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हम काशीवासियों से बेहतर यह कौन जान सकता है कि माँ शक्ति के बिना महादेव भी अधूरे हो जाते हैं। आदि वैरागी का हृदय भी माँ की अनुपस्थिति में विचलित हो उठता है। शक्तिस्वरूपा माँ के सान्निध्य में ही महादेव निश्चिंत होकर अपने योग में रमते हैं।
इतिहास हो या पुराण, संसार के जितने भी महान चरित्रों को हम जानते हैं, उन्होंने अपनी वामांगिनी के सहयोग को न केवल समझा, बल्कि उसे स्वीकार किया और सम्मान भी दिया।
हमें पूर्ण विश्वास है कि कस्तूरबा के बिना मोहनदास कभी महात्मा नहीं बन पाते और देवी प्रभावती के तप के बिना लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी ज्योति में प्रभा अधूरी-सी रह जाती।
आज जब संसद से सड़क तक आदरणीय अखिलेश जी की हर वैचारिक मोर्चाबंदी पर माँ अष्टभुजा की भाँति दृढ़ता से खड़ी, हम सबकी आदरणीय डिंपल यादव जी को देखता हूँ तो वहीं सहयोग, साथ और समर्पण दिखाई देता है।
जब सत्ता की अहंकारी हुकूमत चुनावी लाभ के लिए नारी सम्मान के प्रतीक मंगलसूत्र पर अनर्गल टिप्पणी करती है, तब डिंपल जी पूरे आत्मविश्वास और गरिमा के साथ आगे बढ़कर उन्हें मुँहतोड़ उत्तर देती हैं।
डिंपल यादव जी केवल सादगी की ही नहीं, बल्कि सशक्त चरित्र, वैचारिक स्पष्टता और साहसिक स्पष्टवादिता की जीवंत प्रतिमूर्ति हैं।
समाजवाद के नीतियों और परम्परागत रीतियों का निभाने का संतुलन बनाना यदि किसी को सीखना हो तो उसे आदरणीय डिंपल यादव जी का अनुकरण करना चाहिए।
जनदिन के पावन अवसर पर हम सभी की ओर से आदरणीय मैनपुरी सांसद श्रीमती @dimpleyadav जी को हार्दिक शुभकामनाएँ।
आपका व्यक्तित्व, आपकी गरिमा और आपका संघर्ष समाजवादी आंदोलन को निरंतर दिशा देता रहे।
#dimpleyadav #HappyBirthday

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