Dr. Piyush Mishra
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Dr. Piyush Mishra
@PiyushINC
Ex Joint Media Coordinator -UPCC *Writing a book on Ballia-बागी बलिया का धर्म-कर्म* (Personal Views) 7007408175 / 9453691092
Lucknow Katılım Eylül 2011
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झोली भरकर घर लौट आया हूँ।
इसमे एक ट्रॉफी है। एक प्रशस्ति पत्र, साथ मे पचास हजार का चेक। और गांधी जी जुड़ी आधा दर्जन किताबें..
सोचता हूँ, सबसे ज्यादा कीमती क्या है?
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कोई नोबल प्राइज नही मिला है।
पर इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के उस हॉल में मौजूद सभी- अपने आपमे नोबल शख्स थे। मंच पर साइंटिस्ट गौहर रजा थे। साथ आनंद वर्धन (फाउंडर, पब्लिक मीडिया) और सिद्धार्थ वरदराजन (द वायर)
कार्टूनिस्ट मंजुल, (जो पूरे दिन भर मेरे साथ, बेनाम ऐतिहासिक जगहो पर घूमने के शगल मे, साथ थे, और पति पत्नी के फोटोग्राफर बने रहे) के साथ ही हॉल में प्रवेश किया। लेट थे, कार्यक्रम शुरू हो चुका था।
पीछे की सीट पर पर प्रोफेसर अपूर्वानंद दिखे।
प्रमाण किया वहीं बैठ गए। उधर आयोजक मंडल से ज्ञानेश जी ने नोटिस किया और आगे आकर बैठने सन्देश भेजा।
हम सकुचाते हुए फ्रंट रो में गए। खाली सीट पर नाम की तख्ती थी। पुलित्जर विजेता, सना मट्टू के बगल में बिठा दिया गया।
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तब मंच पर अब राहुल देव बोल रहे थे। उन्होंने ही चुने जाने की खबर दी थी। वे पुरस्कार के उद्देध्य, ज्यूरी औऱ कैटगरीज के बारे में बता रहे थे। शायद उन्होंने मुझे देखा न था। तमाम प्रशंसा के साथ मेरी बात की, नाम लिया- पूछा कि कहां बैठा हूँ।
उठा, हाथ जोड़े। घूम कर हॉल की ओर भी नमस्कार किया। और इस क्षण में सिहर गया।
सारे बेबाक, खुर्राट, मूर्धन्य, प्रतिभाशाली, और पत्रकारिता की दुनिया के जाने माने लोग, जिन्हें जिन्हें दशकों से स्क्रीन पर ही देखा था।सच कहूं तो हर शख्स के तेज के ताप से जलता महसूस किया।
लेकिन बीच मे वे भी दिखे, जिनका स्नेह लगातार मिला है। डॉक्टर राकेश पाठक, दयाशंकर जी, अभिषेक जी, सीपी राय, अनुमा आचार्य, और तमाम लोग बड़े अपनत्व से निहार रहे थे। थोड़ी जान में जान आयी।
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कार्यक्रम बढ़ा। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की अध्यक्ष मैडम बरुआ ने बोला। फिर सिद्धार्थ जी बोले। इसके बाद सम्मान शुरू हुए। सबसे पहले मंजुल जी को सम्मानित हुए। फिर सना मट्टू को, फिर अफरीदा हुसैन।अंत मे मेरा नम्बर आया।
और एक सरप्राइज था।
मैडम सुप्रिया श्रीनेत, जिन्हें अभी तक मैंने नही देखा, ने मंच पर जॉइन किया। प्रोत्साहन भरे शब्द कहे मेरे लिए। वह सुनना कानो के लिए अच्छा था, लेकिन नर्वसनेस भी बढ़ती जा रही थी।
अंततः आनंद बर्धन साहब ने शॉल पहनाई। गौहर रजा ने ट्रॉफी दी। नर्वस देख, कान कुछ शब्द भी कहे। सिद्धार्थ वरदराजन ने सर्टिफिकेट फोल्डर और किताबो का बंच दिया। मुझसे स्पीच का आग्रह किया गया।
कुछ मिनट, कुछ तो भी बोला मैने।
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इसके बाद करन थापर को, लाइफटाइम अचीवमेंट को अवार्ड दिया गया। अमेरिकन जर्नलिस्ट, और अवार्डी-सुश्री लीडिया ने ऑनलाइन उद्बोधन किया।
फिर डिनर था। राजीव जादौन सहित बहुतेरे मित्र मिले। अनुमा जी के परिवार से मिला। भीड़ में कुछ के साथ मैंने सेल्फी ली- कुछ ने मेरे साथ..
