Johan Liebert⚡️

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Johan Liebert⚡️

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@Jatav____

Ambedkarism | Nihilism | Buddhism | Kabir | Ravidas | Kanshiram

Czech Katılım Eylül 2019
467 Takip Edilen230 Takipçiler
Dr Dheeraj K, MD, DM 🇮🇳 🇬🇧 🇦🇺
Reducing outcomes to group privilege and group oppression is likely to make us lose respect for hardworking people and not put the efforts needed to come up in life. Those who are truly privileged can talk like this for brownie points. The underprivileged should never think like that. Best wishes to Johan.
Johan Liebert⚡️@Jatav____

When your both parents are doctors there is no big deal achieving a good rank in any exam. It's just pure privileges. Azadi se pahle jo jameen, paisa inke naam tha bo azaadi ke baad bhi inhi logo pe raha. Nothing big to brag about.

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Johan Liebert⚡️
Johan Liebert⚡️@Jatav____·
@normal_saline_ If God gives to those who deserve why be a doctor and come in a way of God. Let the God decide who he/she want to let die or let live. Then let rapist roam around freely??Low iq aand.
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boldtype
boldtype@Qweentessential·
Also as an insider, i want @narendramodi to do heavy income tax crackdowns on doctors running their own practices/hospitals after that the neet applicants will go down from 11lakh to 2 lakh 🤣 there’s an imaginary ache din inflation in the minds of kids
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Anupriya Singh
Anupriya Singh@cricketwoman·
Why nobody does hunger strike against reservation?
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Bahujansenaa💙☸️
Bahujansenaa💙☸️@Bahujansenaa·
कुछ लोग मुझे DM में गाली दे रहे है !! कारण बस यह है कि मै पार्टियों से हटकर पहले समाज और महापुरूषों का हो रहे अपमान पर आवाज उठाता हु !! यही दिन देखने के लिए पैदा हुआ था क्या की मा बहन की गाली खाऊं ? मै अपना कम पूरी निष्ठा के साथ करता रहूंगा तुम्हारी गाली से घंटा फर्क नहीं पड़ता मुझे !! @SurajKrBauddh @vkjatav84
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Vikas Kumar Jatav
Vikas Kumar Jatav@vkjatav84·
क्या कभी किसी ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य पँजाबी व अन्य सामान्य को आर्टिकल 30 के अल्पसंख्यक आरक्षण का विरोध करते देखा? ************************************** आजम खान की यूनिवर्सिटी चर्चा में है। यह प्राइवेट अल्पसंख्यक यूनिवर्सिटी है लेकिन राज्य सरकार का कहना है की इसपर 3 हजार करोड़ रुपया खर्च हुआ।। इस यूनिवर्सिटी में; "50% शीट अल्पसंख्यक वर्ग के लिए आरक्षित रहेगी। क्योंकि अल्पसंख्यक कोटा में 50% शीट अल्पसंख्यक के लिए आरक्षित की जा सकती है। इनमे अगर सरकार सहायता भी देगी अथार्त प्रोफेसर्स से लेकर माली तक कि सैलरी सरकार देगी तब भी प्रोफेसर्स से लेकर माली तक कि नियुक्ति का 100% आरक्षण अल्पसंख्यक कमेटी के पास होगा और चाहे सरकार सैलरी दे रही हो, 3 हजार करोड़ इसे बनाने में खर्च किया, तब भी एससी/एसटी/ओबीसी और इंहा तक कि EWS का आरक्षण इंहा लागू नही होगा" अब यह अनुसुचित जाति के कट्टर हिन्दू धार्मिक से सवाल है कि क्या कभी किसी; 1.