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Raja pathan ♛افضل_راجا♕
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Raja pathan ♛افضل_راجا♕
@Rajapathan1508
#15_August🎂 #india_love_😍 راجا راحیمین
India (हिन्दुस्तान) Katılım Ocak 2016
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बताया जा रहा है कि यह वीडियो पश्चिम बंगाल के ग्वालपाड़ा क्षेत्र का है..??
जहाँ कुछ महिलाएँ और पुरुष मीडिया के सामने अपनी आर्थिक परेशानियाँ बताते हुए भावुक नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों से गायों की खरीद बिक्री ही उनके परिवार की रोजी रोटी का मुख्य साधन रही है।
कई लोगों ने बैंक से कर्ज लिया, तो कुछ ने ब्याज पर पैसा उठाकर कुर्बानी के मौसम को ध्यान में रखते हुए बड़ी संख्या में गायें खरीदी थीं।
लेकिन हाल के माहौल और बढ़ती आशंकाओं के कारण, अब कई मुस्लिम खरीदार गाय खरीदने से परहेज कर रहे हैं। इसका सीधा असर बाजार पर पड़ा है गायों के दाम अचानक गिर गए हैं और व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
वीडियो में कुछ महिलाएँ रोते हुए कहती दिखाई दे रही हैं कि उनकी मेहनत और पूंजी दोनों डूब गईं, परिवार के सामने रोज़ी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
एक महिला भावुक होकर कहती है कि भूखे मरने से अच्छा है सरकार हमें गोली मार दे, जबकि दूसरी महिला भाजपा सरकार से ज़हर मांगने जैसी पीड़ा भरी बातें करती नजर आती है।
यह मामला केवल राजनीति का नहीं, बल्कि उन गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की आर्थिक चिंता का भी है, जिनकी जिंदगी पूरी तरह इस व्यापार पर निर्भर रही है। किसी भी नीति या सामाजिक माहौल का सबसे बड़ा असर अक्सर उन लोगों पर पड़ता है, जिनके पास कमाई का दूसरा साधन नहीं होता।
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अदानी को तमिलनाडु की एक मुस्लिम उद्योगपति की पावर कंपनी हड़पनी थी
उसने मोदी से कहा….?
मोदी ने सीबीआई से कहा सीबीआई ने ईडी से कहा…?
कंपनी के मालिक को 512 करोड रुपए के फर्जी मामले में फंसा कर जेल में डाल दिया गया…
कंपनी बर्बाद होने लगी तो सरकार ने कहा इसे अदानी खरीद लेगा….
इस तरह कंपनी का मालिक अदानी बन गया…
उसके बाद कोर्ट ने मलिक को बरी कर दिया…
सीबीआई और ईडी ने भी केस वापस ले लिया…
भारत को अब कुTTते चला रहे हैं…
यह भौंक रहे हैं काट रहे हैं बर्बाद कर रहे हैं
क्या कोर्ट सीबीआई ईडी प्रधानमंत्री गृहमंत्री सब मिलकर इस देश को नोच नोच कर खा रहे हैं…???
रवीश कुमार जी ने इस पर बहुत अच्छी रिपोर्ट की है लिंक कमेंट बॉक्स में है
अब आप ही बताइए भारत का व्यापार कैसे बढ़ेगा भारत में कोई निवेश क्यों करेगा?