सुप्रीम कोर्ट के दो वकीलों से मिलना खूब रहा। मुझे पढ़ते है, पसंद करते हैं, और कभी जरूरत पड़े तो उसके लिए कार्ड दे गए हैं।
हालात के मद्देनजर, दोनों कार्ड पत्नी के पास सुरक्षित रखवा दिए हैं। इस्तेमाल, कभी करना हुआ, तो वही करेंगी।
हम तो भीतर होंगे।
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डिनर के बाद वापसी थी। लेकिन चेरी ऑन द केक बाकी था। जब आयोजको से इजाजत लेने गया, वहां सुप्रिया जी मौजूद थी।
खुद अपनी गाड़ी में हमे होटल तक छोड़ा। उस आधे घण्टे की राइड में, मैनें काग्रेस के उद्धार का कोई भी आइडिया देने से गुरेज किया। बस उस फियरलेस फायरब्रांड नेत्री के अनदेखे, बेहद हँसमुख, ग्रेसफुल पहलू का आनंद लिया।
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तो झोली भरकर आया हूँ।
ट्रॉफी है, प्रशस्ति पत्र, चेक, किताबें.. और सोचता हूँ, सबसे ज्यादा कीमती क्या है?
सम्मान-पुरस्कार बहुत मिले हैं- अपने प्रोफेशनल फील्ड में। जो जानते हैं-वो जानते है। लेकिन, पत्रकार, प्रोफेसर, वैज्ञानिक न होते हुए भी- इस फील्ड के तमाम लोगो ने मुझ एमेच्योर, नोबडी को इतनी मोहब्बत से नवाजा- किसी झोली में नही समायेगा।
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तो कोई नोबेल नही मिला मुझे। मगर बहुत से नोबल लोग मिले हैं। उनकी मुस्कान, हाथ पकड़ना, साथ खड़ा होना, और साथ खड़ा होने की इजाजत देना..
इस बड़प्पन और सराहना से निहाल हूँ। यही कमाई है। यही सबसे कीमती है।
द पब्लिक मिडीया, और सभी आयोजनकर्ताओ, ज्यूरी, उपस्थितों का आभार।
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और मुझे पढ़कर, सराहकर, मुझ पर विश्वास जताकर, उस मंच तक धकेलने वाली, फेसबुक- ट्विटर की मेरी मित्र मंडली में शामिल, आप सभी का भी।
शुक्रिया!
❤️
@SupriyaShrinate @gauharraza9 @AnumaVidisha @DrRakeshPathak7 @MANJULtoons @AuthorAVS
@svaradarajan @Apoorvanand__ @RahulDev718370 @DayashankarMi @ABHISHEKJOURNO2 @p_indianews



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@meevkt भाई ये ना रील थी ना आत्महत्या ये इनका #चुतियापा था जो इन्हें निपटा दिया 🤬😡
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"ये हादसा था या खुदकुशी.. अगर खुदकुशी थी तो युवक वीडियो बनाकर किसको दिखाना चाह रहा था??"
दिल्ली के इस वीडियो को देखकर क्या कहेंगे!!