ब्राह्मण 2.क्षत्रिय 3.वैश्य 4.पँजाबी से लेकर अन्य द्वारा भारत के इस सब्सि बेहतरीन आरक्षण का विरोध करते देखा है? मुझे सिर्फ एक आंदोलन बता दीजिए जो इसके खिलाफ कभी इन सभी वर्गों ने किया हो? मेने लिखा कि ; "100 साल के क्रिकेट के इतिहास में एक भी अनुसुचित जाति/जनजाति का खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट टीम में नही हुआ। केवल बालू पलवनकर अंग्रेजो के समय हुए (काम्बली भंडारी, रिंकू ओबीसी नाई है)" अब इसमे मेने क्या विवादित कह दिया। क्या केंद्र सरकार का यह कार्य नही है कि इस पर रिसर्च करे कि क्या कारण हो सकते है कि एक भी खिलाड़ी देश की 27% जनसँख्या वाली एससी/एसटी में से नही हुआ। सरकारों का यह कार्य है। अब कमेंट बॉक्स में; "सामान्य वर्ग के मुझे गालिया दे रहे थे। एससी/एसटी को भला बुरा कह रहे थे। जिसमें 90% से ऊपर अकेले ब्राह्मण वर्ग के है" जबकिं; "भारतीय क्रिकेट में मुस्लिम के लिए अघोषित आरक्षण है। आप 50 साल की टीम देखिए।।उसमे हर सेलेक्शन में सेलेक्शन करने वालो ने 2 तक मुस्लिम खिलाड़ी रखे है। हर सेलेक्शन में रखे है। अब 6 या ज्यादा क्यो नही, या एक भी क्यो नही, अगर पैमाना योग्यता है? क्योंकि उन्हें एक बैलेंस बनाना है, इसी बैलेन्स को अघोषित आरक्षण कहते है" क्या कभी; "सामान्य वर्ग के व्यक्ति ने इस अघोषित आरक्षण का विरोध किया है। सामने है। दिया जा रहा है। लेकिन नही किया" इन वर्गों के टारगेट में "आर्टिकल 30 का अल्पसंख्यक जिसमे 90% से ऊपर मुस्लिम यूज करता है" नही रहता है। इनके टारगेट पर; 1.अनुसुचित जाति को मिल रहा मामूली सा प्रतिनिधित्व रहता है। 2.अनुसुचित जनजाति का प्रतिनिधित्व रहता है। जबकिं दिखाने के लिए "मुस्लिम दुश्मन" व एससी/एसटी हिन्दू भाई। इस स्तर तक एससी/एसटी नही सोचते है। उनके संगठनों में तार्किकता नही है। उन्हें जँहा सरकार से 100 रुपया मिलना चाहिए, उन्हें 20 दिया जाता है, उसी पर सामान्य वर्ग हाय तौबा कर देते है जिससे वो इस 20 रुपया के इर्दगिर्द ही आंदोलन करता है, जबकिं उसे पता भी नही की उसे इस 20 रुपया के इर्दगिर्द इसलिए इसमे उलझाया गया है जिससे वो 100 रुपया की मांग न करे। जबकिं अल्पसंख्यक को 100 की जगह 200 रुपया दिया गया, उसपर न तो किसी ब्राह्मण को, न क्षत्रिय को, न वैश्य को और न ही पँजाबी से लेकर अन्य सामान्य वर्ग को दिक्कत है।। बाबा साहब इसे जानते थे। इसलिए वो आरक्षण नही बल्कि साइमन कमीशन को यह समझाने में सफल रहे कि एससी/एसटी को ब्राह्मण धर्म से अलग मानकर सिख, मुस्लिम की तरह अलग निर्वाचन मण्डल दो। जो मिल रहा था। लेकिन गाँधी इसके विरोध में पुणे की जेल में मरने की हालत तक धरना दे दिए और जबरदस्ती एससी/एसटी को ब्राह्मण धर्म से जोड़कर चले गए। जिसके कारण आज तक इन वर्गों को भुगतना पड़ रहा है।। गांधी ऐसा न करते तो आज जिस प्रकार आजम की यूनिवर्सिटी पर 3 हजार करोड़ सरकार ने बहाया, अल्पसंख्यक आरक्षण में 50% एडमिशन व 100% पद भरने का आरक्षण मिल रहा है, वो एससी/एसटी को भी मिलता, जिसके सामने वर्तमान का सरकारी नौकरी का आरक्षण 20% भी महत्व नही रखता है।। एससी/एसटी जब तक एक अलग पक्ष नही बनेगा तब तक इसी प्रकार घाटे में रहेगा। विकास कुमार जाटव
Vikas Kumar Jatav tweet media
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Johan Liebert⚡️
Johan Liebert⚡️@Jatav____·
Ankhey kholo mere samaj ke jahilo.
Vikas Kumar Jatav@vkjatav84

