Surya
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Surya
@Kingsurya818
जब आँख खुले तो धरती हिन्दुस्तान की हो: जब आँख बंद हो तो यादेँ हिन्दुस्तान की हो: हम मर भी जाए तो कोई गम नही लेकिन, मरते वक्त मिट्टी हिन्दुस्तान की हो।
Katılım Ocak 2020
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"मैं अपनी बेटी को जितने चाहे उतने पुरुषों के साथ डेट करने दूंगी। उसे हर किसी से शादी करने की जरूरत नहीं है, वह अपनी मर्जी से नए लोगों को एक्सप्लोर कर सकती है।" - किआरा आडवाणी
इसलिए पुराने समय में लोग ऐसे घटिया मानसिकता वालों को समाज से अलग रखते थे, क्योंकि यह वो विषाणु जो पीढ़ियों तक को निंगल जाता है

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मिशनरियों के मिशन पर चलने वाले लोगों को पता होना चाहिए कि ईसाइयों में जाति नहीं होती👇☠️
@rashtrapatibhvn
@santoshgangwar
@HemantSorenJMM
@ShilpiNehaTirki
@DC_Ranchi
#Delisting #converted #christian #save #adivasi #tribal #reality #nature #lovers #naturelovers #jharkhand
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महात्मा गांधी की समाधि पर अखंड ज्योति जलाने के लिए 9125 सिलेंडर प्रति वर्ष इस्तेमाल हो रहें हैं।
इससे क्या फायदा हो रहा है @ssrajputINC @SupriyaShrinate @INCIndia
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@alakh_anant Ab thoda is angle se bhi socho agr Centre main BJP na hoti to ky Hindu Bhojshala case jeet sakta tha jo bhi ye comment padh rha hai sab se puch rha bolna aasan hota hai BJP se ladh kr lekin.......
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भोजशाला पहला मंदिर जो हिंदुओं ने बिना RSS-BJP की मदद के हासिल किया
बल्कि ये पहला मंदिर है जो हिंदुओं ने जिहादियों, BJP और RSS से लड़कर हासिल किया
-दिलीप पाण्डेय
दूसरी लाइन पढ़ते ही बहुत सारे लोगों के तन बदन में आग लग गई होगी, बहुत मिर्ची लगी होगी लेकिन जो कहा है वो बिलकुल सच है । आज से 9 साल पहले आचार्य श्री धर्मेंद्र जी महाराज के नेतृत्व में हिंदू कार्यकर्ताओं ने भोजशाला के सरस्वती मंदिर में पूजा करने के लिए आंदोलन शुरू किया था तो शिवराज सिंह चौहान की बीजेपी सरकार ने बाकायदा हिंदू कार्यकर्ताओं पर जमकर लाठियां बरसाई थीं । उस वक्त स्टार न्यूज रहे और आज के एबीपी न्यूज ने दोपहर डेढ़ बजे इसकी कवरेज की थी जिसका मैं स्वयं गवाह था । इसके बाद आचार्य श्री धर्मेंद्र जी महाराज ने पहले वहीं पर एक सभा को संबोधित किया था... जहां अपने कार्यकर्ताओं पर बरसे लट्ठ और बीजेपी का दोगलापन देखकर उनका गला भर आया था, तब उन्होंने उस वक्त के उद्योग मंत्री रहे कैलाश विजय वर्गीय को धमकाते हुए कहा था कि हम लोग मंदिर पर कब्जा कभी नहीं छोड़ेंगे दोबारा आएंगे और तब तुम एक मक्खी भी नहीं मार पाओगे । ये सारे भाषण आज भी यूट्यूब पर मौजूद हैं कोई भी जाकर पूरा सुन सकता है कि आचार्य श्री ने कैसे बीजेपी के सेक्युलरिज्म और दोगलेपन को धोया था ।
यही नहीं... इस लाठीचार्ज के बाद आचार्य धर्मेंद्र जी महाराज ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी जिसमें उन्होंने ये बताया था कि ये कैलाश विजय वर्गीय इंदौर में मुस्लिम वोट लेने के लिए मुसलमानों को ट्रैक्टरों में भर भरकर भोजशाला के मंदिर में ले जाकर नमाज पढ़वाता था । ये प्रेस कॉन्फ्रेंस आज भी यूट्यूब पर मौजूद है । इतने नीच और पापी रहे हैं ये बीजेपी के मंत्री । ये वोट के लिए कुछ भी बेच सकते हैं । अपना ईमान तो बेच ही रहे हैं ।
मोहन भागवत पहले ही कह चुके हैं कि हर मस्जिद के नीचे शिवलिंग क्यों ढूंढना ? हिंदू समाज को आज अपने मंदिर हासिल करने के लिए भागवत और मोदी दोनों से लड़ना होगा ।
