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@M_Saheb_

Senior Judge (CBI)Neelofer Abida...ex DGP पदमश्री IPS Izhaar Alam... IPS M . A Rizvi ... Is My Ideal ❤❤ My_Mother_My_Heaven ❤❤ Rider 🚘🚘🚘🚘International 🌏

Katılım Nisan 2021
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ज़िन्दगी की पहली उस्ताद माँ,, ज़िन्दगी की पहली दोस्त भी माँ,,, ज़िन्दगी भी माँ,,,, क्योकि ज़िन्दगी देने वाली भी माँ। मेरी My Mother My Heaven ❤️💜🌹 @SURINDERJEET63 @ACP_SURINDER_K
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SURINDER JEET KAUR (ਸੁਰਿੰਦਰ ਜੀਤ ਕੌਰ) सुरिंदर जीत
🌹 साहिब इक अदा से, दिल में उतरती है उर्दू... 🌹 “साहिब इक अदा से, दिल में उतरती है उर्दू! हर हर्फ़ में जैसे कोई, शरारत छिपी हो!!” उर्दू की यही नज़ाकत, यही शराफ़त और यही इल्म की रोशनी जिस अज़ीम इदारे की रग-रग में दौड़ती है, उसे दुनिया अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के नाम से जानती है। 🎓 एक ख़्वाब, जो हक़ीक़त बना यह महज़ एक यूनिवर्सिटी नहीं, बल्कि सर सय्यद अहमद ख़ान के उस बुलंद हौसले और दूरंदेशी (Vision) का नतीजा है, जिसने कौम को अंधेरे से निकालकर रोशनी की तरफ़ मोड़ दिया। 24 मई 1875: मदरसातुल उलूम के रूप में एक छोटे से पौधे की शुरुआत हुई। 1877: यही पौधा M.A.O. College (मोहम्मद एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज) बना। 1920: इतिहास ने करवट ली और सर सय्यद का यह ख़्वाब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के रूप में मुकम्मल हुआ। 🏛️ 'चमन' जिसकी मिट्टी में मोहब्बत है... अलीगढ़ सिर्फ़ डिग्रियां नहीं बांटता, यह तहज़ीब सिखाता है। यहाँ की शेरवानी, यहाँ की उर्दू, 'अहले-अलीगढ़' की सादगी और वो 'अफ़कार की गर्मी' जिसके दम पर इस चमन ने देश और दुनिया को बेमिसाल रहनुमा, अदीब, साइंटिस्ट और वतन परस्त दिए हैं। "ये मेरा चमन है मेरा चमन, मैं अपने चमन का बुलबुल हूँ, सरशार-ए-ग़ुलाम-ए-अहमद हूँ, सरमस्त-ए-शराब-ए-मुक़बिल हूँ..." ❤️ ज़िंदाबाद! तहज़ीब-ए-अलीगढ़! आज जब हम इसके सुनहरे इतिहास को याद करते हैं, तो दिल अदब से झुक जाता है। यह इदारा कल भी इल्म का मीनार था, आज भी है, और हमेशा रहेगा। #AMU #AligarhMuslimUniversity #SirSyed #UrduAdab #Tehzeeb #Aligarh
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SURINDER JEET KAUR (ਸੁਰਿੰਦਰ ਜੀਤ ਕੌਰ) सुरिंदर जीत
“तेरी निगाह-ए-मेहरबाँ से, हर ज़ख्म शिफ़ा पाए! कौन कहता है दवा है इश्क़, साहिब, ये तो तेरी परवाह है!!” 🌍💉 अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 💐 हर वर्ष 12 मई को अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस (International Nurses Day) मनाया जाता है। यह दिन आधुनिक नर्सिंग की संस्थापक मानी जाने वाली Florence Nightingale की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। उन्होंने क्रीमिया युद्ध के दौरान घायल सैनिकों की सेवा कर यह साबित किया कि “सेवा” केवल एक काम नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी इबादत है। 