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@LOLnetas

सब एक जैसे हैं. मज़े करिए और बुरा लगे तो डिलीट कर दीजिए. Political Satire.

Jaipur, India Katılım Eylül 2016
935 Takip Edilen50 Takipçiler
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LOLnetas@LOLnetas·
@umashankarsingh 95.04 peaked, a historical high, specially when dollar in itself is weakening. Other currencies are getting stronger. We are in the league of USA, Russia and China but it is frustrating and painful to see that even Napak's currency is getting stronger in INR comparison.
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Umashankar Singh उमाशंकर सिंह
“देश की इज़्ज़त और गिरी” रुपये की गिरती क़ीमत पर ‘सीएम मोदी’ को तो हमने अनेकों बार सुना, ‘पीएम मोदी’ के विचार सुनने का इंतज़ार है
Umashankar Singh उमाशंकर सिंह tweet media
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LOLnetas@LOLnetas·
@MANJULtoons एक केस के बारे में सुना जरूर था, संभवतः कर्नाटक के किसी राजनीतिज्ञ का था जिसके सैंकड़ों तथाकथित आपत्तिजनक वीडियो मिले थे, आरोप गंभीर थे, पता नहीं क्या हुआ।
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MANJUL
MANJUL@MANJULtoons·
एपस्टीन अगर भारत में होता तमाम एंकर और पत्रकार उसके पक्ष में पोस्ट कर रहे होते। बाल ना बांका होने देते उसका अगर वो भाजपा में होता।
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LOLnetas@LOLnetas·
@WokePandemic भाई अदला बदली कर ले, तेरी जगह मैं फ्रांस में रहकर ख़ुशी ख़ुशी तेरी तकलीफ़े भुगत लूँगा और तू मेरी जगह भारत में रहकर स्वर्ग के मजे ले ले। तू भी ख़ुश मैं भी ख़ुश।
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Woke Eminent
Woke Eminent@WokePandemic·
Indian living in France says The LPG Gas cylinder is 5 times more costlier than India and their is no delivery system, have to personally pick up Cylinder Yes Whats wrong with India
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LOLnetas@LOLnetas·
@Kapil_Jyani_ सालाना 20,000 से ज़्यादा फीस ना होने की बात से असहमत पर बाक़ी सभी बातों से कम या ज़्यादा, पर सहमति। कुछ स्कूल ज़्यादा सुविधाएं देते हैं और उनकी फ़ीस जायज़ है। निजी व्यवसायों पर फ़ीस कम रखने का दबाव बनाने की बजाय अच्छे सरकारी स्कूल बनाये जायें। नए स्कूल खोलना आसान किया जाए।
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kapil bishnoi
kapil bishnoi@Kapil_Jyani_·
चाहे कितना ही हाई फ़ाई स्कूल हो प्राइवेट स्कूलों की फ़ीस 20,000/- सालाना से ज़्यादा नहीं हो… सभी प्राइवेट स्कूलों में एक ही कोर्स पढ़ाया जाए… दस साल तक कोर्स मे कोई बदलाव नहीं हो… हर दस साल में एक बार समीक्षा करके नई चीज़ें जोड़ी जा सके… हर किसी को स्कूल खोलने की अनुमति नहीं मिले… प्राइवेट स्कूल खोलने के लिए… मेन रोड और भीड़भाड़ से दूर प्रॉपर इमारत हो.. एक कक्षा में बीस से ज़्यादा बच्चे नहीं हो… बीस बच्चों पर एक शिक्षक अनिवार्य हो… प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों के लिए सरकार एक परीक्षा आयोजित करे… उसमें सफल अभ्यर्थी ही प्राइवेट स्कूलों में पढ़ा सके सभी प्राइवेट स्कूलों की यूनिफ़ॉर्म एक जैसी हो.. जो कम से कम दस साल तक नहीं बदले.. इस तरह की चीजें सख़्ती से लागू हो.. तभी कुछ सकारात्मक बदलाव आने की संभावना होगी
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LOLnetas@LOLnetas·
@MediaHarshVT इस ट्वीट को चुनाव के बाद पढ़ने में ज़्यादा आनंद प्राप्त होगा।
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हर्ष वर्धन त्रिपाठी 🇮🇳Harsh Vardhan Tripathi
मोदी सरकार ने एक बहुत बड़ा निर्णय लिया है। पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में भारी कटौती की है। पेट्रोल और डीजल में 10 रुपये एक्साइज की कटौती करके तेल कंपनियों को उनको हो रहा घाटा पूरा करने का अवसर दिया है। ग्राहकों को उसी कीमत पर पेट्रोल-डीजल मिलेगा, जिस पर पहले मिल रहा था।
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LOLnetas@LOLnetas·
@thedarkrebel 99% of people won’t dare to do what you did. Polo person behaving like Thar seems to be habitual rule breakers. However, it is dangerous for you as authorities, administration and power will never be on your side. People like you are hope. Bravo mate 👍🏻
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LOLnetas@LOLnetas·
@umashankarsingh @AAPKA_RK हमारी तो पूरी परेशानी ही यही है। पूरे देश में कुछ की आय 8-8 गुना हो रही है और बाकियों की बढ़ ही नहीं रही है। एक नेताजी का जवाब था “तो क्या करें, सबकी आय कम कर दें?”
