Nitin Jindal

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Social Media Influencer, Bharat First 🇮🇳 NaMo Believer, RTs - Not Endorsement

Modinagar, India Katılım Kasım 2016
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स्वामी रामदेव
#विजयदशमी स्थापना दिवस पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शतायु होने पर सेवाधर्म व राष्ट्रधर्म के पुरुषार्थ को प्रणाम। #RSS100Years #संघ_शताब्दी_वर्ष #RSSCentenaryCelebrations @ANI @PTI_News @RSSorg
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Sadhguru
Sadhguru@SadhguruJV·
Rashtriya Swayamsevak Sangh is an epitome of Rashtra Bhakti. Their Nationalism has been a vital bridge during some of the most trying periods of Bharat’s recent history. Congratulations on completing a hundred years of service and sacrifice of a very silent sort. 🙏🏽 -Sg @RSSorg
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Vice-President of India
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी के इस महत्वपूर्ण अवसर पर मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ। विश्व का सबसे बड़ा राष्ट्रभक्त संगठन 100 वर्ष का हो चुका है। संघ का सबसे बड़ा योगदान ऐसे आत्मानुशासित और उत्तरदायी नागरिक हैं, जो सशक्त समाज की आधारशिला हैं। 1925 में डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार जी द्वारा स्थापित होने के बाद से, संघ ने युवाओं को मजबूत आंतरिक चरित्र निर्माण और निस्वार्थ भाव से समाज सेवा करने के लिए प्रेरित किया है। “सेवा परमो धर्मः” के आदर्श से प्रेरित स्वयंसेवकों को चाहे बाढ़, अकाल, भूकंप या अन्य किसी भी आपदा का सामना करना पड़े, वे बिना किसी अपेक्षा या आदेश की प्रतीक्षा के संगठित होकर पीड़ितों की सेवा करते हैं। यह निस्वार्थ सेवा राष्ट्र के लिए एक अद्वितीय और अमूल्य उपहार है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सेवा करते हुए कभी धर्म, जाति या भाषा के आधार पर भेदभाव नहीं करता। संघ हमेशा समाज के साथ चलता है। यही वजह है कि संघ और उसके सभी संगठन सफल और निरंतर विकासशील हैं। वह दिन दूर नहीं जब भारत विश्व की सर्वोच्च शक्ति के रूप में स्थापित होगा। इस महान यात्रा में संघ की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण रही है और समय के साथ उसकी यह प्रेरक भूमिका निरंतर बनी रहेगी। इस शताब्दी वर्ष में मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को समाज की सेवा में निरंतर योगदान और राष्ट्रीय एकता, सद्भाव और प्रगति के महान उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।
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PMO India
PMO India@PMOIndia·
Enduring personal hardships to ease the suffering of others… this defines every Swayamsevak.
