Midnight Meander
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Midnight Meander
@Drunk_Prof
just watching life unfold. some thoughts i keep, some i share..










#शिव_विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने जिला कलक्टर, बाड़मेर को पत्र लिखकर पंचायत समिति रामसर के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बिश्नोइयों का तला (बलवंतसिंहपुरा, खारा राठौड़ान) में शिक्षकों की गंभीर कमी का मुद्दा उठाया है। @RavindraBhati__


राजस्थान में मराठी भाषा के अध्ययन केंद्र खोलने का निर्णय स्वागतयोग्य है। भारत की प्रत्येक भाषा हमारी साझा सांस्कृतिक विरासत है और हम सभी भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन एवं सम्मान के पक्षधर हैं। किन्तु आज एक महत्वपूर्ण प्रश्न पूरे राजस्थान की जनता पूछ रही है—क्या अपनी ही मातृभाषा राजस्थानी को उसका उचित सम्मान दिए बिना अन्य भाषाओं के संवर्धन की बात पूर्ण मानी जा सकती है? जिस धरती ने डिंगल, पिंगल, वीर-रस, लोकगीतों और समृद्ध साहित्य की अमूल्य परंपरा विश्व को दी, उसी राजस्थान की अपनी राजस्थानी भाषा आज भी संवैधानिक मान्यता और सम्मान की प्रतीक्षा में है। हम किसी भाषा के विरोध में नहीं, बल्कि अपनी मातृभाषा के अधिकार के समर्थन में खड़े हैं। सभी भारतीय भाषाएँ सम्मान की अधिकारी हैं, लेकिन राजस्थानी भाषा को उसका न्यायसंगत स्थान और संवैधानिक पहचान मिलना भी उतना ही आवश्यक है। राजस्थान की जनता अब आश्वासन नहीं, निर्णय चाहती है। राजस्थानी भाषा को उसका सम्मान और संवैधानिक अधिकार अवश्य मिलना चाहिए। #RajsthaniBhasha @BhajanlalBjp


















राजस्थान के विश्वविद्यालयों में मराठी भाषा पढ़ाने का निर्णय कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े करता है। जब वर्षों से राजस्थान की जनता राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कर उसे संवैधानिक मान्यता दिलाने की मांग कर रही है, तब प्राथमिकता राजस्थानी भाषा के अध्ययन, शोध और संवर्धन सहित संवैधानिक दर्जे की होनी चाहिए थी। राजस्थान का गौरवशाली इतिहास, समृद्ध लोक साहित्य, लोक संस्कृति और असंख्य ऐतिहासिक ग्रंथ राजस्थानी भाषा में सुरक्षित हैं। यदि विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा के अध्ययन एवं शोध केंद्र स्थापित किए जाएँ, तो यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक उसके प्रभावी हस्तांतरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। यह स्पष्ट करना भी आवश्यक है कि हमारा किसी भी भाषा के प्रति न तो विरोध है और न ही कोई पूर्वाग्रह। मराठी सहित भारत की सभी भाषाएँ समान रूप से सम्मान की पात्र हैं। किंतु राजस्थान में अपनी मातृभाषा की उपेक्षा कर किसी अन्य भाषा को प्राथमिकता देना उचित प्रतीत नहीं होता। राजस्थान के जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं को इस गंभीर विषय पर प्रदेश की भावनाओं के अनुरूप आवाज़ उठानी चाहिए, ताकि राजस्थानी भाषा को उसका उचित सम्मान और संस्थागत स्थान मिल सके। @RajCMO @RajGovOfficial