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Umashankar Singh उमाशंकर सिंह
“मैं भारत का कृषि मंत्री शिवराज चौहान कह रहा हूं कई किसानों की आय दोगुनी हुई है, और सिर्फ़ दुगुनी नहीं माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं पूरी ज़िम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ किस सिर्फ़ दुगनी नहीं, कई मामलों में किसानों की आय तिगुनी भी हुई है, चौगुनी भी हुई है, और कई की तो 8-8 गुनी भी हुई है… अध्यक्ष महोदय, एक ग़लत नैरेटिव बनाया जाता है…” शिवराज सिंह के इस बयान पर कोई सवाल उठा ही नहीं सकता… वे बहुत की साफ़गोई से ‘कई किसानों’ की आय ‘दुगुनी तिगुना चौगुनी आठ-गुनी’ होने की बात कर रहे हैं, ‘सभी किसानों’ की नहीं… आप समझे कि नहीं !
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LOLnetas@LOLnetas·
@MrinalPande1 क्या sympathy को सहानुभूति और empathy को परानुभूति कहा जा सकता है?
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LOLnetas@LOLnetas·
@Ashok_Kashmir ये उन्होंने ट्रम्प को अप्रत्यक्ष रूप में बोला है, अब सीधा बोलने का साहस ना हो तो घुमा फिरा के ट्रम्प के उस दावों के बारे में बोला है जिसमें ट्रम्प दुनिया के कई देशों के युद्ध अपनी मध्यस्थता से रुकवाने का श्रेय लेते थे। अब पक्का है ट्रम्प को शांति का नहीं दलाली का नोबेल मिलेगा।
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Ashok Kumar Pandey अशोक اشوک
मैं परसों कहा था कि इस सरकार में कोई ढंग का डिप्लोमेट नहीं है, सारे यस मैन भरे हुए हैं। भाषा का चयन देखिए और बताइए मैं ग़लत था?
Ashok Kumar Pandey अशोक اشوک tweet media
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LOLnetas@LOLnetas·
@_sayema Rs 13,500 for books alone for class 2nd in Jaipur. Let that sink in.
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Sayema
Sayema@_sayema·
Why are parents trapped into buying the books and uniforms from private school??? I spoke to so many parents and all said that even for Class 1 student, they have to spend almost 10,000 for both books and uniform!!! Why is education becoming unaffordable when it’s our fundamental right. Urge the governments and authorities to intervene and regulate this at the earliest!
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Umashankar Singh उमाशंकर सिंह
गैस की ‘कालाबाज़ारी’ कैसे ग़रीबों को पेट काटने पर मजबूर कर रही है! हमारी सोसाइटी के पास एक रेहड़ी पर 30₹ में एक प्लेट पूरी सब्ज़ी मिलती थी। कई बार मैं भी पैक करा कर घर आता हूँ। प्लेट में 5 पूरियाँ होती थीं। आज एक कम मिली है। देते समय ही बता दिया था कि गैस सिलिंडर महँगी हो गई है इसलिए प्लेट में पूरी 4 कर दी है। मैंने कहा रेट बढ़ा देते। बोला हमारे कस्टमर अधिकतर मज़दूर/कामगार/कम सैलरी वाले नौकरीपेशा लोग हैं। रेट 30 से 40 करता तो कस्टमर कम हो जाते। इसलिए एक पूरी कम कर दी। कस्टमर एक पूरी कम खा रहे हैं पर रेट की शिकायत नहीं कर रहे हैं। और जो अधिक पैसा दे सकते हैं वे पाँचवी पूरी भी लेकर खा रहे हैं। वरना पानी अधिक पी कर काम चला रहे हैं। सरकार कहती है LPG की क़िल्लत नहीं है। सही बात है। पर कालाबाज़ारी तो है! और उसका ख़ामियाज़ा ये कि ग़रीबों को अपना पेट काटना पड़ रहा है। Thank you for your attention to this matter!
