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अयोध्या के रोकड़िया हनुमान मंदिर के महंत आचार्य विनोद मिश्रा ने बताया, 'जौनपुर (मुंगराबादशाहपुर) के रहने वाले अनिल विश्वकर्मा मुंबई के बड़े कारोबारी और हमारे शिष्य हैं। उन्होंने रामलला को चांदी का हार और चरण पादुका चढ़ाने का संकल्प लिया था। महीन कारीगरी से बना चांदी का हार करीब 3 किलो का और 64 दिव्य चिह्नों वाली चरण पादुका लगभग 1 किलो वजन की थी।' 'परिवार सबसे पहले मेरे आश्रम आया, जहां दोनों वस्तुओं का पूजन हुआ। फिर परिवार इन्हें थाल में सजाकर, सिर पर रखकर रामलला के दरबार पहुंचा था। मैं भी उनके साथ गया था। गेट पर हमें रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव मिला, जो VVIP रास्ते से हमें सीधे गर्भगृह ले गया। वहां पुजारियों ने कुछ देर के लिए उन वस्तुओं को प्रभु के चरणों में रखा और फिर टिन्नू ने उन्हें अपने पास रख लिया।' जब पीड़ित परिवार ने हार पहनाए जाने की तस्वीर और चढ़ावे की रसीद मांगी, तो टिन्नू ने बहाना बनाया। उसने कहा, 'पहले बैंक के अधिकारी हार की शुद्धता जांचेंगे, फिर इसे प्रभु को पहनाया जाएगा। तब आपको सूचना देकर फोटो-वीडियो उपलब्ध करा देंगे।' रसीद के सवाल पर उसने कहा कि एक बार 'भाई साहब' (ट्रस्ट महासचिव चंपत राय) देख लें, फिर रसीद मिल जाएगी। महंत विनोद मिश्रा ने आरोप लगाया, 'ट्रस्ट ने न तो कभी हार पहनाया और न ही परिवार को कोई सूचना दी। जब भी मैं टिन्नू से रसीद मांगता, वह टालमटोल करता। बाद में उसने दावा किया कि दोनों आभूषणों को बंगाल भेजकर गलवा दिया गया है और उनकी ईंटें बनवा दी गई हैं। ताकि जरूरत के अनुसार भगवान के बर्तन बनाए जा सकें। इस धांधली की खबर सुनकर श्रद्धालु परिवार बेहद आहत है।’ पूरी खबरः bhaskar.com/local/uttar-pr…


















