन खपा देते हैं । चितोड़ पतन के उपरांत गाडोलिया लुहार समुदाय ने यह प्रण लिया था कि वे किले में प्रवेश नहीं करेंगे और महाराणा के साथ घुमतू जीवन अपनाकर जीवन निर्वाह करेंगे । इस लौह प्रतिज्ञा के बाद वे भीषण कठिनाइयों में जिए । रांगेय राघव ने अपने उपन्यास "धरती मेरा घर" और जहूर खां मेहर ने अपने निबंध "धर मजलां धर कोसां" में व्यापक स्तर पर उनके जीवन को लिखा हैं । गाँव - गाँव घूमकर लौह सामग्री बनाकर , जन कल्याण के विशिष्ट कार्य किए । कुछ लोग तो यूरोप तक गए , जो रोमां कहलाए हैं , यूनेस्को ने भी इस पर अध्ययन किया हैं। माणिक्य लाल वर्मा जो एक संवेदनशील वयक्ति थे , उन्हें इस समुदाय की जानकारी हुई तो उन्होंने इन्हें स्थायी निवास और क़िले में पुनः प्रवेश करवाने की ठानी । उन्होंने अथक प्रयासों से गाडोलिया लुहार समुदाय के लोगों और प्रधानमंत्री नेहरू को सहमत करवाकर, आज के दिन 1955 को न केवल स्वाभिमान के साथ किले में प्रवेश करवाया बल्कि स्थानी जीवन जीने की ओर प्रस्थान भी करवाया । वर्तमान में आज भी ये घूमंतू और अर्द्ध- घूमंतू जीवन पद्धति के साथ जीवन यापन कर रहें हैं, किंतु इनके समक्ष आज पहचान , आजीविका तया आवास सहित विभिन्न चुनौतियाँ है। रेनके और इदाते कमीशन ने इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट दी हैं । ये समुदाय संकटो के बावजूद, अपने स्वाभीमान युक्त इतिहास और कठोर परिश्रम से आज भी खुशहाल जीवन जी रहें जो कि एक अपने आप में एक प्रेरणादायक जीवन शैली हैं। #gadoliya_luhar #rajasthan #history @kuldeepdetha4 @pantlp
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Manohar Dan Charan
Manohar Dan Charan@md_barmer·
Thank you for sharing your experiences, @beyondcolours ma’am 🙏. You have worked in this field for a long time, and your insights will serve as valuable input for my research. May I know how I can contact you ? The Gadoliya lohar community is currently facing a severe crisis related to land and livelihoods. Your observations are absolutely accurate. I, too, have closely observed the situation across Rajasthan—including areas such as Triveni Chauraha, Gurjar Ki Thadi, and Jhotwara in Jaipur, as well as Udaipur, Ajmer, jodhpur, Bhilwara and Beawar—and I can attest that the condition is indeed deplorable.
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Anuradha
Anuradha@beyondcolours·
@md_barmer Fact of matter is also that for about half a century, I’ve watched & at times interacted with community close by. Haven’t seen a significant transformation in their living standards. Still in tents, makeshift arrangements, struggling to make living. In a state of abject neglect.
