Virendra Shekhawat

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समाजसेवी, पर्यावरण प्रेमी, कुरीतियों कुप्रथाओं का प्रबल विरोधी, दर्शन एवं अध्यात्म में रूचि, राजनीतिक एवं सामयिक विषयों पर निष्पक्ष राय।

Katılım Nisan 2026
22 Takip Edilen9 Takipçiler
Virendra Shekhawat
Virendra Shekhawat@Follow_Virendra·
@ajits_rathore विरोध हर चीज का होता है, कभी हिंदी का भी हुआ था। हर प्रांत में बीसियों बोलियां होती है परंतु मानक भाषा उनमें से कोई एक ही होती है, उसकी भी कुछ शर्तें हैं। अब कौन समझाए ।
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Ajit Singh Nokha
Ajit Singh Nokha@ajits_rathore·
राजस्थान में राजस्थानी लागू होने से कुछ लोगों को परेशानी हो रही है लोग आवाज भी उठा रहे हैं और बोल रहे हैं कि राजस्थानी सिर्फमारवाड़ी नहीं है बिल्कुल सही बात है उनकी राजस्थानी में सिर्फ मारवाड़ी ही नहीं इसमें सभी क्षेत्र की स्थानीय बोलियां को स्थान मिलना चाहिए और राजस्थानी को सभी स्तर पर लागू करना चाहिए प्रतियोगी परीक्षाओं में भी राजस्थानी का सिलेबस होना चाहिए अगर राजस्थानी भाषा की जरूरत बढ़ेगी तो सभी लोग जिस प्रकार से हिंदी अंग्रेजी सीखने हैं उसी प्रकार से राजस्थानीभाषा भी सीख लेंगे वैसे तो मारवाड़ में रहने वाला जरूरी नहीं है कि उसकी पूरी राजस्थानी आए राजस्थानी का सिर्फ 5 10 परसेंट ही मारवाड़ी बोलने वाले को समझ में आता है और जवाब दे सकता है पर लिखने में वह भी दिक्कत होती है
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Virendra Shekhawat
Virendra Shekhawat@Follow_Virendra·
@MEENAOFINDIA ये इतिहास का गुणगान, शौर्य का बखान केवल उनके लिए है जिन्हें सरकार से कोई अन्य सुविधाएं नहीं मिलती, ना पढ़ाई में,ना नौकरी में, और ना ही कोई अन्य संरक्षण। बस ऐसे लोग पूर्वजों का यशोगान सुनकर आज की पीड़ा को भूल जाते हैं। सरकार से कोई मांग करना भी अपने उसूलों के खिलाफ समझते हैं।
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MEENA OF INDIA🇮🇳
MEENA OF INDIA🇮🇳@MEENAOFINDIA·
श्री राजनाथ जी आप स्वजातीय राजाओ के शौर्य का बखान कर रहे हो बड़ी अच्छी बात है। लेकिन इस देश में और भी समुदायों में राजा,महापुरुष हुए है उनकी कोई सूद नहीं ले रहा है उनकी भी जिम्मेदारी बनती है? मत्स्यदेश के महान शासक राजा विराट के सम्मान में आज तक कोई एक शब्द नहीं बोला और नहीं उनकी स्मृति में कोई विरासत का निर्माण हुआ है। खोह गंग के महान शासक राव आलन सिंह चाँदा, माँच (जमवारामगढ़) के राव नाथू , राव मेदा, राव नायल सिंह , नाहर सिंह , राव बाँधा, बूंदी के महान शासक राव बूँदा, राव जैता । भरतपुर से महाराजा सूरजमल जाट, रणजीतसिंह , मध्यप्रदेश के सबलगढ़ में राजा मीठा मीणा, देवगढ़ (प्रतापगढ़ ) की रानी देवली ! स्वजातीय लोगो के अलावा भी देश और भी राजा महाराजा, स्वतंत्रता सेनानी,महापुरुष , क्रांतिकारी हुए हैं महोदय । @rajnathsingh
Rajnath Singh@rajnathsingh

राव दूदा जी का पूरा जीवन, साहस और शौर्य की एक जीती-जागती गाथा है। राव दूदा जी की तलवार, धर्म और न्याय की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रही। उनके पराक्रम की गूँज आज भी युवाओं में राष्ट्रभक्ति का जोश भरती है।

