shivay Thakur
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shivay Thakur
@SiddhendraT
मन के हारे, हार हैं, मन के जीते जीत,
Katılım Şubat 2023
197 Takip Edilen170 Takipçiler
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Assam and Bengal are clear cases of the election being stolen by the BJP with the support of the EC.
We agree with Mamata ji. More than 100 seats were stolen in Bengal.
We have seen this playbook before:
Madhya Pradesh.
Haryana.
Maharashtra.
Lok Sabha 2024 etc
चुनाव चोरी, संस्था चोरी - अब और चारा ही क्या है!
English

@aajtak वो अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप बेज्जत करते रहता है,
विदेशों में विश्वगुरु का ढोल फट गया है,
LPG cylinder, के दामों में जबरदस्त बढ़ोत्तरी हो गई,
रुपया गिर रहा है,
इस पी एम मोदी क्या कर रहा है 😅,
आजतक पीएम मोदी की तरह कंप्रोमाइज क्यों है 😅🌶️🔥
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पश्चिम बंगाल में कमल खिल उठा है!
वर्ष 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव अविस्मरणीय रहेंगे। जनशक्ति की जीत हुई है और भाजपा के सुशासन की राजनीति को यहां के लोगों का भरपूर आशीर्वाद मिला है। इस ऐतिहासिक विजय के लिए बंगाल के अपने भाई-बहनों का हृदय से आभारी हूं।
जनता-जनार्दन ने भाजपा को अभूतपूर्व जनादेश दिया है। मैं उन्हें विश्वास दिलाता हूं कि हमारी पार्टी पश्चिम बंगाल के लोगों के सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगी। हमारी डबल इंजन सरकार समाज के सभी वर्गों के लिए समान अवसर और सम्मान सुनिश्चित करेगी।
@BJP4Bengal
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Thank you to my brothers and sisters in Keralam for a truly decisive mandate.
Congratulations to every UDF leader and worker for a hard-fought, well-run campaign.
As I said before, Keralam has the talent, Keralam has the potential and now Keralam has a UDF government with a vision to harness both.
I look forward to seeing my Keralam family soon ♥️
English
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रिकॉर्ड है प्रधानमंत्री मोदीजी का, इनके समय में रुपया का इतना तेजी से नीचे गिरना और महंगाई इतना तेजी से आसमान छूने की ओर बढ़ना !
मोदी सरकार का प्रशासन ने देश को खोखला बना दिया है।@VarshaEGaikwad @Pawankhera
@INCIndia @sachin_inc @atullondhe


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"समर शेष है, अभी मनुज भक्षी हुंकार रहे हैं...
गाँधी का पी रुधिर जवाहर पर फुंकार रहे हैं।"
1948 में जिस गोली ने एक निहत्थे बूढ़े की छाती छलनी की थी, वह आज भी हमारे आस-पास सनसना रही है,फर्क सिर्फ इतना है कि अब वह गोली बंदूकों से नहीं, हमारी खामोशी से चलती है।
●●
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' केवल शब्दों के जादूगर नहीं थे, वे भविष्य के दृष्टा थे।
जब बापू की हत्या हुई, तो दिनकर ने एक सच्चाई देखी ...उन्होंने साफ कहा था कि गांधी की मृत्यु अंत नहीं, बल्कि एक नए और भयानक युद्ध की शुरुआत है।
"समर शेष है, अभी मनुज भक्षी हुंकार रहे हैं...
गाँधी का पी रुधिर जवाहर पर फुंकार रहे हैं।"
यह कोई साधारण कविता नहीं थी, यह आने वाले दशकों की भविष्यवाणी थी।
बापू को मारने वालों के भीतर यह भ्रम था कि उन्होंने उस विचार को ही खत्म कर दिया जिसे हम 'भारत' या 'आइडिया ऑफ इंडिया' कहते हैं।
लेकिन सत्य की वह मशाल तब तक जवाहरलाल नेहरू के हाथों में सौंपी जा चुकी थी। उस रोशनी को पूरी तरह बुझाने के लिए, उस मशाल-वाहक को भी मिटाना जरूरी था।
नेहरू जी पर सात बार जानलेवा हमले हुए। यह कभी दो व्यक्तियों की लड़ाई थी ही नहीं, यह तो करुणा और क्रूरता के बीच का युद्ध था।
जिस 'आइडिया ऑफ इंडिया' को गोलियां और साज़िशें नहीं मार सकीं, उसे आज नफरत की आंधी में बुझाने की कोशिश हो रही है।
आज फिर उसी घृणा की विचारधारा के वारिस उस विचार को मिटाने निकले हैं, और आज भी उन्हें अपने रास्ते में नेहरू ही सबसे बड़ी दीवार नजर आते हैं।
दिनकर की चेतावनी "समर शेष है" आज भी हमारा पीछा कर रही है।
क्योंकि युद्ध खत्म कहाँ हुआ है?
