खुरचन
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खुरचन
@Onlyfact998
🅟︎🅔︎🅛︎🅤︎ सबकी पेलाई किसी का पक्ष नहीं न कांग्रेसी ना भाजपाई सिर्फ खूरचाई... थोड़ी सी पढ़ाई रिसर्च और एक तगड़ी लुगाई आज़मगढ़ घर बा त केकरा बाप का डर बा...
आजमगड़िया Katılım Kasım 2012
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प्रयागराज से अगर आप ट्रेन के द्वारा AC रिजर्वेशन से मेरठ जाएंगे तो आप आराम से लगभग 1000 रुपए में सोते हुए बिना मेहनत के पहुंच जाएंगे, लेकिन आप गंगा एक्सप्रेस वे के द्वारा खुद की गाड़ी से जाएंगे तो आपको लगभग 1700 रुपए टोल के लिए देने पड़ेंगे...
फलाने का विकास बहुत महंगा है मित्रों हर आदमी यह विकास सहन नहीं कर सकता।
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@ManishPandeyLKW अरे भाई जी आपका हो जायेगा... जिसके घर उपमुख्य्मंत्री आते हो उसका नहीं होगा तो किसका होगा
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आदरणीय ऊर्जावान ऊर्जा मंत्री जी,
आपके बिजली विभाग ने तो लगता है मुझे “स्पेशल ग्राहक” मान लिया है… पिछले एक महीने से ऐसा काट रहे हैं कि बिजली कम, जेब ज्यादा जल रही है
पहले तो 2 लाख 19 हजार का प्रेम पत्र (बिल) भेज दिया, ऊपर से मीटर को प्री-पेड बना दिया… मानो कह रहे हों “ पहले पैसा , फिर करंट ”
फिर मैं बेचारा अफसरों के दरबार में हाथ जोड़कर पहुंचा… बहुत मिन्नतों के बाद बिल 8 हजार हुआ… लेकिन जनाब, ये खुशी भी दो दिन की मेहमान निकली – देखते ही देखते 10 हजार
अब असली खेल शुरू हुआ
15 हजार डाले तो बिल माइनस 2500…
फिर 5 हजार डाले तो माइनस 1200…
फिर 4 हजार डाले तो कहीं जाकर 1300 प्लस…
साहब, ये बिजली का मीटर है या कोई शेयर मार्केट? कभी ऊपर, कभी नीचे… समझ ही नहीं आ रहा कि यूनिट चल रही है या सेंसेक्स
और ऊपर से ये नया ज्ञान मिला कि जब तक पुराना बकाया (जो कि अभी भी 2 लाख+ दिख रहा है) रहेगा, तब तक मेरे हर रिचार्ज का 25% सीधे उसी में समर्पित होता रहेगा… मतलब “डालो तुम, खाए सिस्टम”
हे महात्मन, आपसे विनम्र प्रार्थना है कि अगर मेरा ही ऐसा ‘VIP ट्रीटमेंट’ हो रहा है, तो प्रदेश के आम जनता का क्या हाल होगा… इसका अंदाजा तो मेरी इस पोस्ट के नीचे आने वाले कमेंट्स से ही लग जाएगा।
फिलहाल मैंने भी दौड़-भाग शुरू कर दी है… और हाल ये है कि नया घर होने के बावजूद उसमें रहने का मन नहीं कर रहा… क्योंकि यहां हर दिन बिजली नहीं, बिल का झटका लग रहा है
उम्मीद है आपका विभाग इस “करंट कथा” को गंभीरता से लेगा… वरना अगर ऐसे ही आम आदमी का कटता रहा, तो अगले साल चुनाव में भी करंट कहीं और ट्रांसफर हो सकता है
@aksharmaBharat
आपके प्रदेश का एक उपभोक्ता 🙏

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परिसीमन पर लोकसभा में बोलते हुए, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "एक सबसे बड़ा नैरेटिव खड़ा किया जा रहा है, भ्रांति फैलाई जा रही है कि यह जो तीन विधेयक हैंः संविधान संशोधन विधेयक और परिसीमन और संघ क्षेत्र के चुनाव के कानून में बदलाव का कानून, यह आने से लोकसभा में दक्षिण की क्षमता कम हो जाएगी और हमारे दक्षिण के राज्यों को बहुत