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Virendra Shekhawat
Virendra Shekhawat@Follow_Virendra·
@ashokgehlot51 बीजेपी में चलती का नाम गाड़ी है, आज जो इतना उछल कूद कर रहें हैं,जिस दिन इनका रिप्लेसमेंट मिला बस समझो लग गये बर्फ़ में।
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Ashok Gehlot
Ashok Gehlot@ashokgehlot51·
जोधपुर में पूर्व उपराष्ट्रपति स्व. श्री भैरोंसिंह शेखावत की मूर्ति अनावरण संबंधी प्रश्न के जवाब में : मैं कह चुका हूं, बगैर अशोक गहलोत की मौजूदगी के अंदर प्रोग्राम की गरिमा घटा दी। जिस व्यक्ति ने जब कभी बीमार पड़े हैं, उनको कैंसर हो गया था। मुंबई हो, दिल्ली हो या सिविल लाइंस हो, जितनी बार मैं मिला हूं, कोई नहीं मिला उनसे, और अंतिम जो है उनसे मिलने वाला व्यक्ति था वो मैं भी। जब वो उनका स्वर्गवास हुआ एसएमएस में उनसे मिलने वाला अंतिम व्यक्ति मैं था और मिल के मैं घर पहुंचा, इत्तला आई वो तो समाप्त हो गए, उनकी डेथ हो गई है तो मेरा रिश्ता इस प्रकार का उनसे था और जो हमने रिस्पेक्ट दिया उनको जब वो उपराष्ट्रपति बने मैं एक सौ छप्पन पर आ गया था वो बत्तीस पर आ गए थे, जब मुख्यमंत्री हटे, तब भी मैं उनके घर गया, शपथ लेते ही उनसे मैंने कहा आराम से आप रखिएगा, जल्दबाजी नहीं कीजिए खाली करने की। पूरी सिक्योरिटी आपकी कायम रहेगी, डॉक्टर पूरे आपके ध्यान रखेंगे, कोई तकलीफ आपको आए, आप मुझे फौरन इत्तला करना। तीन बातें मैं उनको कह के आया था और उसके बाद लगातार हम लोग ऐसे रिश्ते रहे। वो भी कहीं जाना होता आराम से मुझे वो इत्तला करते कि मैं भी आपके साथ चल रहा हूं, प्लेन के अंदर हम साथ जाते थे। सरकार बदलने के बाद मेरे तमाम मंत्री थे, जो सीनियर थे मोहनलाल सुखाड़िया जी के वक्त के चंदनमल जी बेड, खेत सिंह जी राठोड़ , प्रद्युमन सिंह जी, गुलाबी सिंह शक्तावत जी तमाम उनके यहां जाते रहते थे, हम कभी एतराज ही नहीं करते थे। आज जमाना बदल गया, मंत्री तो छोड़ दीजिए, MLA भी आ जाए कहीं हम लोगों के यहां पर तो पचास तरह का शक् होने लग जाते हैं उसके ऊपर। हमारे वक्त में, मैं जाता था होली दिवाली वो आते थे मेरे यहां पर। वो रिश्ते रखे हमने और डेथ हुई तो हमने चला करके उनके लिए स्मारक बनाया। वो तो पूरे राजस्थान जानता है कि अगर ये बीजेपी वाले होते ना तो उपराष्ट्रपति बनने पर इनको कोई सम्मान किया, बता दीजिए किया हो तो, मैं तो ऑफिशियली कह रहा हूं ना मैं खुद आरोप लगा रहा हूं, बीजेपी का एक इतना बड़ा पुराना नेता सन बावन से चुनाव जीतता आ रहा है, वो उपराष्ट्रपति बने तो क्या बीजेपी वालों को शानदार स्वागत नहीं करना चाहिए था? किया क्या ? मैंने किया मुख्यमंत्री निवास में बुलाकर के। संपर्क मैंने रखा उसके बाद में भी, और डेथ हुई तो हम लोगों ने स्मारक बनाया उनके लिए। सब दुनिया जानती है। पूरे राजस्थान में यह चर्चा आज भी है उस वक्त भी थी कि अगर बीजेपी वाले होते शायद वो भी ऐसा स्मारक बनाने की बात या जमीन देने की बात नहीं सोच सकते थे। कोई सम्मान नहीं दिया गया ये स्थिति है। इसलिए मैंने कल कहा कि भाई मेरा