INDIAN
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....... ख़त तेरे नाम किया -तनहा ✍️ ....... मेरे जॉन एलिआ, तुम्हे याद करना खुद को एक ऐसी महफिल में ले जाना है जहाँ चिराग तो जल रहे हैं, पर रौशनी में उदासी घुली है। तुम्हारी याद में 'तनहा' कुछ लिखने बैठा है आज... मुकम्मल तो नहीं, तुम्हें कौन समझता है 🤔.. अधुरा हीं सही.. पर तुमको लिखा.. पढ़ो 👇 .... जॉन, तुम क्या गए कि महफिलों से वह बेबाक वहशत ही चली गई। ... अब तो यहाँ लोग सलीके से रोने भी लगे है, तुम्हारी तरह सरेआम दिल के टुकड़े नहीं करते..! ... कुछ शेर तुम्हारे लिये, तुम्हारे अंदाज मे :- ... उसी को ताकता रहता हूँ नींद आने तक, वो शख्स जो मेरे ख्वाबों में भी पराया है..! तुम्हारी याद का मलबा अभी हटा ही नहीं, ये दिल तो शहर था, अब एक गाँव लगता है..! सुना है शहर में अब 'जॉन' कोई और नहीं, वरना हर मोड़ पे इक शख्स खुद से लड़ता था..! .... मेरे जॉन, जब भी तन्हाई हद से ज्यादा सरगोशियाँ करने लगती है, तो तुम्हारी वो नज्में ज़हन में गूंजती हैं जहाँ तुमने "मैं" को "तुम" से ज्यादा अहमियत दी। तुम्हारी शायरी सिर्फ लफ्जों का खेल नहीं थी, वह तो उस अना (Ego) की चीख थी जिसे दुनिया ने कभी समझा ही नहीं। "शायद अब भी कोई रास्ता निकल आए, चलो ज़रा जी कर देखते हैं।" .... जॉन, तुमने कहा था कि 'ज़िन्दगी क्या है, बस इक सिगरेट का धुआँ है'। आज जब हम तनहा हैं, तो उस धुएँ में तुम्हारी सूरत और वो कड़वी बातें साफ नज़र आती हैं। तुमने दर्द को जो नफ़ासत दी, वह अब किसी और के बस की बात नहीं। तुम जहाँ भी हो, उम्मीद है वहाँ तुम्हें तुम्हारी वह 'शायद' मिल गई होगी जिसे तुम ता-उम्र ढूंढते रहे। खैर, अब बस भी करो जॉन... तुम्हारी कमी बहुत खलती है। जल्दी मिलते है, सजायेंगे एक महफ़िल तुम्हारे नये आशियाँ मे। तेरा तनहा भी तुझसा होने लगा है जॉन.. तुझसा.. .... -तनहा ✍️





वो जिसके हाथ में छाले हैं पैरों में बिवाई है उसी के दम से रौनक आपके बंगले में आई है इधर एक दिन की आमदनी का औसत है चवन्नी का उधर लाखों में गांधी जी के चेलों की कमाई है अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस की शुभकामनाएं 💐

मैं सहूँ कर्ब-ए-ज़िंदगी कब तक रहे आख़िर तिरी कमी कब तक - Jaun Elia 🖤



दिल में तूफ़ान हो गया बरपा तुम ने जब मुस्कुरा के देख लिया ....❤️:) @sharma_k_deepak