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Manohar Dan Charan
Manohar Dan Charan@md_barmer·
@dan_jiwan धन्यवाद जीवन सा ; ज़रूर गुणवत्ता युक्त का शोध और लेखन करेंगे 👏🙏।
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Jiwan Dan Charan
Jiwan Dan Charan@dan_jiwan·
गाड़िया लुहार ऐतिहासिक समुदाय की बेहद संघर्ष भरी प्रण-यात्रा से इस सहृद साक्षात्कार की सफलता की अशेष शुभकामनाएं मनसा👍🙏
Manohar Dan Charan@md_barmer

इतिहास के कुछ अनछुए पहलू और पीएचडी यात्रा के संस्मरण । आज के दिन , 6 अप्रैल 1955 को चितौड़गढ़ में अलग स्तर का जुनून था । किले के पास गाड़िया लुहार समुदाय के सज्जे- धजे लोगों तथा उनकी बैल-गाड़ियों का जमावड़ा था। चितोड़गढ़ किले में उन्हें प्रवेश करवाने के लिए भारत के प्रधानमंगी जवाहरलाल नेहरू और आठ राज्यों के मुख्यमंत्री यहां आए हुए थे । इतिहास में ऐसे बहुत कम समुदाय होते है , जो कि अपनी प्रतिज्ञा के लिए अपना जीवन खपा देते हैं । चितोड़ पतन के उपरांत गाडोलिया लुहार समुदाय ने यह प्रण लिया था कि वे किले में प्रवेश नहीं करेंगे और महाराणा के साथ घुमतू जीवन अपनाकर जीवन निर्वाह करेंगे । इस लौह प्रतिज्ञा के बाद वे भीषण कठिनाइयों में जिए । रांगेय राघव ने अपने उपन्यास "धरती मेरा घर" और जहूर खां मेहर ने अपने निबंध "धर मजलां धर कोसां" में व्यापक स्तर पर उनके जीवन को लिखा हैं । गाँव - गाँव घूमकर लौह सामग्री बनाकर , जन कल्याण के विशिष्ट कार्य किए । कुछ लोग तो यूरोप तक गए , जो रोमां कहलाए हैं , यूनेस्को ने भी इस पर अध्ययन किया हैं। माणिक्य लाल वर्मा जो एक संवेदनशील वयक्ति थे , उन्हें इस समुदाय की जानकारी हुई तो उन्होंने इन्हें स्थायी निवास और क़िले में पुनः प्रवेश करवाने की ठानी । उन्होंने अथक प्रयासों से गाडोलिया लुहार समुदाय के लोगों और प्रधानमंत्री नेहरू को सहमत करवाकर, आज के दिन 1955 को न केवल स्वाभिमान के साथ किले में प्रवेश करवाया बल्कि स्थानी जीवन जीने की ओर प्रस्थान भी करवाया । वर्तमान में आज भी ये घूमंतू और अर्द्ध- घूमंतू जीवन पद्धति के साथ जीवन यापन कर रहें हैं, किंतु इनके समक्ष आज पहचान , आजीविका तया आवास सहित विभिन्न चुनौतियाँ है। रेनके और इदाते कमीशन ने इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट दी हैं । ये समुदाय संकटो के बावजूद, अपने स्वाभीमान युक्त इतिहास और कठोर परिश्रम से आज भी खुशहाल जीवन जी रहें जो कि एक अपने आप में एक प्रेरणादायक जीवन शैली हैं। #gadoliya_luhar #rajasthan #history @kuldeepdetha4 @pantlp

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Manohar Dan Charan
Manohar Dan Charan@md_barmer·
@loharpawan610 प्रणवीर समाज का इतिहास सार्थक रूप से भारत के समक्ष आना चाहिए । 👏🙏
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Pawan Lohar
Pawan Lohar@loharpawan610·
@md_barmer धन्यवाद हुक्म 🙏🙏
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Manohar Dan Charan
Manohar Dan Charan@md_barmer·
@Dev9V निःसंदेह , घुमंतू समुदायों , भारतीय समाज की असीम सेवा की हैं । भारतीय सांस्कृतिक एकता के महत्वपूर्ण योगदानकर्ता रहें हैं । समय के साथ सामाजिक अलगाव आया जो , विकृति का परिचायक हैं । शोध कार्य से कुछ जानकारियां ज़रूर सामने लाई जाएगी ।
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vasu_dev_charan
vasu_dev_charan@Dev9V·
