
जोधपुर में पूर्व उपराष्ट्रपति स्व. श्री भैरोंसिंह शेखावत की मूर्ति अनावरण संबंधी प्रश्न के जवाब में :
मैं कह चुका हूं, बगैर अशोक गहलोत की मौजूदगी के अंदर प्रोग्राम की गरिमा घटा दी। जिस व्यक्ति ने जब कभी बीमार पड़े हैं, उनको कैंसर हो गया था। मुंबई हो, दिल्ली हो या सिविल लाइंस हो, जितनी बार मैं मिला हूं, कोई नहीं मिला उनसे, और अंतिम जो है उनसे मिलने वाला व्यक्ति था वो मैं भी।
जब वो उनका स्वर्गवास हुआ एसएमएस में उनसे मिलने वाला अंतिम व्यक्ति मैं था और मिल के मैं घर पहुंचा, इत्तला आई वो तो समाप्त हो गए, उनकी डेथ हो गई है तो मेरा रिश्ता इस प्रकार का उनसे था और जो हमने रिस्पेक्ट दिया उनको जब वो उपराष्ट्रपति बने मैं एक सौ छप्पन पर आ गया था वो बत्तीस पर आ गए थे, जब मुख्यमंत्री हटे, तब भी मैं उनके घर गया, शपथ लेते ही उनसे मैंने कहा आराम से आप रखिएगा, जल्दबाजी नहीं कीजिए खाली करने की। पूरी सिक्योरिटी आपकी कायम रहेगी, डॉक्टर पूरे आपके ध्यान रखेंगे, कोई तकलीफ आपको आए, आप मुझे फौरन इत्तला करना।
तीन बातें मैं उनको कह के आया था और उसके बाद लगातार हम लोग ऐसे रिश्ते रहे। वो भी कहीं जाना होता आराम से मुझे वो इत्तला करते कि मैं भी आपके साथ चल रहा हूं, प्लेन के अंदर हम साथ जाते थे। सरकार बदलने के बाद मेरे तमाम मंत्री थे, जो सीनियर थे मोहनलाल सुखाड़िया जी के वक्त के चंदनमल जी बेड, खेत सिंह जी राठोड़ , प्रद्युमन सिंह जी, गुलाबी सिंह शक्तावत जी तमाम उनके यहां जाते रहते थे, हम कभी एतराज ही नहीं करते थे। आज जमाना बदल गया, मंत्री तो छोड़ दीजिए, MLA भी आ जाए कहीं हम लोगों के यहां पर तो पचास तरह का शक् होने लग जाते हैं उसके ऊपर। हमारे वक्त में, मैं जाता था होली दिवाली वो आते थे मेरे यहां पर। वो रिश्ते रखे हमने और डेथ हुई तो हमने चला करके उनके लिए स्मारक बनाया। वो तो पूरे राजस्थान जानता है कि अगर ये बीजेपी वाले होते ना तो उपराष्ट्रपति बनने पर इनको कोई सम्मान किया, बता दीजिए किया हो तो, मैं तो ऑफिशियली कह रहा हूं ना मैं खुद आरोप लगा रहा हूं, बीजेपी का एक इतना बड़ा पुराना नेता सन बावन से चुनाव जीतता आ रहा है, वो उपराष्ट्रपति बने तो क्या बीजेपी वालों को शानदार स्वागत नहीं करना चाहिए था? किया क्या ? मैंने किया मुख्यमंत्री निवास में बुलाकर के। संपर्क मैंने रखा उसके बाद में भी, और डेथ हुई तो हम लोगों ने स्मारक बनाया उनके लिए।
सब दुनिया जानती है। पूरे राजस्थान में यह चर्चा आज भी है उस वक्त भी थी कि अगर बीजेपी वाले होते शायद वो भी ऐसा स्मारक बनाने की बात या जमीन देने की बात नहीं सोच सकते थे। कोई सम्मान नहीं दिया गया ये स्थिति है।
इसलिए मैंने कल कहा कि भाई मेरा तो क्षेत्र है वो मेरे क्षेत्र में प्रोग्राम हो रहा है। सरकारी प्रोग्राम नहीं होता तो मैं नहीं करता, यह प्रोग्राम JDA का था अगर मान लीजिए प्रोग्राम प्राइवेट कोई करता तो फिर भी मैं कोई कमेंट नहीं करता। यह प्रोग्राम सरकारी था। रक्षा मंत्री को बुलाया गया और आप लोकल MLA को नहीं बुलाओ, छोड़िए पूर्व मुख्यमंत्री की बात, छोड़िए मेरे क्या रिश्ते थे तब, यह इनकी एप्रोच है। ये तो इस देश में डेमोक्रेसी खत्म कर ही रहेंगे यह इनका संकल्प है। उसी रूप में तमाम बंगाल हो या बिहार हो, चाहे असम हो, देश में राजनीति चल रही बहुत खतरनाक चल रही है।
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