Getwick
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सोढ़ा राजपुत अपनी लडकीयो को मुसलमानो को बेचने के लिए प्रसिद्ध थे। अंग्रेजो ने देखा की सोढ़ा राजपुतानिया काफ़ी सुंदर हुआ करती थीं, उनकी सुंदरता को सोढ़ा राजपूतों ने धंधे में परिवर्तित कर दिया। सोढ़ा राजपुत उतना ही अमीर माना जाता था जितनी उसके बेटियां हो। @Samvadkshtriya


Her name is Noelia Castillo and tomorrow she will be the first person to receive euthanasia for depression in Spain. She was living in a supervised center with unaccompanied minors when she was gang raped by them. Afterwards, she tried to unalive herself by jumping from a fifth floor. But she became paraplegic instead. She’s 25 years old and today is her last day alive. Praying she can feel Jesus love before tomorrow and changes her mind. 🙏🏻


Marathas brutally stomped Udaipur family, james tod writes about brutal treatment by Holkar toward Udaipur royal family in 1804 . Holkar first demanded 40 lakhs , on the inability of Maharana paying such large amount , Holkar stripped off the royal palace of everything that could be converted to gold or had some value . Royal Females were deprived of every article of Luxury , heavy contributions were levied on city , he managed to obtain 12 lakhs rupees. For the rest amount, he took hostages from the household of Rana and chief citizens, who were to be held at maratha camp.


सभी जाट इस बात को गांठ बांध ले कि हम एक स्वतन्त्र ‘जनजाति’ — जिसे अरबी में क़बीला और अंग्रेज़ी में ट्राइब कहते हैं — हैं, जाति अथवा वर्ण नहीं। मुग़ल काल से पहले तक हमारा ब्राह्मण अथवा हिन्दू धर्म से कोई लेना देना नहीं था, हमारे पूर्वज अपने पारंपरिक क़बायली धर्म में आस्था रखते थे, जिसे जठेरा कहा जाता हैं। हमारे सामाजिक नियम हिंदुओं से बहुत भिन्न थे, जो हमारी ट्राइबल काउंसिलों के द्वारा लागू करवाए जाते थे। हमारी गोत व्यवस्था भी ब्राह्मणवादी गोत्र व्यवस्था से बहुत भिन्न हैं, हम हमारी चार गोतों को छोड़कर अन्य किसी भी जाट गोत में विवाह कर सकते हैं, अर्थात् हमारे क़बीले के भीतर कोई भी तरह का भेदभाव नहीं हैं, कोई ऊंच नीचता नहीं हैं। दूसरी ओर, हिंदुओं की लगभग सभी जातियों और जनजातियों के भीतर भी ऊंच नीचता की एक लंबी श्रृंखला पाई जाती हैं, अर्थात् उनकी जातियां कई असमान उपजातियों में बंटी हुई हैं। कहने का आशय यह है कि हम नहीं तो कोई जाति हैं और ना ही कोई वर्ण। जो कोई भी जाट अपने आपको क्षत्रिय अथवा वैश्य अथवा शूद्र अथवा ब्राह्मण मानता हैं, वो किसी जाटनी का जाया नहीं हो सकता। हमारे पूर्वज एक शताब्दी पहले तक ऐसे शब्दों से पूरी तरह से अनजान थे। जो कोई भी हम जाटों को ब्राह्मणवादी अथवा हिंदुवादी जाति अथवा वर्ण व्यवस्था से जोड़ने की कोशिश करता हैं, वो हम लोगों की जनजातीय स्वतन्त्रता पर हमला करता हैं, इसीलिए वो हमारा दुश्मन हैं, चाहे वो नोनिका दत्ता हो अथवा उमा चक्रवर्ती या कोई भी अन्य व्यक्ति।

बाईसाऐं मुगल बादशाह के हरम की शान हुआ करती थी ये तो हमने काफी बार सुना है लेकिन आपको जान के हैरानी होगी कि बाईसाऐं प्रचुर संख्या में मुगल बादशाहों के तुर्क सेनापतियों और यहां तक कि हिंदू खत्री दीवानों के हरम में भी पाई जाती थी। जैसे सभा चंद जो एक खत्री था, जुल्फीकार खान का खास

@OliveGreens09 @ajshekha @BlueBlistering x.com/i/status/19871… If Rajputs were this powerful then why Rajput women were raped by Faujdars and sometimes forced to comit Jauhar something isn't adding up

When ghori appeared on Panjab frontier Chandraja the vassal of Prithviraj Chauhan gave following report :- > Rajput women has been defiled by Ghurid troops , even the noblest of Rajput families disappeared in front of him. > He is a unrelenting enemy.

बन्ना हम बाईसा फेमिनिज्म की सपोर्टर नहीं है, हमें तो आपकी बन्नागिरी ही प्यारी लगती है। आप ही हमारे प्रिय हो। लेकिन क्या ये सच नहीं कि आप लोगो ने हमें अपने ताकतवर आक्रांताओं के सामने एक ढाल की तरह इस्तेमाल किया। जहां आपको लगा कि आपकी गांड़ कुटाई हो सकती है वहां आप लोगों ने

हम गरीब राजपूतानीयो को अंग्रेजी सेना में वैश्या के रूप में बेच दिया जाता था।