तो क्षेत्र है वो मेरे क्षेत्र में प्रोग्राम हो रहा है। सरकारी प्रोग्राम नहीं होता तो मैं नहीं करता, यह प्रोग्राम JDA का था अगर मान लीजिए प्रोग्राम प्राइवेट कोई करता तो फिर भी मैं कोई कमेंट नहीं करता। यह प्रोग्राम सरकारी था। रक्षा मंत्री को बुलाया गया और आप लोकल MLA को नहीं बुलाओ, छोड़िए पूर्व मुख्यमंत्री की बात, छोड़िए मेरे क्या रिश्ते थे तब, यह इनकी एप्रोच है। ये तो इस देश में डेमोक्रेसी खत्म कर ही रहेंगे यह इनका संकल्प है। उसी रूप में तमाम बंगाल हो या बिहार हो, चाहे असम हो, देश में राजनीति चल रही बहुत खतरनाक चल रही है।
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Tribhuvan_Official
Tribhuvan_Official@TheTribhuvan·
सीजेआई हो तो जस्टिस सूर्यकांत जैसा!!! 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠 🪳 🦠
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Virendra Shekhawat
Virendra Shekhawat@Follow_Virendra·
@TheTribhuvan पर्ची लाने वाले भी तो श्री मान जी ही थे। इसलिए प्रशंसा करना तो बनता है 😁
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Tribhuvan_Official
Tribhuvan_Official@TheTribhuvan·
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का यह बयान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की केवल औपचारिक प्रशंसा नहीं है; इसके राजनीतिक निहितार्थ बहुत गहरे हैं। जब देश के सबसे वरिष्ठ नेताओं में गिने जाने वाले राजनाथ सिंह यह कहते हैं कि भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान विकास के नए आयाम छू रहा है तो यह मुख्यमंत्री के कामकाज पर केंद्रीय नेतृत्व की स्पष्ट मुहर है। यह संदेश जनता, संगठन और विपक्ष तीनों के लिए है कि भजनलाल शर्मा अब केवल “नए मुख्यमंत्री” नहीं रहे, भरोसेमंद और परिणाम देने वाले नेता के रूप में उभर रहे हैं।इसका मतलब यह भी है कि उनके बदलाव की बातें अफ़वाह हैं। भजनलाल शर्मा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने सत्ता को शोर का मंच नहीं, काम का माध्यम बनाया है। उन्होंने प्रशासन में संयम, निर्णयों में स्पष्टता और संगठन के प्रति विनम्रता दिखाई है। राजस्थान जैसे विशाल राज्य में बुनियादी ढांचे, निवेश, कानून-व्यवस्था, किसान-युवा हित और प्रशासनिक जवाबदेही को साथ लेकर चलना आसान नहीं था; लेकिन उन्होंने कम समय में अपनी कार्यशैली की दिशा स्पष्ट कर दी। इन पंक्तियों से कुछ लोगों को हैरानी हो सकती है; लेकिन अगर इनके शुरू के दो साल और किसी भी कांग्रेस सीएम के शुरुआती दो साल देखें तो स्पष्ट हो जाएगा। कुछ लोग मुझसे गाली-गुफ़्ता कर सकते हैं; लेकिन मैं जो ग्राउंड पर सुन रहा हूँ, वह बता रहा हूँ। उनके नेतृत्व का एक और महत्वपूर्ण पक्ष उनकी राजनीतिक उदारता है। उनके साथ दो-दो डिप्टी मुख्यमंत्री हैं; लेकिन उन्होंने कभी उनके प्रति किसी तरह की रिजर्वेशन, संकोच या असुरक्षा नहीं दिखाई। उलटे, उन्होंने सत्ता-साझेदारी की एक स्वस्थ परंपरा स्थापित की। मुझे पिछले दिनों एक बुज़ुर्ग काँग्रेस नेता ने बताया था कि भजनलाल ने अपने डिप्टी मुख्यमंत्री के लिए वह ऐतिहासिक मुख्यमंत्री कार्यालय खोला, जो