ηαVεη∂υ SιηGн ✍️ નવેન્દુ સિંહ.

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@singh_navendu

Ex. BHU., Journalist by profession. Accredited Journalist by U.P. Govt. Lucknow. U.P. Naya India, Ex. Janasatta, Hindustan, Swatnatra Bharat, Hindi Dailies.

Lucknow, Varanasi, India Katılım Mayıs 2013
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UP : SDM निलंबित !! उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के बरहज SDM PCS विपिन द्विवेदी निलंबित !! नलकूप ज़मीन विवाद मामले में पाए गए थे दोषी, नियुक्ति विभाग ने विपिन द्विवेदी को निलंबित किया !! अब इन्हें राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया गया है !!
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Umashankar Singh उमाशंकर सिंह
ब्रेकिंग न्यूज़: ब्रेट बेयर: "मैंने अभी प्रेसिडेंट से फ़ोन पर बात की। उन्होंने फ़ोन किया। उन्होंने कहा 'रात 8 बजे (हमला) हो रहा है। अगर हम उस पॉइंट पर पहुँचे, तो ऐसा हमला होगा जैसा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा होगा।' वह अभी इसी बात पर अड़े हुए हैं।"
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Girish Kumar Pandey
Girish Kumar Pandey@GirishPandy·
किस्सा एक फोटो का 📸 _____ मेरा 31 मार्च 2017 को गोरखपुर से लखनऊ आना पूरी तरह एक्सीडेंटल था। गोरखपुर में मैं दैनिक जागरण में चीफ रिपोर्टर था। लखनऊ में स्टेट ब्यूरो में मुझे मेरी काबिलियत के नाते नहीं कुछ रिश्तों को जागरण के एक खास मालिक के फेवर में “इनकैश” करने के लिए बुलाया गया था। दूसरे या तीसरे दिन, 5 कालिदास मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास पर महाराज जी (योगी आदित्यनाथ जी) से मुलाकात हुई। मैंने उन्हें बताया कि जागरण प्रबंधन के लोग आपसे मिलना चाहते हैं। वह मुस्कुराए 😊 और बोले—“सबको एक साथ ही बुला लेते हैं।” 👉मैंने कहा—“मैं अपने स्टेट हेड से पूछ लूं।” अपने 3000 रुपये वाले नोकिया मोबाइल से आशुतोष जी से बात की। उन्होंने मिलने वालों के नाम बताए। स्वाभाविक था कि सूची में वही नाम था, जिनके फेवर के लिए मुझे यहां बुलाया गया था। मुलाकात की तारीख तय हुई—4 अप्रैल। इसके बाद मैं ऑफिस गया। आशुतोष जी थोड़े चिंतित दिखे। बोले—“पहले वो नहीं, ये मालिक मिलेंगे। (पेंच सीनियरिटी का था)आप तुरंत मुख्यमंत्री आवास जाकर संशोधन कराइए।” मैं, जिसने बतौर रिपोर्टर कभी प्रशासन की बारीकियां नहीं देखी थीं, शासन के शीर्ष पद की अहमियत क्या समझता! 😅 मैंने CM आवास पर अपने एक परिचित को यह बताया। जवाब मिला—“आप जिसको मिलाना चाहते हैं, उन्हें लेकर आ जाइए।” मैंने संशोधित नाम दर्ज करा दिए। … यह मुलाकात आज ही की तारीख में हुई थी ⏳ मैं तस्वीर के फ्रेम में रहना नहीं चाहता था, लेकिन जो मालिक वहां गए थे, उन्होंने कहा—“तुम भी आ जाओ।” मैं गया… लेकिन दूरी बनाकर। सबसे बाएं। इसमें इतना ही बाकी जब पत्रकारिता🗞️ का अपना सफर🚶 लखनऊ पहुंचेगा तब तफसील से✍️ #पत्रकारिता #लखनऊ #गोरखपुर #दैनिकजागरण #यादें #संस्मरण #सच
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@IAS_SAUMYA या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। चैत्र नवरात्र के प्रथम दिवस व हिन्दू नव वर्ष की आपको व आपके परिवार को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं... 🌹🙏
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Saumya I.A.S.