🔷🩺 नर्स केवल अस्पताल की कर्मचारी नहीं होती… वो दर्द में उम्मीद की मुस्कान होती है, मरीज के माथे पर रखा सुकून भरा हाथ होती है, रात भर जागकर किसी अनजान की सांसों की रखवाली करने वाली ममता होती है। 🔷जब पूरा संसार थक कर सो जाता है, तब एक नर्स किसी ICU में खड़ी होकर, किसी माँ की दुआ, किसी बच्चे की उम्मीद और किसी परिवार की आख़िरी आस बन जाती है। 🔷कोविड महामारी के कठिन दौर ने दुनिया को यह एहसास कराया कि डॉक्टर जहाँ जीवन बचाने की रणनीति बनाते हैं, वहीं नर्सें उस रणनीति में अपनी संवेदनाएँ, धैर्य और अथक सेवा जोड़कर उसे जीवन देती हैं। कई नर्सों ने अपने परिवारों से दूर रहकर, अपनी जान जोखिम में डालकर मानवता की रक्षा की। उनकी यह तपस्या सदैव याद रखी जाएगी। 🔷📖 इस दिवस को मनाने की शुरुआत International Council of Nurses (ICN) द्वारा की गई थी, ताकि दुनिया भर की नर्सों के समर्पण, सेवा और त्याग को सम्मान दिया जा सके। 🔷🌸 नर्स वह दीपक है, जो खुद जलकर दूसरों की जिंदगी में उजाला भरती है। वो हर दर्द को समझती है, बिना किसी रिश्ते के भी अपनों जैसा साथ निभाती है। 🔷आज के दिन उन सभी नर्सों को दिल से सलाम:— जो अपने कोमल व्यवहार, धैर्य, सेवा और करुणा से इस दुनिया को थोड़ा और मानवीय बनाती हैं। 🙏💖 “जहाँ दवाइयाँ हार मानने लगती हैं, वहाँ अक्सर एक नर्स की मुस्कान काम कर जाती है।” 🌺🙏
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SURINDER JEET KAUR (ਸੁਰਿੰਦਰ ਜੀਤ ਕੌਰ) सुरिंदर जीत
माँ सिर्फ एक रिश्ता नहीं होती, वो घर की धड़कन, दुआओं की छाँव और त्याग की वो मूर्ति होती है, जो खुद टूटकर भी बच्चों को संभालती है!! जिसने उंगली पकड़कर चलना सिखाया, रातों की नींद खोकर हमें सुलाया, हमारी एक मुस्कान के लिए अपने हर दर्द को छुपाया… वो “माँ” ही होती है। ❤️ 🔷दुनियाँ की सभी मदर्स को मदर्स डे की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌷 मदर्स डे हर वर्ष मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। यह दिन माँ के प्रेम, त्याग, संघर्ष और निस्वार्थ समर्पण को सम्मान देने के लिए समर्पित है। 🔷इस दिन की आधुनिक शुरुआत अमेरिका में हुई थी। 1908 में Anna Jarvis नामक महिला ने अपनी माँ की याद में एक कार्यक्रम आयोजित किया था। उनकी कोशिशों के बाद 1914 में अमेरिका के राष्ट्रपति Woodrow Wilson ने इसे आधिकारिक रूप से “Mother’s Day” घोषित किया। धीरे-धीरे यह दिन पूरी दुनिया में मातृत्व के सम्मान का प्रतीक बन गया। 🌍 🔷माँ वो होती है जो— बच्चे के रोने से पहले उसकी तकलीफ़ पहचान लेती है, खुद भूखी रहकर भी बच्चों का पेट भर देती है, और हर मुश्किल में ढाल बनकर खड़ी रहती है। दुनिया में अगर कहीं सच्चा, निस्वार्थ और बिना शर्त वाला प्रेम है, तो वो सिर्फ माँ का प्रेम है। 🔷आज का दिन सिर्फ उपहार देने का नहीं, बल्कि माँ के त्याग को महसूस करने, उनके साथ समय बिताने और उन्हें यह एहसास दिलाने का है कि— उनकी मौजूदगी ही हमारी सबसे बड़ी दौलत है। 💐 🔷जो लोग अपनी माँ के साथ हैं, वो उनका सम्मान करें, समय दें, गले लगाएँ… और जिनकी माँ अब इस दुनिया में नहीं हैं, उनकी यादों को दिल से सजाकर रखें, क्योंकि माँ कभी सच में दूर नहीं जाती… वो हमेशा दुआ बनकर साथ रहती है। 🙏 “भगवान हर जगह नहीं हो सकते थे, इसलिए उन्होंने माँ बनाई।” ❤️ Is video ko dekhen Ye hoti hai Maa jiski jagah dunia me koi nahi le sakta.👇👇👇👇👇
