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निदेश सूर्यवंशी एडवोकेट _WITH INC
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निदेश सूर्यवंशी एडवोकेट _WITH INC
@Nidesh423
INC कांग्रेस पार्टी एक राजनीतिक दल ही नहीं वरन् एक राष्ट्रवादी विचारधारा है। जिसने इस देश को बनाया है। श्री राहुल गांधी जी मेरे आदर्श राजनेता है।
Madhya Pradesh, India Katılım Ocak 2020
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आज सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा हाईकोर्ट और ओडिशा के कई ट्रायल कोर्ट द्वारा दलित एवं आदिवासी समुदाय के व्यक्तियों की जमानत के समय पुलिस स्टेशनों में दो महीने तक लगातार सुबह 6:00 से 9:00 बजे तक साफ-सफाई करने की जातिगत भेदभावपूर्ण शर्तों को बेहद शर्मसार करने वाला फैसला बताया।
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू महोदया, आप इसी ओडिशा राज्य और उसी आदिवासी समुदाय से आती हैं, जिसे आज न्याय व्यवस्था से ही जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।
ओडिशा हाई कोर्ट के निर्देशों पर गंभीर एतराज जताते हुए आज चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने इन शर्तों को जातिगत भेदभाव को दर्शाने वाला बताया और कहा कि, "हम बहुत निराश और हताश हैं, और ओडिशा राज्य की न्यायपालिका जिस तरह से ऐसी भारी, अपमानजनक और बेइज्जती भरी शर्तें लगाकर असल में एक पुरानी सोच की ओर लौट गई है, उससे हम पूरी तरह नाराज हैं, जो साफ तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन करती हैं। ऐसी शर्तें न्याय को आगे बढ़ाने के बजाय आरोपी की गरिमा पर चोट करती हैं और दोषी होने के आधार पर कार्रवाई करती हैं, जो कानून में पूरी तरह गलत है।"
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "हमारा मानना है कि किसी भी राज्य की न्यायपालिका को ऐसी जाति-आधारित और दमनकारी शर्तें नहीं लगानी चाहिए, जिनसे गंभीर सामाजिक टकराव पैदा होने का खतरा हो"। साथ ही, आदेश की एक प्रति देशभर के सभी हाई कोर्ट को भेजने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने कहा कि ऐसी शर्तों से यह प्रतीत होता है कि ओडिशा राज्य की न्यायपालिका जातिगत भेदभाव से ग्रसित है, क्योंकि सभी आरोपी पिछड़े समुदायों से थे।
सुनवाई के दौरान ओडिशा के एडवोकेट जनरल पीतांबर आचार्य को संबोधित करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा: "दुर्भाग्य से, ओडिशा में हाईकोर्ट और कुछ ट्रायल कोर्ट ऐसी जमानत शर्तें लगा रहे हैं, जो अनुचित हैं और जाति के आधार पर भेदभाव दर्शाती हैं तथा न्यायपालिका की छवि को धूमिल कर रही हैं।"
जानकारी में आया है कि ओडिशा राज्य में मई 2025 से जनवरी 2026 के बीच जातिगत भेदभाव वाले ऐसे आठ आदेश पारित किए गए, जिनमें से छह आवेदक दलित समुदाय के थे और दो आदिवासी समुदाय से थे।
#SupremeCourt #Odisha #CasteDiscrimination #HumanRights @rashtrapatibhvn @indSupremeCourt @ndtv @IndianExpress @TOIIndiaNews

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यह पश्चिम बंगाल , केरल और तमिलनाडु का किसान नहीं है ।
यह किसान मध्यप्रदेश का है जहां 20 साल से बीजेपी सरकार है , 29 संसद बीजेपी के है ।
केंद्र कृषि मंत्री मध्यप्रदेश का शिवराज सिंह है ।
लेकिन किसी को कोई दिक्कत नहीं है , क्योंकि ट्रेक्टर - ट्राली में अनाज है , अगर ट्राली में 10-15 किसान बैठकर दिल्ली कि तरफ चले होते तो 🤔
फिर आंसू गैस और लाठियां होती और नेशनल मीडिया से लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा होती ।
#electionresult2026

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वह औरत किस किस से लड़तीं?
काली का रुप तो उसमें झलकता था।
परंतु वह काली इस कलयुग के राक्षसों से जित ना पाई।
कुछ राक्षसों के नाम इस प्रकार है
1- महिशासुर कुमार
2- वड़नगर वाला मारीच
3- तड़ीपार भस्मासुर
तिन बड़े राक्षस
और उनकी अधभक्त राक्षसी सेना।
इस बार महाकाली(ममता दीदी) ने मुख्य रूप से रक्तबीज (Raktabeeja) नामक राक्षस(खाजपा )का वध करने यश प्राप्ति न की हो।
किंतु पांच वर्षों के बाद विपक्षी दल इस राक्षस का वध अवश्य करेगा
फिर भी अभिमन्यु होने में कौई कसर बाकी नहीं रखी दीदी ने।
कलयुग की इस वीरांगना को हाथ जोड़कर प्रणाम करते हैं 🙏
*दीदी आप वोटों से पराजित नहीं हूई*
*आप प्रशासन से पराजित हूई।*
# मोंटी
जय हिंद जय भारत जय महाराष्ट्र 🚩🇮🇳🙏

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फरक्का से कांग्रेस के विजयी उम्मीदवार मोहताब शेख हैं।
इनका नाम एसआईआर सूची में नहीं था,
जिसके बाद इसने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर ट्रिब्यूनल को इनके मामले की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर करने का निर्देश दिया।
नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन इनका नाम सूची में शामिल किया गया
और ये चुनाव जीत लिया।
ज़रा सोचिए,
27 लाख नागरिक आज भी अपनी पहचान की तलाश में हैं।

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