वाकई आपकी सुंदर लेखनी से इतिहास के पन्नो से नदारद इस घुम्मकड़ जाति के त्याग ने जिन्होंने अपने महाराजा के लिए क़िले छोड़े भूमि छोड़ी उसका वास्तविकता से परिचय करवाया आज के समय में सरकारो द्वारा भी इनको पर्याप्त सुविधाये उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है सरकारों को भी घुमंतू परिवारों पर ध्यान देना चाहिए @md_barmer @dineshbohrabmr @arvindchotia @KumariDiya
Manohar Dan Charan@md_barmer

इतिहास के कुछ अनछुए पहलू और पीएचडी यात्रा के संस्मरण । आज के दिन , 6 अप्रैल 1955 को चितौड़गढ़ में अलग स्तर का जुनून था । किले के पास गाड़िया लुहार समुदाय के सज्जे- धजे लोगों तथा उनकी बैल-गाड़ियों का जमावड़ा था। चितोड़गढ़ किले में उन्हें प्रवेश करवाने के लिए भारत के प्रधानमंगी जवाहरलाल नेहरू और आठ राज्यों के मुख्यमंत्री यहां आए हुए थे । इतिहास में ऐसे बहुत कम समुदाय होते है , जो कि अपनी प्रतिज्ञा के लिए अपना जीवन खपा देते हैं । चितोड़ पतन के उपरांत गाडोलिया लुहार समुदाय ने यह प्रण लिया था कि वे किले में प्रवेश नहीं करेंगे और महाराणा के साथ घुमतू जीवन अपनाकर जीवन निर्वाह करेंगे । इस लौह प्रतिज्ञा के बाद वे भीषण कठिनाइयों में जिए । रांगेय राघव ने अपने उपन्यास "धरती मेरा घर" और जहूर खां मेहर ने अपने निबंध "धर मजलां धर कोसां" में व्यापक स्तर पर उनके जीवन को लिखा हैं । गाँव - गाँव घूमकर लौह सामग्री बनाकर , जन कल्याण के विशिष्ट कार्य किए । कुछ लोग तो यूरोप तक गए , जो रोमां कहलाए हैं , यूनेस्को ने भी इस पर अध्ययन किया हैं। माणिक्य लाल वर्मा जो एक संवेदनशील वयक्ति थे , उन्हें इस समुदाय की जानकारी हुई तो उन्होंने इन्हें स्थायी निवास और क़िले में पुनः प्रवेश करवाने की ठानी । उन्होंने अथक प्रयासों से गाडोलिया लुहार समुदाय के लोगों और प्रधानमंत्री नेहरू को सहमत करवाकर, आज के दिन 1955 को न केवल स्वाभिमान के साथ किले में प्रवेश करवाया बल्कि स्थानी जीवन जीने की ओर प्रस्थान भी करवाया । वर्तमान में आज भी ये घूमंतू और अर्द्ध- घूमंतू जीवन पद्धति के साथ जीवन यापन कर रहें हैं, किंतु इनके समक्ष आज पहचान , आजीविका तया आवास सहित विभिन्न चुनौतियाँ है। रेनके और इदाते कमीशन ने इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट दी हैं । ये समुदाय संकटो के बावजूद, अपने स्वाभीमान युक्त इतिहास और कठोर परिश्रम से आज भी खुशहाल जीवन जी रहें जो कि एक अपने आप में एक प्रेरणादायक जीवन शैली हैं। #gadoliya_luhar #rajasthan #history @kuldeepdetha4 @pantlp

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Manohar Dan Charan
Manohar Dan Charan@md_barmer·
@Manojraj04 धन्यवाद @Manojraj04 जी । घुमंतू समुदायों पर शोध कार्य नहीं के बराबर हुआ हैं , भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में इन समुदायों का विशेष योगदान रहा हैं । ऐकडेमिक जगत में नए विषय के रूप में हम सभी मिलकर इस पर शोध कार्य करके , कुछ सेवा जरूर करेंगे ।
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Manoj Rajpurohit
Manoj Rajpurohit@Manojraj04·
@md_barmer आपने बहुत ही शानदार शोध का विषय लिया है और आशा करते है कि आपकी इस थीसिस से शिक्षा जगत के लोग लाभान्वित होंगे। 🙏
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Anil Paliwal IPS
Anil Paliwal IPS@AnilPaliwalips·