दल्लूपुरा में पवन ने अपने दोस्त से वीडियो बनाने को कहा.. अपनी कमर में खोंसकर रखी दोस्त की लाइसेंसी पिस्टल निकाली, मैगज़ीन लगाई, पिस्टल लोड की और मुस्कुराते हुए सीधे सीने पर पिस्टल तानकर ट्रिगर दबा दिया..
पिस्टल से निकली गोली सीधे पवन के दिल में लगी.. वो वहीं गिर पड़ा..
पवन को अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया..
ये रील तो नहीं थी.. लेकिन इस तरह से खुदकुशी के पीछे क्या वजह हो सकती है!! क्या पवन किसी को अपनी मौत का तमाशा दिखाना चाहता था!!
वैसे ये वीडियो लाइसेंसी असलहाधारकों के लिए चेतावनी भी है.. लाइसेंसी शस्त्र का नियम ये है कि शस्त्र उसके पास ही रहेगा जिसके नाम पर लाइसेंस है.. लाइसेंसधारक के अलावा शस्त्र किसी भी सूरत में किसी और को नहीं दिया जा सकता.. फिर चाहे वो पिता हो, भाई हो, दोस्त हो, पत्नी हो, मां हो, बहन हो..
पवन के मामले में शस्त्र लाइसेंसधारक के खिलाफ कार्रवाई तय है..
#suicideboys #suicide #delhi #reel #viralvídeo #Licence
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ये साहब हैं- जनरल बीएम कौल!!
बृज मोहन कौल, जवाहर लाल नेहरु के दूरदराज के भतीजे-वतीजे लगते थे। कहा जाता है कि यही रिश्तेदारी उन्हें नॉदर्न कमांड का मुखिया बनाने का कारण थी।
शायद रहा हो।
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लेकिन बीएम कौल कोई राह चलते शख्स तो थे नही। 1933 में वे ब्रिटेन के सैंडहर्स्ट मिल्ट्री कॉलेज में सलेक्ट हुए। ब्रिटिश आर्मी में कमीशन मिला।
फिर वे प्रमोट होते गए। 1946 में वे आर्म्ड फोर्स नेशनलाइजेशन कमिटी के सदस्य नियुक्त हुए, जनरल थिमैया (भविष्य के इंडियन आर्मी चीफ) और जनरल मूसा (भविष्य के पाकिस्तानी आर्मी चीफ) शामिल थे।
तो कौल का इतिहास इम्प्रेसिव था।
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कौल, इम्प्रेसिव नरेटिव भी देते, अच्छी अंग्रेजी बोलते, और
औऱ आर्मी मुख्यालय में उनका खासा दबदबा था। मने सुंग जू, फ्रेडरिक दी ग्रेट, औऱ नेपोलियन के बाद कोई स्ट्रैटजी जानने वाला कोई जनरल इस धरती पर पैदा हुआ था..
