राष्ट्र प्रेमी 🇮🇳 (Modi ka Pariwar)
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राष्ट्र प्रेमी 🇮🇳 (Modi ka Pariwar)
@Matribhakt
See my country as the loving mother who nourishes all her children. Proud to belong to the true cradle of civilization - Hindustan. Am @Matribhakt on Parler.



वीर सावरकर के समाज-सुधार कार्यों का मूल्यांकन करने में इतिहासकारों ने कंजूसी की है. वामपंथियो-इस्लामिक लोगों के जिम्मे इतिहास-लेखन का काम होने का ये एक बड़ा नुकसान रहा. सावरकर देश के सबसे प्रमुख समाज सुधारकों मेंं थे. हमें उन्हें वह स्थान देना चाहिए, जिसके वे हकदार थे. नमन. कितने लोग जानते हैं कि उन्होंने रत्नागिरी में सर्वजातीय मंदिर बनवाया. वह मंदिर आज भी है. गांधी इस समय तक मंदिर प्रवेश आंदोलन के विरोधी थे. सभी जातियों के सहभोजन का आंदोलन सबसे पहले सावरकर ने शुरू किया. लंबी लिस्ट है. फिर कभी.











रेडियो मिर्ची वाली जेहादी RJ सायमा ने मुझे उस दिन ब्लॉक कर दिया था जिस दिन दिल्ली दंगों के लिए इसने भीड़ को उकसाया और मैने इसके खिलाफ आवाज उठाई। अब चोरी छुपे #DoTook के क्लिप्स देख कर ट्रोल करती है। और इसे बुरा लगा जब स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर का अपमान करके वाले सैयद जवाद को मैने लताड़ लगाई। और यह स्वाभाविक है क्योंकि सायमा खुद शाहीन बाग में बैठ कर "जिन्ना वाली आजादी" के नारे लगा रही थी।

🇿🇦 South African President Cyril Ramaphosa says that the country will not abandon its DEI policies, known as “Black Economic Empowerment (BEE).” “Those who say BEE and affirmative action must stop are just dreaming,” he said. South Africa has strict laws that mandate race-based hiring practices. A new law called the Employment Equity Amendment Act sets hiring targets for 2025–2030 across 18 economic sectors. Some workforce targets aim for 90–96% of employees to come from designated groups, which include Black people, women, and people with disabilities (minimum 3%). That means that if a company has more than 5% white men, it could face penalties of up to 10% of its income.


WhatsApp groups formed by the Islamic conversion cartel at TCS Nashik would regularly share information on which Hindu woman to target - who is facing personal problems like bad marriage, no children, etc Men like Raza Memon, Danish Sheikh etc would then target them through manipulation, false hope of a better future, all aimed at their leaving Hindu identity and adopting Islam The horror is directly inspired by - centuries of deeply embedded Hindu hate - superstition that ‘bringing iman to kaafirs’ will reserve a seat in Jannat to enjoy hoors - aggressive preaching of sexual perversion by mullahs It succeeds because many Hindus have been cut off from their own Vedic wisdom and roots. This civilisational weakening is what produces weak laws and weak enforcement

Community note पर हो हल्ला क्यों भाई ।@XCorpIndia नोट छापते रहे और भारत सरकार को कोई टैक्स नहीं दे, यह कहाँ का न्याय है । ऑस्ट्रेलियाई क़ानून की तरह वह भारत में Publishers का लाइसेंस लें तथा हमें प्रत्येक साल भारत सरकार को 25 हज़ार करोड़ का टैक्स देते रहें,अन्यथा कम्यूनिटी नोट बंद करे। X प्रत्येक वर्ष ऑस्ट्रेलिया सरकार को 7 हज़ार करोड़ रुपये टैक्स देता है








मोदी से समस्या उनके द्वारा किए जा रहे तुष्टिकरण से नहीं है। वो तो हम बारह वर्षों से झेल रहे हैं। मोदी से जो समस्या है, वह आज और कल में @narendramodi हैंडल से किए गए पोस्ट में दिखता है। ज्योतिबा फूले पर सात पोस्ट हुए हैं आज, पर मंगल पांडे के बलिदान दिवस को बिलकुल नकार दिया गया। फुले स्वघोषित रूप से हिन्दू-घृणा करने वाला व्यक्ति था जो उसकी पुस्तक गुलामगीरी के पन्नों पर दिखती है। 1857 की क्रांति को ले कर उसके विचार क्या हैं, वह क्या PM को नहीं पता? और मंगल पांडे का 1857 में योगदान, क्या नरेन्द्र मोदी केवल इस कारण से नकार गए क्योंकि उनके हिन्दू-विरोधी दलित नायकों की शृंखला में एक ब्राह्मण फिट नहीं होता? हमारी समस्या यही है कि सवर्णों का योगदान मिटाया जा रहा है, ब्राह्मण विरोधियों को सरकारी प्लेटफॉर्म से वह सब बनाया जा रहा था जो वो कभी थे ही नहीं। ब्राह्मण यूनिवर्सिटी की दीवारों पर गाली सुनता है, नारों में लिंच होता है और सरकारी योजनाओं को फायनेंस करने में पिसता रहता है। @PMOIndia @BJP4India और @RSSorg स्पष्ट तौर पर राष्ट्र में विभाजनकारी नीतियों को बढ़ा रहे हैं। आलोचना की डींगे मारने वाले नरेन्द्र का सत्य यह है कि वो पत्रकारों को हाउस अरेस्ट करवाते हैं। उनके निर्देश पर उन्मुक्त सोशल मीडिया को बाँधने के लिए मूर्खों से भरी संसदीय समिति अपनी अनभिज्ञता की विष्ठा सार्वजनिक करती है। नरेन्द्र मोदी को निशिकांत दूबे जैसे चाटुकार ही चाहिए। वही उनको उचित उन्माद देते हैं। बाकी, साक्षात्कारों में ‘आलोचना होती रहनी चाहिए’ का धनिया छिड़कते रहिए।