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SURINDER JEET KAUR (ਸੁਰਿੰਦਰ ਜੀਤ ਕੌਰ) सुरिंदर जीत
“साहिब, मैं ने मेहनत से हथेली पे लकीरें खींचीं! वो जिन्हें कातिब-ए-तक़दीर नहीं खींच सका!!” कातिब-ए-तक़दीर = भाग्य लिखने वाला 🌹अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस (International Workers’ Day)🌹 अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ💐🙏🙏 हर साल 1 मई को मनाया जाने वाला यह दिन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि मेहनत, संघर्ष और अधिकारों की जीत का प्रतीक है। यह उन हाथों को सलाम करने का दिन है, जो दुनिया की हर इमारत, हर सड़क, हर व्यवस्था को खड़ा करते हैं—पर अक्सर खुद गुमनाम रह जाते हैं। 🔷📜 इतिहास की पृष्ठभूमि (History & Origin):— मजदूर दिवस की शुरुआत Haymarket Affair से जुड़ी है। 🔸 1 मई 1886, शिकागो (अमेरिका) हजारों मजदूर सड़कों पर उतरे—मांग थी: 👉 8 घंटे काम, 8 घंटे आराम, 8 घंटे अपने लिए 🔸 4 मई 1886 को हेमार्केट स्क्वायर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान एक विस्फोट हुआ और पुलिस कार्रवाई में कई मजदूर मारे गए। 👉 इस घटना ने दुनिया को झकझोर दिया और यहीं से शुरू हुआ मजदूरों के अधिकारों के लिए एक वैश्विक आंदोलन। 🔶🌍 दुनिया भर में महत्व:— आज यह दिन 80 से अधिक देशों में मनाया जाता है। कई देशों में यह राष्ट्रीय अवकाश भी होता है। 🔹 भारत में पहली बार मजदूर दिवस 1923 में चेन्नई में मनाया गया। 🔹 इसे मनाने की पहल की थी 👉 सिंगारवेलु चेट्टियार ने 🔷⚖️ मजदूर दिवस का संदेश:— यह दिन हमें याद दिलाता है कि— ✔️ हर श्रमिक का सम्मान जरूरी है ✔️ उचित वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और अधिकार उनका हक़ है ✔️ समाज की असली नींव वही हैं, जिनके हाथों में मेहनत की सच्चाई है 🔷शुरुआती पंक्तियाँ सिर्फ शायरी नहीं, बल्कि एक गहरी सच्चाई हैं— 👉 “मेहनत इतनी ताक़तवर है कि इंसान खुद अपनी तक़दीर लिख सकता है।” कभी-कभी किस्मत इंतज़ार करती है, लेकिन मेहनत उसे मजबूर कर देती है बदलने के लिए। 🔷🙏 नमन उन सभी मेहनतकश हाथों को आज के दिन उन सभी श्रमिकों को नमन— जो बिना रुके, बिना थके, अपने पसीने से दुनिया को आगे बढ़ाते हैं। चाहे वो किसान हो, निर्माण मजदूर, सफाई कर्मचारी, ड्राइवर, फैक्ट्री वर्कर या कोई भी मेहनतकश इंसान— 👉 हर एक का योगदान अमूल्य है। 🔷🌺 समापन:— आइए आज संकल्प लें— 👉 श्रम का सम्मान करेंगे 👉 श्रमिकों के अधिकारों के प्रति जागरूक रहेंगे 👉 और हर मेहनतकश को उसका हक दिलाने में अपना योगदान देंगे मेहनत करने वाले कभी हारते नहीं, वो बस अपनी तक़दीर लिखने में लगे रहते हैं… ✍️ 🙏 अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏
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🌿 सेवाग्राम आश्रम स्थापना दिवस 🌿 “साहिब, जो सीखें थीं बातें, कभी किताबों से हमने! ज़िंदगी ने फिर उनका, मतलब सिखाया है!!” आज का दिन हमें उस पावन स्थान की याद दिलाता है, जहाँ विचार सिर्फ लिखे नहीं गए, बल्कि जिए गए — सेवाग्राम आश्रम, वर्धा। 🔷📜 स्थापना और इतिहास:— 1936 में महात्मा गांधी ने इस आश्रम की स्थापना की। उनका उद्देश्य था—भारत के गाँवों के बीच रहकर, उनके जीवन को समझना और वहीं से देश की आज़ादी की राह को मजबूत करना। सेवाग्राम का अर्थ ही है—“सेवा का गाँव”, और यही इसकी आत्मा भी है। 🔷🌾 गाँव से जुड़ी सादगी और आत्मनिर्भरता:— यह आश्रम किसी भव्य इमारत का नाम नहीं, बल्कि एक जीवंत विचारधारा है— सादगी भरा जीवन स्वदेशी और खादी का प्रयोग आत्मनिर्भरता का संदेश श्रम और सेवा का महत्व यहाँ बापू ने खुद चरखा चलाया, मिट्टी के घरों में रहे, और यह सिखाया कि 👉 सच्चा नेतृत्व वही है, जो सबसे सरल जीवन जीकर भी समाज को दिशा दे। 🔷🕊️ आज़ादी के आंदोलन का केंद्र:— सेवाग्राम आश्रम केवल निवास स्थान नहीं था, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम की रणनीति और संवाद का प्रमुख केंद्र बना। देश-विदेश के अनेक नेता यहाँ आते थे, विचार-विमर्श होता था, और यहीं से कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। 🔷🌼 आज के समय में महत्व:— आज जब जीवन भागदौड़, दिखावे और प्रतिस्पर्धा में उलझा है, सेवाग्राम हमें याद दिलाता है कि— सादगी में भी शक्ति है सेवा में ही सच्ची सफलता है और आत्मनिर्भरता ही असली आज़ादी है 🔷संदेश:— साहिब, किताबें हमें रास्ता दिखाती हैं, पर ज़िंदगी उन्हें जीना सिखाती है— और सेवाग्राम आश्रम उसी जीवंत सीख का प्रतीक है। आइए, इस स्थापना दिवस पर हम यह संकल्प लें कि— 👉 हम भी अपने जीवन में सरलता, सेवा और सच्चाई को स्थान देंगे। 🙏 सेवाग्राम आश्रम स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🌿
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SURINDER JEET KAUR (ਸੁਰਿੰਦਰ ਜੀਤ ਕੌਰ) सुरिंदर जीत
दिल दहला देने वाली घटना जिसने इंसानियत को शर्मसार किया 😭😭 “आख़िर प्रशासन को आई शर्म…” — पर क्या इतना ही काफ़ी है? ओडिशा की यह घटना सिर्फ़ एक खबर नहीं, बल्कि हमारे सिस्टम और समाज की कड़वी सच्चाई है — जिसे देखकर दिल टूट जाता है और रूह काँप उठती है। 🔷क्या हुआ था पूरा मामला?
केन्दुझर जिले के दियानाली गांव में रहने वाले 50-52 वर्षीय आदिवासी मजदूर जीतू मुंडा की बड़ी बहन कलरा मुंडा (56) की 26 जनवरी 2026 को मौत हो गई थी। बहन के नाम पर ओडिशा ग्रामीण बैंक की मलीपोसी शाखा में करीब ₹19,400 जमा थे। जीतू उन पैसों को निकालना चाहते थे — लेकिन बैंक की कागजी प्रक्रिया, डेथ सर्टिफिकेट और “खाताधारक को लेकर आओ” वाली माँग ने उन्हें बेबस कर दिया। अनपढ़, गरीब और सरकारी दफ़्तरों से अनजान जीतू समझ ही नहीं पाए कि अब क्या करें। महीनों तक चक्कर काटने के बाद मजबूरी और निराशा की इंतहा पर उन्होंने अपनी बहन की कब्र खोद ली… कंकाल को बोरी में भर लिया… और कंधे पर लादकर करीब 3 किलोमीटर पैदल चलकर बैंक पहुँच गए — ताकि “सबूत” दे सकें कि उनकी बहन अब इस दुनिया में नहीं है। यह दृश्य इतना दर्दनाक, इतना दिल दहला देने वाला था कि जिसने भी देखा, उसकी आँखें नम हो गईं। एक भाई अपनी बहन के अवशेषों को इस तरह ढोते हुए… कल्पना करो तो रूह काँप जाती है। 🔷📹 फिर क्या हुआ? 