काशी में ज्ञानवापी की कथित मस्जिद के अंदर वजूखाने में मिले शिवलिंग वाले मामले को दबाने के लिए मोदी सरकार ने क्या क्या नहीं किया ? सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से सर्वे तक रुकवा दिया गया है । प्लेसेज़ ऑफ वर्शिप एक्ट पर जवाब अब तक फाइल नहीं किया गया है ।
साल 2003 में जब बीजेपी सरकार थी तब एएसआई के द्वारा ये फैसला किया गया था कि भोजशाला में शुक्रवार को नमाज होगी और सोमवार को पूजा । ये सारे पाप बीजेपी की सरकार में ही हुए थे । केंद्र ने ऐसा आदेश देकर जिहादियों के अवैध कब्जे को नैतिक चोला ओढ़ाने का जो प्रयास किया वो निंदनीय है ।
भोजशाला में विजय का सेहरा सिर्फ एक महान शख्सियत पर बंधता है और वो हैं... विष्णु शंकर जैन और उनके पिता हरि शंकर जैन जिन्होंने साल 2022 में इस मामले में इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी । मैं बार बार इन पिता पुत्र की जोड़ी को प्रणाम करता हूं जो सनातन के लिए असल में काम कर रही है । इनकी यश और प्रसिद्धि को रोकने के लिए अभी सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से इसी मामले में कई षड़यंत्र केंद्र और RSS के द्वारा किए जा सकते हैं इसलिए सावधान रहने की जरूरत है ।
बीजेपी का ये सौभाग्य है कि इस वक्त देश में कोई ऐसा सनातनी विकल्प नहीं है जो सरकार बना सके । अगर ये विकल्प होता तो हिंदुओं ने अब तक बीजेपी को हिंद महासागर में डुबो दिया होता । या तो बीजेपी अपना रवैया सुधार ले नहीं तो जनता बीजेपी को सुधार ही देगी ।
धन्यवाद
दिलीप पाण्डेय
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“गुमला टोल प्लाजा में कथित अवैध टोल टैक्स वसूली के खिलाफ चेंबर का आक्रोश फूट पड़ा।
व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने जोरदार प्रदर्शन कर प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
जनता का सवाल साफ है —
जब सड़क सुविधा अधूरी है, तो आखिर किस बात का टोल टैक्स?
अवैध वसूली बंद हो, जनता को न्याय मिले!
@DCGumla
#TollPlaza #gumla #jharkhand
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झारखंड का पूरा आदिवासी समाज एकजुट है और बहन निशा उरावं के साथ है| आदिवासियों के 'स्वशासन व्यवस्था' में ईसाई अतिक्रमण मंजूर नहीं है| @OraonNesha @DCGumla
The Followup@The_FollowUp
निशा उरांव के नेतृत्व में ग्रामीणों की गुमला डीसी से मांग, स्वशासन व्यवस्था में संरक्षित हो सरना आदिवासियों का संवैधानिक अधिकार
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धर्मांतरण का समाज पर क्या असर होता है ? जिस प्रकार पेड़ के जड़ में नमक डालने से पेड़ मर जाएगा , उसी प्रकार अपनी आस्था छोड़ने से पहचान मिट जाएगी
👉🏽ऐसा मान लो कि समाज एक बड़े पेड़ की तरह है
👉🏽जब हम मूल आस्था और पूजा पद्दति का पालन करते हैं , तो हम पेड़ के जड़ में खाद और पानी डालते हैं
👉🏽जब हम धर्मांतरण करते हैं और अपने देवी देवता तथा आस्था को भूल जाते हैं तो हम पेड़ के जड़ में नमक डालने का काम करते हैं
⭐️⭐️पेड़ के जड़ में नमक डालोगे तो पेड़ मर जाएगा
#पारंपरिक_उलगुलान
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_भारत में God (ईश्वर), Gold (सोना), और Glory (गौरव/यश) की नीति यूरोपीय औपनिवेशिक शक्तियों (विशेषकर पुर्तगालियों और अंग्रेजों) द्वारा भारत और अन्य एशियाई देशों में अपनाए गए विस्तारवादी और शोषणकारी एजेंडे के तीन मुख्य स्तंभ थे। इस नीति के तहत, यूरोपीय शक्तियों का उद्देश्य भारत में ईसाई धर्म का प्रचार और धर्मपरिवर्तन (God), व्यापार के माध्यम से धन लूटना (Gold) और साम्राज्य का विस्तार कर अपनी प्रतिष्ठा (Glory) बढ़ाना था। औपनिवेशिक काल में 1813 के चार्टर एक्ट ने पहली बार ईसाई मिशनरियों को भारत में आकर रहने, ईसाई धर्म का प्रचार करने और ईसाई मिशनरी स्थापित करने की क़ानूनी अनुमति प्रदान की। इस कानून के तहत कोलकाता में एक बिशप के अधीन भारत में एक औपचारिक 'चर्च स्थापना' (Ecclesiastical Establishment) की नींव रखी गई। 