Saumya I.A.S.@IAS_SAUMYA·
नव वर्ष विक्रम संवत 2083 एवं चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌼 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ यह नव संवत्सर सृष्टि, नव ऊर्जा और जागरण का प्रतीक है। इस नव संवत्सर के राजा बृहस्पति एवं मंत्री मंगल हैं—जो ज्ञान, शक्ति और कर्मप्रधान प्रगति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। माँ दुर्गा आप सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें। 🌺
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यूपी में तीन आईएएस अफसरों का तबादला !! Iलक्ष्मी एन VC मथुरा को CEO ब्रज तीर्थ विकास परिषद का अतिरिक्त चार्ज !! संतोष कुमार कार्यकारी निदेशक, उत्तर प्रदेश आउटसोर्सिंग सेवा निगम बनाये गए !! सूरज पटेल 2019 VC सहारनपुर विकास प्राधिकरण बनाये गये !!
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Lucknow... PWD में तकनीकी सलाहकार वी.के. सिंह का कार्यकाल 1 वर्ष बढ़ाया गया. सेवानिवृत्त प्रमुख अभियंता विजय कुमार सिंह फुल डेप्थ रिक्लेमेशन तकनीक के कार्यों के प्रभावी ढंग से संचालन के लिए बढ़ाया गया कार्यकाल. अब वे 28 फरवरी 2027 तक बढ़ी...
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NBT Hindi News
NBT Hindi News@NavbharatTimes·
दिल्ली: भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने कहा, "DMK का मतलब है 'डर्टी मनी किसका'...तमिलनाडु हाई कोर्ट ने भी स्टालिन सरकार पर फटकार लगाई है कि क्यों वे के.एन. नेहरू जैसे एक भ्रष्टाचारी मंत्री को बचाया जा रहा है। उनके खिलाफ शिकायत नहीं की जा रही जबकि सबूत है। अब स्टालिन सरकार न्यायालय की अवमानना करते हुए उन्हें संरक्षण दे रही है। क्या ये भ्रष्टाचार का पैसा कांग्रेस और DMK के शीर्ष नेताओं को भी मिलता है? उन्हें बताना चाहिए कि क्या वे भ्रष्टाचार के साथ हैं या भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।" #ShahzadPoonawala #CorruptionAllegation #DMKvsBJP #Congress #TamilNaduHighCourt
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New Delhi... ये सीन दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम के रेस्टोरेंट का है !! रेस्टोरेंट में बचा हुआ कोल्ड्रिंक "Thumsup" बोटल में फिर से डाली जा रही है. अब ये अगले मैच में फिर से सर्व की जाएगी. "स्कैम" का एक और लेवल !!
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अवतंस चित्रांश
उत्तर प्रदेश शासन के अपर महाधिवक्ता परमप्रिय मित्र सूर्यमणि सिंह रैकवार जी को एन्काउंटर@लक्ष्मणपुर टाइम्स की प्रति भेंट की। गहरी सामाजिक समझ वाले विद्वान अधिवक्ता सूर्यमणि भाई ने छात्र जीवन में ही मेरे अंदर की बेचैनी पढ़ ली थी। किताब में लिखी बेचैनी अब वकील साहब की नजर से पढेंगे
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Lucknow... नेहा सिंह राठौड़ ने लखनऊ के हज़रतगंज थाना पहुंच पुलिस के समक्ष दर्ज कराया बयान. नेहा के खिलाफ पीएम मोदी पर अभद्र टिप्पणी वाले गाने को लेकर वाराणसी व लखनऊ में मुकदमा दर्ज है. नेहा सिंह को पुलिस ने पूछताछ के लिए तलब किया था. नेहा सिंह बयान दर्ज करा थाने से रवाना हुईं...