अहंकार की जड़ें अब भी हरी हैं।
इंसान आज भी इंसान का खून बहाने को आतुर है,कभी धर्म के नाम पर, तो कभी जाति और खोखले राष्ट्रवाद के नाम पर।
जो ज़हर उगलता है, उसे सिर माथे पर बिठाया जाता है; और जो प्रेम या एकता की बात करे, उसे देशद्रोही का तमगा थमा दिया जाता है।
"वृक को दंतहीन, अहि को निर्विष करना बाकी है..."
दिनकर की यह पुकार आज के समाज का सबसे बड़ा सत्य है।
●●
ऐसे में राष्ट्रकवि ने एक आह्वान किया था
"सावधान! हो खड़ी देश भर में गाँधी की सेना..."
लेकिन यह गाँधी की सेना आखिर है कौन?
यह सेना उन आम लोगों की है जिनके पास न तो सत्ता का अहंकार है, न बम-बारूद, और न ही नफ़रत फैलाने वाली कोई ट्रोल आर्मी...
यह उन लोगों की कतार है जो द्वेष का जवाब करुणा से देने का साहस रखते हैं।
जो जानते हैं कि इस देश का भविष्य दंगों की आग और बुलडोज़र के गुरूर में नहीं है। देश का भविष्य उस स्नेह में है, जो दिलों के गहरे घाव सीना जानता है और ढहते हुए विश्वास के बीच मंदिर और मस्जिद को एक ही इंसानियत के धागे में पिरो सकता है।
●●
आज जब सोशल मीडिया पर नफ़रत को ट्रेंड बनाया जाता है, जब एक कुर्सी के लिए पूरे इतिहास को ही तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है, और जब सच बोलना इस दौर का सबसे बड़ा गुनाह बन गया है तब दिनकर की वह एक पंक्ति किसी भारी पत्थर की तरह हमारी आत्मा पर गिरती है
"जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध"
तटस्थता कोई समझदारी नहीं है, यह अन्याय का कायरतापूर्ण समर्थन है।
अगर आप नफ़रत का बाज़ार सजते देखकर भी चुप हैं, अगर आप किसी कमज़ोर पर होते वार को देखकर अपनी आँखें फेर लेते हैं, तो याद रखिए आपके हाथ भी उस अपराध में सने हैं।
आने वाला इतिहास आपको भीष्म और द्रोण की तरह ही परखेगा, जो धर्म और न्याय का सारा ज्ञान रखते थे, लेकिन जब चीरहरण हो रहा था, तब उन्होंने अपनी आँखें मूंद कर अपनी 'तटस्थता' चुन ली थी।
समर अब भी शेष है।
सवाल अब आपसे है क्या आप इस अंधेरे में 'गाँधी की सेना' का वह सिपाही बनेंगे जो सच का दीया जलाता है?
या इतिहास की अदालत में खुद को एक मौन अपराधी के रूप में दर्ज करवाएंगे?
#VijayShukla

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मध्यप्रदेश के सिंगरौली में एक असहाय आदिवासी आदमी को भद्दी भद्दी गालियाँ देकर बुरी तरह से पीटने का यह वीडियो मानवता को शर्मसार करता है
आदिवासियों की ज़मीन छीनने के साथ ही साथ उनके साथ खुलेआम जानवरों से भी बदतर व्यवहार हो रहा है
डबल इंजन सरकार में यह बर्बरता हो रही है और BJP में सुई टपक सन्नाटा है
इन दरिंदों को पुलिस, प्रशासन, सरकार किसी का डर क्यों नहीं है?
कितना दुखद है कि आदिवासियों के साथ हमारे देश में यह अराजकता तब हो रही है जब हमारी महामहिम राष्ट्रपति स्वयं आदिवासी समाज से हैं - लेकिन दुर्भाग्य से वह बिल्कुल मौन हैं
📍 सिंगरौली, मप्र
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सावरकर के परपोते सत्यकी सावरकर ने कोर्ट में वही कहा जो दुनिया कहती है
▪️सावरकर ने ब्रिटिश सरकार को 5 माफीनामे लिखे
▪️सावरकर ने दूसरे विश्व युद्ध में ब्रिटिश सरकार में भर्ती के लिए अपील की
▪️सावरकर ने गाय को सिर्फ़ एक उपयोगी जानवर माना, पूजनीय नहीं
सावरकर के परपोते ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि के केस में कोर्ट में क्रॉस एग्जामिनेशन के दौरान वो सच बयां कर दिया जो संघियों और भाजपाईयों को हमेशा शर्मसार करता है!

