The Psychiatric Nurse

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The Psychiatric Nurse

The Psychiatric Nurse

@PsychoBanter

Psychiatric Nursing by #Education || Patriotic || Political Satirists || Proud Hindu🚩 दुनिया में सब कीमती है एक पाने के दूसरा खोने के बाद!

Chhattisgarh, India Katılım Şubat 2021
509 Takip Edilen127 Takipçiler
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The Hawk Eye
The Hawk Eye@thehawkeyex·
Body Language analysis: 1. Person who is trying to amplify presence, authority, seek attention, or emotional impact beyond what the actual conversation naturally carries. 2. Excessive hand gestures → Attempt to appear energetic, convincing, dominant. 3. Constant facial expressions / eyebrow movement → Seeking emotional reaction, attention, or validation from listeners. 4. Tilted lips / smirks after simple points → self-satisfaction, performative confidence, pretending smart, or pseudo intelligence. 5. Over-emphasis on ordinary facts → Desire to sound insightful, Performative communication style, desperate to seek attention in group discussions, artificial When the actual content is shallow, but delivery is highly theatrical, people often perceive it as: - Overacting - Pseudo-intellectual - Attention-seeking - Inexperienced Authentic expressive people → gestures match substance and emotion naturally. Performative expressive people → gestures feel disproportionate to the depth of content.
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ᴋᴀᴍʟᴇsʜ sɪɴɢʜ / tau
The generation before ours first laughed at us, and then crushed our revolutionary ideas. We were confounded. And pissed. They forced us back onto what they considered the path. I cannot thank them enough. We believed we were speaking truth to power, holding them accountable, demanding what was rightfully ours. The government was apathetic and used force when we went a bit off the rails. It was a beautiful time. Barely out of our teens, we had a purpose, a small following (there was no social media), and, God knows, the feeling that apun ich bhagwan hai. What we thought were ideas were a product of age. Cultivated by manipulative agents provocateur, books we half-understood, and editorials we consumed (there were no reels). The feeling went away. The curated anger was devoured by the desire to beat hunger and the hunger to succeed in a brutally competitive world, and the general hostility. What good of it remains is a heightened sense of empathy. That, and the pain in the shin that returns with the easterlies. Change is constant and, constantly, a slow grind. The cockroaches, however cocky, are roaches. The ultimate survivors who can escape a nuclear event. May they not receive the blessing of a CRPF baton. Because that shit returns every time the easterlies blow.
Dr Ranjan@DocRGM_

A Revolution Has Just Begun 🪳

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Shubham Shukla
