अगले चुनाव में जनता भाजपा को अच्छे से धो-पटककर हमेशा के लिए सुखा देगी।
शुक्र है उप्र के ‘असफल मुख्यमंत्री’ जी ने ये नहीं कहा कि इस ‘महा विद्युत आपदा’ के पीछे दिल्लीवालों के भेजे हुए दूत की साज़िश है। ये स्पष्ट किया जाए कि मुख्यमंत्री जी की समीक्षा बैठक में बिजली मंत्री जी आते नहीं हैं या बुलाए नहीं जाते हैं। अगर आते हैं तो माननीय से अनुरोध है कि उनके ‘कंधे पर हाथ रखकर’ एक तस्वीर आप पोस्ट कर दीजिए, जनता को आपकी ‘आपसी गर्मी’ से तो राहत मिल जाएगी क्योंकि जनता ने आप दोनों को कभी एकांत में साथ देखा नहीं।
भाजपा राज में बिजली के सब-स्टेशनों पर पीएसी लगती है और विधायक-सांसद अपनी ही सरकार के ख़िलाफ़ चिट्ठी लिखकर, जनता के आक्रोश से बचने का कायराना काम करते हैं।
भाजपा में अब करेंट नहीं रहा!
तेल के बेतहाशा बढ़ते दामों के बीच भाजपा सरकार के पास बस एक ही तरीक़ा बचा है और वो है उनका पुराना ‘बोरी में चोरी वाला फ़ार्मूला’ मतलब तेल के दाम बढ़ाने के बजाय एक लीटर में तेल की मात्रा घटा दो।
तेल के दामों और भाजपा के कमीशन में सीधा संबंध है मतलब जितने दाम बढ़ेंगे उतना ही भाजपा का कमीशन बढ़ेगा।
तेल के दाम बढ़ाकर भाजपा दरअसल हालिया चुनाव में ख़र्च किये गये अपने पैसों की रिकवरी कर रही है। भाजपा का एक ही सिद्धांत है कि उसका और उसके लोगों का ख़ज़ाना खाली न हो, उसके लिए भले जनता की जेब पर डाका ही क्यों न डालना पड़े।
UP की भाजपा सरकार और उसकी पुलिस की नाइंसाफ़ी और ज़्यादती देखकर ITBP को भी इन पर भरोसा नहीं है।
दिल्ली का भरोसा लखनऊ से उठ गया है तभी ITBP ने ये घेराबंदी की होगी। ये कैसा डबल इंजन है जो एक-दूसरे के ख़िलाफ़ बंदूक ताने खड़ा है।
महाकुंभ के नाम पर प्रयागराज में 50 हज़ार करोड़ से भी अधिक पैसा हड़पा गया लेकिन लोग आज भी बूँद-बूँद के लिए तरस रहे हैं।
भाजपा राज में ‘जल जीवन मिशन’ का अर्थ है : ‘जल’ की व्यवस्था में ही सारा ‘जीवन’ व्यर्थ होना।
भ्रष्टाचार की पाइप लाइन लखनऊ से दिल्ली तक बिछ गई लेकिन पानी लोगों के घर तक नहीं पहुँचा।
पानी की टंकिया यूँ ही नहीं गिर रही हैं और ‘स्वतंत्र’ लोग यूँ ही बंधक नहीं बनाए जा रहे हैं।
‘BJP 3C INFLATION’ मतलब ‘भाजपाई कमीशन-करप्शन कोविड महंगाई’ के कारण, आम जनता को आज मिली ‘महंगाई की तीसरी डोज़’।
जो भाजपा समर्थक कहते हैं कि महंगाई भले कितनी भी हो जाए लेकिन फिर भी वो भाजपा को ही वोट देंगे, उन्हें यह महंगाई मुबारक! भाजपा अपने ऐसे समर्थकों का सदस्यता कार्ड देखकर केवल उनको ही महंगा पेट्रोल, डीज़ल, तेल व परिवहन लागत बढ़ने से बढ़ी अन्य चीज़ो की ऊँची क़ीमत पर सारा सामान बेचे और बाक़ी आम जनता पर कृपा करे व ग़रीबों को बख़्श दे।
#BJP_3C_INFLATION
असली शस्त्र के तो लाइसेंस बनते हैं लेकिन कुछ अदृश्य शस्त्र भी हैं, जो गुप्त रूप से देश, समाज और आपसी प्रेम पर अंदर से बेहद घातक हमला कर रहे हैं।
वकील कह रहे हैं कि लगे हाथों :
- भाजपाइयों के घर, दुकान, कार्यालय, प्रतिष्ठान के काग़ज़-नक्शे मँगाकर उनकी वैधता भी जाँच ली जाए।
- साथ ही भाजपा और उनके संगी-साथियों द्वारा निर्माणों, आयोजनों व आपदाओं के नाम पर ‘जगह-जगह’ से बटोरे गये ‘तरह-तरह’ के चंदे-फ़ंड का हिसाब भी माँगा जाए और उनका ऑडिट हो।
- और हाँ जनता ये भी पूछ रही है कि इस बात का भी क़ानूनी पहलू समझाया जाए कि ‘अनरजिस्टर्ड’ लोग ज़मीन किसके नाम से लेकर अपना निर्माण करते हैं और ये संपत्तियाँ कैसे बेनामी नहीं हैं?
