Kainthola
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जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने कहा कि गोरखपुर से गोविष्टि यात्रा शुरू करने से पहले उन्हें धमकियां मिली. किसी के माई के लाल में हिम्मत नहीं है कि उन्हें मरवा दे. कोई पार्टियां उन्हें मरवाएंगी, तो सत्ता से बेदखल हो जाएंगी. वे गोरखपुर की निडर जनता का सम्बोधन नहीं कर पाए हैं. निडर और डरी जनता के बारे में बोलना पड़ रहा है. क्योंकि डराया जा रहा है. उन्होंने कहा- "सत्ता हमको डरा रही है. खूब धूप होगी, लेकिन आज देखिए मौसम कि परम् सत्ता हमारे साथ है. गाय की रक्षा करना है. गाय को माता कहकर पुकारा नहीं जा सकता है. उसे मारना तो दूर उसका किसी भी तरह अनादर नहीं कर सकते हैं. क्या पाकिस्तान में उनके लिए कोई मांग रखें, तो क्या सरकार सुनेगी नहीं. क्या ईसाईयों की उनके देश में उनकी नहीं सुनी जाएगी, लेकिन भारत में गो माता की रक्षा की बात भारत की सरकार नहीं सुनती है. इसका मतलब भारत हिन्दू राष्ट्र नहीं है."
#Avimukteshwaranand #UP #Gorakhpur #ABPNews

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@indreshmaikhuri प्रतिभा और योग्यता के अनुरूप यदि किसी को कोई कार्य या पद प्राप्त होता है सबको खुश होना चाहिए! उत्तराखंड के लिए तो यह और भी गर्व का क्षण है!
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@AbhishekVermaX It is a very powerful Stotra! Here, the rendering appears to be perfect but orchestra shouldn't drown the voice! Production part needs to be reviewed!
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@AHindinews माननीय उच्चतम न्यायालय का निर्णय अपने स्थान पर है! परन्तु भारत का अधिकांश जन मानस क्या सोचता है यह भी महत्वपूर्ण है! अग्रिम जमानत पर प्रसन्न यह व्यक्ति उन राजनीतिज्ञों में से है जो अधिकतर झूठप्रपंच और निहायत ही भद्दी घिनौनी टिप्पणियों से अपने राजनीतिक विरोधियों पर चोट करते हैं!
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#WATCH दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मिलने पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने मुझे जमानत दी। उस जमानत से पूरे देश को एक साफ़ संदेश जाता है कि जब भी किसी आम नागरिक के अधिकारों का हनन सरकार के द्वारा किया जाता है, तब बाबा साहेब अंबेडकर का संविधान उसकी रक्षा में जरूर आता है। मेरी रक्षा में भी आया।"
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@Baliyan_x E.C.I. has done a very commendable job in West Bengal for a free and fearless election! Goondaism and unlawful activities, anywhere, need to be crushed with full might!
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इस बार वाला CEC इतिहास में दर्ज होगा।
फलता विधानसभा, जिसमे आज महिलाओं ने TMC के गुंडों पर उन्हें डराने धमकाने का आरोप लगाया उस पूरी विधानसभा का चुनाव रद्द कर दिया गया है।
डराने वाले गुंडों को उल्टा लटकाकर सीधा करने के बाद 21 मई को इस विधानसभा के सभी बूथ पर फिर से वोटिंग करवायी जाएगी।
ये बहुत कम बार देखा गया है, जब ECI ने इतनी सख्ती दिखायी है- लाजवाब काम 👏👏
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@yadavakhilesh बहुत ही दुखद !!! ग़रीब के लिए नियम क़ानून बहुत सख्त हैं! इस तरह का साक्ष्य हमारी संवेदनहीन व्यवस्था पर बहुत गहरी चोट है! परन्तु लगता नहीं इन अभावग्रस्त लोगों के लिए कुछ बदलेगा!
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@abhijitmajumder He is an M. P., a Lawyer, also a Mimic, wild and rowdy! Loyal to his Master and fiercely unkind to his political opponents!
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@jpsin1 स्वतंत्र भारत में प्रभावशाली राजनीतिज्ञों ने अपने शाही अंदाज में न केवल देश को लूटा है, बल्कि जंगल पहाड़ और नदियों को भी बड़ी बेदर्दी से अपने पांवों तले रौंदा है! इनके पालतू पिल्ले इनके लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं! आज भी कई प्रदेशों में इसी प्रकार की खुलेआम डकैती चल रही है!