क्या कभी किसी ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य पँजाबी व अन्य सामान्य को आर्टिकल 30 के अल्पसंख्यक आरक्षण का विरोध करते देखा? ************************************** आजम खान की यूनिवर्सिटी चर्चा में है। यह प्राइवेट अल्पसंख्यक यूनिवर्सिटी है लेकिन राज्य सरकार का कहना है की इसपर 3 हजार करोड़ रुपया खर्च हुआ।। इस यूनिवर्सिटी में; "50% शीट अल्पसंख्यक वर्ग के लिए आरक्षित रहेगी। क्योंकि अल्पसंख्यक कोटा में 50% शीट अल्पसंख्यक के लिए आरक्षित की जा सकती है। इनमे अगर सरकार सहायता भी देगी अथार्त प्रोफेसर्स से लेकर माली तक कि सैलरी सरकार देगी तब भी प्रोफेसर्स से लेकर माली तक कि नियुक्ति का 100% आरक्षण अल्पसंख्यक कमेटी के पास होगा और चाहे सरकार सैलरी दे रही हो, 3 हजार करोड़ इसे बनाने में खर्च किया, तब भी एससी/एसटी/ओबीसी और इंहा तक कि EWS का आरक्षण इंहा लागू नही होगा" अब यह अनुसुचित जाति के कट्टर हिन्दू धार्मिक से सवाल है कि क्या कभी किसी; 1.ब्राह्मण 2.क्षत्रिय 3.वैश्य 4.पँजाबी से लेकर अन्य द्वारा भारत के इस सब्सि बेहतरीन आरक्षण का विरोध करते देखा है? मुझे सिर्फ एक आंदोलन बता दीजिए जो इसके खिलाफ कभी इन सभी वर्गों ने किया हो? मेने लिखा कि ; "100 साल के क्रिकेट के इतिहास में एक भी अनुसुचित जाति/जनजाति का खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट टीम में नही हुआ। केवल बालू पलवनकर अंग्रेजो के समय हुए (काम्बली भंडारी, रिंकू ओबीसी नाई है)" अब इसमे मेने क्या विवादित कह दिया। क्या केंद्र सरकार का यह कार्य नही है कि इस पर रिसर्च करे कि क्या कारण हो सकते है कि एक भी खिलाड़ी देश की 27% जनसँख्या वाली एससी/एसटी में से नही हुआ। सरकारों का यह कार्य है। अब कमेंट बॉक्स में; "सामान्य वर्ग के मुझे गालिया दे रहे थे। एससी/एसटी को भला बुरा कह रहे थे। जिसमें 90% से ऊपर अकेले ब्राह्मण वर्ग के है" जबकिं; "भारतीय क्रिकेट में मुस्लिम के लिए अघोषित आरक्षण है। आप 50 साल की टीम देखिए।।उसमे हर सेलेक्शन में सेलेक्शन करने वालो ने 2 तक मुस्लिम खिलाड़ी रखे है। हर सेलेक्शन में रखे है। अब 6 या ज्यादा क्यो नही, या एक भी क्यो नही, अगर पैमाना योग्यता है? क्योंकि उन्हें एक बैलेंस बनाना है, इसी बैलेन्स को अघोषित आरक्षण कहते है" क्या कभी; "सामान्य वर्ग के व्यक्ति ने इस अघोषित आरक्षण का विरोध किया है। सामने है। दिया जा रहा है। लेकिन नही किया" इन वर्गों के टारगेट में "आर्टिकल 30 का अल्पसंख्यक जिसमे 90% से ऊपर मुस्लिम यूज करता है" नही रहता है। इनके टारगेट पर; 1.अनुसुचित जाति को मिल रहा मामूली सा प्रतिनिधित्व रहता है। 2.अनुसुचित जनजाति का प्रतिनिधित्व रहता है। जबकिं दिखाने के लिए "मुस्लिम दुश्मन" व एससी/एसटी हिन्दू भाई। इस स्तर तक एससी/एसटी नही सोचते है। उनके संगठनों में तार्किकता नही है। उन्हें जँहा सरकार से 100 रुपया मिलना चाहिए, उन्हें 20 दिया जाता है, उसी पर सामान्य वर्ग हाय तौबा कर देते है जिससे वो इस 20 रुपया के इर्दगिर्द ही आंदोलन करता है, जबकिं उसे पता भी नही की उसे इस 20 रुपया के इर्दगिर्द इसलिए इसमे उलझाया गया है जिससे वो 100 रुपया की मांग न करे। जबकिं अल्पसंख्यक को 100 की जगह 200 रुपया दिया गया, उसपर न तो किसी ब्राह्मण को, न क्षत्रिय को, न वैश्य को और न ही पँजाबी से लेकर अन्य सामान्य वर्ग को दिक्कत है।। बाबा साहब इसे जानते थे। इसलिए वो आरक्षण नही बल्कि साइमन कमीशन को यह समझाने में सफल रहे कि एससी/एसटी को ब्राह्मण धर्म से अलग मानकर सिख, मुस्लिम की तरह अलग निर्वाचन मण्डल दो। जो मिल रहा था। लेकिन गाँधी इसके विरोध में पुणे की जेल में मरने की हालत तक धरना दे दिए और जबरदस्ती एससी/एसटी को ब्राह्मण धर्म से जोड़कर चले गए। जिसके कारण आज तक इन वर्गों को भुगतना पड़ रहा है।। गांधी ऐसा न करते तो आज जिस प्रकार आजम की यूनिवर्सिटी पर 3 हजार करोड़ सरकार ने बहाया, अल्पसंख्यक आरक्षण में 50% एडमिशन व 100% पद भरने का आरक्षण मिल रहा है, वो एससी/एसटी को भी मिलता, जिसके सामने वर्तमान का सरकारी नौकरी का आरक्षण 20% भी महत्व नही रखता है।। एससी/एसटी जब तक एक अलग पक्ष नही बनेगा तब तक इसी प्रकार घाटे में रहेगा। विकास कुमार जाटव