बड़ा नुकसान होगा। कर्नाटक में 28 सीटें हैं जो सदन की 543 सीटों में से 5.15% हैं। बिल पास होने के बाद कर्नाटक के सांसदों की संख्या 28 से बढ़कर 42 हो जाएगी, और लोकसभा में कर्नाटक के सांसदों का प्रतिशत बढ़कर 5.44 हो जाएगा। कर्नाटक को बिल्कुल भी नुकसान नहीं होगा। आंध्र प्रदेश में 25 सीटें हैं, जो कुल सीटों का 4.60% है। बिल पास होने के बाद सांसदों की संख्या 25 से बढ़कर 38 हो जाएगी, जो नई संख्या का 4.65% होगा...तेलंगाना में 17 सीटें हैं, जो 3.13% है। बिल पास होने के बाद सांसदों की संख्या 17 से बढ़कर 26 हो जाएगी, जो नई संख्या का 3.18% होगा। तमिलनाडु में 49 सीटें हैं, जो 7.18% है। बिल पास होने के बाद सांसदों की संख्या 59 हो जाएगी जो नई संख्या का 7.23% होगा। केरलम में 20 सीटें हैं, जो कुल सीटों का 3.68% है। बिल पास होने के बाद सांसदों की संख्या 30 हो जाएगी और नई संख्या का 3.67% होगा।"
उन्होंने आगे कहा, "कुल मिलाकर दक्षिण का जो पूरा नैरेटिव बनाया जा रहा है, अभी 543 सीटों में उनके 129 सांसद बैठते हैं, 23.76% दक्षिण सांसदों की शक्ति यहां है, 50% वृद्धि के बाद 129 की जगह 195 सांसद दक्षिण के होंगे और उनकी शक्ति 23.97% होगी।"

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@shalabhmani
विषय: UPSSSC की परीक्षाओं में अभ्यर्थन वापसी (Withdrawal) की व्यवस्था लागू कराने के संबंध में।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) द्वारा समीक्षा अधिकारी/सहायक समीक्षा अधिकारी (RO/ARO) परीक्षा-2023 के संदर्भ में अभ्यर्थियों को यह सुविधा
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जब मोदी शाह ने राजनाथ सिंह से पूछा , यू पी के सीएम बनोगे ?
बात है 2016 की। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में कुछ ही महीने रह गए थे। भाजपा के पास उत्तर प्रदेश के लिए राजनाथ सिंह ही सबसे बड़ा चेहरा थे। लेकिन आशा के विपरीत राजनाथ सिंह ने ये प्रस्ताव ठुकरा दिया क्यूंकि उस समय तक उत्तर प्रदेश में भाजपा की स्थिति बहुत पतली थी। संगठन बिखरा हुआ था , कार्यकर्त्ता उत्साहहीन थे। हाँ, मोदी लहर में 2014 की बड़ी जीत से स्थिति बहुत बदली थी लेकिन फिर भी सरकार बन जाएगी ऐसा नहीं लगता था।
2014 के लोकसभा चुनावों की बड़ी जीत के बाद भाजपा बिहार और दिल्ली के विधानसभा चुनाव बुरी तरह हार चुकी थी। राजनाथ सिंह को लग रहा था अगर यूपी में भी हार गए तो केंद्र से भी जाऊंगा और प्रदेश से भी। राजनाथ सिंह को भी ये लगा कि गुजरात लॉबी उन्हें ठिकाने लगाना चाह रही है।
उसके बाद नोटबंदी हुई , योगी आदित्यनाथ को आगे किया गया और 2017 का ऐतिहासिक चुनाव परिणाम सामने आया।

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@SeemaSingh54481 @AnilYadavmedia1 @grok @VermaUdaibhan क्या तुम्हारी जात की बात करें तभी लीजेंड होंगे
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16 Pages SUMMARY - GEOGRAPHY CLASS 6 NCERT - The Earth Our Habitat
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@ZakirAliTyagi अबे चुतिया संसद का सदस्य था इसलिए करना पड़ा
प्रोटोकॉल हैं...
