
RAHUL CHOUDHARY
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RAHUL CHOUDHARY
@Rahul_Lamba7771
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राजस्थान के जयपुर जिले में स्थित भैराणा धाम के पास प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र को लेकर गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार दादू पंथ के संतों द्वारा सरकार के निर्णय के विरोध में जीवित समाधि लेने की घोषणा करना न केवल चिंताजनक और पीड़ादायक है बल्कि श्री @BhajanlalBjp के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार की संवेदनहीनता का बड़ा उदाहरण है | प्रदेश सरकार का दायित्व विकास करने के साथ - साथ आस्था, परंपरा और सामाजिक संतुलन का संरक्षण करना भी है मगर सरकार साधु - संतो के आंदोलन को अनदेखा का रही है | इस पूरे प्रकरण में मुख्यमंत्री जी की चुप्पी और संवेदनहीनता BJP की नीतियों पर भी सवाल खड़े करती है । मैं मुख्यमंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि क्या आपकी सरकार इतनी संवेदनहीन हो चुकी है कि संत समाज की पीड़ा भी आपको सुनाई नहीं दे रही ? चुनाव से पूर्व BJP पार्टी साधु - संतो के नाम पर वोट मांगते हुए नजर आती है मगर सत्ता में आने के बाद उन्हें साधु - संतो की पीड़ा दिखाई नहीं देती | जब संतों को अपनी बात मनवाने के लिए जीवन दांव पर लगाना पड़े, तो यह सिर्फ विरोध नहीं बल्कि BJP सरकार की विफलता का प्रमाण है। मैं पुनः मुख्यमंत्री से अपील करता हूं कि तत्काल इस विषय में हस्तक्षेप करें, संत समाज से संवाद स्थापित करें और ऐसा समाधान निकालें जिससे साधु -संतों के प्रति आस्था और उनका सम्मान बरकरार रहे | राजस्थान की परंपरा संतों के सम्मान की रही है, इसे आहत न होने दें। मेरी साधु - संतो से भी अपील है आप जीवित समाधि लेने जैसा कदम नहीं उठाएं | राजस्थान सरकार को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि विकास के नाम पर आस्था को कुचलने नहीं दिया जाएगा क्योंकि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी इस आंदोलन में संत समाज के साथ खड़ी है तथा आवश्यकता पड़ी तो मैं स्वयं मौके पर आऊंगा | @RajCMO


भाजपा प्रभारी यूट्यूबर्स के पैटर्न पर हैं... राजस्थान भाजपा के प्रभारी डॉ राधामोहन दास अग्रवाल ने सचिन पायलट पर पहली बार गैर-जरूरी टिप्पणी नहीं की है। वे पहले भी पायलट पर ऐसी ही टिप्पणी कर चुके हैं। सचिन पायलट को इस बार बहुरूपिया बताया है। इससे पहले वे हनुमान बेनीवाल को भी चूहा बता चुके हैं। वे बेहद होशियार आदमी हैं। होशियार नहीं बल्कि डेढ़ होशियार ही हैं। पढ़े-लखे हैं। पेशे से चिकित्सक हैं। बड़ा नाम है गोरखपुर में। सब समझते हैं कि किसके लिए क्या बोलने पर क्या प्रतिक्रिया आ सकती है। असल में ऐसा लगता है कि उन्होंने राजस्थान के यूट्यूबर्स का गहराई से अध्ययन किया है और उन्हीं के पैटर्न पर रणनीतिक तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। राजस्थान के यूट्यूबर्स के वीडियो खंगाल लीजिए। उनके इंटरव्यूज खंगाल लीजिए। आपको समझ में आ जाएगा कि उनके सवाल सचिन पायलट, हनुमान बेनीवाल, किरोड़ी लाल मीणा और रविंद्र सिंह भाटी के ईर्द-गिर्द सिमट कर रह जाते हैं। सारी रीच इन चार-पांच नामों पर ही आती है। इसी मर्म को राधामोहन दास अग्रवाल ने पकड़ लिया लगता है। किरोड़ी लाल मीणा उन्हीं की सरकार में मंत्री हैं, इसलिए उनको निशाने पर ले नहीं सकते। रविन्द्र सिंह भाटी से देर-सवेर उम्मीद है। ऐसे में निशाने पर लेने के लिए दो ही बचते हैं। एक को ले लिया। पिछली बार अग्रवाल साहब ने सचिन पायलट पर टिप्पणी की थी तब पूरी कांग्रेस उनके समर्थन में नहीं उतरी थी। युवा कांग्रेसियों और एनएसयूआई वालों ने जरूर उनके खिलाफ प्रदर्शन किए थे। उदयपुर में उन्हें काले झंडे दिखाए गए थे। फिर अग्रवाल साहब को थोड़ा धड़का जरूर हुआ था और तब उनका बयान आया कि अगर उनके शरीर को कोई हानि होती है तो इसकी जिम्मेदारी सचिन पायलट की होगी। इसके बाद सचिन पायलट ने भी कार्यकर्ताओं को शांत रहने की नसीहत दी और मामला आया-गया हो गया। फिर एक दौरे में अग्रवाल साहब रालोपा वाले हनुमान बेनीवाल को चूहा बता बैठे। रालोपियन्स और हनुमान बेनीवाल को तो आप जानते ही हैं कि वहां उतनी थोथ नहीं है। हनुमान बेनीवाल का बयान आ गया कि उल्टी-सीधी बातें की तो छोरे जूत धर देंगे। बाद में लंबे समय तक प्रभारी महोदय राजस्थान पधारे ही नहीं और बात ठंडी हो गई। इस बार जब राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के पहले राजस्थान दौरे के सिलसिले में प्रभारी महोदय फिर पधारे तो सचिन पायलट पर हमला कर दिया। इस बार पायलट गुट के साथ ही गहलोत गुट के लोग भी पायलट के समर्थन में उतर आए और अशोक गहलोत ने इस मौके को अपने हिसाब से भुना लिया लेकिन यहां गौर करने वाली बात ये है कि इस बहाने से चर्चा का केंद्र राष्ट्रीय अध्यक्ष से ज्यादा प्रदेश प्रभारी हो गये। हर कांग्रेसी ने पार्टी के प्रति वफादारी का प्रदर्शन करने के चक्कर में राधामोहन दास अग्रवाल को निशाने पर लिया। ऐसे में राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्वागत सत्कार के चक्कर में जयपुर शहर में हुई अव्यवस्थाएं गौण हो गई। होने को राष्ट्रीय अध्यक्ष भी गौण हो गए। अब बात हो रही है कि राजस्थान में भाषा की एक मर्यादा होती है, राजस्थान की ऐसी तासीर नहीं है वगैरह-वगैरह लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। राजस्थान में भाषा की मर्यादा तार-तार करने वाले बहुत बैठे हैं और आए दिन करते भी रहते हैं। पांच-सात साल से हम देख भी रहे ही हैं। हालांकि यह हमारे घर की बात है। बाहर से आकर कोई कर जाए, यह हमें मंजूर नहीं है और नहीं होना चाहिए। बाकी राजनीति एक खेल है। होशियार लोग इसे खेलते हैं और हमारे जैसे ठाले लोग इस पर चर्चा करते हैं। शेष सब कुशल मंगल है। भगवान सबको सद्बुद्धि प्रदान करे @BJP4Rajasthan @INCRajasthan @SachinPilot @hanumanbeniwal @ashokgehlot51 @NitinNabin


