Shubham Shukla@Shubhamshuklamp·
सौरभ द्विवेदी बुरा ना मानें लेकिन आप एक्टिंग के लिए नहीं बने हैं। ये वैसे ही है जैसे रोनाल्डो को क्रिकेट खेलने का भूत चढ़े, विराट कोहली को गायक बनने का नशा हो। खैर मुझे लगता है ये पहली और आख़िरी है।
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Apurva Singh
Apurva Singh@iSinghApurva·
16 मई 2014 आज से ठीक 12 साल पहले, श्री @narendramodi जी प्रधानमंत्री का चुनाव जीते थे रविश कुमार की मुस्कुराहट के पीछे का छिपा दर्द देख सकते है आप। 😂
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ANIL
ANIL@AnilYadavmedia1·
पांच राज्यों के चुनाव के बाद और आने वाले अगले चुनावों में विपक्ष के लिए पेश है ये गिफ्ट हैम्पर, जब तक EVM है ये वाला भुजियम खाते रहो, खिलाते रहो,
ANIL tweet media
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The Psychiatric Nurse
The Psychiatric Nurse@PsychoBanter·
अपने कार्य दायित्व दिलाने बदाम भेंट कर दो तो माननीय अधिकारी नाराज हो जाएंगे। @CGVOICE00777 @yashwantbhilai
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The Psychiatric Nurse
The Psychiatric Nurse@PsychoBanter·
Here is a clean list of freedom fighters from Chhattisgarh (names only):Veer Narayan Singh Thakur Pyarelal Singh Pandit Sundarlal Sharma Pandit Ravi Shankar Shukla Wamanrao Baliram Lakhe Hanuman Singh Gunda Dhur (Veer Gundadhur) Babu Chhotelal Shrivastava Madhav Rao Sapre Ram Dayal Tiwari
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Voice of Chhattisgarh
Voice of Chhattisgarh@CGVOICE00777·
अब धमतरी में 18 करोड़ की लागत से बन रहे बस स्टैंड का नाम रखने का प्रस्ताव आया है। मेरे विचार से धमतरी बस स्टैंड का नाम हमारे छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता सेनानियों और महापुरुषों के नाम पर रखा जाना चाहिए। इस मुद्दे पर अपने-अपने विचार रखें।
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Vinayak Tripathi
Vinayak Tripathi@belikevinayak·
नेपाल में 12 साल से शासन कर रहे बालेन शाह मोदी ने शिक्षा क्षेत्र में लिया बड़ा फ़ैसला…
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Toofan Ojha
Toofan Ojha@RealTofanOjha·
पारले जी कंपनी पर बीस साल से भरोसा है 😂😃
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sumit kalra
sumit kalra@sumit1kalra·
"राहत इंदौरी" ने जिस दुर्भावना से ये लिखा था कि "सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में,किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है." राहत ने जिस दुर्भावना के साथ ये लिखा था, उसका माकूल और खूबसूरत जवाब "बेचैन मधुपुरी" जी ने दिया है। "बेचैन मधुपुरी" जी ने बहुत ही बेहतरीन जवाब दिया है। आप भी उनके कायल हो जाएँगे। “ख़फ़ा होते हैं तो हो जाने दो, घर के मेहमान थोड़ी हैं; सारे जहाँ भर से लताड़े जा चुके हैं, इनका मान थोड़ी है । ये कान्हा , राम की धरती है, सजदा करना ही होगा; मेरा वतन ये मेरी माँ है; लूट का सामान थोड़ी है। मैं जानता हूँ ; घर में बन चुके हैं सैकड़ों भेदी; जो सिक्कों में बिक गए; वो मेरा ईमान थोड़ी है। हमारे पुरखों ने सींचा है; इस वतन को अपने लहू के कतरों से; बहुत बांटा मगर अब बस; ख़ैराते आम थोड़ी है। जो रहजन थे; उन्हें हाकिम बना कर उम्रभर पूजा ; मगर अब हम