Shwetank
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@Shwetank0
न तिष्ठन्ति, न निमिषन्त्येते, देवानां स्पश इह चरन्त्यन्ये || लोकाभिरामं रणरंगधीरं, राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्






















रोटी और सर्कस रोम के सम्राटों ने अपनी जनता का ध्यान अनस्टैबिलिटी, इकोनॉमिक प्रॉब्लम्स और अधिकारों की मांग से भटकाने के लिए मुफ्त रोटी मतलब अनाज और कोलोसियम में खूनी खेलों का सहारा लिया था। भारत में आज मीडिया, ध्रुवीकरण, धर्म, चुनावी रैलियां और डिस्प्यूटेड डिस्कोर्स एक वैसा ही सर्कस तैयार करते हैं! बुनियादी आर्थिक समस्याओं और बेरोजगारी का ठोस सॉल्यूशन खोजने की जगह पैसा बाँटने की स्कीम, मुफ्त योजनाओं और राशन को एक बड़े राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है जो बहुसंख्य आबादी की तात्कालिक जरूरतों को तो पूरा करता है लेकिन उन्हें कभी अपने पैरों पर खड़ा नहीं होने देता! भारत की जनता ऐसे ही सर्कसों में उलझायी गई है, जहाँ आदिवासियों से लेकर महिलाओं तक और नौकरी से लेकर फ़ैक्ट्री तक हर मुद्दे धरे रह जा रहे हैं।जब तक जनता इस सर्कस में खोई रहती है, सत्ता को जवाबदेही की जरूरत नहीं पड़ेगी। तो कोलोसियम दरअसल रोमन जनता की राजनीतिक उदासीनता का स्मारक है और आज का भारत भी खड़ा नजर आता है।




