@HarishKumar4112 Hi there, We’re happy to assist you with your issue. Could you please provide us the trip during which it was lost? This information will help us connect with the right driver to try and locate it. We appreciate you bringing this to our attention. twitter.com/messages/compo…
@Uber marked a complaint regarding mobile phon left in cab yesterday,
Still no response received from uber customer care
Kindly connect immidiatly els a complaint will be loudge in nearest police station
Rishabh
8791976435
इंसाफ नहीं अदल होगा, जब कोई दाढ़ी, टोपी या बुर्क़े वाली प्रधानमंत्री बनेंगे।
ये समय किसी पार्टी को हराने का नहीं बल्कि खुद की लीडरशिप बनाने का है।
और ये होकर रहेगा बस यकीन रखो खुदा के फैसले पर।
"रामायण" लिखकर विदेशी 👹 ब्राह्मणों ने काल्पनिक ⚔️ क्षत्रिय राम द्वारा असली ⚔️ क्षत्रिय मूलनिवासी बुद्ध का ब्राह्मणीकरण कर बुद्ध की समता समानता बंधुत्व न्याय वाली मानवतावादी विचार को खत्म कर भारत का सत्यानाश कर डाला
"विश्वगुरु" सुनील यादव अहीर
डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने अपनी सबसे बड़ी डिग्री D.Sc. (Doctor of Science) मात्र 2 साल और 3 महीने में पूरी कर ली थी,
जबकि इस स्तर की पढ़ाई के लिए आमतौर पर 8 साल का समय लगता है।
नई दिल्ली में आयोजित ’एआई इम्पैक्ट समिट’, जिसमें देश व विदेश के भी काफी प्रमुख लोग आमंत्रित थे तथा यह इवेन्ट अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खि़यों में था, इस दौरान जिन भी लोगों द्वारा अर्द्धनग्न होकर अपना रोष प्रकट किया है जिसमें अधिकतर कांग्रेसी युवा बताये जा रहे हैं, वह अति-अशोभनीय व निन्दनीय है।
अगर यह सम्मेलन अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का नहीं होता तो अलग बात थी, किन्तु समिट के दौरान ऐसा आचरण करना यह चिन्ता की बात है अर्थात अपने देश की गरिमा व इमेज को ना बिगाड़ा जाये तो यह उचित होगा।
@dromsudhaa बाबा साहब के बनाये संविधान को कैसे गलत कह सकते हो मक्कार आदमी
संविधान के अनुसार ही तो कानून बनते है
कानून मे लिखा है तो ठीक ही लिखा है
तुम लोग जान बूझकर बाबा साहब का अपमान कर रहे हो
इस्लाम किसी धार्मिक राज्य की तलाश नहीं करता, बल्कि एक ऐसे समाज की बात करता है जहाँ इंसाफ़ हो, इंसानी गरिमा महफूज़ हो और अमन क़ायम रहे। दिलों की पाकीज़गी और ज़िम्मेदारी का एहसास ही इस्लामी तालीम का बुनियादी पैग़ाम है।
निशब्द हूं
पत्रकार ~लोगों की किस्मत भगवान लिखते हैं ❓
लड़की ~ नहीं अगर लोगों की किस्मत भगवान लिखते
तो 3 साल की बच्ची की किस्मत में रेप नहीं लिखते आगे और पूछने की हिम्मत नहीं हुई पत्रकार चुप चाप मुंह बंद कर लिया 🤫
“जो लोग ऐसा कहते हैं उनसे बोलो मांस ना काटे, बलि अपने बच्चे की दे”
भाई मांस काटने वाला फेकता थोड़े है उसे खाता है, आप तो दूध फेंक रहे इसलिए लोग कहते हैं, पर देखिये जरा नफ़रत कहाँ कहाँ से निकल रही।
@AmbedkariteLk Take the knowledge and perform the retuals
No one is stopping you to enter or perform the specific ritual which they are making,
Only you have to learn the things required to be a brahaman
Baba sahab said learn more and more
And you people dont learn anymore
The practice of giving Brahmins 100% reservation in temples must end. India’s temple economy is worth billions, and people from all castes should have equal opportunities to participate and benefit.
@dromsudhaa@DN_Thakur_Ji बकैत कुछ दिन करके देख ले तेरे स्वयं के धर्म की शक्ति समझ आ जाएगी
बाकि ज़ब तक दूषित सोच वाले लोगो के बीच बैठेगा तो ऐसे ही करता रहेगा
@Ayesha786Majid इस्लाम हिस्सेदारी सिखाता है
सियासत मे, घर मे, मुल्क के बतवारे मे
वही सनातन जिम्मेदारी सिखाता है
समाज के लिए, परिवार के लिए, देश के लिए
इतना सा फर्क ही काफ़ी है
ब्राह्मणों ने इतिहास को अपनी सुविधा से लिखा और मनमाने ढंग से गढ़ा है।
उदाहरण देखिए:
सबको बताया जाता है कि 1857 में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों से डटकर मुकाबला किया।
लेकिन सच यह है कि जब अंग्रेजों ने झांसी किले पर अंतिम हमला किया, तब रानी लक्ष्मीबाई डर गई थीं और महल से भागने की तैयारी कर रही थीं।
उसी वक्त वीरांगना झलकारी बाई (जो पासी समाज की थीं और रानी की हमशक्ल थीं) ने रानी के कपड़े पहने, खुद को रानी लक्ष्मीबाई बताकर किले की कमान संभाली, अंग्रेजों से लोहा लिया और दुश्मन को घंटों उलझाए रखा।
इसी बीच असली रानी लक्ष्मीबाई को सुरक्षित महल से निकालकर भगाया गया। झलकारी बाई अंत तक लड़ती रहीं और वीरगति को प्राप्त हुईं।
आज भी ब्राह्मण-लिखित इतिहास में झलकारी बाई को महज “रानी की सखी” बताया जाता है, जबकि सच यह है कि झांसी की आखिरी लड़ाई झलकारी बाई ने लड़ी थी, रानी लक्ष्मीबाई ने नहीं।
वीरांगना झलकारी बाई पासी को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि प्रणाम 🙏🙏🙏
जय भीम, जय पासी, जय बहुजन