Umashankar Singh उमाशंकर सिंह tweet media
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LOLnetas
LOLnetas@LOLnetas·
@umashankarsingh @yadavtejashwi तब इसलिए बनाया क्योंकि इनमें मुद्दा बनाने का दम है। तुममें ताकत है तो मुद्दा बना के देख लो। इनको जब फायदा लगेगा तब ये मुद्दा बनायेंगे, जो करना है कर लो।
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Umashankar Singh उमाशंकर सिंह
कुछ लिख रहे हैं कि बंगाल में मछली बहुत कॉमन है। वाह। ये तो बिहार में भी और ख़ास तौर पर मिथिला क्षेत्र में भी बहुत कॉमन है तब क्यों मुद्दा बनाया था जब @yadavtejashwi के मामले में! हिंदू धर्म का राज्यों की सीमा के हिसाब से तय होता है?
Umashankar Singh उमाशंकर सिंह@umashankarsingh

नवरात्र चल रहा है और बीजेपी नेता Sharadwat Mukherjee हाथ में मछली 🎣 पकड़ कर चुनाव प्रचार कर रहे हैं! धर्म भ्रष्ट कर रहे हैं! घोर निंदा।

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Sushant Singh
Sushant Singh@SushantSin·
Brilliant, simply brilliant from @samzsays - the best thing you can read today.
Sushant Singh tweet media
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LOLnetas
LOLnetas@LOLnetas·
@Ashok_Kashmir आप 76 हजार करोड़ बोल रहे हैं, शाम होते होते ये डूबत 12 लाख करोड़ पहुंच चुकी है। अफ़सोस कि अब कोई नुकसान जनता को उद्वेलित नहीं करता, सब को नियति मान लिया है।
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Ashok Kumar Pandey अशोक اشوک
कल dow jones में गिरावट देखकर उम्मीद तो थी ही कि आज भारत में भी बाज़ार गिरेगा... लेकिन इतना!
Ashok Kumar Pandey अशोक اشوک tweet media
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LOLnetas
LOLnetas@LOLnetas·
@shakeelNBT अगर समस्या का समाधान समस्या होने से पहले कर लिया जाए तो पता कैसे चलेगा कि समस्या का समाधान किसने किया है। पहले समस्या हो, लोग परेशान हों, ट्रम्प से लेकर नेहरू तक को ब्लेम किया जाए फिर ईश्वर अवतार लेकर समस्या का समाधान करें और त्रस्त जनता ईश्वर की जय जयकार करे। तब क्रेडिट मिलेगा।
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Shakeel Akhtar
Shakeel Akhtar@shakeelNBT·
जो काम प्रधानमंत्री मोदी ने कल किया उसे अगर वे पहले कर लेते तो देश में तेल और गैस का ऐसा संकट नहीं होता। 13 दिन तक उन्होंने ईरान से बात नहीं की। उनके सुप्रीम लीडर मारे गए कोई शोक संदेश नहीं। नए सुप्रीम मीडिया चुने गए कोई मुबारकबाद नहीं। हमला हुआ कोई निंदा नहीं। जब देश में तेल और गैस संकट विकराल रूप धारण कर गया हॉरमुज स्ट्रेट से झूठी खबरें चलवाने से जहाज तो नहीं निकले उल्टे बदनामी और हो गई तब कल प्रधानमंत्री को ईरान के राष्ट्रपति को फोन करना पड़ा। अब सुन रहे हैं जहाजों को निकालने की अनुमति मिल गई है। यह काम पहले ही करना था। @dblive15 पर आज शाम @RajeevRdb के साथ।
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LOLnetas
LOLnetas@LOLnetas·
@ravish_journo बिल्ली के गले में घंटी बाँधेगा कौन?