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Rahul sonpimple
Rahul sonpimple@Sonpimplerahul·
Saumya Barmate explores how Rahul Mishra’s ‘Devi’ collection at Paris Haute Couture Week casually absorbed Buddhist heritage into a generic Hindu visual default. Read the full article on our website theambedkarianchronicle.in/ajantas-buddhi…
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Johan Liebert⚡️ retweetledi
Johan Liebert⚡️ retweetledi
Gems of Broominism
Gems of Broominism@Jaatankwadiyah·
devotees in Puri who were standing in a temple queue didnt hesitate to loot a poor food vendor. this brings a grave question on the hindu morality
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Johan Liebert⚡️ retweetledi
Clark Kent
Clark Kent@Maverick120832·
The self proclaimed Ambedkarite middle class should be blamed for the death of the Ambedkarite and Buddhist movement, whose entire narrative revolves around reservation while showing little concern for landless labourers and the issues they face
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Lawyers dice
Lawyers dice@Serenity2601026·
हिंदू धर्म गरीब दलित-वंचितों को इतना मंदबुद्धि बना देता है,कि बिना आरक्षण के वो कोई भी परीक्षा पास नहीं कर पाते..! हिंदू खुद तो इन सब चक्करों में नहीं पड़ते, लेकिन गरीबों को धर्म के जाल में इस तरह फंसा के रखते हैं, ताकि वह हमेशा उनके मंदबुद्धि गुलाम बनके रहे..!
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Johan Liebert⚡️
Johan Liebert⚡️@Jatav____·
@theskindoctor13 This person as a doctor defending the one who sales and leaks the neet exam, a medical entrance exam. And mocking those who demand accountablity. Wah
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THE SKIN DOCTOR
THE SKIN DOCTOR@theskindoctor13·
What if Sonam Wangchuk went on another hunger strike, but this time demanding the abolition of the reservation? Would he get support from celebrities? Would Instagram influencers run campaigns urging the govt to listen to him? Not at all. If anything, he might be physically attacked, and the govt would arrest him for provoking public sentiment and inciting riots. Nobody would call the govt 'oppressive' that time. Essentially, neither his hunger strike nor his life is what truly matters; only the narrative matters. All of this emotional appeal to rally behind him is not for his sake, but for the sake of the narrative. His supposedly good image among the youth is merely a smokescreen to obscure the agenda driving him forward. Such kind of support is always transactional. The moment the asset stops serving the ideological goals of the narrative-creators, his moral immunity will be revoked, his 'good image' will be dismantled overnight, and the very same crowd that idolises him would abandon him.
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Johan Liebert⚡️
Johan Liebert⚡️@Jatav____·
True that
Tony Bekkal 🐘@tonybekkal