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प्रियंका वाड्रा का बंगला शिमला से बाहरी इलाके में जंगलों और पहाड़ पर स्थित है
प्रियंका वाड्रा कानून के तहत यहां मकान नहीं बना सकती थी ना जमीन खरीद सकती थी
लेकिन हिमाचल प्रदेश सरकार यानी उस वक्त के वीरभद्र सिंह ने सिर्फ और सिर्फ प्रियंका वाड्रा के लिए कैबिनेट की विशेष मीटिंग बुलाकर प्रियंका वार्ड्रा के लिए नियम एक दिन के लिए बदल दिए ताकि प्रियंका वाड्रा रजिस्ट्री करा सके
उसके बाद वन विभाग के नियमों में छूट दी गई और यहां स्थित हजारों पेड़ों को काटने की इजाजत दिया गया तथा ब्लास्ट करके पहाड़ों को समतल करने की इजाजत दिया गया जो आज तक शिमला में किसी के साथ नहीं किया गया
उसके बाद जब प्रियंका वाड्रा के सपनों का शीशमहल बना रहा था तब कई बार सोनिया गांधी और प्रियंका वाड्रा उसका निरीक्षण करने जाती थी तब हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह किसी चपरासी की तरह हाथ बंधे वहां खड़े रहते थे जैसे पूछते हो मैडम और बताइए और आपके लिए मैं नियम में क्या बदलाव कर दूं
प्रियंका वाड्रा ने अपने सपनों का यह शीश महल में देवदार और चीड़ की लकड़ी का काफी इस्तेमाल किया है यह बंगला पहाड़ी शैली का बना है और इसे बनाने में करीब 800 चीड़ के पेड़ काटकर उनकी लकड़ी का इस्तेमाल किया गया है
और हां आज यही प्रियंका और यही राहुल गांधी पर्यावरण बचाने निकले हैं
मतलब यह दोगले यह चाहते हैं कि यह कॉर्पोरेट जेट में घूमें यह हजारों गाड़ियों का काफिला लेकर चलें यह अपने सपनों के महल को बनाने के लिए हजारों पेड़ काटे पहाड़ी को विस्फोट से उड़ाए तब ठीक है
लेकिन भारत सरकार भारत की सुरक्षा के लिए नेबल बेस आर्मी बेस और एयर फोर्स बेस ना बनाएं


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@Profdilipmandal एक ये गांधी हैं और एक और गांधी था, निखालिस, फकीरी में जीने वाला!
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प्रियंका गांधी का हिमाचल प्रदेश में एक महल है. डेढ़ एकड़ में फैला हुआ. ये मकान जहां बना है, वहां किसी समय में घने जंगल हुआ करते थे. इसका मतलब ये नहीं है कि ये महल गिराकर वहां जंगल लगा दिया जाए.
जंगल काटकर ही विकास और मानव सभ्यता यहां तक पहुंची है. पेड़ काटकर ही खेत बने, गांव बसे. हम सबके घर ऐसे ही बने हैं. करना पड़ता है. एक संतुलन चाहिए. अभी का नियम है कि जितने पेड़ काटो, उतने पेड़ कहीं और लगाओ. निकोबार प्रोजेक्ट में इसका ध्यान रखा गया है. जितने कटेंगे, उससे ज्यादा पेड़ लगाए जाएंगे.
लेकिन पेड़ कटने आधार पर पोर्ट, हवाई अड्डे, रहने के मकान और बिजलीघर का विरोध पाप है. अपराध है.
#पोर्ट_वहीं_बनाएंगे

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@janardanspeaks बी जे पी का ' सबका साथ ' एक तरफा है! जो लोग सरकार का साथ नहीं देते, कई अवसरों पर देश के विरुद्ध खड़े नज़र आते हैं, उन्हें सरकारी सुविधाओं का मुफ्त लाभ क्यों मिलना चाहिए!