1813 के बाद अनेक संस्थाओं का जन्म हुआ, जिनमें जनरल बैप्टिस्ट मिशनरी सोसाइटी, लंदन मिशनरी सोसाइटी, वैसलियन मिशन, चर्च मिशन सोसाइटी और स्कॉच मिशनरी सोसाइटी प्रमुख थी। ईसाई मिशनरियों ने ईसाई धर्म के प्रचार के साथ-साथ पश्चिमी शिक्षा को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके लिए सरकार ने शिक्षा पर ₹1 लाख खर्च करने का प्रावधान किया। ईसाई मिशनरियों ने भारत में शिक्षा के प्रचार के लिए सीरामपुर (बंगाल) को केंद्र बनाया। बाईबल का अनेक भाषाओं में अनुवाद किया गया और अनेक पुस्तकें प्रकाशित की गई। 1818 ई. में कलकत्ता के प्रथम बिशप रेवरेंड मिडिलटन ने कलकत्ता में एक मिशनरी कॉलेज खोला।_
_मद्रास में ईसाई मिशनरियों का शिक्षा प्रसार ज्यादा था जबकि सबसे कम मिशनरी क्रियाकलाप पंजाब में था। किंतु वर्त्तमान पंजाब की स्थिति भयावह है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय संगठनों का दावा है कि 2011 में पंजाब में ईसाई आबादी लगभग 1.26%-1.30% थी, जो अब बढ़कर लगभग 10% से 15% के बीच हो सकती है। ऐसा माना जाता है कि पंजाब के लगभग सभी क्षेत्रों में एक या दो धर्मान्तरित ईसाई परिवार हैं। मीडिया रिपोर्ट्स का तर्क है कि परिवर्तित ईसाई कागज पर दलित बने हुए हैं और आरक्षण लाभ प्राप्त करने के लिए अपने धर्म से बचते हैं। डीएसजीएनसीके अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह कालका और महासचिव सरदार जगदीप सिंह काहलों का मानना है कि ईसाई प्रचारक पंजाब में गरीब और कमजोर सिखों को लालच देकर ईसाई धर्म में शामिल कर रहे हैं। भगवान बिरसा मुंडा की धरती झारखण्ड भी ईसाईकरण से अछूता नहीं है। झारखण्ड के सिमडेगा जिले में (51%), खूँटी में (26%) और गुमला में (20%) ईसाई आबादी पहुँच चुकी है। राज्य की कुल ईसाई आबादी का 96% आबादी आदिवासी है। इसमें खड़िया(69%), मुंडा(33%), उराँव(27%), माल पहाड़िया(19%), सौरिया पहाड़िया (53%), सन्थाल(9%), खोंड(15%), बिरजिया(33%) आदि जनजातियाँ सम्मलित हैं।
#Delisting #converted #christian #Jharkhand #Indian


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@moshahid_ahmad @Profdilipmandal agle chunav mian tum kerla Ko uneducated bologe 10 saal ke baad tamilnadu ko🤣
Eesti
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Days after DMK MLA Thiru Udhayanidhi Stalin spoke about eradicating Sanathana Hindu Dharma on the floor of the legislative assembly, TVK MLA Thiru VMS Mustafa came in support of Thiru Udhayanidhi Stalin’s remarks. Not only is this very unfortunate but also it shows the level of hatred they harbour in their minds towards an eternal Dharma that helps us to lead a meaningful life!
DMK & TVK, in their very short history, have proven to the people that they are two sides of the same coin. DMK has forgotten what their constant attack on Sanathana Hindu Dharma has brought them to. TVK will also soon remember.
If either DMK or TVK had the courage of conviction, they should have openly declared during their election campaigns that targeting Sanathana Hindu Dharma would be central to their politics. Instead, they hid behind secularism & theatrics, only to reveal their true intentions after seeking votes from the very people whose faith they now insult with arrogance and impunity.
Please be reminded, Sanathana Hindu Dharma is not your punching bag! I sincerely hope their remarks will not go unpunished by our people.
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