100% सही, मैंने खुद तीन ताल देखना शुरू किया था फिर मैने पुराना एपीसोड देखे बाबा जो थे वो सवाल भी उठते थे और पुरानी सरकार में जो अच्छे काम हुए है उसी सराहना भी करते थे तो उन्हें निकाल दिया गया क्योंकि वो ताऊ का प्रोपेगंडा रियल टाइम में ध्वस्त कर देते थे अब तो खुलो छूट है, सरकार के हर कृत्य को सही ठहराना यही @kamleshksingh का उद्देश्य है, @kuldeepmishra की आत्मा अभी मेरी नहीं है बस मजबूर है फिर भी वे जितना हो सके निष्पक्ष रहने की कोशिश करता है बाकी हैं तो चैनल के गुलाम, जब PR का ठेके ले लिया है तो करना तो पड़ेगा ही
नैरेटिव कैसे बनता है देखिए...
आजतक रेडियो पर तीन ताल नाम के शो में 4 बुद्धिजीवी बंगाल इलेक्शन का विश्लेषण कर रहे हैं जिसमें ओझा सर भी शामिल हैं।
इन चारों ने पूरे 25 मिनट इस पर बात की, कि बंगाल में बीजेपी की जीत के फैक्टर क्या हैं और पूरे टाइम सिर्फ तारीफें करते रहे एक बार भी नहीं कहा कि उसकी जीत के फैक्टर में भर-भरकर बेईमानी थी चुनाव आयोग का पूरी तरह से एकतरफा रवैया था, 90 लाख लोगों का वोट काटना था, सेंट्रल फोर्स के दम पर दादागिरी करना था।
बुद्धिजीवियों का काम होता है अपनी बुद्धि का प्रयोग करके आम लोगों तक सच पहुंचाना उन लोगों तक जिनकी जिंदगी सिर्फ कमाने और खाने में ही खर्च हो रही है लेकिन हमारे यहां ज्यादातर बुद्धिजीवी अपनी बुद्धि का प्रयोग बीजेपी के लिए नैरेटिव बनाने में ही खर्च कर रहे हैं...
अगर ये लोग सोचते हैं कि ये व्यंग्य करके हंसते हुए दोहे सुनाकर किसी का पक्ष लेंगे और लोगों को पता नहीं चलेगा तो ये इनकी गलतफहमी है हम सब समझ रहे हैं।