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बंगाल के मुस्लिम बाहुल्य इलाकों की रिपोर्टिंग देखी
एक नहीं कई सारे चैनलों की
मेरी नजर मुस्लिम महिलाओं पर थी, मै एक खास चीज नोट कर रहा था
सभी की सभी मुस्लिम महिलाएं यानी हंड्रेड परसेंट ये चाहती हैं कि भाजपा की सरकार किसी भी कीमत पर न आए
वुमेन सेफ्टी के सवाल पर अधिकांशतः का जबाब है कि ममता दीदी के राज में बंगाल में महिलाएं अन्य राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा सुरक्षित है
एक भी महिला ऐसी नहीं दिखी जो कह रही हो कि मोदी ने तीन तलाक़ हटाया था इसलिए मेरा वोट उनको
बंगाल ही नहीं हर राज्य में मुस्लिम मतदाता 99.99 प्रतिशत भाजपा के खिलाफ वोट करते है
लेकिन फिर भी भाजपा इस उम्मीद में कि -- दिल कहता है एक दिन हसीना मान जाएगी
लगी पडी़ है
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@mohitdimriuk उत्तराखंड में आरम्भसे ही निकम्मी सरकारें रहीहैं!मंत्री,अफसर अपने हित साधनमें ही लगेरहे हैं!आजभी वहीहाल है!न पहाड़ की ज़मीन की रक्षा कर पा रहेहैं और न इकोलॉजी की!बेलगाम टूरिज्म से गुंडागर्दी,पॉल्यूशन बढ़ रहा है! प्रदेशका युवक चायपकौड़ी बेच रहा है और नेताओंके चहेते मोटे हो रहे हैं!
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@janardanspeaks वाह क्या बात है!!! जजों की ऐसी पीठ की कल्पना तो संभवतः माननीय उच्चतम न्यायालय भी नहीं कर पाएगा!
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आज केरीवाल के संजयसिंह के साथ राजघाट बापू की समाधि पर दर्शन के लिए जाते ही केजरीवाल की सत्याग्रह की धमकी से डरकार आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा।
अब केजरीवाल के केस की सुनवाई के लिए नए सरकार ने जजों की नियुक्ति की लिस्ट जारी कर दी गई है जो इस प्रकार है...
दिल्ली हाई कोर्ट की जज होंगी आतिशी मार्लेना।
जबकि
डबल बेंच के जज होंगे संजयसिंह और सौरभ भारद्वाज।
सुप्रीम कोर्ट के जज होंगे सुनीता केजरीवाल, सत्येंद्र जैन, भगवतमान
और
अमानतुल्लाह खान। 😂😂
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@TejashwiYdvRJD Bharat ke paas, durbhagy se patience bahut adhik hai! Bhrasht, badzuban, gaalibaaz politicians khub khel rahe hain, panap rahe hain ! China ya North Korea jaisi sarkaren yadi desh mein rule kartin to is Bimari ka ilaaj bahut jald hojata!
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@KaurageousDils After polluting Delhi, he is trying to pollute, pious serene atmosphere of Rajghat! Gandhi ji not in peace even after his death!
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@GaonPrahari यही हो जीवन की सत्य कथा! अंदर तक छूने वाली, कचोटने वाली! अधिकांश लोगों के जीवन में सबसे कठिन अवसरों पर कोई न कोई ऐसा व्यक्ति हमारे साथ खड़ा मिलता है जो एक फरिश्ता सा होता है! न खून का रिश्ता न दोस्ती! ये ही वे लोग हैं जो ज़िंदगी को सही अर्थ देते हैं,!
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समय निकालकर पढ़िए, जीवन का अर्थ समझ में आ आएगा।
कहानी ख़त्म हुई….
