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#अपने_बाबत
पढ़ना लिखना पसंद है। पूरब का ऑक्सफोर्ड कहे जाने वाले इलाहाबाद विश्विद्यालय से एलएलबी किया। विवि के हर छात्र की तरह आईएएस की परीक्षा में किस्मत आजमाया। बिना किसी खास तैयारी के 1984 में जब प्री निकला तो लगा, मुश्किल नहीं है। 1985 ड्रॉप किया। पूरी लगन से तैयारी की, पर 1986 और 1987 की यात्रा भी मेन तक की ही रही।
लगा इस पढ़ाई का उपयोग सिर्फ पत्रकारिता में संभव है। इस क्रम में "आईआईएमसी" और "टाइम्स रिसर्च फाउंडेशन" में भी रिटेन के बाद इंटरव्यू दिया। अंत में दाखिला मिला डॉ. हरी सिंह गौर विश्विद्यालय सागर में।
पत्रकारिता की शुरुआत भोपाल के दैनिक जागरण नई दुनियां से की। अमर उजाला कानपुर होते हुए अधिक समय दैनिक जागरण गोरखपुर में बतौर रिपोर्टर गुजरा। 2017 से 2019 तक का समय जागरण के राज्य ब्यूरो लखनऊ में गुजरा।
तब जब पत्रकारिता में मठाधीशी नहीं थी। मेरिट और मौलिकता की पूछ थी, तब देश के सभी शीर्ष अखबारों (नवभारत टाइम्स, जनसत्ता,अमर उजाला, दैनिक नई दुनिया, दैनिक भास्कर) के एडिट पेज पर छपने का मौका मिला।
ऑफबीट रिपोर्टिंग में खेतीबाड़ी, मौसम, पर्यावरण, गाय, गोबर और भूसा आदि प्रिय विषय रहे हैं। फील्ड रिपोर्टिंग में आनंद आता है। पढ़ना लिखना अब भी जारी है। जो आपको समय समय पर दिखता भी है। यकीनन इसके लिए प्रेरणा और हौसला आप से ही मिलता है। मिलता रहेगा। बदले परिवेश में यही मीडिया का असली मंच है। इसीलिए सोचा, थोड़ा खुद के बारे में बता दूं।
फोटो: मार्च 2017 में गोरखपुर से लखनऊ आने के पहले दैनिक जागरण के मित्रों के साथ

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