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कह दिया था - चुनाव के बाद महंगाई की गर्मी आएगी।
आज कमर्शियल गैस सिलेंडर ₹993 महंगा। एक ही दिन में सबसे बड़ी बढ़ोतरी। यह चुनावी बिल है।
फरवरी से अब तक: ₹1,380 की बढ़ोतरी - सिर्फ़ 3 महीनों में 81% का इज़ाफ़ा।
चायवाला, ढाबा, होटल, बेकरी, हलवाई - हर किसी की रसोई पर बोझ बढ़ा। और इसका असर आपकी थाली पर भी पड़ेगा।
पहला वार गैस पर, अगला वार पेट्रोल-डीज़ल पर।
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लद्दाख के युवाओं ने मुझे बताया कि किस तरह उनके खूबसूरत आशियाने को एक पुलिस राज में बदल दिया गया है।
उनकी आवाज़ दबा दी गई है, लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचल दिया गया है और उनकी ज़मीन और नाज़ुक पर्यावरण को मोदी जी के अरबपति मित्रों के हवाले किया जा रहा है।
लद्दाख के लोग विकास के खिलाफ नहीं हैं। वो रोज़गार और उद्योग चाहते हैं, मगर ऐसा विकास जो स्थानीय लोगों को फायदा पहुँचाए।
आशा है कि अपने दौरे के दौरान गृह मंत्री इस सच्चाई को समझ पाएं।
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@aajtak चुनाव ख़त्म, सरकार की मनमानी शुरू,
गाड़ियां ख़राब होगी, कबाड़ में जमा होगी,
लोगों को नई गाड़ियां खरीदनी पड़ेगी,
मित्रों और सरकार के मंत्रियों की कमाई होगी,
भाड़ में जाए जनता अपना काम बनता,
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E85 Petrol : बदलेगा फ्यूल गेम... अब पेट्रोल में 85% एथेनॉल! सरकार ने जारी किया ड्राफ्ट नोटिफिकेशन
E85 Petrol ethanol blending: देश में पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए सरकार अब बड़ा कदम उठाने जा रही है. केंद्र सरकार ने एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें पेट्रोल में ज्यादा मात्रा में एथेनॉल मिलाने के नियमों को शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है. अगर यह लागू होता है, तो आने वाले समय में गाड़ियां पूरी तरह एथेनॉल से भी चलेंगी.
पढ़ें पूरी ख़बर: intdy.in/wkxszk
#ATCard #AajTakSocial #petrol #e85 #ethanolfuel #ethanol

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मैंने अपनी पढ़ाई लिखाई कांग्रेस के शासनकाल में की है, मुंबई,महाराष्ट्र बोर्ड।
इसी कांग्रेस के शासन काल में हमें कक्षा 1 से दो तक भारतीय संस्कृति के बारे में पढ़ाया गया, पौराणिक कथाओं रामायण, महाभारत, राजा शिबी।
इतिहास कक्षा 3 में भारत के स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारकों पर पूरी किताब थी।
गांधी जी हर क्लास में थे l
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कक्षा 4 में सिर्फ और सिर्फ छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में पढ़ाया गया।
साल में स्कूल से दो बार फिल्में दिखाने ले जाते।
एक फिल्म छत्रपति शिवाजी पर होती ही थी।
फिल्म शहीद भी स्कूल में ही देखी थी पहली बार।
जिन्होंने पढ़ाई नहीं की, उन्हें कुछ याद नहीं होगा।लेकिन सारी किताबे pdf में उपलब्ध हैं अभी भी। सबूत है।
ये पोस्ट धीरेन्द्र शास्त्री के छत्रपति शिवाजी महाराज पर दिए गए घटिया बयान पर है।
फिल्म इंडस्ट्री के डरपोक लोगों में एक रितेश देशमुख रीढ़ वाला निकला, जिसने इसका विरोध किया
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जब किसी राष्ट्र की आत्मा को मारना हो, तो तोपों या तलवारों की ज़रूरत नहीं पड़ती; बस उसके महानायकों के शौर्य का सूक्ष्मता से अपमान कर दो और कुटिल पहरेदार मुस्कुराते हुए मौन रहते हैं।
यह केवल एक मंच से बोला गया झूठ नहीं है, यह हमारे सामाजिक और नैतिक पतन का सबसे वीभत्स दृश्य है, जिसे हम खुली आँखों से देख रहे हैं।
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संघ प्रमुख मोहन भागवत, महाराष्ट्र के सत्ताधीश देवेंद्र फडणवीस और नितिन गडकरी।
और मंच से एक स्वयंभू वक्ता धीरेन्द्र शास्त्री बड़े ही नाटकीय ढंग से कहते हैं कि "छत्रपति शिवाजी महाराज लगातार युद्धों से बहुत थक गए थे।"
थक गए थे?