किसी ने यह वीडियो बना लिया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
वीडियो वायरल होते ही प्रशासन और बैंक हरकत में आ गया —
✔️ बैंक ने बहन के खाते के ₹19,402 तुरंत निकाल दिए
✔️ जिला प्रशासन ने ₹30,000 की अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी दी लेकिन… 
🔷क्या यह मदद वीडियो वायरल न होता तो भी मिलती? 💔 यही सबसे बड़ा सवाल है…
👉 क्या एक गरीब, अनपढ़ आदिवासी की आवाज़ इतनी कमज़ोर हो चुकी है कि बिना वायरल हुए उसे सुना ही नहीं जाता?
 👉 क्या सिस्टम को जगाने के लिए अब हर दर्द को कैमरे में कैद करके सोशल मीडिया पर चिल्लाना ज़रूरी हो गया है?
 👉 क्या ये कुछ हजार रुपये उस अपमान, उस मानसिक यातना और उस भाई की बेबसी की भरपाई कर सकते हैं? 🔷👁️ सोचिए ज़रा… 
एक भाई, जिसने बहन के साथ ज़िंदगी बिताई…
उसे उसकी अंतिम गरिमा और पहचान के लिए कब्र खोदकर कंकाल कंधे पर उठाना पड़ा —
यह सिर्फ़ गरीबी नहीं, यह व्यवस्था की संवेदनहीनता, कागजी जाल और इंसानियत की हत्या है। गरीबी सिर्फ़ पैसों की कमी नहीं होती…
कभी-कभी यह इंसान की गरिमा, सम्मान और इंसानियत छीन लेती है। 🔷🙏 आज ज़रूरत है:— 
✔️ सिस्टम को संवेदनशील और जवाबदेह बनाने की
✔️ ज़मीनी स्तर पर आसान, बिना कागजों के मदद पहुँचाने की
✔️ हर गांव-कस्बे में जागरूकता और तुरंत सहायता की व्यवस्था की
✔️ और सबसे ज़रूरी — इंसान को इंसान समझने की, उसकी मजबूरियों को समझने की 👉🙏ईश्वर उस बुज़ुर्ग जीतू मुंडा को इस घाव से उबरने की हिम्मत दे…
और हम सबको इतनी आँखें, इतनी संवेदना दे कि भविष्य में कोई भाई अपनी बहन के सम्मान के लिए सड़कों पर कंकाल ढोने को मजबूर न हो। क्योंकि एक सच्चा विकसित समाज
उसकी इमारतों से नहीं,
उसकी इंसानियत और संवेदना से पहचाना जाता है। जागो… सोचो… और बदलाव लाओ।
#Odisha #JituMunda #SystemFailure #Humanity #InsaniyatKiLadai
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क्या लिखूं मां ❤️ की शान में सब कुछ तो लिख दिया खुदा ने कुरान में ❤️ उसके प्यार की दास्तान इतनी लंबी थी... स्याही खत्म हो गयी “माँ” लिखते-लिखते ❤️❤️ #happy_mothers_day @ACP_SURINDER_K @SURINDERJEET63
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Shubham Sahu 🇮🇳
Shubham Sahu 🇮🇳@ivShubham_INN·
Engineer का कमाल बनाया पानी में तैरता घर 😱
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komal
komal@komal323232·
कल सुबह उठीं तो कमर में ये हों गया । कम होने का नाम ही नहीं ले रहा हैं और बढ़ता ही जा रहा हैं। क्या बीमारी है ये ?
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@komal323232 Ek Free Ka Ilaaj Aamchoor Sukhe Aam Ka Pissa Hua Powder Aamchoor Bolte hai jisko 10 Rupe Ka Pecket Milega Halka Sa Paani Daal ke Pest Lga Lena 2 Ghante Me Gayab Ho Jayega Sahi Hone Ke Baad Dua De Dena Bass
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A factory owner in Parsa Kheda, Road No 1 the industrial area of ​​Bareilly, is not paying Rs 21,000 rent for truck for the last one year. You are requested to take strict action against the culprit. @Uppolice @bareillypolice @adg
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A factory owner in Parsa Kheda, Road No 1 the industrial area of ​​Bareilly, is not paying Rs 21,000 rent for truck for the last one year. You are requested to take strict action against the culprit. @Uppolice @bareillypolice @adg
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