नया सीएमओ बनने के बाद से ही बंद-सा पड़ा था। यह प्रतीकात्मक नहीं, बहुत बड़ा राजनीतिक संकेत है। उन्होंने डिप्टी सीएम को सीएमओ के किसी एक्सटेंशन या हाशिए वाले कमरे में नहीं बैठाया, सम्मानजनक संस्थागत स्पेस दिया। इससे साफ होता है कि भजनलाल शर्मा सत्ता को केंद्रीकृत अहंकार नहीं, सामूहिक नेतृत्व मानते हैं। राजनाथ सिंह का यह कहना कि आने वाले समय में सफल राजनीतिज्ञों की सूची में भजनलाल शर्मा का नाम लिया जाएगा, इसी उभरती विश्वसनीयता की घोषणा है। विपक्ष उन्हें अनुभवहीन मुख्यमंत्री बताता रहा, लेकिन अनुभव केवल पुराने पदों से नहीं, निर्णयों की गुणवत्ता और टीम को साथ लेकर चलने की क्षमता से भी मापा जाता है। हालांकि यह सही है उनका नाम राजनाथ सिंह ने ही तय करवाया था। भजनलाल शर्मा ने साबित किया है कि सादगी, संगठन-निष्ठा, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और सहकर्मियों के प्रति सम्मान मिल जाए तो नया चेहरा भी राज्य को नई दिशा दे सकता है।लेकिन उन्होंने सरकार रिपीट कर दी या उनके सीएम अवधि में हो गई तो बड़ी बात हो जाएगी। पिछले तीस साल के आंकड़े इस संभावना को तस्दीक करते हैं। अगर काँग्रेस अभी से चाहे तो बेहतर नेतृत्व के साथ एकजुट होकर संभल सकती है। @BhajanlalBjp
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Virendra Shekhawat
Virendra Shekhawat@Follow_Virendra·
बीजेपी का समय, कांग्रेस का समय,‌आरोप प्रत्यारोप बंद करके कुछ सार्थक काम कीजिए। पहले तो यह क्लीयर करलें कि जनता की सेवा ध्येय है या परिवार वालों को सेटल करना। ज्यादातर लोग आजकल राजनीति में दूसरे वाले उद्देश्य से ही राजनीति में आ रहे हैं। कांग्रेस को भूल सुधारने का मौका नहीं दिया जनता ने, सत्ता से बेदखल कर दिया था, इसलिए कांग्रेस का नाम ले लेकर समय बर्बाद मत कीजिए।
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Dinesh Bohra
Dinesh Bohra@dineshbohrabmr·
“इसके जो तीन परिवार के जो लोग उसमें जो एमबीबीएस कर रहे हैं, वो कांग्रेस राज के समय से कर रहे हैं। यही तो बात मैं आपसे कह रहा हूँ। तब उस समय कहाँ गए थे कांग्रेस के शासनकर्ता?”
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Ashok Shera
Ashok Shera@ashokshera94·
बीजेपी विधायक हाथ रिक्शा में
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Virendra Shekhawat
Virendra Shekhawat@Follow_Virendra·
मुझे हमेशा से ही उपदेश देने वालों से ज्यादा जो उपदेश सुनते हैं उनको देखने, समझने में रूचि रही है। अधिकांश लोग स्कूलों में ली जा सकने वाली नैतिक शिक्षा की क्लास बुढ़ापे या अधेड़ उम्र में लेने की शुरुआत करते हैं। बाबा उपदेश दे रहा है लोग सामने पालथी लगाए , आंखें बंद करके अहोभाव में गर्दन हिलाते रहते हैं। मुझे समझ नहीं आता कि ऐसे बाबा लोग इन श्रोताओं और चेलों के सहारे किसका भला कर सकते हैं। बाबा चेलों के सहारे अपना साध रहा है और चेले बाबा के सहारे अपना टाइम पास कर रहे हैं।
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सौभद्र
सौभद्र@V927251518·
@Vikas972100 मोक्ष क्या होता है? और किसका होता है? मतलब तन का कि मन का या किसी और का?