तो वो बीएम कौल थे।
और इसलिए उन्हें फोर्थ कोर्प्स का कमांडर बनाया गया। यह एकदम फ्रेश एरिया कमांड बनी थी, नार्थ ईस्ट के लिए।क्योकि वहां चीन का खतरा बढ़ रहा था।
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कमांड का मुख्यालय तेजपुर था।
जब चीन ने तवांग पर हमला किया, औऱ तेजपुर की तरफ तेजी से बढ़ने लगा, कौल साहब की तबियत बिगड़ गई। छाती में दर्द का इलाज कराने दिल्ली भाग आये।
नेहरू ने जमकर फटकार लगाई, तो सीने का दर्द ठीक हो गया। वे मोर्चे पर लौटे। लेकिन रायता जितना फैलना था, फैल गया।
कौल साहब समेटने में सफल नही हुए।
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जान डालवी ने अपनी किताब "हिमालयन ब्लंडर" में बीएम कौल को 1962 में नेफा मोर्चे पर हार का मुख्य कारण बताया।
संभ्रांत भाषा मे डालवी ने जो लिखा- उसका सीधी भाषा मे मतलब होता है कि बीएम कौल, बड़बोले और कायर शख्स थे। याद रहे, कि जॉन डालवी, कोई विदेशी नही थे। उनका पूरा नाम है-जॉन परशुराम डालवी।
औऱ वे कौल की उसी कमांड में ब्रिगेडियर रहे।
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इस किताब ने कौल के ऊपर सवाल उठे, तो कौल ने वह किया, जो उन्हें बेस्ट आता था। अच्छी अंग्रेजी में अपनी एक किताब लिखी-
" द अनटोल्ड स्टोरी"
इसमे सारा ब्लेम नेहरू गवर्मेंट पर डाला। आज व्हाट्सप यूनिवर्सिटी में 1962 को लेकर नेहरू की जो आलोचना आप पढ़ते है, उसके रचयिता बीएम कौल हैं।
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लेकिन कोई बात नही। नेहरू के नेतृत्व में हार हुई, वे जिम्मेदार थे। अचरज यह कि उन्होंने ज्यादा मलामत, कृष्णा मेनन की करी।
जबकि सच यह था, कि नेहरू इस बड़बोले आदमी को हाथ भर दूर रखते थे। और वो रक्षामंत्री कृष्णा मेनन थे, कौल जिनके लाडले थे। दरअसल, उस दौर मे जनरल थिमैया की कृष्णा मेनन से जो खटपट हुई। फिर इस्तीफा, और नेहरू द्वारा बीच बचाव से इस्तीफा वापसी ड्रामा हुआ।
उसके सूत्रधार भी कौल ही थे।
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जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने कोई किताब लिखी है। बरसों से वह सरकार के पास अटकी है। अनुमति जारी नही हुई, इसका कारण आज संसद में पता चला।
यह एक अलग किस्म की सेंसरशिप है। आप सेना के नाम पर उड़ी, बार्डर 2 और धुरंधर जैसी फिल्में देखिए। उसमे पुरानी सरकारों को निकम्मा दिखाने, और मौजूदा झंडाबरदारों को सुपरमैन बताने की छूट है।
लेकिन किसी किताब में आलोचना हुई, तो छपने न दी जाएगी। यह सब देखकर, याद आता है, कि इसी देश मे कोई दौर ऐसा भी था, जब कोई बीएम कौल जैसा कलाकार भी,
सरकार की कड़ी आलोचना के साथ,
किताब छाप कर बेच सकता था।

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वोट चोरी से हरियाणा में कांग्रेस की सरकार चोरी की गई है - और इसका ब्लैक एंड व्हाइट सबूत आपके सामने हैं।
- ब्राज़ील की एक मॉडल हरियाणा की वोटर लिस्ट में 10 बूथों पर 22 वोट - अलग-अलग नाम से
- एक ही फोटो के साथ 223 वोट एक बूथ में - नाम हर बार नया
- एक ही घर में 501 वोटर दर्ज - वो घर जो सिर्फ़ कागजों पर है
- पूरे राज्य में 1,24,177 फर्ज़ी तस्वीरों वाले वोटर
- हज़ारों लोग ऐसे हैं जिनके वोट हरियाणा और उत्तर प्रदेश दोनों जगह हैं - इनमें कई BJP के नेता और कार्यकर्ता
- दो मंज़िला पुराने मकान, कोई 'फुटपाथ या खंभा' नहीं, फिर भी “मकान संख्या 0”
मानना पड़ेगा - “व्यवस्था” सच में टाइट थी और ये साफ है कि EC और BJP ने मिल कर हरियाणा का चुनाव चुराया है।
मैं हिंदुस्तान के युवाओं, देश के Gen-Z से आग्रह करता हूं - सत्य और अहिंसा का हाथ थाम कर चलें और भारी संख्या में निकल कर मतदान करें।
वोट चोरी को हराने और लोकतंत्र की रक्षा करने का यही सबसे बड़ा हथियार है।

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