मैं ओला चलाता हूँ। ज़्यादातर नाइट शिफ्ट करता हूँ। पिछले हफ्ते रात 11 बजे एक बुज़ुर्ग सज्जन को उठाया। सफ़ेद पंजाबी धोती, आँखों में थकान लेकिन आवाज़ में अजीब-सी दृढ़ता।
गाड़ी में बैठते ही बोले,
आज रात मुझे पाँच जगहों पर ले चलना होगा । मैं तुम्हें 5000 रुपये दूँगा। नकद, लेकिन अंत तक कारण मत पूंछना।
यह कहकर एक कागज़ आगे बढ़ाया। उस पर पाँच पते लिखे थे ।
पहला पड़ाव-
दक्षिण कोलकाता का एक पुराना घर।
मैंने गाड़ी रोकी। वे उतरे नहीं। सिर्फ़ खिड़की का शीशा नीचे करके देखते रहे। दस मिनट तक।
आँखों से निरंतर आँसू बह रहे थे, लेकिन कोई आवाज़ नहीं।
चलो… अगला।
दूसरा पड़ाव-
एक प्राथमिक विद्यालय। गेट बंद। अंदर अँधेरा मैदान।
वे उतरकर धीरे-धीरे झूले तक गए। एक झूले पर बैठकर हल्के-हल्के झूलने लगे।
बीस मिनट बाद लौटे। बोले -
यहीं पढ़ाता था। तैंतालीस साल। ज़िंदगी का सबसे अच्छा समय यही था।
तीसरा पड़ाव-
एक छोटा पुराना कॉफ़ी हाउस।
अंदर जाकर एक कप चाय मँगाई। कोने की मेज़ पर अकेले बैठे रहे। चाय को छुआ तक नहीं। बस चारों ओर देखते रहे।
पंद्रह मिनट बाद लौटकर हल्के से मुस्कुराए -
यहीं, मेरी और मिताली (उनकी पत्नी) की पहली मुलाक़ात हुई थी। 1969 में।
चौथा पड़ाव-
निमतला श्मशान घाट।
वे उतरे। चिताभस्म के पास एक फ़लक के सामने खड़े होकर धीमे-धीमे कुछ बोलते रहे। मैं सुन नहीं पाया।
आधे घंटे बाद लौटे। आँखें लाल थीं।
आज तीन साल हो गए उसे गए।
पाँचवाँ पड़ाव-
एक बड़ा सरकारी अस्पताल।
गाड़ी पार्क करने को कहा। फिर मेरी ओर देखा -
अब कारण बताता हूँ। मुझे चौथे स्टेज का कैंसर है। डॉक्टर ने कहा है कुछ हफ़्ते… शायद कुछ दिन। आज मैं अपनी पूरी ज़िंदगी आख़िरी बार देख लेना चाहता था।
मैं स्टीयरिंग पर सिर रखकर रोने लगा।
उन्होंने कहा—
वो घर, जहाँ बच्चों को बड़ा किया।
वो स्कूल, जहाँ अपना उद्देश्य पाया।
वो कॉफ़ी हाउस, जहाँ प्यार हुआ।
वो श्मशान, जहाँ आख़िरी विदाई दी।
और ये अस्पताल जहाँ आज भर्ती होऊँगा। अब घर वापसी नहीं होगी।
उन्होंने मेरे हाथ में 5000/- रुपये रख दिए।
धन्यवाद, तुमने मुझे मेरी ज़िंदगी एक बार फिर घुमा दी। मेरे आख़िरी अजनबी इंसान...जिसने मेरे साथ कोमल व्यवहार किया।
मैंने कहा—
नहीं, ये मैं नहीं ले सकता ।
वे बोले—
लो, देने के लिए मेरा कोई नहीं। बच्चों ने इतनी दूरी बना ली है कि अब वो बात नहीं करते। यार-दोस्त कोई बचा नहीं, एक-एक करके सब विदा हो गये। तुमने तीन घंटे दिए तीन घंटे की इंसानियत। उसकी कीमत पैसे से ज़्यादा है।
छोटा सूटकेस लेकर वे अंदर चले गए।
अगले दिन मैं अस्पताल गया। पूछा, श्री अनिरुद्ध मुखर्जी। केबिन 412।
फूल लेकर अंदर गया। मुझे देखकर मुस्कुराए
तुम आए?
आपको ऐसे छोड़ नहीं पाया।
दो घंटे बातें हुईं, मिताली देवी की, उनके छात्रों की, उनके रूठे हुए बच्चों की।
मैं रोज़ जाने लगा। चाय ले जाता। अख़बार पढ़कर सुनाता। कभी चुपचाप बैठा रहता।
एक दिन बोले
सोचता था अकेला मरूँगा। लेकिन तुम हो। आख़री वक़्त में एक अजनबी, परिवार बन गया। तुम्हें मेरा बहुत-बहुत आशीर्वाद।
मैंने उनका हांथ पकड़ा....
