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महिला आरक्षण का पूरा मामला समझें 👇
▪️2023 में महिला आरक्षण बिल लाया गया. इसमें मोदी सरकार ने कहा- पहले जनगणना होगी, फिर परिसीमन होगा, इसके बाद महिला आरक्षण लागू होगा.
▪️कांग्रेस और सारे विपक्ष ने महिला आरक्षण का पूरा समर्थन किया. ये भी कहा कि मोदी सरकार इतने नियम न लगाए और तत्काल महिला आरक्षण लागू करे.
▪️लेकिन मोदी सरकार नहीं मानी और जनगणना और परिसीमन वाले नियम के साथ महिला आरक्षण पास हुआ.
▪️मतलब महिला आरक्षण 2023 में पास हो गया.
🔹 यहां कहानी का एक हिस्सा खत्म हुआ
▪️इस बीच कांग्रेस लगातार जनगणना में जातिगत जनगणना को शामिल करने की मांग कर रही थी.
▪️2024 में मोदी ने इस मुद्दे को कमजोर करने के लिए जातिगत जनगणना को अर्बन नक्सल की सोच बताया.
▪️हालांकि इससे यह मुद्दा कमजोर नहीं हुआ और देश में ये मांग उठने लगी, खासकर दलितों, पिछड़ों की तरफ से.
▪️फिर विपक्ष और लोगों के दबाव के आगे मोदी सरकार को झुकना पड़ा और 2025 में जातिगत जनगणना कराने की बात कही गई.
🔹 यहां कहानी का दूसरा हिस्सा खत्म हुआ
▪️2024 में महिला आरक्षण पास हो चुका था, जिसे जनगणना और परिसीमन के बाद लागू करना था.
▪️2025 में जातिगत जनगणना की बात भी हो गई थी.
▪️फिर कुछ खबरें आने लगीं कि जातिगत जनगणना में देर होगी और 2029 तक ये आ नहीं पाएगा.
▪️यहां ध्यान रखने वाली बात है. जनगणना 2021 में हो जानी चाहिए थी, जिसमें पहले ही बहुत देर हो चुकी है. देश में आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी.
▪️जातिगत जनगणना में देर होने की खबरों के बीच मोदी सरकार ने मार्च 2026 में महिला आरक्षण लागू करने की बात शुरू कर दी.
▪️और अब मोदी सरकार संसद चलाकर, अपना ही नियम बदल रही है. यानी जनगणना और परिसीमन के बाद महिला आरक्षण वाला नियम बदला जा रहा है.
🔹अब क्या हो रहा है?
▪️2023 में पास हुआ महिला आरक्षण लागू किया जा रहा है.
▪️परिसीमन का बिल पास किया जा रहा है, जो कि 2011 की जनगणना के आधार पर होगा.
अब आप सोचिए... कौन सी बात पीछे रह गई?
जी हां, जातिगत जनगणना. ये वो चीज है जिसका कहीं जिक्र नहीं है.
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