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Kaushlendra Pratap Singh
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Kaushlendra Pratap Singh
@EditorKpsingh
पत्रकार . Author @YouthKiAwaaz | Editor of @prajatantra_tv| Ex- @DainikBhaskar
Delhi , new delhi Katılım Ekim 2013
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लोकतंत्र सिर्फ शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि संवाद, सहमति और संवैधानिक मर्यादाओं की जीवंत प्रक्रिया है.
इस प्रक्रिया के केंद्र में होती है संसद, और संसद की गरिमा के संरक्षक होते हैं स्पीकर और प्रीसाइडिंग ऑफिसर्स.
इन्हीं लोकतांत्रिक मूल्यों को साझा करने और संसदीय परंपराओं को मजबूत करने का मंच है Conference of Speakers and Presiding Officers of the Commonwealth #CSPOC
#RajyaSabha के उपसभापति @harivansh1956 के साथ विशेष बातचीत देखिए.
#CSPOC2026 #Parliament @LokSabhaSectt @CPA_Secretariat @PranajaliSingh
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जब सुब्रत रॉय सहारा के बेटे की शादी में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन अपने पूरे परिवार के साथ बारात में नाच रहे थे, देश के प्रधानमंत्री घुटने ख़राब होने के बावजूद मंच पर चढ़ कर वरवधू को आशीर्वाद दे रहे थे। देश का कोई ऐसा व्यक्ति नहीं बचा था जिसकी गिनती देश के बड़े लोगों में होती हो और वो उस शादी में लखनऊ न पहुँचा हो, पच्चीसों मुख्यमंत्री पूरी केंद्र सरकार और यूपी सरकार वहाँ थी, लोकसभा, राज्यसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के मेम्बर शायद ही कभी एकसाथ कहीं और जुटे हों।
कभी साइकिल पर घूम घूम कर नमकीन बिस्कुट बेचने वाले सहारा उस वक़्त, आज के अंबानी अड़ानी और टाटा से ज़्यादा शक्तिशाली दिखने लगे थे।
लेकिन अपने शक्ति और साम्राज्य विस्तार के एक कदम में सहारा ऐसे फँसे की अंत तक एकदम बेसहारा और लाचार हो गए और उसी लाचारी की स्थिति में कल वो इस दुनिया से विदा भी हो गए।
उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा रहा होगा कि रोशनलाल नाम का एक आदमी जो इंदौर का रहने वाला था वो उनकी जगमगाती हुई दुनिया को बेनूर और कम रोशन कर डालेगा।
क़िस्सा 2009 से शुरू हुआ, सहारा ने अपनी रियल स्टेट कंपनियों के नाम से बॉण्ड जारी किए, 3 करोड़ लोगों ने इन बाँड्स को सब्सक्राइब किया और क़रीब 24000 करोड़ रुपये इस समय सहारा ने इन बाँड्स से जुटाये। इन बाँड्स को जारी करने में सहारा ने सेबी द्वारा स्थापित नियम क़ानूनों की जम कर धज्जियाँ उड़ाईं।
फिर एक रोशनलाल नाम के व्यक्ति ने, सहारा की शिकायत नेशनल हाउसिंग बैंक कारपोरेशन को कर दी, नेशनल हाउसिंग बैंक ने सहारा को उस चिट्ठी के आधार पर नोटिस भेजा, तो सहारा ने बैंक को ये कहकर दुत्कार दिया, कि ये तुमसे रिलेटेड मामला नहीं है, अगर किसी को पूछने का हक़ बनता भी है तो वो सेबी है, तुम इसमें अपनी नाक मत घुसेड़ो। बैंक के अधिकारियों को ये बात बुरी लग गई, उन्होंने रोशनलाल की चिट्ठी और उस पर सहारा के जवाब को अपनी टिप्पणी और जाँच करने के आग्रह के साथ सेबी को भेज दिया।