भी इस सच्चाई से अनजान थोड़ी हैं ? बहुत लूटा फिरंगी ने; कभी बाबर के पूतों ने ; ये मेरा घर है ; मुफ्त की सराय मेरी जान, थोड़ी है। कुछ तो अपने भी शामिल हैं, वतन तोड़ने में; अब ये कन्हैया औ रविश मुसलमान थोड़ी हैं ??? यकीनन किरायेदार ही मालूम पड़ते हैं ये इस मुल्क में; यूं बेमुरव्वत, कोई जलाता है, अपना ही मकान थोड़ी है ??? सभी का खून शामिल था यहाँ की मिट्टी में; हम अनजान थोड़े हैं। मगर जिनके अब्बा ले चुके पाकिस्तान; अब उनका हिंदुस्तान थोड़ी है ??? 👆 😡 Revisiting old post
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Raja Babu
Raja Babu@GaurangBhardwa1·
हर दिल में राम, हर सांस में नाम 🙏 #SriRamaNavami प्रभु श्री राम
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Voice of Chhattisgarh
Voice of Chhattisgarh@CGVOICE00777·
ये भी बताया जाता है कि इस पेड़ से दवाई भी बनती है। समस्या ये है कि रात में इस पेड़ के आसपास ये पेड़ ख़तरनाक प्रभाव छोड़ता है। इसके आसपास इंसान देर तक नहीं रह सकता है। जिनके घर के आसपास ये पेड़ लगा है उनके स्वास्थ्य के लिए ये खतरा है। मैंने जो बताया है कि रात के समय में फूलों का तेज गंध शरीर में भरने लगता है,रात में निंद नहीं आती और पेट में मरोड़े उठने लगती है । सिर दर्द करने लगता था। सांस लेने में भी थोड़ी परेशानी होती थी। अगर ज्यादा समय तक इंसान इसके सम्पर्क में रहता है तो उसका प्रभाव दिखने लगता है। स्वास्थ्य के लिए हानिकारक एलर्जी और अस्थमा का कारण बनने के कारण मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, असम, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों में कोनोकार्पस के साथ-साथ सप्तपर्णी (Alstonia scholaris) के पेड़ लगाने पर रोक लगा दी गई है। इन राज्यों में अब पुराने पेड़ों को हटाकर स्थानीय प्रजातियों (जैसे नीम, पीपल) को प्राथमिकता दी जा रही है।
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Voice of Chhattisgarh
Voice of Chhattisgarh@CGVOICE00777·
वित्त एवं पर्यावरण मंत्री @OPChoudhary_Ind जी, सप्तपर्णी ( Alstonia scholaris ) पेड़ के सिर्फ रोपण पर रोक लगाने से नहीं चलेगा, इस पेड़ से पूर्णतः निवारण की आवश्यकता है। सप्तपर्णी ( Alstonia scholaris ) पेड़ से शरीर को बहुत सारे नुकसान है और मैं यह अपने व्यक्तिगत अनुभव से बता रहा हूँ, क्योंकि जहाँ मैं रहता हूँ वही पास में ही यह पेड़ है। ठंड के मौसम में जब सप्तपर्णी ( Alstonia scholaris ) पेड़ में फूल आते हैं तो सूर्यास्त के बाद छोटे, गुच्छेदार सफेद फूल तेज और मादक गंध पैदा करता है। अगर जिसके आसपास यह पेड़ है तो इसके फूलों की गंध आपको सोने नहीं देगी और जब वह गंध आपके शरीर में अंदर जाती है तो बेचैनी और अनिद्रा बढ़ाती है। पेट में अजीब ही हलचल पैदा करती है। पेट में मरोड़े उठने लगती है और सांस में में थोड़ी दिक्क़त होने लगती है। साल 2022 में मुझे पहला अनुभव हुआ, जब मेरे घर के सप्तपर्णी ( Alstonia scholaris ) पेड़ में पहली बार फूल आये थे। फूलों का तेज गंध मेरे शरीर में भरने लगता था, रात में निंद नहीं आती थी। पेट में मरोड़े उठने लगते थे। सिर दर्द करने लगता था। सांस लेने में भी थोड़ी परेशानी होती थी। क्योंकि मैं इस पेड़ के सबसे पास वाले कमरे में सोता था इसलिए इसका मुझ पर सबसे ज्यादा असर होता था। शुरुवात में तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है, पर 1-2 दिन बाद थोड़ा