
दशकों बाद आज अहमदाबाद, गुजरात में इतने सारे कांग्रेस के होर्डिंग्स और फ्लैग्स दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस का अधिवेशन ६४ साल के बाद गुजरात में कल हो रहा हैं। आज CWC मीटिंग हैं। यह सब गुजरात में हो रहा वह रसप्रद हैं।गुजरात भाजपा के लिए अधिनायकवाद, मानवाधिकारों का हनन और घोर संवैधानिक उल्लंघन के सभी प्रयोगों का घरेलू मैदान, home pitch है। कुछ लोगों को लग सकता है कि कांग्रेस का गुजरात में CWC और AICC सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय अति महत्वाकांक्षी है, जिसमें अपरिपक्वता और अहंकार की भी बू आती है। लेकिन नहीं। यह निर्णय साहसी और सराहनीय है। कांग्रेस ने भाजपा को उसके स्वघोषित आदर्श राज्य में चुनौती देने का साहस किया हैं जो अर्थपूर्ण रीत से प्रतीकात्मक है। सभी लड़ाइयाँ हमेशा जीतने या हारने के लिए नहीं लड़ी जाती हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि युद्ध के मैदान से भागना नहीं चाहिए; बल्कि सामने आना चाहिए। महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल की जन्मभूमि में AICC अधिवेशन आयोजित करने में कांग्रेस की वीरता उल्लेखनीय है। बेशक, कांग्रेस को गुजरात में खुद को फिर से तलाशने की जरूरत है, लेकिन इस कार्यक्रम के साथ, वे बहादुरी से युद्ध क्षेत्र में उतर/आए हैं। मैं फिर से कहती हूँ। 2029 या कभी भी यूपी, तमिलनाडु या बिहार मायने नहीं रखेंगे। गुजरात हारने के बाद ही भाजपा भारत को खोएगी। Life is a ⭕ circle. Congress must focus on taking on the BJP from #Gujarat only and hence this a good move. #गुजरात #AICC #कांग्रेस #RahulGandhi #NyayPath #AICCSession2025 @INCGujarat @INCIndia

