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ravish kumar
ravish kumar@ravish_journo·
इस बयान का यही मतलब है कि भारत को गैस और तेल ले जाने की अनुमति मिलेगी लेकिन दुनिया के नेताओं को अमरीका से जाकर कहना चाहिए कि इस युद्ध को रोकें। इस्राईल से भी कहना चाहिए कि यह युद्ध रोका जाए। यह युद्ध ईरान ने नहीं थोपा है। तब जाकर शायद तेल और गैस की सप्लाई की इजाज़त मिलेगी। लेकिन ट्रंप से कौन कहेगा? क्योंकि कहना विदेश नीति का हिस्सा तो है नहीं। ट्रंप को कहने का मतलब है इस युद्ध के ख़िलाफ़ स्टैंड लेना। जब पहले नहीं लिया तो क्या भारत ईरान के कहने पर लेगा? भारत अपना हित देखता है। सिलेंडर और तेल नहीं।
Press Trust of India@PTI_News

VIDEO | On Iran allowing Indian ships to sail freely and bring energy products from the Strait of Hormuz, Representative of Iran's Supreme Leader in India, Dr Abdul Majid Hakeem Ilahi, says: "Actually, there have been some discussions concerning this, and I am sure that India will benefit from oil, gas, and other resources. But I think the complete solution is that the leaders of the world have to come together. They should go to the United States and convince President Trump that this war is an unjust war against civilians and that it has to stop. They should also put pressure on the Zionist regime to stop this war. We didn't create this war, we didn't initiate this war, we didn't start this war... We are ready to share our blood on the earth, but we are not ready to sell our dignity." (Full video available on PTI Videos- ptivideos.com)

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LOLnetas
LOLnetas@LOLnetas·
@premchandr60286 @RajuValmikiN अंधभक्त जी, विकिपीडिया का लिंक दिया है पढ़ ले भाई, 1974 में परमाणु हथियार परीक्षण या nuclear weapon test हुआ था और 1974 में भारत परमाणु हथियार संपन्न देश बना था। अंधभक्ति में भारत के विकास और राजा रामान्ना और P K आयंगर (मुख्य वैज्ञानिक) को नीचा मत दिखा।
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prem chandra choudhary
prem chandra choudhary@premchandr60286·
@LOLnetas @RajuValmikiN चमचेजी, 1974 में देश सिर्फ परमाणु सक्षम देश बना, लेकिन 1998 में देश पूर्ण परमाणु हथियार सक्षम देश बना. दोनों में आकाश जमीन का अंतर होता है.
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राजू वाल्मीकि चौहान
19 मार्च 1998 को वाजपेयी प्रधानमंत्री बने और ठीक छः दिन बाद दो वैज्ञानिक अब्दुल कलाम और चिदंबरम को अपने ऑफिस बुलाया। वाजपेयी ने धीमी आवाज मे पूछा क्या आप दोनों परमाणु परिक्षण के लिये तैयार है? दोनों ने हामी भरी तो वाजपेयी ने कहा कि बुद्ध पूर्णिमा की पूजन इस बार आप दोनों ही करेंगे। परमाणु परिक्षण के लिये राजस्थान का पोखरण चुना गया, मटेरियल पूरा मुंबई मे रखा था। रात के दो बजे मुंबई मे सामान लोड करके एयरपोर्ट लाया गया, रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नाडीज पूरी रात नहीं सोये। यदि एक भी कन्टेनर फट जाता तो पूरा मुंबई शहर शमशान बन जाता, ये सामग्री मुंबई से जैसलमेर के रास्ते पोखरण साइट पहुंची। अमेरिकी सेटेलाइट से बचने के लिये टीम मुश्किल से चंद मिनट ही काम कर पाती थी। हमारे वैज्ञानिको ने अपार कष्ट सहकर काम किया, अपार इसलिए कि उन्हें तपते रेगिस्तान मे सेना की भारी वर्दी पहननी पड़ी जिसके वे आदि नहीं थे। दिल्ली मुंबई मे रहे वैज्ञानिको को राजस्थान की गर्मी असहनीय थी, लेकिन बावजूद इसके काम शीघ्रता से किया गया। दूसरा डर यह भी था कि वाजपेयी की गठबंधन की सरकार बड़ी मुश्किल से चल रही थी। ऐसे मे यदि सरकार गिर जाती तो ये परिक्षण