पेड़ के फूलों के ऊपर ध्यान देने और घर में माँ-पापा और भाई बहन से चर्चा करने पर पता चला कि इस सप्तपर्णी ( Alstonia scholaris ) पेड़ के फूलों के तेज गंध के कारण ये सब हो रहा है। फिर घर में चर्चा करने के बाद इस सप्तपर्णी ( Alstonia scholaris ) पेड़ की शाखाओं को काटने का निर्णय हुआ और साल में 2022 के दिवाली के समय पेड़ की जिन-जिन डालों में फूल लगे उन डालों को मैंने काटा। पर इस पेड़ का विकास इतनी जल्दी से होता है कि 4-5 महीने में ही ये वापस उतना घना हो जाता है और पेड़ की जिन डालों को काटा जाता है, वहीं इसकी दूसरी शाखाएं निकलने लगती हैं। 2022 से अब तक से हर साल जब ठंड के मौसम में इस सप्तपर्णी ( Alstonia scholaris ) में फूल लगते हैं तब उसकी शाखाओं को काटना पड़ता है। 2022, 2023 और 2025 में तीनों साल इस पेड़ की शाखाओं काटना पड़ा। साल 2024 में ज्यादा धूप के कारण इसके फूल मुरझा कर खुद मर गये इसलिए 2024 में उस साल काटना नहीं पड़ा। सप्तपर्णी ( Alstonia scholaris ) पेड़ सिर्फ राजधानी रायपुर में नहीं, बल्कि जगदलपुर और कोंडागांव अधिका मात्रा में लगे हुए हैं और जगदलपुर में चारों ओर सप्तपर्णी ( Alstonia scholaris ) पेड़ लगे हुए हैं। ध्यान देने वाली बात ये है की सप्तपर्णी ( Alstonia scholaris ) पेड़ के फूलों की गंध दिन में एकदम कम हो जाती है, क्योंकि धूप के कारण इसकी गंध दब जाती है और दिन में इसके आसपास से गुजरने वाले लोगों को इसके बारे में पता भी नहीं चलता, पर जैसे ही शाम ढलनी शुरु होती है तब इसकी गंध शुरु हो जाती और रात होते-होते इसकी गंध बहुत तेज हो जाती है। सप्तपर्णी ( Alstonia scholaris ) पेड़ को लेकर यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव रहा है। कई लोगों की मुझसे उलट दूसरी राय भी हो सकती है। बाकि छत्तीसगढ़ के मेरे भाई-बहन सप्तपर्णी ( Alstonia scholaris ) पेड़ को लेकर अपना-अपना अनुभव कमेंट करके जरूर बताएं। यह जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला इसे सरकार गंभीरता लिया जाना चाहिए। क्योंकि अधिकतर शहरों में यह पेड़ नगर निगम या कोई सरकारी विभाग द्वारा लगवाया गया है, तो सरकार की जिम्मेदारी बनती है इस पेड़ को हटाने की। सिर्फ इस पेड़ के रोपण पर प्रतिबन्ध लगाने से काम नहीं चलेगा, वर्तमान में जिन क्षेत्रों में सप्तपर्णी ( Alstonia scholaris ) पेड़ लगा है वहां के लोगों को तकलीफ हो रही और वहाँ के लोग अनजाने में या फिर मजबूरी में इन पेड़ों के बीच में सांस ले रहे हैं और बीमार हो रहे हैं और जब तक इन पेड़ों को वहां से नहीं हटाया जाएगा, तब तक उन्हें ऐसे ही जीना पड़ेगा। मैं माननीय विधायक @SunilSoniBJPCG जी को जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण एवं गंभीर प्रश्न उठाने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूँ। साथ में छत्तीसगढ़ के मेरे भाई-बहनों से निवेदन करता हूँ कि अगर किसी के क्षेत्र में यह पेड़ लगा है और इससे लोगों को तकलीफ हो रही है तो वह लोग आगे आयें और नगर पालिका या नगर निगम,आप जिन क्षेत्र में रहते हैं वहां इस पेड़ को काटने के लिए आवेदन दें। @vishnudsai @ChhattisgarhCMO @ArunSao3 @vijaysharmacg @OPChoudhary_Ind @bhupeshbaghel @DrCharandas @DeepakBaijINC @INCChhattisgarh @TS_SinghDeo @SunilSoniBJPCG @ThihaCG
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Voice of Chhattisgarh
Voice of Chhattisgarh@CGVOICE00777·