इससे उसके पाप माफ नहीं हो जायेंगे
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अगर धुरंधर 2 फिल्म में पूर्व सांसद अतीक अहमद को पाकिस्तानी जासूस दिखाया गया है तो देश कि संसद ने 5 बार विधायक 1 बार सांसद रहे अतीक अहमद को श्रद्धांजलि क्यों दी थी? क्यों 788 सांसदों ने 6 बार संवैधानिक पद पर रहने वाले अतीक अहमद की हत्या के बाद उनके सम्मान में खड़े होकर 2 मिनट का मौन धारण कर श्रद्धांजलि दी थी? क्यों लोकसभा अध्यक्ष और मोदी कैबिनेट के दर्जनों मंत्री अतीक अहमद को संसद में श्रद्धांजलि देने के लिए खड़े हुए थे? और अगर संसद अतीक अहमद के सम्मान में खड़ी हुई तो तथाकथित फ़िल्म डायरेक्टर @AdityaDharFilms अतीक अहमद को पाकिस्तानी जासूस कैसे दिखा व बता सकता हैं? अब या तो @PMOIndia को अपनी फिल्म के माध्यम से झूठ और नफ़रत फैलाने वाले गुंडे डायरेक्टर पर कार्रवाई करनी चाहिए या फिर संसद में दी गई श्रद्धांजलि पर सफ़ाई जारी करनी चाहिए।
#Dhurandhartherevnenge #Dhurandhar2 #AtiqAhmad
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@askrajeshsahu फोटो किसलिए खींचा था आपने...
जानते थे क्या की भूल जाऊंगा...
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गाड़ी में सामान भूलने की आदत तो नहीं है लेकिन आज एक बैग भुला गया।
लखनऊ में उतराठिया से कमता के लिए टैक्सी पर बैठा। आहिमामऊ में टैक्सी वाले ने कहा कि दूसरी पर बैठ जाइए। वहीं मामला गड़बड़ हो गया।
पीले रंग की टैक्सी थी। ड्राइवर का यही फोटो लिया है। कोई जानता हो तो बताए। हालांकि संभावना कम है फिर भी कोशिश कर लेता हूं।
@lkopolice @Uppolice देखिए अगर मिल जाए तो बढ़िया।

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कई राज्यों के राज्यपालों को इधर से उधर कर दिया है।
ख़बर है कि राज्यपालों के अदला बदली में एक बड़े राज्य के राज्यपाल को भी बदलना था, लेकिन मामला अभी होल्ड पर चला गया है।
बड़े राजनीतिक कद के बड़े नेता लंबे समय से बड़े राज्य के राज्यपाल के पद पर आसीन है।उम्र भी बड़ी है।उम्र भी 84 साल हो चुकी है।
इस बड़े और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बड़े राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।
राजनीति के जानकार बताते हैं कि इस बड़े राज्य के बड़े राज्यपाल पर बड़े बड़े नेता भी आसानी से हाथ नहीं डाल सकते हैं।
खबर है कि इस बड़े राज्य के राज्यपाल को कुर्सी छोड़ने के लिए आकर्षक प्रस्ताव दिया गया है। राजनीति में जिसे एडजस्ट करना कहा जाता है।ऐसा सुना है कि राज्यपाल को कुर्सी छोड़ने पर परिवार के सदस्य को एडजस्ट करने का प्रस्ताव है।कब,कहा और कैसे एडजस्ट किया जाएगा, इस पर चर्चा चल रही है।
उड़ती उड़ती खबर यह है कि इस बड़े राज्य के राज्यपाल ने अगले साल के विधानसभा चुनाव तक बड़े राज्य का राज्यपाल बने रहने की अपनी इच्छा से सबसे बड़े नेता को अवगत करा दिया है।लेकिन दिल्ली के एक दूसरे बड़े नेता इस बड़े राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्यपाल को हटा कर इस बड़े राज्य में अपनी पसंद का और अपने भरोसे का राज्यपाल चाहते हैं।
आने वाले दिनों में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस बड़े राज्य में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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