फिर शुरू हुई सेबी की जाँच, हालाँकि सत्ता के शिखर के तमाम लोगों को अपने जेब में लेकर चलने का मुग़ालता पाले सुब्रत रॉय सहारा ने सेबी की जाँच को भी हल्के में लिया। सेबी ने जब उनसे इन बाँड्स के बारे में पूछताछ की तो सहारा ने 31669 कार्टन से भरे 127 ट्रक भरकर डॉक्यूमेंट्स सेबी के दफ़्तर भेज दिया, कि लो पढ़ लो और कर की जाँच। 127 ट्रकों को सेबी के सामने खड़ा करके सहारा ने ख़ुद को देश की सुर्ख़ियों में ला दिया, मुंबई में सेबी के दफ़्तर के सामने लगे ट्रैफिक जाम ने पूरी मीडिया का ध्यान इस मामले पर आकर्षित कर दिया। उस समय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी थे, प्रणव मुखर्जी ने जाँच पूरी ईमानदारी से हो इस बात को सुनिश्चित करवाया, सेबी ने सहारा से ग़लत तरीक़े से जुटाये निवेशकों के पैसे को 15% ब्याज के साथ लौटने के लिए कहा, सहारा वो पैसा नहीं लौटा पाए। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा और सहारा जेल पहुँच गए, उसके बाद दिन ब दिन सहारा बेसहारा होते चले गये, और फिर जो हुआ हम सबने देखा ही है।
इसीलिए आप मेहनत क़िस्मत और तिकड़म के सहारे भले शिखर पर पहुँच जायें लेकिन दो बातें हमेशा याद रखिए, पहली, अहंकार मत करिए, दूसरी, शिखर पर पहुँचा जा सकता है, शिखर पर घर नहीं बनाया जा सकता, शिखर पर पहुँचने के बाद आपका बर्ताव तय करता है कि आप शिखर पर कितने समय रहेंगे।
स्वर्गीय सुब्रत राय सहारा की जिंदगी फिल्मों सी थी सत्तर के दशक में। बेहिसाब दौलत और बेशुमार ताकत। लखनऊ में नवाबी जाने के बाद उनका ही राज दरबार लगता था। राजसी आमोद प्रमोद तो था ही, निजी सेना जैसी सुरक्षा व्यवस्था भी थी। सन 94, 95 के उस दौर में कपूरथला अलीगंज लखनऊ का चमकदार शानदार कार्यालय, शनिवार का ड्रेस कोड, सहारा गान और लंबे लंबे कॉरपोरेट व्याख्यान नवाबों के शहर लखनऊ के लिए तो सब नया नया ही था। वो भारत के उद्योग जगत के पहले सुपर स्टार थे। एक दौर था, उनकी शोहरत का सूरज कभी अस्त नहीं होता था। राय ने जिस पर भी हाथ रख दिया वो दौलत, शोहरत और ताकत की बुलंदी पर होता था।
खुद और सियासत की नजर उतारने के लिए प्रिंट मीडिया के जमाने में उनका अखबार राष्ट्रीय सहारा अपने पथ पर दंभ के साथ अवस्थित रहा। उस दौरे वक्त अखबार की तूती बोल रही थी। उनके इशारों पर शासन सत्ता चलती थी। उनकी व्यक्तिगत जिंदगी की कहानियां किवदंती बनकर फैली हुई थीं। पूरा बॉलीवुड, क्रिकेट टीम, बड़े बड़े राजनेता और हर तबके के स्टार उनके दरबार में नतमस्तक ही रहा करते थे। सेक्रेटरी पद से रिटायर होने वाले ब्यूरोक्रेट की भी चाह होती थी कि आगे की जिंदगी सहारा की चाकरी में बीते।


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क्या आपको पता है कि Gmail जब storage full दिखाता है तब बिना एक भी photo या data delete किए भी account खाली किया जा सकता है?
ज़्यादातर लोग storage full देखते ही photos हटाने लगते हैं या paid plan लेने का सोचते हैं
जबकि सही तरीका इसका बिल्कुल उल्टा है
data delete नहीं करना होता data को safely बाहर निकालना होता है
Google खुद इसका official तरीका देता है
Google में search करें takeoutgoogle com
Website खुलते ही Deselect all पर tap करें
अब सिर्फ Google Drive select रखें
Photos और बाकी services unselect ही रहने दें
Next step में
File type ZIP रखें
File size option में 50GB select करें
इससे पूरा data आसानी से download हो जाता है
अब Send download link via email चुनें
Export once select करें Create export पर tap करें
कुछ समय बाद आपके email पर download link आ जाएगा आप पूरा data phone या laptop में save कर सकते हैं उसके बाद Drive और Photos से वही files हटा दीजिए
Result साफ है data भी सुरक्षित account भी खाली और Gmail फिर से normal चलने लगता है
कमेंट में बताइए आप अब तक storage full होने पर क्या करते थे?
Disclaimer
यह जानकारी सामान्य Google account awareness के लिए है
Export options समय के साथ बदल सकते हैं
Final process के लिए हमेशा Google की official website ही use करें


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