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Rajasthan Patrika
Rajasthan Patrika@rpbreakingnews·
रेलयात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी, राजस्थान को मिल सकती है 2 वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की सौगात patrika.com/jaipur-news/ra…
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N. Ram
N. Ram@nramind·
This editorial in The Hindu of January 1, 2026 analyses how and why the Election Commission of India’s Special Intensive Review (SIR) of electoral rolls across 12 States and Union Territories has descended into farce — actually much worse than farce. A combination of high-handedness, ad hocery, incompetence, indecent haste, and motivated and unlawful manoeuvres threatens to turn (where it has not already turned) the SIR exercise into a means of mass disenfranchisement on an unprecedented scale. The ongoing West Bengal SIR is an egregious case of this incompetence and grave abuse of procedure and process by the ECI. Unfortunately, the Supreme Court of India has failed “properly [to] vet the new SIR procedure for constitutionality.” But “it is still not too late for the Court to take note of the infirmities and to decide firmly in favour of the electorate. The fate of the very idea of universal adult franchise hangs in the balance.” Descent into farce The Hindu, January 1, 2026 thehindu.com/opinion/editor…
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पूर्व BJP विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से झटका ! कुलदीप सेंगर की सजा रद्द करने के दिल्ली HC के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगायी. सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई का पक्ष सुनने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर लगायी रोक...
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ये थेथर हैं !!!😅🤣 थेथर का अर्थ पूरब के लोग समझ सकते हैं. पूर्वांचल का शब्द है ये ...
Adv. Vijay Singh@VijaySingh_law

दोगलापन भी शर्मा जाए... रजत शर्मा लाइव उदाहरण हैं! पता नहीं ऐसे लोगों को रात को नींद कैसे आती होगी? #MondayMotivation

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umang misra
umang misra@umangmisra·
वंदे मातरम पर चर्चा और अर्धसत्य का पाप : वंदे मातरम से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण बिंदु संन्यासी विद्रोह पर चर्चा नहीं हो रही। संन्यासी विद्रोह का वंदे मातरम गीत और आनंदमठ से कनेक्शन पूरे विवाद का समाधान कर देता है। बंकिम चंद्र जी ने 1875 में जो वंदे मातरम गीत लिखा था वो पूरा का पूरा राष्ट्रगीत के रूप में स्वीकार किया गया है। 1875 में उन्होने 2 स्टैंजा ही लिखे थे और उनमें मातृभूमि की ही वंदना है। 