✨📢 फलोदी जिला – मेधावी विद्यार्थियों हेतु विशेष सूचना 📢✨ 🎓 कक्षा 12वीं (विज्ञान वर्ग – गणित सवर्ग) 📘 RBSE परीक्षा वर्ष 2026 का परिणाम आज घोषित 📊 अपने Physics, Chemistry एवं Mathematics (PCM) के अंक जोड़कर औसत निकालें— औसत = (Physics + Chemistry + Mathematics) ÷ 3 🌟 उपरोक्त समग्र औसत के आधार पर जिले के Top 3 विद्यार्थियों को मिलेगा सम्मान 🌟 🏆 स्व. श्री घासीराम जी पालीवाल की स्मृति में विशेष पुरस्कार: 🥇 प्रथम: ₹51,000/- 🥈 द्वितीय: ₹31,000/- 🥉 तृतीय: ₹21,000/- 📨 अपनी प्रविष्टि भेजें: 📌 मार्कशीट की स्पष्ट फोटो 📌 नाम, विद्यालय एवं मोबाइल नंबर सहित 📲 WhatsApp: 9829298905 🌸 उज्ज्वल भविष्य की ओर एक कदम 🌸 --- ✨ NOTICE (ENGLISH) ✨ 🎓 Class 12 Science (Mathematics Group) 📘 RBSE Exam Year 2026 – Result Declared Today 📊 Calculate your PCM Average: (Physics + Chemistry + Mathematics) / 3 🌟 Top 3 students of district will be awarded 🌟 🏆 Awards: 🥇 ₹51,000 | 🥈 ₹31,000 | 🥉 ₹21,000 📨 Send: ✔ Marksheet photo ✔ Name, School & Mobile number 📲 WhatsApp: 9829298905 #Phalodi #RBSE #Topper #Merit #Education
Anil Paliwal IPS@AnilPaliwalips

फलोदी, पोकरण ,जैसलमेर ...इस क्षेत्र में 80 के दशक तक शिक्षा का एवं शिक्षा के क्षेत्र में भी गणित विज्ञान विषय की पढ़ाई के अवसर -प्रेरणा बहुत कम थी, उस दौर में बहुत कम लोग इन क्षेत्रों में शिक्षा का अवसर प्राप्त कर पाए, मेरे आदरणीय स्वर्गीय पिताजी श्री घासीराम जी पालीवाल ने उस दौर में इन विषयों की पढ़ाई का महत्व समझा एवं बहुत दूर खुर्जा उत्तर प्रदेश में शिक्षा हासिल की एवं हमको भी प्रेरित किया। उन्हीं की स्मृति में इस विषय के विद्यार्थी हेतु यह पुरस्कार की घोषणा है

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Lokendra Singh Kilanaut
Lokendra Singh Kilanaut@crosschat_wala·
गुजराती बनाम बंगाली की राष्ट्रीय बहस के बीच अब एक बहस राजस्थानी की भी जोड़ दी जानी चाहिए। TMC की नेता महुआ मोइत्रा को भी यह बात मालूम चले कि बंगाल के राष्ट्रवाद की असली जड़ें राजस्थान में हैं। बंगाल ने देश को राष्ट्रवाद दिया लेकिन बंगाल को राजस्थान ने क्या - क्या दिया इस बहस पर हर बार परदा क्यों गेर दिया जाता है ? मैं यहां राजस्थान सुप्रीमेसी या किसी भी तरह के श्रेष्ठताबोध को छोड़कर सिर्फ इतिहास के इस खूबसूरत पहलू पर सिलसिलेवार बात करना चाहता हूँ जो अभी बहस से अछूता है। हां, बंगाल में राष्ट्रवाद की कोंपले फूटी थी लेकिन क्या बिना राजस्थान के बंगाल में इस महान विचार का कोई वजूद था ? अव्वल तो देश को इस महान विचार के जन्म की धरती होने के कारण बंगाल का कृतज्ञ होना चाहिए लेकिन बंगाल ऐसी ही कृतज्ञता राजस्थान के लिए व्यक्त कर दे तो यह कितनी खूबसूरत बात हो सकती है। बंगाल में राष्ट्रवाद के विचार के पीछे के लोग कौन थे ? वहां के लेखक, कवि, साहित्यकार, गीतकार और शिक्षक लेकिन उन्होंने वह राष्ट्रवादी साहित्य किस धरती से लिया ? राजस्थान के इतिहास के पितामह कर्नल जेम्स टॉड ने दो महान ग्रन्थ लिखे "Annals and Antiquities of Rajast'han, Or, the Central and Western Rajpoot States of India" जिसके दो भाग क्रमशः 1829 और 1832 में प्रकाशित हुए। कर्नल टॉड की इन किताबों का जब बंगाली में अनुवाद हुआ तो बंगाली समाज का राजस्थान के महान इतिहास से सामना हुआ। यह ठीक वही समय था जब बंगाली समाज राष्ट्रवाद जैसे महान विचार के फूट जाने के लिए तैयार हो रहा था। बुद्धिजीवी बंगाली समाज ने राजपुताने के इतिहास को इस हद से अंगीकार किया कि पूरा बंगाली बुद्धिजीवी समाज राजपुताने के इतिहास को लेकर कृतज्ञता के भाव से भर गया और देखते ही देखते बंगाल के तमाम साहित्यकारों ने राजपुताने के इतिहास को विषयवस्तु बनाकर लिखना शुरू किया। बंकिम चंद्र चटर्जी को बंगाल के राष्ट्रवाद का जनक माना जाता है। अगर मैं कहूं कि बंकिम चंद्र ने कर्नल टॉड का लिखा हुआ राजपुताने का इतिहास पढ़ा था तो यह एकदम सच है। इसी इतिहास को पढ़कर उन्होंने एक उपन्यास लिखा जिसका नाम "राजसिंह" था। मेवाड़ के महाराणा राजसिंह पर बंकिम चंद्र का यह उपन्यास बंगाली समाज में बहुत अधिक लोकप्रिय हुआ था। बंकिम चंद्र का एक दूसरा उपन्यास "दुर्गेशनंदनी " पूरी तरह से राजस्थानी विषयवस्तु पर आधारित है। इस उपन्यास का नायक जगत सिंह एक राजपूत सेनापति है। इसी तरह बंगाल में राष्ट्रवाद के दूसरे जनक थे अरविंद घोष। श्री घोष ने उस वक्त चित्तौड़ की यात्रा की थी और वे कुछ दिनों तक चित्तौड़गढ़ में ठहरे थे। अपने संस्मरणों में श्री घोष ने चित्तौड़गढ़ से उनके भावनात्मक जुड़ाव को रेखांकित किया है। वे चित्तौड़गढ़ राष्ट्रवादी भावना को महसूस करने के लिए आए थे और उसके बाद उन्होंने लगातार राजपूताना प्राइड पर लिखा। गुरुदेव रविन्द्र नाथ टैगोर को मानो राजस्थान के इतिहास पर फिदा हो बैठे थे। राजस्थान की यात्रा करने के बाद उनके साहित्य की विषयवस्तु भी राजस्थानी हो गई थी। रविन्द्र नाथ टैगोर ने भी उसी दौर में "कथा ओ कहानी" नाम से एक ऐतिहासिक कविता/कहानी संग्रह लिखा जिसमें राजपूत राजाओं की नैतिक कहानियां लिखी गईं। इन्हीं रविन्द्र नाथ टैगोर के भतीजे अवनींद्र नाथ टैगोर ने एक किताब "राज कहानी" नाम से लिखी जिसमें मीरा से लेकर चित्तौड़ के तमाम वीर और वीरांगनाओं का उल्लेख किया। कहने का तात्पर्य यह हुआ कि बंगाल में राष्ट्रवाद के उभार के दौर में ऐसा कोई कवि/साहित्यकार नहीं था जिसकी विषयवस्तु राजस्थान नहीं था। यह बात दिगर है कि राजस्थान के क्रांतिकारी गोपाल सिंह खरवा को तब अनेक जलसों में क्रान्तिकारी भाषण देने के लिए बंगाल बुलाया जाता था। अब सवाल है कि बंगाल ने यह वॉरियर स्पिरिट राजपुताने में क्यों ढूंढा ? क्योंकि मध्यकाल के इतिहास में बंगाल के पास वॉरियर स्पिरिट नहीं था। बीते निकट भविष्य में बंगाल की धरती पर पलासी की जंग लड़ी गई थी और इस लड़ाई के मैदान से भी बंगाल को कोई वॉरियर नहीं मिल पाया लिहाजा खानवा, हल्दीघाटी और चित्तौड़ किले के नायकों को बंगाल ने अपना नायक स्वीकार कर लिया। गुरुदेव रविन्द्र नाथ टैगोर की राजपुताने की धरती के लिए इज्जत इस दर्जे की थी कि जब उन्हें ब्रिटिश क्राउन की खिदमत में "जन गण मन अधिनायक" लिखा तो उसमें राजपुताने को नहीं लिख पाए। क्योंकि रविन्द्र नाथ टैगोर राजपुताने की धरती का भाग्य विधाता ब्रिटिश क्राउन को नहीं मानते थे। यह उनका राजपुताने के लिए मन से सम्मान था। उनका लिखा यही गीत आजाद भारत का राष्ट्रगान बन गया और अब तक हमारे राष्ट्रगान में राजस्थान अछूता है। जै हिंद जै राजस्थान ~ लोकेन्द्रसिंह किलाणौत
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Dinesh Bohra
Dinesh Bohra@dineshbohrabmr·
UPI की सफलता की एक सुंदर कहानी यह तस्वीर पश्चिमी राजस्थान के एक विवाह समारोह की है। इसमें दो महिलाएँ मांगणियार समुदाय से हैं, जिनका पारंपरिक कार्य शादियों में गायन और वादन करना होता है। इनके बिना किसी भी शादी की रौनक अधूरी मानी जाती है। जब यह समुदाय विवाह समारोहों में प्रस्तुति देने आता है, तो खुशी के अवसर पर परिवारजन ‘घोल’ या ‘अवारणा’ के रूप में इन्हें दस, बीस या पचास रुपये भेंट करते हैं। लेकिन आज के इस बदलते दौर में, उसी परंपरा के बीच जब ढोल पर लगा एक QR कोड स्कैनर दिखाई देता है, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि डिजिटल पेमेंट अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गाँवों और दूर-दराज की ढाणियों तक पहुँचकर लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। यह तस्वीर वास्तव में UPI की सफलता की जीवंत कहानी बयान करती है। आज भारत का वैश्विक डिजिटल लेन-देन में लगभग 50% हिस्सा है, जो इस परिवर्तन की व्यापकता और प्रभाव को दर्शाता है। @UPI_NPCI @RBI @JM_Scindia @narendramodi @PMOIndia