जिस महामानव ने औरंगजेब की रातों की नींद छीन ली, जिसने अपनी धमनियों का रक्त बहाकर इस मिट्टी में स्वराज्य का बीज बोया, क्या वो थक गया था?
और उससे भी बड़ा प्रहसन यह कि बाबा कहते हैं कि महाराज ने अपना मुकुट उतारकर रामदास के चरणों में रख दिया और कहा कि अब आप राज्य चलाइए।
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इतिहास भावनाओं, चमत्कारों या मंच की तालियों से नहीं चलता।
वह पन्नों पर दर्ज सत्य की स्याही से साँस लेता है।
जरा धुले के समर्थ वाग्देवता मंदिर (हस्तलिखित बाड क्र. 668) में सहेजे गए पन्नों की धूल झाड़िए।
वर्ष 1672 का वह पत्राचार चीख-चीख कर कहता है कि रामदास स्वयं महाराज से गुहार लगा रहे थे कि "मैं कई दिनों से आपके ही मुल्क में हूँ, पर आप मेरी तरफ मुड़कर भी नहीं देखते।"
जिस राजे ने अपने बाहुबल, कूटनीति और अदम्य साहस से स्वराज्य खड़ा किया, क्या वह उस रामदास को राज्य सौंपेगा जो उनके दरबार में अपनी पहचान के लिए तरस रहा था?
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बात केवल पत्राचार की नहीं है, बात उस वैचारिक धरातल की है जिसे आज हम भूल बैठे हैं।
जरा 'रामदासांची मुसलमानी अष्टके' के प्रमाणित पन्नों को पलटिए।
जो व्यक्ति तत्कालीन मुगलों और आदिलशाही सत्ता को खुश करने के लिए लिख रहा हो कि
◾पत्थर टूट सकता है, इसलिए पत्थर खुदा नहीं हो सकता; खुदा न टूटने वाला है। पहाड़ बनाने वाले खुदा को नासमझ लोग पत्थर में देखते हैं और उसी पर श्रद्धा रखते हैं।
◾हिंदू धर्म अजब है। धर्म क्या कहता है, उसे समझकर अपनाओ। जब 'या अल्लाह, या अल्लाह' कहोगे, तो उसे परमेश्वर का ही नाम समझकर कहोयह सत्य प्यारे रामदास कह रहे हैं।
संदर्भ:
समर्थ वाग्देवता मंदिर, धुले हस्तलिखित बाड क्र. 668 (रामदास जी द्वारा रचित मुसलमानी अष्टक)
'रामदासांची मुसलमानी अष्टके' - इंदू लिमये
'मराठे आणि महाराष्ट्र' - अ. रा. कुलकर्णी, डायमंड पब्लिकेशन, पुणे
◾◾
क्या वह व्यक्ति स्वराज्य के उस प्रखर सूर्य का गुरु हो सकता है, जिसने अपना कण-कण उसी दमनकारी सत्ता को उखाड़ फेंकने में गला दिया?
यह इतिहास की अज्ञानता नहीं है, यह एक सोची-समझी साजिश के तहत शिवराय के स्वतंत्र और सार्वभौम अस्तित्व का अपहरण है।
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हृदय को जो बात सबसे गहरी पीड़ा देती है, वह इस ऐतिहासिक मिलावट से अधिक, उस मंच पर बैठे लोगों की चुप्पी है।
वक्ताओं का काम है भीड़ जुटाना, लेकिन कलेजा तो तब फटता है जब वे लोग, जो हर चुनाव में शिवराय के नाम की कसमें खाकर सत्ता की सीढ़ियां चढ़ते हैं, इस घोर शिवद्रोह को चुपचाप पी जाते हैं।
क्या सत्ता की कुर्सियां इतनी मखमली हो गई हैं कि छत्रपति के स्वाभिमान की कीमत पर भी कोई चुभन महसूस नहीं होती?
आज महाराष्ट्र में सत्ते के नशे में चूर नेताओं और खुद को मराठा अस्मिता का रक्षक कहने वालों की जुबान पर ताले क्यों पड़े हैं? यह उनकी मूक सहमति नहीं है हुजूर, यह उस स्वराज्य की पीठ में खंजर है जिसके लिए हजारों मावलों ने अपने शीश कटवाए थे।
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सत्य को साबित करने के लिए किसी क्रोध या अपशब्द की नहीं, केवल निर्भयता की आवश्यकता होती है।
यह वक्त किसी राजनीतिक पार्टी का झंडा उठाने का नहीं, अपने जमीर को टटोलने का है।
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