- इसके अतिरिक्त जनता की जिज्ञासा ये भी है कि गुप्त-गतिविधियों में संलिप्त भाजपाई संगी-साथियों के ऐसे निर्माणों को ‘कार्यालय’ कहा जाए या ‘अड्डा’?
- इन ‘संगी-साथी’ अवैध लोगों का ख़र्चा-पानी कौन उठाता है? इसका कच्चा चिट्ठा तलाशकर खोला जाए।
- ये तथाकथित स्वदेशी ‘संगी-साथी’, विदेश भ्रमण करने क्यों जाते हैं?
- ये ‘संगी-साथी’ औपनिवेशिक समय से किसकी कठपुतली हैं?
- इन ‘संगी-साथियों’ का इतिहास मुख़बिरी का क्यों रहा है?
- ये ‘संगी-साथी’ सामाजिक सौहार्द क्यों बिगाड़ते हैं?
- वकील ये भी पूछ रहे हैं कि अब ये ‘संगी-साथी’ किस नई साज़िश के तहत ‘मानस के मान’ पर लाठियाँ चलवा रहे हैं?
विशेष आग्रह :
भाजपा की गलत नीतियों की वजह से उप्र में जो असहनीय बिजली संकट चल रहा है, उसके लिए बिजली विभाग के कनिष्ठ कर्मचारियों या लाइनमैन पर जनता अपना गुस्सा न निकाले। बिजली विभाग के हज़ारों संविदा कर्मचारियों की छँटनी के बाद वो पहले से ही बहुत दबाव में काम कर रहे हैं।
दरअसल इस ‘महा विद्युत आपदा’ के लिए भाजपा सरकार, भाजपा के बिजली मंत्री, भाजपा के सांसद, विधायक, मेयर, पार्षद से लेकर बिजली विभाग के उच्चाधिकारी व भ्रष्ट ठेकेदार ज़िम्मेदार हैं, जो इस नाकाम सत्ता में अप्रत्यक्ष-प्रत्यक्ष रूप से हिस्सेदार हैं। सवाल-जवाब इन लोगों से किया जाए।
सच तो ये है कि भाजपा सरकार ने बिजली व्यवस्था को ठप्प कर दिया है। न नई माँग की पूर्ति के लिए जेनरेशन हेतु कोई नया पावर प्लांट लगाया है, न ट्रांसमिशन के लिए नई व्यवस्था की गयी है, न डिस्ट्रीब्यूशन के लिए। ऊपर से स्मार्ट मीटर का महाभ्रष्टाचार भी करेले पर नीम चढ़ा रहा है।
ये बेहद निंदनीय है कि भाजपाई और उनके संगी-साथी बिजली की शिकायत करनेवालों को धमका रहे है और शिकायतकर्ताओं पर FIR तक हो रही है। अस्पताल तक बिजली के बिना बेहद परेशान हैं। जेनरेटर महंगे डीज़ल की वजह से शांत हैं।
हमारा ये भी आग्रह है कि घर के बड़े बुजुर्गों, बीमारों व बच्चों का विशेष ख़्याल रखें और जब भी बिजली आए तो मोबाइल चार्ज कर लें और टार्च तैयार करके रखें। ये भी ध्यान रखें कि अंधेरे का फ़ायदा उठाकर कोई असामाजिक तत्व आपके वाहनों, घर के सामनों पर हाथ न साफ़ कर जाएं। पशुओं का भी विशेष ध्यान रखें। बिजली की कमी से पीने की पानी का भी सीधा संबंध है, इसलिए पानी भरकर रखें और गर्मी से बचने के लिए पानी पीते रहें।
आपका
अखिलेश