
किसने सोचा था कि पत्रकारिता में ऐसा दिन आएगा जब सत्ता से सवाल पूछने वाले पत्रकार पर टीवी एंकर ही प्रश्नों की बौछार शुरू कर देंगे? कभी पत्रकारिता का धर्म था, सत्ता से पूछो, नेताओं से पूछो, मंत्रियों से पूछो, अफ़सरों से पूछो, संस्थाओं से पूछो, ताक़तवर से पूछो। अब नया तमाशा है, जो पूछ रहा है, उसी से पूछो कि तुमने पूछा क्यों?