1882 में जब बंकिम चंद्र जी ने आनंदमठ ग्रंथ लिखा तो उसमें 1875 वाले 2 स्टैंजा में चार और जोड़ दिए, उन 4 स्टैंजा में भारत माता की कल्पना देवी दुर्गा की तरह की गई है। ऐसा क्यों किया ये जानने के लिए आपको ये समझना पड़ेगा कि आनंद मठ में है क्या ? आनंदमठ संन्यासी विद्रोह पर आधारित है जो 1760 के बाद बंगाल के कई क्षेत्रों में हुआ था. स्वाभाविक है जब कथानक के नायक संन्यासी होंगे तो वो देवी की वंदना करेंगे ही. इसलिए जब बंकिम चंद्र जी ने पहले से लिखे रखे वंदे मातरम गीत के दो स्टैंजा आनंदमठ में जोड़े तो ग्रंथ की भावनाओं के और अनुरूप बनाने के लिए उसमें भारत माता की देवी के रूप में वंदना के चार स्टैंजा और जोड़ दिए। अब बंकिम चंद्र जी को क्या पता था आजादी के 75 से ज्यादा साल बीत जाने के बाद ऐसे लोग आएंगे जो देश के पहले प्रधानमंत्री को दोषी ठहराने के लिए उन अतिरिक्त स्टैंजा का प्रयोग करेंगे. अब बात इसकी कि क्या नेहरू जी ने पूरा वंदे मातरम गीत राष्ट्रगीत बनने से रोक दिया? इसका उत्तर है सिर्फ नेहरू ने नहीं। वंदे मातरम का कितना हिस्सा राष्ट्रगीत के रूप में लिया जाएगा इसमें सबसे बड़ी भूमिका गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर की थी। वो ही इस विषय के सबसे बड़े विद्वान थे, इसलिए उनके सुझाव पर ही वही दो स्टैंजा राष्ट्रगीत के रूप में स्वीकार किए गए जो बंकिम चंद्र जी ने 1875 में लिखे थे। संन्यासी विद्रोह पर आधारित आनंदमठ पुस्तक को और ज्यादा जीवंत बनाने के लिए लिखे गए अतिरिक्त स्टैंजा राष्ट्रगीत में नहीं जोड़े गए। इसके अलावा उन पंक्तियों पर सांप्रदायिक राजनीति भी जिन्ना और मुस्लिम लीग कर रहे थे। अब गुरुदेव रवीद्र नाथ टैगोर जी से ज्यादा विद्वान लोग अमृतकालीन भाजपा में बैठे हों तो बताएं। और महत्वूर्ण बात..जिस उप समिति ने टैगोर जी की राय पर शुरु के दो स्टैंजा को ही राष्ट्रगीत में शामिल किया उस उपसमिति के अध्यक्ष नेताजी सुभाष चंद्र बोस थे, सदस्य नेहरू, पटेल, मौलाना आजाद, डा राजेन्द्र प्रसाद, राजगोपालाचारी, आचार्य नरेन्द्र देव और जमनालाल बजाज भी थे। चलिए अगर नेहरू को ये दोषी मानते हैं तो क्या इनकी हैसियत है कि ये पटेल जी को भी दोषी बोलें ? क्या इनमें इतना साहस है कि ये सुभाष चंद्र बोस पर तुष्टिकरण का आरोप लगाएं? और भी ज्यादा महत्वपूर्ण बात..नेताजी सुभाष की अध्यक्षता वाली जिस उपसमिति की सिफारिश को कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने भी मान लिया था उसी बात को संविधान सभा ने स्वीकार किया। संविधान सभा ने भी वंदे मातरम के दो स्टैंजा को ही राष्ट्रगीत माना। तो क्या नेहरू को गुनहगार बताने वालों की इतनी हिम्म्त है कि बाबा साहेब अम्बेडकर को भी दोषी बता सकें ? डा. राजेन्द्र प्रसाद को दोषी ठहरा सकें ? नहीं है हिम्मत! क्योंकि साहस सत्य की साधना से आता है, अर्धसत्य का प्रोपगंडा करने से नैतिक साहस नहीं आता। और अब आखिरी बात...वंदे मातरम हो या पूरा स्वतंत्रता आंदोलन, उसमें सबसे बड़ी भूमिका कांग्रेस की है ये हर उस व्यक्ति को पता है जिसने इतिहास पढ़ा है। सारा प्रपंच उन लोगों के लिए रचा जाता है जिन्होंने इतिहास नहीं पढ़ा है। बात बात में इतिहास में कूदने वाले वर्तमान को छलने के अलावा कुछ नहीं करते। स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों ने कभी ये नहीं सोचा होगा कि उनकी तपस्या के नाम पर एक दिन ये सब होगा। आज की कांग्रेस की मेरिट/ डिमेरिट के आधार पर उसकी आलोचना होनी चाहिए और आज की भाजपा के कार्यों के आधार पर उसकी. इतिहास में नायक और खलनायक खोज ही क्यों रहे हैं ? उस व्यक्ति के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चलाना जिसने दशक से ज्यादा जेल में बिताया, आधुनिक भारत के निर्माण की नीव खड़ी की बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। कोई भी ऐसा व्यक्ति जिसने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को सिर्फ पढ़ा ही नहीं उसकी आत्मा को समझा है वो अर्धसत्य के इस पाप को स्वीकार नहीं कर सकता. वंदे मातरम, भारत माता की जय.
