
पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से आरटीआई (RTI) के तहत मिली जानकारी के आधार पर कहा जा रहा है कि परशुराम के ऐतिहासिक अस्तित्व का कोई भौतिक या पुरातात्विक प्रमाण मौजूद नहीं है फिरभी लोगो के ऊपर FIR क्यों किए जा रहे है? क्या सच बोलना गुनाह है?हमारी अभिव्यक्ति की आजादी क्यों झीनी जा रही है






