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Vikas Chaurasiya
Vikas Chaurasiya@Vikas972100·
श्री कृष्ण जी का भी मोक्ष नहीं हुआ। श्री राम जी का भी नहीं। तो आपका कौन करेगा? जानने के लिए देखिए कलयुग में सतयुग की शुरुआत — भाग 6, Factful Debates यूट्यूब चैनल पर #Kalyug_Mein_SatyugKiShuruat6
Vikas Chaurasiya tweet media
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𝑨𝒏𝒏𝒖 𝑹𝒂𝒕𝒉𝒐𝒓𝒆
📌 आगामी जनगणना में अपनी मातृभाषा “राजस्थानी” लिखवाएं और अपनी भाषा को उसका अधिकार दिलाने में भागीदार बनें। जब हम अपनी भाषा को सम्मान देंगे, तभी उसे संवैधानिक पहचान और अधिकार प्राप्त होगा। मायड़ भाषा के सम्मान और संरक्षण के इस अभियान में सहभागी बनें। #राजस्थानी #मायड़_भाषा
𝑨𝒏𝒏𝒖 𝑹𝒂𝒕𝒉𝒐𝒓𝒆 tweet media
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Virendra Shekhawat
Virendra Shekhawat@Follow_Virendra·
फोटो में दिखाई दे रहे तीन मशहूर अभिनेता अजय देवगन, शाहरुख खान और जैकी श्रॉफ को लोग दोष देते हैं कि वे विमल गुटखे का विज्ञापन करते हैं। अगर आप भी यही सोचते हैं तो आप ग़लत हैं, विज्ञापन में दिखाई देने वाले पाऊच पर विमल इलायची लिखा है। लोग पता नहीं कैसे इसे गुटखा समझ लेते हैं। इलायची के दानों में केसर मिला है, इसे आप त्यौहार पर घर में बनने वाली मिठाई में डालकर अपनी खुशियां डबल कर सकते हैं। दरअसल ये लोग कानून का मजाक उड़ा रहे हैं। टीवी और सोशल मीडिया पर शाहरुख खान और अजय देवगन जिस "विमल इलायची" का प्रचार करते हैं, वह असल में सरोगेट विज्ञापन (Surrogate Advertising) का एक हिस्सा है, कानूनी नियमों के तहत भारत में तंबाकू, गुटका और पैन मसाला के सीधे विज्ञापन पर प्रतिबंध है। इसलिए, कंपनियां अपने मुख्य तंबाकू ब्रैंड का नाम लोगों के दिमाग में बनाए रखने के लिए उसी नाम से 'माउथ फ्रेशनर' या 'इलायची' का विज्ञापन बनाती हैं । यही पैटर्न शराब बनाने वाली कंपनियां अपनाती हैं वे अपने विज्ञापन में प्रोडक्ट के रूप में सोडा दिखाती हैं।
Virendra Shekhawat tweet media
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Antarman | The Conscious Mind
राजस्थान की प्रमुख बोलियाॅं और क्षेत्र। राजस्थान की बोलियों में अधिकांश शब्द मिलते जुलते से ही है, बोलने के लहजे में थोड़ा फर्क है। राजस्थानी भाषा इन सबका मिला-जुला रूप हो तो बेहतर होगा।
Antarman | The Conscious Mind tweet media
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Virendra Shekhawat
Virendra Shekhawat@Follow_Virendra·
मेरे हिसाब से यह राजस्थानी भाषा का पहला विज्ञापन होना चाहिए। जो जनगणना में Self Enumeration (स्व -गणना) के लिए छपा है। स्व- गणना के लिए राजस्थानी भाषा में शब्द आया है - 'खुद गिणत' । क्या आपने इससे पहले ऐसा विज्ञापन देखा है ?
Virendra Shekhawat tweet media
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Virendra Shekhawat
Virendra Shekhawat@Follow_Virendra·
मेरा मन मैं पैली स ही धुकधुकी चालै ही, क आपा सोनो खरीदा कै अबी थोड़ा दिन रूकां। मैं मेरा सगळा भायला कन राय ले ले धापग्यो, चैट जीपीटी अर जैमिनी न भी पूछ लियो, पर मैं कोई ठोस निर्णय कोनी ले पारयो हो, असमंजस क मायनै दिन निकलता जा र॒या हा, घरकां को भी प्रेशर भोत बढ़तो जा रृयो हो। फेर एक दिन भगवान मेरी सुणी, अब मेरे कने ठोस निर्णय है अर ई निर्णय मैं मोदीजी अर सारो को सारो मीडिया मेरै सागै है। आपणै एक साल सोनै को नाम ही कोनी लेणों है।😅
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Virendra Shekhawat
Virendra Shekhawat@Follow_Virendra·
परवरिश का बहुत बड़ा रोल होता है, दोनों वीडियो देखें और महसूस करें
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सौभद्र
सौभद्र@V927251518·
भ्रम में न रहे, इस खुरपेंची को मुर्गी/मुर्गा मारने से कोई समस्या नहीं है, ये सिर्फ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक कैमिकल के खिलाफ है, इसे प्राकृतिक रूप से बड़ी हुई मुर्गी का माँस चाहिए।
खुरपेंची स्वास्थ्य@Khurpenchhealth

FSSAI वालों बताओ ये मुर्गियों को कौन सा टीका लगा रहा है , मुझे तो लग रहा है कि पोलियों का टीका लगा रहा है , लेकिन कुछ हरामखोर बोल रहे है कि इंजेक्शन लगाकर मुर्गी का साइज बढ़ा रहे है जिससे मुर्गी हफ्ते भर में 2 किलो की हो जाय।

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Virendra Shekhawat
Virendra Shekhawat@Follow_Virendra·
किसी देश/राज्य के जरूरी सात प्रमुख अंग। जिनके बिना देश या राज्य की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।
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