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Ram Nath Kovind
Ram Nath Kovind@ramnathkovind·
आज नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित श्रीविजयादशमी उत्सव में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मैं सभी स्वयंसेवकों तथा संघ परिवार के सभी संगठनों के सदस्यों को विजयादशमी और शताब्दी समारोह की हार्दिक बधाई देता हूं। मुझे विश्वास है कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत तथा पूर्णतः समरस और एकात्म भारत के निर्माण में संघ का असीम योगदान रहेगा। #RSS100Years #RSSorg
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Narendra Modi
Narendra Modi@narendramodi·
An inspiring address by Param Pujya Sarsanghchalak Dr. Mohan Bhagwat Ji, highlighting the rich contributions of the RSS to nation-building and emphasising the innate potential of our land to attain new heights of glory, thereby benefiting our entire planet. #RSS100Years
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Excerpts of the speech by Param Poojaniya Sarsanghchalak ji on the occasion of Vijayadashmi Utsav, Nagpur #RSS100Years rss.org/Encyc/2025/10/…

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Narendra Modi
Narendra Modi@narendramodi·
परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में राष्ट्र निर्माण में संघ के अतुलनीय योगदान पर प्रकाश डाला है। उन्होंने भारतवर्ष के उस सामर्थ्य को भी रेखांकित किया है, जो देश को सशक्त बनाने के साथ-साथ संपूर्ण मानवता के लिए भी कल्याणकारी है। #RSS100Years
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शताब्दी वर्ष श्री विजयादशमी उत्सव युगाब्द 5127 . #RSS100Years x.com/i/broadcasts/1…

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शताब्दी वर्ष श्री विजयादशमी उत्सव युगाब्द 5127 . #RSS100Years x.com/i/broadcasts/1…
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मुझे विश्वास है कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत तथा पूर्णतः समरस और एकात्म भारत के निर्माण में संघ का असीम योगदान रहेगा। मैं पुनः आप सभी को विजयादशमी के पावन पर्व की बधाई देते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं। - श्री रामनाथ कोविंद #RSS100Years
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संघ की कार्यशैली व्यक्ति-निष्ठ न होकर संगठन-निष्ठ और तत्त्व-निष्ठ है। यही संघ की शक्ति है। पिछले सौ वर्षों के दौरान संघ द्वारा समरस, और संगठित व समावेशी समाज तथा सुदृढ़ राष्ट्र के निर्माण हेतु भगीरथ प्रयास किए गए हैं। संघ ने संत-परंपरा, सज्जन-शक्ति और मातृ-शक्ति के योगदान से हमारे समाज और राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोया है। नई पद्धतियों और technology को अपनाते हुए, संघ के कार्यों को और तेज गति से आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। मैं आशा करता हूं कि भविष्य में संघ का और अधिक विस्तार होगा। जमीनी स्तर पर सामाजिक समरसता एवं सामाजिक न्याय के पक्षधर रहे संघ के स्वयंसेवक, गरीबों और वंचितों को न्याय दिलाने में और अधिक सक्रियता तथा दृढ़ता के साथ कार्य करेंगे। - पूर्व राष्ट्रपति #RSS100Years
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मैं युवाओं से अनुरोध करूंगा कि वे जन-सेवा में बढ़-चढ़कर भागीदारी करें। नैतिक मूल्यों पर आधारित राजनीति में भागीदारी करना जन-सेवा का प्रभावी माध्यम है। किसी विचारक ने ठीक ही कहा है कि राजनीति से परहेज करने की गलती करके, समाज के अच्छे लोग अपने ऊपर कम योग्य व्यक्तियों के शासन का भार ढोना स्वीकार कर लेते हैं। जन-सेवा की भावना से प्रेरित होकर तथा संकीर्ण निजी स्वार्थों से ऊपर उठकर राजनीति में सक्रिय होना युवाओं के हित में भी है, तथा समाज और राष्ट्र के हित में भी है। - पूर्व राष्ट्रपति #RSS100Years
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युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा प्रदान करना देश के सुदृद भविष्य के लिए अनिवार्य है। यह बात उत्साहित करती है कि आज संघ के प्रति युवाओं में आकर्षण बढ़ रहा है। युवाओं में ईमानदारी, विनम्रता, प्रामाणिकता और सकारात्मक दृष्टिकोण के जीवन-मूल्यों को प्रसारित करने में संघ परिवार बहुत बड़ा योगदान दे सकता है। सभी सम्बद्ध संगठनों को एकजुट होकर योग-युक्त तथा नशा-मुक्त युवा पीढ़ियों का निर्माण करना है। - श्री रामनाथ कोविंद #RSS100Years