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🚨🚨क्रोनोलॉजी समझिए:
पिछले 43 सालों में किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने नॉर्वे का दौरा नहीं किया था। लेकिन मोदिया गया!
जानते हैं क्यों?
27 फरवरी 2026 को नॉर्वे के 'सॉवरेन वेल्थ फंड' (Sovereign Wealth Fund) ने अडानी की कंपनी 'अडानी ग्रीन एनर्जी' को ब्लैकलिस्ट कर दिया।
दरअसल, 1990 में नॉर्वे के समुद्र में तेल का एक विशाल भंडार मिला था। इस तेल को बेचकर नॉर्वे ने बेतहाशा पैसा कमाया। लेकिन उन्हें पता था कि तेल हमेशा नहीं रहेगा, इसलिए उन्होंने एक फंड बनाया और तेल से होने वाली सारी कमाई को उसमें जमा करना शुरू कर दिया।
अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए नॉर्वे इस फंड का पैसा सिर्फ देश के बाहर शेयर बाज़ार, दूसरे देशों को कर्ज़ देने, विदेशों में प्रॉपर्टी खरीदने और सौर तथा पवन ऊर्जा जैसे रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में निवेश करता है!!
आज दुनिया भर की लिस्टेड कंपनियों में इस फंड की 1.5% हिस्सेदारी है। Apple, Microsoft, Amazon और Nvidia समेत 7,200 कंपनियों में इस नॉर्वेजियन फंड का पैसा लगा है। इस फंड में इतनी दौलत है कि अगर इसे नॉर्वे के हर नागरिक में बांट दिया जाए, तो हर इंसान के हिस्से में 3 करोड़ रुपये से ज़्यादा आएंगे।
इस फंड के नियम और नैतिक मानक (Ethical Standards) बेहद सख्त हैं। जो कंपनियां तंबाकू या परमाणु हथियार बनाती हैं, मानवाधिकारों का हनन करती हैं, या भ्रष्टाचार में शामिल होती हैं, यह फंड उन्हें सीधा ब्लैकलिस्ट करता है। अडानी पर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के कारण ही इस फंड ने उनकी कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया था।
अब क्रोनोलॉजी समझिए:
43 साल से कोई पीएम नॉर्वे नहीं गया था। 26 फरवरी को नॉर्वे अडानी ग्रीन को ब्लैकलिस्ट करता है, और 18 मई को मोदिया नॉर्वे पहुँच जाता है। वो तो बीच में बंगाल चुनाव आ गए इसलिए थोड़ी देरी हो गई, वरना मोदिया अपने मित्र के लिए एक पल का भी इंतज़ार नहीं करता।
क्या अब भी कुछ समझाना बाकी है?
उधर अमेरिका में, जब अडानी पर 2,000 करोड़ रुपये की रिश्वत देने का मुकदमा दर्ज़ हुआ, तो रातों-रात अमेरिका के साथ एक व्यापारिक समझौता (Trade Deal) कर लिया गया। इस डील के तहत, अमेरिकी कृषि कंपनियों के लिए भारत के दरवाज़े खोल दिए गए, अमेरिका में भारतीय कंपनियों पर टैरिफ लगा दिए गए, और इसके बदले भारत के हाथ कुछ नहीं आया।
कुछ ही दिनों बाद, अमेरिकी अदालत ने अडानी का केस हमेशा के लिए बंद कर दिया। और अब, अडानी अमेरिका में 1 बिलियन डॉलर का निवेश करेगा।
क्या आपको अब भी कोई शक है कि अडानी को बचाने के लिए इस देश को बेचा जा रहा है?
आप सोच रहे हैं कि प्रधानमंत्री आपके हैं, लेकिन हकीकत यह है कि जिसको आप शेर समझते हैं, अडानी उसको अपना शेरू बना के घुमा रहा है!!
मोदिया पूरी तरह से कॉम्प्रोमाइज्ड है!

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10 रुपए झालमुड़ी का मनोरंजन पश्चिम बंगाल में OBC समाज के लिए बहुत महंगा पड़ गया है.
बंगाल के मुख्यमंत्री आदरणीय सुवेन्दु अधिकारी ने OBC आरक्षण 17% से घटाकर 7% कर दिया है.
OBC आरक्षण में जोड़ी गयी मुस्लिम जातियों को हटा दिया गया है. फिर भी आरक्षण 7% नही 27% से ज्यादा होना चाहिए.
ममता बनर्जी ने भी OBC आरक्षण को 27% नही किया, ऊपर से मुस्लिम जातियों को ओबीसी आरक्षण में जोड़ दिया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी तो खुद को OBC कहते हैं. लेकिन आज तक OBC आरक्षण बढ़ा कर 50% करने पर और OBC समाज की गणना पर कोई फैसला नही करते हैं.
भारत का हर दूसरा नागरीक OBC है. OBC आरक्षण 50% तक होना चाहिए. मगर अफसोस इस बात का है हर तीसरा OBC ठाकुर, राजपूत और क्षत्रिय बनने पर लगा हुआ है. आरक्षण की लड़ाई केवल बहादुरी से SC-ST समाज लड़ता है.


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पश्चिम बंगाल में नयी भाजपा सरकार ने गाय-भैंस और अन्य बोवाइन पशुओं के वध को लेकर जो नियम लागू किए हैं वह जवान गाय भैंस को जीवन और बूढ़े गाय भैंस को कत्ल करने के लिए है।।
यह नियम 1950 के कानून West Bengal Animal Slaughter Control Act के तहत लागू किया जा रहा है , नियम भी पढ़ लीजिए...
गाय, बैल, बछड़ा, भैंसा आदि का वध बिना सरकारी “फिटनेस सर्टिफिकेट” के नहीं किया जा सकता।
और "फिटनेस सर्टिफिकेट" तभी मिलेगा जब पशु 14 साल से अधिक उम्र का हो और काम क्रीड़ा और प्रजनन के लायक न हो और वह स्थायी रूप से घायल, बीमार या अशक्त हो।
मतलब मरने के पहले काट कर खा जाओ....
बताईए भला, बुढ़ापे में मां की सेवा करने की बजाय उसे काटकर खाने का लाइसेंस दिया जा रहा है....यह तो ओल्ड एज होम से अधिक विभत्स है।
मतलब यह कि इन्हें गाय से मतलब नहीं, बूढ़ी गाय माता नहीं, उन बूढ़ी गायों में 33 कोटि के देवी-देवता वास नहीं करते , उन्हें वध करने का यह लाइसेंस दे रहे हैं....
हे माँ, तेरे पुत्र नालायक


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