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संदीप कनौजिया प्रतापगढ
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संदीप कनौजिया प्रतापगढ
@Gybsandeeppbh
“बुद्ध की करुणा, फुले की शिक्षा, गाडगे बाबा की सेवा और बाबा साहेब की समानता—इन्हीं विचारों में मेरी पूरी पहचान।” ✍️ Sandeep Kanojia
#Pratapgarh,India Katılım Nisan 2020
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ग्राम कनकपुर,थाना नवाबगंज,गोंडा में जमीनी विवाद में जो सिविल प्रकृति का मामला है विपक्षी पार्टी से मोटा रकम लेकर थाने की पुलिस बिना किसी नोटिस के जबरन बल प्रयोग कर घर में घुस कर हाथ पैर तोड़ने का धमकी दिया कृपया आवश्यक कार्यवाही करें @Uppolice @gondapolice @myogioffice
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@UPPCLLKO consumer_number 6022390100 क्या आप बता सकते हैं कि इस अकांउट नम्बर का बिल अभी तक नहीं आया है क्या आप लोग मनमर्जी का काम करते है और जब उपभोक्ता का बिल ज्यादा हो जाएगा, तो फिर आप लोग उपभोक्ता को परेशान करने लगते हो
उचित जानकारी देने का कष्ट करे @ramjeevanrajlmp

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@Gybsandeeppbh @dgpup @Uppolice @sultanpurpolice @RaazNirmal28202 @Join_GYB @Rajeshbhaisurat @MANOJKU99379769 @RahulNirmal173 @sultanpurpolice @igrangeayodhya उक्त प्रकरण में तत्परता पूर्वक दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्यवाही करना सुनिश्चित करें।
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संत गाडगे बाबा का विचार:
“जाति और भेदभाव इंसान को छोटा बनाते हैं,
लेकिन मानवता इंसान को महान बनाती है।”
@ManishCEO2 @Gybgonda43 @Gybsandeeppbh

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महोदय मामले को गंभीरता पूर्वक लेकर फिर दर्ज करें ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके
@Uppolice @dgpup @myogiadityanath @ASP4UP @PMOIndia_RC @gadgesena
संदीप कनौजिया प्रतापगढ@Gybsandeeppbh
कोतवाली कादीपुर, जनपद सुल्तानपुर में धोबी समाज (दलित) के व्यक्ति पर जानलेवा हमला चिंताजनक है, स्थानीय पुलिस प्रशान BNS सहित अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोग पंजीकृत कर वैधानिक कार्यवाही करे @dgpup @Uppolice @sultanpurpolice @RaazNirmal28202
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महोदय मामले को गंभीरता पूर्वक संज्ञान लेकर एफ आई आर दर्ज कर कार्रवाई करने कि कृपया करें @Uppolice @dgpup @UPGovt @myogioffice @mlcsurendrabjp @Gybsandeeppbh @PMOIndia @AniketDhanuk_ @gadagesena72



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कोतवाली कादीपुर, जनपद सुल्तानपुर में धोबी समाज (दलित) के व्यक्ति पर जानलेवा हमला चिंताजनक है, स्थानीय पुलिस प्रशान BNS सहित अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोग पंजीकृत कर वैधानिक कार्यवाही करे @dgpup @Uppolice @sultanpurpolice @RaazNirmal28202




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कोतवाली कादीपुर, जनपद सुल्तानपुर में धोबी समाज (दलित) के व्यक्ति पर जानलेवा हमला चिंताजनक है, स्थानीय पुलिस प्रशान BNS सहित अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोग पंजीकृत कर वैधानिक कार्यवाही करे @dgpup @Uppolice @sultanpurpolice @bk_kanaujiya




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#जौनपुर के मुंगरा बादशाहपुर में तेज वाहन चलाने से मना करने पर दलित परिवार को मारकर हाथ तोड़ दिया गया है, जब पीड़ित परिवार मामले को पंजीकृत कराने गया तो स्थानीय प्रशासन विपक्षी से मिलकर पीड़ित को ही थाने पर बिठा लिया
मामला पंजीकृत नहीं किया
@adgzonevaranasi कृपया संज्ञान लीजिए

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जब बहन सुश्री मायावती जी ने लखनऊ में स्थित डॉ. अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्मारक एवं अंबेडकर पार्क और नोएडा में दलित प्रेरणा स्थल का निर्माण कराया, तब उसका मूल उद्देश्य स्पष्ट था कि बहुजन समाज के लिए ऐसे ऐतिहासिक एवं सार्वजनिक स्थल विकसित करना जहाँ ओबीसी, एससी (बहुजन) समाज के लोग लोकतांत्रिक तरीके से एकत्र होकर प्रदेश-स्तरीय या राष्ट्रीय-स्तरीय बैठकों, विचार-विमर्श के माध्यम से अपनी बात रख सकें। उस समय बहुजन समाज के पास ऐसे सम्मानजनक ऐतिहासिक सार्वजनिक स्थल लगभग नहीं थे। इन ऐतिहासिक स्थलों को महज़ “पार्क” नहीं, बल्कि बहुजन ऐतिहासिक स्थल, सामाजिक-राजनीतिक चेतना के केंद्र के रूप में विकसित किया गया। जहाँ पर तमाम बहुजन महापुरुषों के संघर्ष और इतिहास को प्रतीकों और लेखनी के माध्यम से बहुजन समाज के सामने स्थापित किया गया।
लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण यह रहा कि भाजपा, कांग्रेस, सपा एवं तमाम पार्टियों ने मिलकर इसका कड़ा विरोध किया। तर्क दिया गया कि “टैक्स का पैसा पार्कों और स्मारकों (पत्थरों हाथी) में बर्बाद किया जा रहा है।” यह विरोध केवल आर्थिक नहीं था, बल्कि वैचारिक भी था, क्योंकि पहली बार सत्ता के संसाधनों का उपयोग बहुजन महापुरुषों के इतिहास, सम्मान और स्मृति को सार्वजनिक रूप से स्थापित करने में हो रहा था।
आज वही सवाल एक बार फिर प्रासंगिक है। लखनऊ सहित प्रदेश के अनेक स्थानों पर अटल बिहारी वाजपेयी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमाएँ और स्मारक बनाए जा रहे हैं। यह निर्माण भी करदाताओं के पैसे से ही हो रहा है। न कि नरेगा की मिट्टी डालकर। लेकिन इस पर न तो वही राजनीतिक दल विरोध कर रहे हैं, न ही जातिवादी मीडिया में “टैक्स के दुरुपयोग” का शोर सुनाई देता है। यह दोहरा मापदंड साफ़ दिखाता है कि समस्या टैक्स के पैसे की नहीं, बल्कि बहुजन महापुरुषों के प्रतीकात्मक सशक्तिकरण की है।
वास्तव में बहन जी का काम केवल निर्माण तक सीमित नहीं था। उन्होंने बहुजन समाज के महापुरुषों को इतिहास के हाशिये से निकालकर सार्वजनिक स्मृति में स्थापित किया। ताकि आने वाली पीढ़ियाँ जान सकें कि इस देश के लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और समानता की लड़ाई में बहुजन समाज का भी निर्णायक योगदान रहा है। इसलिए बहुजन महापुरुषों की मूर्तियों और स्मारकों का विरोध दरअसल इतिहास, सम्मान और समानता के अधिकार का विरोध है। और यही इस पूरे विवाद का असली केंद्र है।
जय भीम।।
✍️✍️
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