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sameer chougaonkar
sameer chougaonkar@semeerc·
यह सही है कि बीजेपी ने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए अपना कोरम पूरा कर लिया है।भाजपा के संविधान के मुताबिक,पार्टी को देश के कम से कम 50 फीसद राज्यों और केन्द्र शासित क्षेत्रों में आंतरिक चुनाव पूरे करने होते हैं,जो हो चुके है। हालांकि सबसे महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश,हरियाणा, कर्नाटक,दिल्ली,झारखंड जैसे राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष बनना बाकी है।बिहार के प्रदेश अध्यक्ष मंत्री बन गए है,ऐसे में वहा भी नया अध्यक्ष मिलना है।त्रिपुरा जैसे छोटे से राज्य में भी भाजपा अभी तक अध्यक्ष नहीं बना सकी। संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष में हो रही देरी को समझा जा सकता है, लेकिन राज्यों में भी अध्यक्ष की नियुक्ति ना होना, समझ से परे है।संघ का संदेश साफ़ है।बचे हुए राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष इसी साल नियुक्त कर दे।नए साल तक ना खीचे।संघ का कहना है कि सत्ता का स्वर्णिम काल तब तक है जब तक संगठन मजबूत है।संगठन की सीढ़ी पर खड़ी सरकार संगठन को नज़रअंदाज़ नाकरे।उत्तरप्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर हो रही देरी से भी संघ थोड़ा असहज है। उत्तरप्रदेश पार्टी और संघ दोनों के लिए वैचारिक और चुनावी लिहाज से बेहद अहम है।उत्तर प्रदेश राज्य में चार बड़े बदलाव होने है।नया प्रदेश अध्यक्ष,आनंदीबेन पटेल की जगह नया राज्यपाल,कैबिनेट में फेरबदल और राष्ट्रीय परिषद के लिए नाम।संघ का कहना है कि 2027 में उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनाव के लिए ज़्यादा समय नहीं है। संघ का मानना है कि राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव को लंबे समय से टलना संगठन की दृष्टि से ठीक नहीं है।संगठन को सर्वापरि मानने वाली पार्टी में संगठन को लेकर इतनी शिथिलता कार्यकर्ताओं में अच्छा संदेश नहीं देती है। संघ नए साल में नए एजेंडे पर काम करना चाहता है और इस कारण सभी खाली पदों को इसी साल भरना चाहता है। संदेश दे दिया गया है कि रबर इतना भी मत तानों कि टूट जाए। वैसे नड्डा जी आज दो दिन के लिए झारखंड जा रहे है। नया अध्यक्ष बनाकर आते है या नयी सरकार बनाकर वापस आते है। देखते है।
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Congress
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रूस के महान लेखक Boris Pasternak को नोबेल पुरस्कार मिला। सोवियत संघ इससे नाराज हुआ और उसने Boris Pasternak को स्टॉकहोम जाकर पुरस्कार लेने की इजाजत नहीं दी। इसके साथ ही Boris Pasternak को देश निकाला देने की कार्रवाई शुरू हो गई। लंदन में Boris Pasternak के डिफेंस में एक कमेटी बनाई गई, जिसने नेहरू जी से आग्रह किया कि वे उस समिति के अध्यक्ष बनें। नेहरू जी से कहा गया कि आपके संबंध रूस से अच्छे हैं, इसलिए आप बात करें ताकि Boris Pasternak को स्टॉकहोम जाने दिया जाए और उनके खिलाफ देश निकाला देने की कार्रवाई रोक दी जाए। नेहरू जी के बात करने पर Boris Pasternak पर देश निकाला देने की कार्रवाई रोक दी गई। लेकिन नेहरू जी ने कभी 'विश्वगुरू' होने का दावा नहीं किया। : The Nehru Centre के उद्घाटन कार्यक्रम में अशोक वाजपेयी जी 📍 नई दिल्ली
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