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आपका नाम संजुक्ता पराशर है।
आपने UPSC में Rank 85 हासिल की। आपके पास IAS बनने का विकल्प था, लेकिन आपने IPS चुना।
क्योंकि आपको कुर्सी के पीछे नहीं , जमीन पर काम करना था।
2006 में आप IPS में शामिल होने वाली पहली असमिया महिला बनीं।
2008 में आपकी पोस्टिंग असम के माकुम में हुई—पूर्वोत्तर के सबसे संवेदनशील इलाकों में से एक। उस दौर में बोडो उग्रवादी आम लोगों की हत्या कर रहे थे, गांव जला रहे थे और हथियारों का नेटवर्क चला रहे थे।
लेकिन आपने फाइलों से नहीं, मैदान से जवाब दिया।
सिर्फ 15 महीनों में आपने जंगलों में 16 counter-operations लीड किए।
64 उग्रवादियों को गिरफ्तार किया।
भारी मात्रा में अवैध हथियार और गोला-बारूद जब्त किया।
आप कमांड सेंटर में बैठकर आदेश देने वाली अधिकारी नहीं थीं।
आप CRPF जवानों के साथ AK-47 लेकर जंगल में उतरने वाली अधिकारी थीं।
घर पर आपका चार साल का बच्चा था।
पति की पोस्टिंग अलग थी।
आप उनसे दो महीने में एक बार मिल पाती थीं।
JNU से International Relations में PhD करने वाली महिला कोई भी आरामदायक करियर चुन सकती थी।
लेकिन आपने सबसे कठिन रास्ता चुना।
आज आप National Investigation Agency में Inspector General हैं।
भारत के पास एक संजुक्ता पराशर है।
लेकिन इस देश को ऐसी हजारों संजुक्ता पराशर चाहिए।

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