ज्ञानेंद्र पंडित
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ज्ञानेंद्र पंडित
@Modified24
सिविल इंजीनियर, सृजनात्मक एवं विध्वंसक प्रवृत्ति स्वाभाविक।


At the age of 99, I have seen our nation earn its voice - and today, I used mine. The first time I voted was in 1946 as a Medical Student. Voting is not just a right, it is a responsibility to the future we leave behind. Your one vote matters. Step out. Stand up. Be counted.




गुरु को दया नहीं चाहिए। उसे भीख नहीं चाहिए। उसे उसका हक चाहिए। कृपया… एक शिक्षक को टूटने से बचा लीजिए। #JusticeForTeachers #StandWithTeachers

घर में दवा की पर्ची रखी है। फीस की आखिरी तारीख पास है। रसोई में खर्च की फुसफुसाहट है। और वह… कल फिर समय पर स्कूल जाएगा। #JusticeForTeachers

20 वर्षों तक उसने दूसरों के बच्चों के सपनों को सींचा। आज उसका अपना बच्चा पूछ रहा है — “पापा/माँ… सब ठीक तो है?” और वह मुस्कुराकर झूठ बोल देता है। #JusticeForTeachers

उसने बच्चों से कहा — “डरो मत, मैं हूँ न…” और उसी क्षण उसे महसूस हुआ — उसके लिए “मैं हूँ” कहने वाला कोई नहीं। #JusticeForTeachers

यदि गुरु टूटेगा, तो संस्कृति का आधार टूटेगा। कृपा नहीं — न्याय दीजिए। क्योंकि गुरु बचेगा, तभी भविष्य बचेगा। #JusticeForTeachers


नीतियाँ बदल गईं… पर उसके 20 वर्ष नहीं बदल सकते। उसकी सेवा, उसका समर्पण, उसके पढ़ाए हुए डॉक्टर, इंजीनियर, अधिकारी — सब गवाही दे सकते हैं। #JusticeForTeachers

शास्त्र स्मरण कराते हैं— “न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते॥” जब ज्ञान से बढ़कर कुछ पवित्र नहीं, तो ज्ञान देने वाला इतना असुरक्षित क्यों? #JusticeForTeachers

वह रोज बच्चों से कहता है — “मेहनत करोगे तो जीवन संवर जाएगा।” पर आज घर लौटते समय उसे अपने ही शब्द बोझ लग रहे थे। #JusticeForTeachers

आज गुरु कक्षा में खड़ा था… हाथ में चॉक था, पर हाथ हल्का काँप रहा था। बच्चों ने समझा ठंड है… उसे पता था — यह भविष्य का डर है। #JusticeForTeachers

जब गुरु रोता है, तो संस्कृति रोती है। जब शिक्षक असुरक्षित होता है, तो आने वाली पीढ़ियाँ असुरक्षित हो जाती हैं। गुरु को न्याय दीजिए। #JusticeForTeachers #StandWithTeachers

यह केवल वेतन नहीं — यह उस सम्मान की बात है जो सदियों से भारतीय संस्कृति में “गुरु” को मिला है। #JusticeForTeachers