आप अकेले नहीं हैं।
मंगलवार भोर 3 बजकर 17 मिनट पर वे स्वर्ग चले गए।
मैं उनका हांथ पकड़े बैठा था।
आख़िरी शब्द थे—
सबसे कहना… अजनबियों की ओर देखना। सचमुच देखना। हम सब कहीं जा रहे हैं कोई तेज़, कोई धीरे। जाते हुए राह में दया करना। तुमने की। तुमने मेरे आख़िरी दिनों को जीने लायक बना दिया।
मॉनिटर की आवाज़ सीधी रेखा बन गई।
श्मशान में उनके दाह-संस्कार के समय थे, कुल छः लोग -
मैं,
तीन नर्स,
एक वकील,
और एक पूर्व छात्र।
43 साल की शिक्षकी।
52 साल का दांपत्य।
81 साल की ज़िंदगी।*
6 लोग।
मैंने कहा—
अनिरुद्ध बाबू ने मुझे सिखाया-
हर अजनबी किसी का पूरा संसार होता है।
हर यात्री एक कहानी है।
हर इंसान जी रहा है, मर रहा है, इंतज़ार कर रहा है, कोई उसे देखे।
उन्होंने मुझे 5000/- रुपये दिए थे जीवन की सड़क पर गाड़ी चलाने के लिए।
लेकिन जो शिक्षा दी, उसकी कीमत पैसे से कहीं ज़्यादा है।
मानवता कोई *अतिरिक्त चीज़ नहीं। यही सब कुछ है।
आज भी वो 5000/- रुपये मेरे ग्लव बॉक्स में रखे हैं। खर्च नहीं किए।
क्योंकि हर यात्री शायद अपनी आख़िरी यात्रा पर हो। हर अजनबी शायद आख़िरी विदाई दे रहा हो।
इसलिए अब मैं अलग तरह से गाड़ी चलाता हूँ।
पूंछता हूँ। सुनता हूँ। लोगों को देखता हूँ।
क्योंकि एक बुज़ुर्ग शिक्षक ने एक कोमल रात माँगी थी-और एक अजनबी रुक गया था।
निशब्द क्षण, अनकहा सत्य।
कहानी खत्म हुई😥
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@awesh29 @KapilSibal बर्दाश्त नहीं है! मोदी बर्दाश्त नहीं है! भारत और भारतीय आस्था से प्यार करने वाला कोई भी बर्दाश्त नहीं है!
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कपिल सिब्बल जी @KapilSibal की भविष्यवाणी सुनिए। यह भविष्यवाणी देश के हर सामान्य समझ रखने वाले आदमी की भी है जो देश का मतलब समझता है।
संविधान संसद और अदालतों की चौखट के भीतर चीख रहा है भाजपा अट्टहास कर रही है, विपक्षी नेता नंगे होकर बिकने को तैयार खड़े हैं।
कपिल जी का दुख और क्षोभ हर हिंदुस्तानी का दुख है। देश में जो कुछ हो रहा है इसके लिए कार्यपालिका न्यायपालिका और भाजपा तीनों बराबर की जिम्मेदार हैं लेकिन इससे जनता की जवाबदेही खत्म नहीं हो जाती।
सच यह है कि जनता को लोकतंत्र के बदन से कपड़ों को उघड़ते दिखने में मजा आने लगा है।यकीनन इसकी जिम्मेदार मीडिया भी है।
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@AHindinews केजरीवाल जी का फैसला तो न्यायालय ही करेगा परन्तु न्यायाधीश उनकी पसंद का होना चाहिए! अच्छा होगा हर कोई भ्रष्ट राजनीतिज्ञ अपनी अपना पसंद का न्यायाधीश चुन ले!
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#WATCH दिल्ली: AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा, "मुझे एक झूठे केस में फंसाया गया और जेल भेज दिया गया। एक चुनी हुई सरकार को गलत तरीके से गिरा दिया गया। हमें कई महीने जेल में रखा लेकिन आखिरकार सच की जीत हुई। कोर्ट ने मुझे पूरी तरह निर्दोष घोषित कर दिया। कोर्ट ने CBI की जांच पर सवाल खड़े किए और जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए। CBI ने तुरंत इस फैसले के हाई कोर्ट में चुनौती दी ये केस जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के सामने लगा। तब मेरे मन में सवाल उठा कि क्या इनके सामने मुझे न्याय मिलेगा?... RSS की जिस विचारधारा वाली सरकार ने झूठे आरोप लगाकर मुझे जेल डाला, जज साहिबा ने स्वयं माना है कि उस विचारधारा से जुड़े संगठन अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के मंचों पर वे कई बार जाती रही हैं। मैं और AAP उस विचारधारा के घोर विरोधी हैं। ऐसे में क्या उनके सामने मुझे न्याय मिल सकता है?"
(वीडियो सोर्स: आम आदमी पार्टी)
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