సెక్యులర్ ముసుగు వేసుకున్న దోపిడీ కులాల అసలు రంగు ఇలానే బయటపడుతుంది. కునాల్ కమ్రా టీ-షర్ట్‌పై ఉన్న వాక్యం చదవండి: "అర్హతలు లేనివారు కూడా గాంధీని విమర్శిస్తారు." ఈ మాట ఎంత అహంకారపూరితంగా ఉందో ఆలోచించండి. గాంధీని అత్యంత తీవ్రంగా, తాత్వికంగా విమర్శించిన వ్యక్తి డాక్టర్ బాబాసాహెబ్ అంబేద్కర్. ఈ లెక్కన గాంధీని విమర్శించే అర్హతే లేదని చెప్పడం అంటే, అంబేద్కర్ ను తక్కువ చేయడమే కాదా! అంబేద్కర్ ఆలోచనలను గౌరవించే ప్రతి అంబేడ్కరిస్ట్ గాంధీని విమర్శించే హక్కును, అవసరాన్ని గుర్తిస్తాడు. అందుకే ప్రశ్న ఒక్కటే.. గాంధీపై ఇంత గుడ్డి భక్తి ప్రదర్శించే కునాల్ కమ్రా నిజంగా అంబేద్కర్ ఆలోచనల పక్షాన ఉన్నాడా? లేక సెక్యులరిజం పేరుతో బ్రాహ్మణీయ రాజకీయాలను కాపాడుతున్నాడా?

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Tony Bekkal 🐘
Tony Bekkal 🐘@tonybekkal·
సెక్యులర్ ముసుగు వేసుకున్న దోపిడీ కులాల అసలు రంగు ఇలానే బయటపడుతుంది. కునాల్ కమ్రా టీ-షర్ట్‌పై ఉన్న వాక్యం చదవండి: "అర్హతలు లేనివారు కూడా గాంధీని విమర్శిస్తారు." ఈ మాట ఎంత అహంకారపూరితంగా ఉందో ఆలోచించండి. గాంధీని అత్యంత తీవ్రంగా, తాత్వికంగా విమర్శించిన వ్యక్తి డాక్టర్ బాబాసాహెబ్ అంబేద్కర్. ఈ లెక్కన గాంధీని విమర్శించే అర్హతే లేదని చెప్పడం అంటే, అంబేద్కర్ ను తక్కువ చేయడమే కాదా! అంబేద్కర్ ఆలోచనలను గౌరవించే ప్రతి అంబేడ్కరిస్ట్ గాంధీని విమర్శించే హక్కును, అవసరాన్ని గుర్తిస్తాడు. అందుకే ప్రశ్న ఒక్కటే.. గాంధీపై ఇంత గుడ్డి భక్తి ప్రదర్శించే కునాల్ కమ్రా నిజంగా అంబేద్కర్ ఆలోచనల పక్షాన ఉన్నాడా? లేక సెక్యులరిజం పేరుతో బ్రాహ్మణీయ రాజకీయాలను కాపాడుతున్నాడా?
Tony Bekkal 🐘 tweet media
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Johan Liebert⚡️
Johan Liebert⚡️@Jatav____·
@neha_laldas This protest needs to be supported by doctors and neet aspirants, and mbbs students. But these people are cowards. Let alone supporting I have seen most them mocking. Phir bolte hain humare liye to koi bolta hi nahi. Salo kon bolega tum khud bolo na. #neet26 #jantarmantar
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Dr. Neha Das
Dr. Neha Das@neha_laldas·
CJP is an ambedkarite movement. It supports UGC guidelines. It supports reservation. It is taking support of Shaheen bag supporters, Azadi supporters, Marxists, communists, separatists, free palestine supporters. Not sure how it helps GC in any way. They are just taking advantage of the situation to further their own political agenda. So I don't support CJP. That's my stand. Hope that's very clear. Thank you 🙏
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