फिर सालो पीछे हो जाता। आखिर 11 मई का दिन आया, उस दिन वाजपेयी, आडवाणी, जसवंत सिंह और जॉर्ज फर्नाडीज प्रधानमंत्री आवास पर एकदम शांत बैठे थे। दिल्ली के गरम माहौल से दूर पोखरण मे आखिर परमाणु परिक्षण हुआ, धरती डोल गयी, दो फुटबाल मैदान के बराबर का गड्ढा हो गया। कलाम और चिदंबरम को चक़्कर आने लगे दोनों ने एक दूसरे को संभाला और बाहर आये। वैज्ञानिको ने जैसे ही चिदंबरम और कलाम को देखा तो भारत माता की जय का नारा लगाना शुरू कर दिया, कलाम और चिदंबरम हर नारे पर जय बोल रहे थे। दिल्ली खबर आयी तो चारो नेता रो पड़े मगर किसी ने किसी को बधाई नहीं दी। इसके बाद वाजपेयी का वो 15 आवर्स 45 मिनट वाला भाषण इतिहास लिख गया, 13 मई को फिर दो धमाके किये गए और वाजपेयी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा "अब भारत परमाणु शक्ति बन चुका है" लेकिन इसके तुरंत बाद अमेरिका के प्रतिबंधों की बारिश शुरू हो गयी, जापान ने भारत के सारे बॉन्ड फ्रीज कर दिये, कनाडा ने तो अपने डिप्लोमेट तक बुलाने का फैसला कर लिया। संयुक्त राष्ट्र तक मुद्दा गया। ब्रिटेन, फ़्रांस और रूस ने इस पर किसी भी प्रकार की बात करने से मना कर दिया, हालांकि ब्रिटेन राष्ट्रीय स्तर पर भारत के खिलाफ था मगर संयुक्त राष्ट्र मे उसने चुप्पी साधकर भारत का साथ दिया।
राजू वाल्मीकि चौहान tweet media
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LOLnetas
LOLnetas@LOLnetas·
@kkjourno Fake news का सहारा सिर्फ सोर्स ही होते हैं, अगर खबर सच्ची होती तो फोटो ऑप के लिए समंदर में हरी झंडी लिए फोटो खिंचवा रहे होते।
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Krishna Kant
Krishna Kant@kkjourno·
ईरान ने भारत को स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से तेल लाने की अनुमति दे दी है। ईरान ज्यादातर देशों के जहाज रोक रहा है लेकिन भारत को नहीं रोकेगा। ऐसी खबरें हैं लेकिन सूत्रों के हवाले से हैं। इतनी महत्वपूर्ण और जरूरी बातें सूत्र क्यों बताते हैं? सरकार में बैठे लोग इतने घनघोर टाइप के मुंहचोर क्यों हैं? एक कूटनीतिक कामयाबी को सामने रखकर जनता को भरोसे में लेने का काम भी इनसे क्यों नहीं होता? क्या सरकार के लोग अपने मुंह से ईरान का नाम भी नहीं लेना चाहते? क्या प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट सच में ब्लैकमेल हो रही है?
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LOLnetas
LOLnetas@LOLnetas·
@AamAadmiParty "Actors" को हिन्दी में सहयोगी कहना शायद सही अनुवाद नहीं है। Actors शब्द का प्रयोग (अनुमति देने के सन्दर्भ में) सामन्यतः उन व्यक्तियों के लिए होता है जो बिना विरोध के, सभी निर्देशों का अक्षरशः पालन करते हैं। आज्ञाकारी या अनुशासित या अनुपालनकर्ता ज्यादा अच्छे शब्द हैं।
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AAP
AAP@AamAadmiParty·
“भारत में हमारे सहयोगी अच्छे लोग हैं। उन्होंने पहले भी रूस से प्रतिबंधित तेल खरीदना बंद किया था। हमने उन्हें कुछ समय के लिए रूसी तेल लेने की इजाज़त दी है।” यह बयान व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ने एक आधिकारिक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में दिया। इससे पहले भी अमेरिकी प्रशासन की ओर से इसी तरह के संकेत दिए जा चुके हैं। लेकिन हैरानी की बात है कि इस पर मोदी सरकार पूरी तरह खामोश है। सवाल उठता है — जो प्रधानमंत्री खुद को 56 इंच के सीने वाला नेता बताते हैं, वे आज इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं? क्या भारत की विदेश नीति अब वॉशिंगटन की अनुमति से तय होगी? देश जानना चाहता है — आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि सरकार खुलकर जवाब देने से बच रही है?
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