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Barmer wala
Barmer wala@rajendrapokrna·
थार की धरती का गौरव बाड़मेर–जैसलमेर–बालोतरा से निकले I.R.S अधिकारी पूरन प्रकाश ने राष्ट्रीय राजधानी में रचा इतिहास। वित्त मंत्रालय के “प्रारंभ 2026” कार्यक्रम में उनके प्रेरक शब्दों से हुआ आगाज़। शोधपरक ज्ञान, प्रभावी संप्रेषण और सरल जीवनशैली के दम पर उन्होंने कम समय में अलग पहचान बनाई। पूर्व विधायक सिवाना,गोपाराम मेघवाल के पुत्र पूरन प्रकाश आज युवाओं के लिए मिसाल बन चुके हैं।
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President of India
President of India@rashtrapatibhvn·
President Droupadi Murmu graced the opening of the Amrit Udyan Winter Annuals Edition 2026. Amrit Udyan will be open for public viewing from February 3 to March 31, 2026 between 10 a.m. and 6 p.m. (last entry at 5.00 p.m.). The Udyan will remain closed on Mondays, which are maintenance days and on March 4 on account of Holi. The entry to the Garden is free of cost. Booking can be made only through online mode at visit.rashtrapatibhavan.gov.in. Details: presidentofindia.nic.in/press_releases…
President of India tweet mediaPresident of India tweet mediaPresident of India tweet mediaPresident of India tweet media
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Manoj Rajpurohit
Manoj Rajpurohit@Manojraj04·
दादीसा रामू कंवर धर्मपत्नी श्री भोपाल सिंह जी राजपुरोहित, सरपंच ग्राम पंचायत थोब(ओसियां) द्वारा गांव में शानदार लाइब्रेरी का निर्माण करवाया है मुझे लगता है हर ग्राम पंचायत में अध्ययन के लिए ऐसी लाइब्रेरी जरूरी है।@arvindchotia @ashokshera94 @atulkotharissun @md_barmer @BmrAshok
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PIB India
PIB India@PIB_India·
▶️ India marks record-breaking year in clean energy in 2025: Union Minister Pralhad Joshi (@JoshiPralhad) ▶️ India registers 22.6% rise in RE capacity to 266.78 GW in 2025, with an addition of 49.12 GW ▶️ Solar Capacity reaches 135.81 GW; Wind at 54.51 GW ▶️ Other renewable energy segments also contributed to the overall growth in 2025. Bioenergy installed capacity reached 11.61 GW, including 0.55 GW from waste-to-energy off-grid projects, reflecting steady progress in clean fuel generation and waste management Read here: pib.gov.in/PressReleasePa… @mnreindia
Pralhad Joshi@JoshiPralhad

India Marked a Record-Breaking Year in Clean Energy in 2️⃣0️⃣2️⃣5️⃣ India’s clean energy transition gathered unprecedented momentum in 2025. Non-fossil fuel capacity surged to 266.78 GW, marking a 22.6% rise over 2024. Solar power led the charge, jumping to 135.81 GW with a remarkable 38.8% growth, while wind energy climbed to 54.51 GW, registering a 13.2% increase. This landmark progress reflects decisive policy direction, long-term vision and sustained implementation under the leadership of Hon'ble PM Shri @narendramodi ji, strengthening India’s path towards energy security, climate responsibility and a self-reliant green economy. #RenewableEnergy #SolarEnergy #WindEnergy #CleanEnergy

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