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“Poetry doesn’t belong to those who write it but those who need it” - Pablo Neruda ❤️ #Life_is_Poetry #Indian

Bikaner, India Katılım Şubat 2023
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खुरपेंच Satire
आपका नाम संजुक्ता पराशर है। आपने UPSC में Rank 85 हासिल की। आपके पास IAS बनने का विकल्प था, लेकिन आपने IPS चुना। क्योंकि आपको कुर्सी के पीछे नहीं , जमीन पर काम करना था। 2006 में आप IPS में शामिल होने वाली पहली असमिया महिला बनीं। 2008 में आपकी पोस्टिंग असम के माकुम में हुई—पूर्वोत्तर के सबसे संवेदनशील इलाकों में से एक। उस दौर में बोडो उग्रवादी आम लोगों की हत्या कर रहे थे, गांव जला रहे थे और हथियारों का नेटवर्क चला रहे थे। लेकिन आपने फाइलों से नहीं, मैदान से जवाब दिया। सिर्फ 15 महीनों में आपने जंगलों में 16 counter-operations लीड किए। 64 उग्रवादियों को गिरफ्तार किया। भारी मात्रा में अवैध हथियार और गोला-बारूद जब्त किया। आप कमांड सेंटर में बैठकर आदेश देने वाली अधिकारी नहीं थीं। आप CRPF जवानों के साथ AK-47 लेकर जंगल में उतरने वाली अधिकारी थीं। घर पर आपका चार साल का बच्चा था। पति की पोस्टिंग अलग थी। आप उनसे दो महीने में एक बार मिल पाती थीं। JNU से International Relations में PhD करने वाली महिला कोई भी आरामदायक करियर चुन सकती थी। लेकिन आपने सबसे कठिन रास्ता चुना। आज आप National Investigation Agency में Inspector General हैं। भारत के पास एक संजुक्ता पराशर है। लेकिन इस देश को ऐसी हजारों संजुक्ता पराशर चाहिए।
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Anurag Dwary
Anurag Dwary@Anurag_Dwary·
सड़क हादसे में लहूलुहान पति… और अस्पताल पहुंचते ही पत्नी से 108 एंबुलेंस धुलवाई जाती है। दर्द, अपमान और लाचारी ...सब कैमरे में कैद। वीडियो वायरल हुआ तो प्रशासन जागा, पायलट और EMT बर्खास्त... तस्वीर कटनी की है
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Kitabganj
Kitabganj@Kitabganj1·
एक मज़दूर ने लोहा खोद कर निकाला। एक मजदूर ने उसे पिघलाया। एक मज़दूर ने साँचे में डाल लोहे को- बंदूक की गोली बनाई। गोली पे पहला हक़ मजदूरों का था- हक़ मांगते एक मज़दूर ने वो गोली खाई।। (आर्ट: @Defiance_in_art) #मज़दूर_दिवस #InternationalLabourDay #MayDay2026
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Uljhi Diary
Uljhi Diary@UljhiDiary·
पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है जाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है आशिक़ सा तो सादा कोई और न होगा दुनिया में जी के ज़ियाँ को इश्क़ में उस के अपना वारा जाने है - मीर तक़ी मीर
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Manisha Pande
Manisha Pande@MnshaP·
“Not in my name…that’s the point. Because I love my country…I love my country from my heart” ~ Raghu Rai
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Puneet Sharma
Puneet Sharma@PuneetVuneet·
जंगल, आदिवासियों के पूजास्थल हैं। ये उनके मंदिर हैं। उनके मंदिरों को, हर दिन कोई आक्रांता आ कर तोड़ देता है, कुचल देता है। उन्हें अपने मंदिर बचाने के लिए, जेल में डाल दिया जाता है।
Amiya_Pandav ଅମିୟ ପାଣ୍ଡଵ Write n Fight@AmiyaPandav

9 tribal female fighters of Tala - Amapadar village protesting against #Vedanta company, #Sijimali are released from Bhavani patana jail on bail.They were there from March 11. 12 fighters are still in the jail. @DhanadaKanta @TeestaSetalvad @pbhushan1 @_YogendraYadav

