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सुजाता मिश्रा
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Supreme Court to hear the suo motu case focussing on alleged bias and irregularities in the probe into Twisha Sharma's death #TwishaSharma #SupremeCourt

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एक बार मेरे एक दोस्त ने ऐसे ही मोबाइल चलाते हुए एक instant loan वाला app देख लिया?
उसमें लिखा था ₹3500 तुरंत account में, सिर्फ 15 दिन बाद वापस करो
उसने सोचा इतनी छोटी रकम है, salary आते ही भर दूंगा
उसने आधार डाला, PAN डाला, account डाला, पहले ₹1 आया और फिर पूरा amount account में आ गया
उसे लगा काम आसान हो गया
लेकिन जब details खोली तो लिखा था 15 दिन बाद ₹5400 वापस करने हैं
उसने हिसाब लगाया ₹3500 लिए और 15 दिन बाद ₹5400 देने हैं यानी ₹1900 ऊपर
फिर उसने सोचा कोई बात नहीं, भर दूंगा
लेकिन 15 दिन वाले दिन payment नहीं हो पाई और अगले दिन amount ₹6000 दिखने लगा
अब उसके account में ₹5400 थे लेकिन payment पूरी नहीं हो रही थी
फिर उसे दूसरा app दिख गया जिसमें ₹9000 मिल रहे थे और 3 महीने का time लिखा था
उसने सोचा इससे पहला बंद कर देता हूँ
₹9000 account में आए, ₹6000 पहले वाले में चले गए और बाकी पैसे बच गए
फिर उसने schedule देखा तो पता चला 3 महीने का time मतलब 6 किस्तें थीं
एक किस्त करीब ₹3200 पड़ रही थी
उसने हिसाब लगाया ₹3200 × 6 = ₹19200
मतलब ₹9000 लेकर वापस करीब ₹19200 देने पड़ रहे थे
पहली किस्त किसी तरह भर दी
लेकिन दूसरी किस्त आते ही पैसे कम पड़ गए
फिर उसने तीसरा loan लिया ताकि दूसरे की किस्त भर सके
फिर तीसरे को भरने के लिए चौथा, चौथे को भरने के लिए पाँचवा
धीरे-धीरे हालत ऐसी हो गई कि उसे खुद याद नहीं रहा कौन सा loan किसको बंद करने के लिए लिया था
कुछ समय बाद उसने अपने एक दोस्त को बैठकर बताया कि मैं ऐसे इस हालत में फंस गया था, शुरुआत सिर्फ ₹3500 से हुई थी और मुझे लगा था मैं control कर लूंगा
क्या आपने या आपके किसी जानने वाले ने कभी ऐसा छोटा instant loan लेकर बाद में मुश्किल देखी है?


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90 साल की सास को पीठ पर उठाकर 9 किलोमीटर चलती है बहू... कलयुग में भी जिंदा हैं ऐसे रिश्ते...
आज के समय में,जब कई लोग बुजुर्गों की जिम्मेदारी से बचने के बहाने ढूंढते हैं,
वहीं छत्तीसगढ़ के मैनपाट के जंगलपारा गांव की सुखमुनिया बाई ने सेवा, समर्पण और इंसानियत की मिसाल पेश की है।
हर महीने वह अपनी 90 वर्षीय सास सोनवारी को पीठ पर उठाकर पहाड़ियां, जंगल और नाले पार करते हुए करीब
9 किलोमीटर दूर नर्मदापुर के सेंट्रल बैंक तक ले जाती हैं, ताकि उन्हें उनकी ₹500 मासिक वृद्धावस्था पेंशन मिल सके।
जिस उम्र में एक बुजुर्ग को सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उस समय परिवार का साथ सबसे बड़ी ताकत बन जाता है।
सुखमुनिया बाई की यह कहानी हमें याद दिलाती है कि परिवार केवल खून के रिश्तों से नहीं, बल्कि एक-दूसरे के लिए किए गए त्याग, सम्मान और साथ से बनता है।


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जब पानी से सिर से ऊपर बहेगा तो सेना उतरेगी ही…
ITBP जवान विकास सिंह की माँ को साँस की दिक्कत थी लेकिन कानपुर के कृष्णा अस्पताल वालो ने हाथ काट दिया…
बेचारा जवान तीन दिन तक FIR लिखाने के लिए भटकता रहा…
वीडियो में देखिए एक निर्लज्ज पुलिस अफसर कटा हाथ देखने के बाद भी कुछ नहीं करता तो आज ITBP वालों को पुलिस कमिश्नर ऑफिस को मजबूरन घेरना पड़ा…
यूपी के इतिहास में ये शायद पहली ऐसी घटना है !!
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बेहद शर्मनाक ! भीलवाड़ा की सुभाष नगर पुलिस का यह रवैया कानून का मजाक उड़ाना है। एक बेटा अपने जीवित पिता का 'फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र' बनवाकर धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ न्याय मांग रहा है, और पुलिस उसे ही जेल में डाल रही है?
पुलिस को शायद पता नहीं कि 1 जुलाई 2024 से कानून बदल चुका है। जिसे पुलिस 151 कह रही है, वह अब BNSS की धारा 172 है। इसका इस्तेमाल केवल 'बड़ा अपराध' रोकने के लिए होता है, किसी पीड़ित की आवाज दबाने के लिए नहीं। थाने में बहस करना गिरफ्तारी का आधार नहीं है।
वीडियो में पुलिस अधिकारी जिस तरह लड़के को 'कान के नीचे देने' की धमकी दे रहे हैं, वह सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है। जीवित व्यक्ति का डेथ सर्टिफिकेट बनाना BNS (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 336 और 340 के तहत संगीन जुर्म है, लेकिन पुलिस अपराधियों को संरक्षण दे रही है और आवाज उठाने वाले को सलाखों के पीछे।
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Fully agree 💯 with Justice Nagrathna 👍
News Algebra@NewsAlgebraIND
🚨 SUPREME COURT : "If both parents are IAS officers, why seek reservation?" "The parents have studied, they are in good jobs, they are getting good income, and the children want reservation again" "We will never get out of it" "With educational and economic empowerment, there is social mobility" "See, they should get out of reservation"
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