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संघ में व्याप्त समरसता, समानता और जाति भेद से पूरी तरह मुक्त व्यवहार को देखकर महात्मा गांधी भी बहुत प्रभावित हुए थे जिसका विस्तृत विवरण सम्पूर्ण गांधी वांड्मय में मिलता है। गांधीजी ने 16 सितंबर 1947 को दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की रैली को संबोधित किया था और कहा था कि वे बरसों पहले संघ के संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार के जीवनकाल में संघ के एक शिविर में गए थे। गांधीजी संघ के शिविर में अनुशासन, सादगी और छूआछूत की पूर्ण समाप्ति को देखकर अत्यंत प्रभावित हुए थे। जनवरी 1940 में बाबासाहब आंबेडकर द्वारा महाराष्ट्र के सातारा जिले के कराड़ नगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में जाकर लोगों से मिलने का तथा अपनेपन की भावना व्यक्त करने और सहायता का प्रस्ताव देने का उल्लेख, संघ के समरसतापूर्ण दर्शन एवं व्यवहार शैली का ऐतिहासिक प्रमाण है। मराठी भाषा में प्रकाशित होने वाले 'केसरी' समाचार पत्र को उस समय राष्ट्रीय समाचार पत्र का दर्जा प्राप्त था। 9 जनवरी 1940के केसरी समाचार पत्र में बाबासाहब के एक महत्वपूर्ण वक्तव्य को उद्धृत किया गया है। बाबासाहब ने कहा था 'कुछ बातों में मतभेद होने पर भी मैं इस संघ की ओर अपनेपन से देखता हूं।' बाबासाहब के अपने साप्ताहिक पत्र 'जनता' में भी यह समाचार छपा था कि कराड़ म्युनिसिपलिटी के एक समारोह में भाग लेने के बाद बाबासाहब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों से मिले और आवश्यकता पड़ने पर उनकी सहायता करने का आश्वासन दिया। - श्री रामनाथ कोविंद #RSS100Years
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Sangh’s experience has been that individual character building & personality development leads to societal transformation and in turn leads to transformation of systems in all dimensions of life. #RSS100Years - Dr. Mohanji Bhagwat .
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सामाजिक समरसता को पंच-परिवर्तन अभियान में पहला स्थान दिया गया है। सामाजिक समानता और एकता संघ की पहचान है। 'एक मंदिर, एक कुआं, एक शवदाह-स्थल' जैसे प्रयासों से, विभाजक प्रवृत्तियों को दूर किया जा रहा है। यह प्रसन्नता की बात है कि समरसता की भावना के साथ समाज-सेवा तथा समाज-परिवर्तन के अनेक प्रकल्प संघ द्वारा चलाये जाते हैं। देश भर में, संघ के स्वयंसेवकों के द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य और जन-जागरण के लिए गरीब बस्तियों में किया जा रहा कार्य विशेष रूप से सराहनीय है। - रामनाथ कोविंद #RSS100Years
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महिलाएं हमारी परिवार-व्यवस्था में बराबर की सहभागी हैं। संघ की विकास यात्रा में भी यह तथ्य परिलक्षित होता है। आज से लगभग 90 वर्ष पहले 25 अक्तूबर 1936 को विजयादशमी के ही दिन संघ द्वारा 'राष्ट्र-सेविका समिति' की स्थापना की गयी थी। संघ की मान्यता के अनुसार, मातृ-शक्ति का दायित्व है कि वे परिवार निर्माण के साथ-साथ समाज और राष्ट्र का निर्माण भी करें। अतीत में भी मातृ-शक्ति द्वारा ऐसा योगदान किया जाता रहा है। जीजामाता, अहिल्याबाई होलकर, रानी अब्बक्का, रानी चेन्नम्मा, लक्ष्मी बाई, झलकारी बाई, अवन्ती-बाई लोधी, सावित्री बाई फुले, लक्ष्मीबाई केलकर, विजयाराजे सिंधिया और सुषमा स्वराज जैसी महिला विभूतियों ने अपने त्याग, शौर्य और नेतृत्व से राष्ट्र-निर्माण को अमूल्य योगदान दिया है। - पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद #RSS100Years
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1925 में स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, एकता और संगठन का प्रतिरूप बना। आज हजारों शाखाओं में लाखों स्वयंसेवक व्यक्ति निर्माण, चरित्र निर्माण, समाज निर्माण और राष्ट्र निर्माण के लक्ष्य के साथ निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। - श्री रामनाथ कोविंद #RSS100Years
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