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Rajkamal Prakashan 📚
Rajkamal Prakashan 📚@RajkamalBooks·
अपने सामने • कुँवर नारायण
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खुरपेंच Satire
खुरपेंच Satire@Khurpench_·
एक आंगनवाड़ी सेविका की सैलरी 3500 होती है , इससे ज्यादा रुपए का तो अधिकारी चाय पी जाते है , आंगनवाड़ी सेविका बीमार थी लेकिन अधिकारी को यक़ीन न होने पर पति के सहारे कांपते हुए अधिकारी को बीमारी का सबूत देने पहुंची सेविका। थू है तुम्हारे ऐसे अफसरशाही पर
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खुचरेंप
खुचरेंप@khuchrep·
जहां सामान्य लोग गैस, बिजली बिल जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, वहां एक सांसद को मिलने वाली सुविधाएं इस प्रकार हैं - 1- सैलरी 2-निर्वाचन क्षेत्र भत्ता 3- ऑफिस भत्ता 4- दैनिक भत्ता 5- फ्री ट्रेन यात्रा फर्स्ट एसी क्लास में 6- 30 से ज्यादा हवाई यात्रा साल में 7- सड़क यात्रा भत्ता 8- दिल्ली में सरकारी बंगला 9- टेलीफ़ोन भत्ता 10- बिजली पानी फ्री (50000 यूनिट) 11-सांसद और उनके परिवार का फ्री इलाज 12-आजीवन पेंशन 13- सरकारी सुरक्षा
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वरुण 🇮🇳
वरुण 🇮🇳@varungrover·
Taaki yaad rahe.
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Vijender Chauhan
Vijender Chauhan@masijeevi·
यही भारत दुर्दशा है- आवाज़ बंद करने की प्रक्रिया ऐसी अपारदर्शी और ग़ैर-जवाबदेह है कि शिकायतकर्ता की पहचान तक नहीं पता और पेज हटा दिया गया. @moliticsindia
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खुरपेंच
खुरपेंच@khurpenchh·
जस्टिस यशवंत वर्मा ने इंपीचमेंट से पहले इसीलिए इस्तीफा दिया है ताकि पेंशन चालू रहे , हम सबको #StopHisPension के लिए आवाज उठानी चाहिए , ताकि ये नियम खत्म हो और इनको ज्यूडिशियल प्रोसेस से होकर गुजरना पड़े। वरना हमको एक भ्रष्टाचारी के लिए जीवन भर टैक्स देना पड़ेगा।
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Hansraj Meena
Hansraj Meena@HansrajMeena·
यह तस्वीर मध्यप्रदेश के छतरपुर की है, जहाँ बीजेपी सरकार केन–बेतवा लिंकिंग परियोजना के तहत हजारों आदिवासी परिवारों को विस्थापित करना चाहती है। विरोध में आदिवासी महिलाएं प्रतीकात्मक चिता पर लेटकर परियोजना रद्द करने की मांग कर रही हैं। देश में आदिवासी राष्ट्रपति हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि वह सिर्फ संघ के लोगों की ही बात सुनती है।
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Uljhi Diary
Uljhi Diary@UljhiDiary·
माननीय, भीड़ की तालियाँ और समर्थन आपको ताकत देते हैं, लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि भीड़ की पसंद स्थायी नहीं होती। जो केवल भीड़ को खुश करने की राजनीति करता है, वह धीरे-धीरे अपने सिद्धांतों और सच्चे संबंधों से दूर हो जाता है। हर किसी को खुश रखने की कोशिश में अक्सर निर्णय सिद्धांतों से नहीं, लोकप्रियता से तय होने लगते हैं। एक समय ऐसा आता है जब भीड़ तो आपके साथ दिखाई देती है, लेकिन भरोसे का रिश्ता कहीं नहीं बचता। इसलिए नेतृत्व का असली अर्थ भीड़ का प्रिय होना नहीं, बल्कि सही बात पर दृढ़ रहना और लोगों के भरोसे के योग्य बनना है।
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खुरपेंच
खुरपेंच@khurpenchh·
>नाम जस्टिस यशवंत वर्मा >पहले दिल्ली हाईकोर्ट ,अब यूपी हाई कोर्ट में >घर से जले हुए नोटों की गड्डियां मिली >पहले मामले को दबाने की कोशिश हुई >लेकिन सोशल मीडिया ने उसे नाकाम कर दिया >फिर कार्यवाही हुई , इंपीचमेंट होने वाला था >लेकिन उससे पहले जज साहब ने इस्तीफा दे दिया >इंपीचमेंट से पहले इस्तीफा देने से उनके पोस्ट रिटायरमेंट बेनिफिट्स चालू रहेंगे >इससे पहल भी दो जजों ने इसी रास्ते का इस्तेमाल किया >अब देश की जनता एक भ्रष्टाचारी के पोस्ट रिटायरमेंट बेनिफिट्स के लिए टैक्स देगी >इसके खिलाफ हम सबको आवाज उठानी चाहिए।
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Uljhi Diary
Uljhi Diary@UljhiDiary·
आज के समय में लेखन और कला के क्षेत्र में एक अजीब सी जल्दबाज़ी दिखाई देती है। बहुत-से लोग चार पंक्तियाँ लिखकर या कुछ चमकदार शब्द जोड़कर तुरंत प्रसिद्धि पाना चाहते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि बिना गहरे अध्ययन और जीवन के अनुभवों के, किसी भी रचना में स्थायित्व और गंभीरता नहीं आ सकती। ज्ञान का जो लंबा और धैर्यपूर्ण मार्ग है, उसे पार किए बिना कला अक्सर केवल सतही प्रभाव तक ही सीमित रह जाती है। कवि, लेखक और कलाकार का काम केवल शब्दों या रंगों का खेल नहीं होता, वह विचारों और समझ की परिपक्वता से जन्म लेता है। जब रचनाकार स्वयं ज्ञान में टुटपुँजिया रह जाता है, तो उसकी कृति भी क्षणिक तालियों तक सिमट जाती है। आज के लोग सीखने की धीमी प्रक्रिया से बचना चाहते हैं, जबकि असली साहित्य और कला उसी धैर्य, अध्ययन और आत्ममंथन से पैदा होती है। इसलिए जो रचनाएँ केवल तात्कालिक लोकप्रियता के लिए लिखी जाती हैं, वे अक्सर समय की कसौटी पर टिक नहीं पातीं। स्थायी और गंभीर कला वही है, जिसके पीछे गहरा अध्ययन, व्यापक दृष्टि और जीवन की सच्ची समझ हो। प्रसिद्धि की जल्दबाज़ी भले कुछ समय के लिए ध्यान खींच ले, परंतु ज्ञान की गहराई ही किसी रचना को वास्तव में अर्थपूर्ण बनाती है।
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कविता : हाशिया नहीं है मुझे  भाषा का ज्ञान  और शब्दकोश की समझ जब भी पूछा जाता है  मुझसे हाशिये का पर्याय  मैं 'स्त्री' और 'दलित' बता देता हूँ। - कुलदीप सिंह भाटी
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खुरपेंची स्वास्थ्य
जिन हरामखोर लोगों की वजह से मिड मिल का ये गेहूं सड़कर बर्बाद हो गया , उनकी सैलरी से पूरी भरपाई होनी चाहिए और ऐसे लोगों को तत्काल नौकरी से लात मारकर निकाल देना देना चाहिए!
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