युवतियों से छेड़छाड़ करने वाले गुंडों को रोकने पर छेड़छाड़ करने वाले गुंडों ने पत्रकारों के ऊपर किया हमला। वैसे बता दूँ कि छत्तीसगढ़ में सुशासन की सरकार है और सुशासन की गंगा पूरे प्रदेश में बह रही है।
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Voice of Chhattisgarh
Voice of Chhattisgarh@CGVOICE00777·
मोदी की गारंटी के नाम पर जुमलेबाजी करके इन्होंने छत्तीसगढ़ के युवाओं को ठगा है। जब विपक्ष में थे तब संविदा कर्मचारियों के सभी रैली और धरना प्रदर्शनों में जाकर भाजपा के नेताओं ने संविदा कर्मचारियों से झूठी हमदर्दी दिखाकर, उनसे नियमितीकरण के वादे किये थे। यहाँ तक कि विधानसभा चुनाव में मोदी की गारंटी बोलकर घोषणापत्र में चुनाव जितने पर संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण लिए 100 दिन में कमेटी बनाने का वादा किया था, पर उस कमेटी काक्या हुआ किसी को कुछ पता नहीं? भाजपा के जिन नेताओं ने संविदा कर्मचारियों के रैली और धरना प्रदर्शनों जाकर उनसे वादे किये थे वो लोग चुनाव जितने के बाद आज सरकार में टॉप के मंत्री बन चुके हैं। वेतन-भत्ते और सरकारी सुविधाओं की सेवा ले रहे हैं, पर उन्हें वोट देकर जिताने वाले संविदा कर्मचारी किस हाल में जी रहे हैं, उनका हाल-चाल पूछने के लिए भी समय नहीं है। मेरे पास उन नेताओं के बयान के वीडियो और अखबार आज भी मौजूद हैं। नेता लोग नियमितीकरण के झूठे वादे करके वोट लेते हैं और चुनाव जितने के बाद संविदा, अनियमित एवं दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को उनके हाल पर छोड़कर सत्ता का सुख भोगने लग जाते हैं। पहले कांग्रेस ने ऐसा किया और अब बीजेपी भी वही कर रही है। जब विपक्ष में रहते हैं तब दोनों राजनितिक पार्टी संविदा और अनियमित कर्मचारियों के हमदर्द बनने का नाटक करते हैं। @vishnudsai @ArunSao3 @vijaysharmacg @ChhattisgarhCMO @ShyamBihariBjp @bhupeshbaghel @DeepakBaijINC @TS_SinghDeo @DrCharandas @INCChhattisgarh @BJP4CGState @brijmohan_ag @vijaybaghelcg @ShrivasGouri
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THE SKIN DOCTOR
THE SKIN DOCTOR@theskindoctor13·
I was today years old when I learned that LPG dealerships are allotted as per the central reservation policy. SC/ST: 22.5%, OBC: 27%. 50.5% is Open category, where anyone can apply, and the dealership is awarded through a draw of lots to eligible people. So basically, if your dealer doesn’t give you LPG, don’t pick a fight with them. Who knows, you may or may not get the gas, but you might end up inside under the Atrocities Act.
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Cg_Chaupal
Cg_Chaupal@Bharati_IND·
विकाश के नाम पर विनाश की और बढ़ते कदम, बधाई हो छत्तीसगढ़ आखिर हम कहीं तो नंबर वन आए, ​भ्रष्टाचार और अपराध की दौड़ में तो हम आगे थे ही अब जाम छलकाने में भी हमने झंडे गाड़ दिए हैं, होली के मौके पर 128 करोड़ की शराब की बिक्री! ​विकास की गंगा बहे न बहे शराब की नदियां जरूर बह रही हैं, इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी, दोनों उपमुख्यमंत्री अरुण साव जी, विजय शर्मा जी और सुपर CM ओपी चौधरी जी का विशेष आभार। छत्तीसगढ़ को नंबर वन बनाने का आपका तरीका वाकई लाजवाब है! @rpsinghraipur @CGVOICE00777
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